सुप्रीम कोर्ट ने अपने “दामाद” राहुल गांधी का केस बर्फ में लगा दिया; 54 देशों की यात्रा पर 60 करोड़ का खर्च कैसे गलत हो सकता है

सुभाष चन्द्र

मैंने जानबूझकर राहुल गांधी के लिए सुप्रीम कोर्ट का “दामाद” शब्द प्रयोग किया है क्योंकि उसके खानदान के सामने सभी जज नतमस्तक रहते हैं, ये कैसे कोई गुलामी कर कर रहे है। 

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने विघ्नेश शिशिर की याचिका पर आय से अधिक संपत्ति मामले में CBI और ED को जांच करने के आदेश दिए थे लेकिन कल सुप्रीम के चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना ने शिशिर, CBI और ED को नोटिस जारी करते हुए आदेश दिया कि दोनों एजेंसी अपनी कोई रिपोर्ट हाई कोर्ट में जमा न करें

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मैंने कहा कि केस बर्फ में लगा दिया, ऐसा इसलिए कहा कि कोई नोटिस पीरियड नहीं दिया गया और न कोई अगली तारीख तय की है अक्सर कोर्ट 4 हफ्ते का नोटिस देता है और एक तारीख तय करता है अगली सुनवाई के लिए

कपिल सिब्बल ने कहा कि हाई कोर्ट ने बिना राहुल गांधी को सुने आदेश जारी किया अब अगर हाई कोर्ट ने गलत आदेश जारी किया तो राहुल गांधी को हाई कोर्ट जाना चाहिए था कि वो अपने आदेश में मुझे सुनने के बाद बदलाव करे लेकिन सिब्बल की सेटिंग तो सुप्रीम कोर्ट में थी और सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी को बचा लिया

जस्टिस बागची ने कहा कि CBI स्वयं भी इसकी जांच कर सकती थी, उसे हाई कोर्ट के आदेश की क्या जरूरत थी अरे भाई अगर हाई कोर्ट ने आदेश दे दिया शिशिर की याचिका पर, तो आसमान तो नहीं गिर गया फिर ये लोग यह भी आरोप लगाते हैं कि मोदी सरकार CBI/ED का दुरुपयोग कर रही है

चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने भी कहा अगर जांच एजेंसी के पास कोई prima facie material है तो वो किसी के भी खिलाफ केस दर्ज करके जांच कर सकती है और उसके लिए आरोपी की अनुमति की कोई जरूरत नहीं होती

17 अप्रैल को इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस सुभाष विद्यार्थी ने भी राहुल गांधी के खिलाफ ब्रिटिश नागरिकता के मामले में FIR दर्ज करने के आदेश दिए थे लेकिन अगले ही दिन आदेश वापस ले लिए जब उन्हें बताया गया कि मामले में राहुल गांधी को भी सुनना चाहिए था फिर वो केस से अलग हो गए लेकिन केस के लिए दूसरी बेंच अभी 4 महीने बाद भी गठित नहीं हुई है इसलिए अगर राहुल गांधी आय से अधिक संपत्ति के मामले में हाई कोर्ट को कहता कि आदेश रोक कर मेरी बात भी सुनी जाए तो संभवतः हाई कोर्ट उसकी बात सुन लेता और सुप्रीम कोर्ट जाने की आवश्यकता ही न होती

लेकिन राहुल गांधी को पता है वो सुप्रीम कोर्ट का दामाद है और वहां से उसे पूरी राहत मिल सकती है - जस्टिस गवई ने उसकी दोषसिद्धि पर रोक लगा दी थी और उसके बाद वह पूरी तरह उद्दंड हो गया - सेना के अपमान के मामले में ट्रायल कोर्ट के समन पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी और आज एक साल बाद भी उसकी सुनवाई नहीं की है -

नोटिस जारी करना वह भी बिना समय सीमा के और सुनवाई की अगली तारीख तय न करना सुप्रीम कोर्ट की मंशा पर शक पैदा करता है - सुप्रीम कोर्ट  CBI / ED को जांच तो पूरी करने देता - 

ज्यादा से ज्यादा उन्हें यह निर्देश दे सकता था कि क्योंकि मामला हमारे संज्ञान में आ गया है, अपनी अपनी रिपोर्ट हाई कोर्ट की बजाय सीधे सुप्रीम कोर्ट में जमा करें - ऐसा भी किया जाता तो बात समझ में आती थी लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने तो जांच भी रोक दी और हाई कोर्ट की सुनवाई पर भी रोक लगा दी - THIS IS CALLED NAKED JUDICIAL FAVOURITISM - आपकी बात का तो मतलब साफ़ है राहुल गांधी का 54 देशों की यात्रा पर 60 करोड़ रुपया खर्च करना कोई बड़ी बात नहीं है बेशक उसकी आय उतनी थी ही नहीं - 

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