Ethanol Blending भारत में 2001 से हो रही है। शुरू में 1% थी, 2006 में 5% हुई, 2021-22 में 10% और 25-26 में 20% । लेकिन आज अचानक उसके खिलाफ मोर्चेबंदी क्यों हो रही है? कभी कोई गाड़ी इथेनॉल की वजह से ख़राब होती नहीं सुनी गई?
सबसे पहले समझने की बात है कि -
-यह इथेनॉल 55% गन्ने से और 45% सड़े हुए या नष्ट हुए अनाज से प्राप्त होता है;
-गन्ना किसानों की कमाई का मुख्य जरिया है इथेनॉल जिसका विरोध करने वाले किसानों के पेट पर लात मारना चाहते हैं। देश के 50 बिलियन लीटर पेट्रोल में 20% इथेनॉल की खपत होती है और 31 मिलियन metric tonnes कच्चे तेल का आयात कम होता है जिसका मतलब है विदेशी मुद्रा की बचत होती है;
-इथेनॉल गन्ने से बनाने में किसानों को 35,000 करोड़ सालाना मिलता है और 2014 से 2026 के बीच किसानों को 1.58 लाख से 1.60 लाख करोड़ का भुगतान हुआ है। 2024 में ही किसानों को 92,409 करोड़ का भुगतान हुआ; अब सोचिये किसान भला इथेनॉल का विरोध क्यों करेंगे?
“शराब कम पिया करो, हमें वही एथनॉल पेट्रोल में मिलाना है”
— ANUPAM MISHRA (@scribe9104) July 7, 2026
~ मणिशंकर अय्यर, पेट्रोलियम मंत्री, 2005 pic.twitter.com/lQEaQd9uxe
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| लेखक चर्चित YouTuber |
-E25 और E30 (25 से 30% इथेनॉल) - ब्राज़ील में कानूनन 27.5 से 30% Blending चल रही है, Paraguay में E30 अनिवार्य है और Bolivia में E25 अनिवार्य है।
अचानक इथेनॉल विरोध के पीछे कई कारण हो सकते हैं। पहला तो यह है कि जो भी मोदी और उसकी सरकार का काम है, विपक्ष ने उसका विरोध करना है और उनके विरोध का साफ़ मतलब समझा जाना चाहिए कि मोदी का वह काम 100 टका सही है।
दूसरा कारण है, इथेनॉल नहीं मिलाया जाएगा तो गन्ना किसान भूखा मरेगा और विपक्ष को उसे सड़कों पर उतरना आसान होगा। अपना विरोध किसानों को नहीं बताएंगे और सारा दोष मोदी को दे देंगे कि मोदी की वजह से तुम्हारी कमाई ख़त्म हो गई। आर्थिक नुकसान न केवल किसानों का होगा बल्कि सरकार का भी होगा क्योंकि ज्यादा कच्चा तेल आयात करना पड़ेगा।
तीसरा कारण वह देश भी हो सकते हैं जो भारत के रूस से तेल खरीद पर आपत्ति करते हैं क्योंकि फिर भारत हो सकता है उनसे तेल खरीदने पर मजबूर हो जाए।
चौथा कारण भारत की तेल बेचने वाली कंपनियां ही चाहती हों कि इथेनॉल मिश्रित तेल न बेचा जाए जिससे उनका 100% तेल बिके बिना किसी इथेनॉल के।
पांचवां कारण है विपक्ष मोदी के खिलाफ एक और अनावश्यक आंदोलन खड़ा करना चाहता है। भारत की और विदेशी तेल कंपनियों की मिलीभगत से और कोई बड़ी बात नहीं एक दिन सभी गाड़ियों को विरोध प्रदर्शन करते हुए विपक्ष सड़कों पर खड़ा कर दे। मोदी के लिए किसानों का हित प्रथम है और विपक्ष इथेनॉल पर चोट करके किसानों को ही बर्बाद करना चाहता है।
एक Consumer कोर्ट ने एक कंपनी को गाड़ी ही बदलने का निर्देश दे दिया यह कह कर कि इथेनॉल की वजह से गाड़ी ख़राब हुई है। गाड़ी ख़राब होने के कई कारण हो सकते हैं और सरकार ने 20% Ethanol Blending की है तो पूरी वैज्ञानिक तकनीक को समझ कर की होगी और इसलिए अदालतों को सोच समझ कर फैसले देने चाहिए।

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