झूठ और अफवाह के उस्ताद केजरीवाल: अब फैलाया हवा में फ्लाइट बंद होने का डर!

अरविन्द केजरीवाल लोगों में ग़लतफ़हमी फैलाकर आखिर क्या साबित करना चाहता है? आखिर झूठ की हद होती है। सियासत करनी है तो मुद्दों पर क्यों नहीं की जाती, विदेशी फंडिंग पर ये गन्दा खेल कब तक खेला जाता रहेगा? अपनी गिरती साख को बचाने कॉकरोचों को ले आए। लेकिन इसका नुकसान बीजेपी को नहीं विपक्ष को होगा। झूठ बोलकर पहले कांग्रेस के वोट पर डाका मारा और अब झूठ और उपद्रव कर अपने साथ सारे विपक्ष को चारों खाने चित करने जा रहे हो। 

आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का राजनीतिक करियर तथ्यों से परे सनसनीखेज दावों और मनगढ़ंत आरोपों पर टिका रहा है। राजनीति में शुचिता और बदलाव का वादा लेकर आए केजरीवाल ने समय-समय पर जनमानस में भय, भ्रम और अराजकता फैलाने के लिए कई भ्रामक बयान दिए हैं।

विमान सुरक्षा से लेकर महामारी नियंत्रण और रोजगार के आंकड़ों तक, केजरीवाल का हर बड़ा प्रशासनिक व राजनीतिक दावा केवल सुर्खियों में रहने का स्टंट साबित हुआ है। तथ्य-जांच और कानूनी कार्यवाहियों के सामने जब भी इन दावों की पोल खुली, तो सच्चाई सामने आते ही जनता के सामने उनके झूठ बेनकाब हुए।

 हवा में फ्लाइट बंद होने का मनगढ़ंत डर

केजरीवाल ने 6 अगस्त 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए दावा किया कि केंद्र सरकार एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) में एथेनॉल मिलाने जा रही है, जिससे विमानों के इंजन हवा में बंद हो सकते हैं। नागरिक उड्डयन मंत्रालय और केंद्रीय मंत्री के. राम मोहन नायडू ने इस दावे को पूरी तरह से भ्रामक और गैर-जिम्मेदाराना करार दिया। सरकार ने स्पष्ट किया कि ATF में एथेनॉल मिलाने का कोई प्रस्ताव नहीं है, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय मानकों के तहत सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (SAF) के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है।
सर्जिकल स्ट्राइक के सबूत मांगे  
केजरीवाल ने 3 अक्टूबर 2016 को एक वीडियो संदेश जारी करते हुए भारतीय सेना द्वारा पाकिस्तान में की गई सर्जिकल स्ट्राइक की प्रामाणिकता पर सवाल खड़े किए थे। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मीडिया के दावों का हवाला देते हुए केंद्र सरकार से सर्जिकल स्ट्राइक के सबूत सार्वजनिक करने की मांग की थी। उनके इस बयान को पाकिस्तान के मीडिया और राजनेताओं द्वारा भारत के खिलाफ ढाल के रूप में इस्तेमाल किया गया, जिसकी देश भर में कड़ी आलोचना हुई थी।
विधानसभा में फर्जी मशीन से EVM हैकिंग का नाटक
केजरीवाल ने 9 मई 2017 को दिल्ली विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) में धांधली और हैकिंग का सार्वजनिक प्रदर्शन करवाया था। चुनाव आयोग (ECI) ने उसी दिन इस दावे को सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि जिस मशीन पर प्रदर्शन किया गया था, वह चुनाव आयोग की असली EVM नहीं बल्कि केवल उसकी तरह दिखने वाला एक खिलौना या डुप्लीकेट गैजेट था। आयोग ने इसे जनता को भ्रमित करने वाला स्टंट करार दिया था।
‘सिंगापुर स्ट्रेन’ का सनसनीखेज और काल्पनिक दावा
केजरीवाल ने 18 मई 2021 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के माध्यम से दावा किया कि सिंगापुर में कोरोना का एक नया और बेहद खतरनाक स्ट्रेन आया है, जो बच्चों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। उन्होंने केंद्र सरकार से सिंगापुर की सभी उड़ानें तुरंत रद्द करने की मांग कर दी। इस बयान पर सिंगापुर सरकार और भारत के विदेश मंत्रालय ने कड़ा ऐतराज जताया और साफ किया कि सिंगापुर में ऐसा कोई नया स्ट्रेन नहीं था।
ऑक्सीजन मांग का 4 गुना बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया 
केजरीवाल ने 25 अप्रैल 2021 से 10 मई 2021 के दौरान कोरोना की दूसरी लहर के संकट में दिल्ली के लिए भारी मात्रा में ऑक्सीजन की मांग रखी थी। इसके बाद 25 जून 2021 को सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित ऑक्सीजन ऑडिट समिति की अंतरिम रिपोर्ट सार्वजनिक हुई, जिसमें यह खुलासा हुआ कि दिल्ली सरकार ने अपनी वास्तविक आवश्यकता से लगभग 4 गुना अधिक ऑक्सीजन की मांग प्रस्तुत की थी। इस गैर-जिम्मेदाराना रवैये से अन्य राज्यों की आपूर्ति प्रभावित हुई थी।
10 लाख नौकरियां देने के आंकड़े का झूठा ढोल
केजरीवाल ने 21 फरवरी 2022 से 26 मार्च 2022 के दौरान पंजाब चुनाव प्रचार के समय दावा किया था कि दिल्ली में 10 लाख युवाओं को नौकरियां दी गई हैं। बाद में 24 मार्च 2022 को उन्होंने यह संख्या बढ़ाकर 12 लाख बता दी, जबकि उनके ही उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने 26 मार्च 2022 को विधानसभा में यह आंकड़ा 1.78 लाख बताया। RTI से मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार, दिल्ली सरकार ने 7 वर्षों में केवल 3,246 पक्की नौकरियां दी थीं।
SYL नहर और पानी के मुद्दे पर यू-टर्न
केजरीवाल ने 8 अप्रैल 2022 को पंजाब चुनाव जीतने के बाद जल संकट पर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया। पंजाब विधानसभा चुनावों के दौरान उन्होंने वादा किया था कि सत्ता में आते ही वे पंजाब को 24 घंटे पानी उपलब्ध कराएंगे। लेकिन चुनाव जीतते ही जब सतलुज-यमुना लिंक (SYL) नहर पर विवाद बढ़ा, तो 8 अप्रैल 2022 को उन्होंने बयान दिया कि जल संकट का समाधान करना केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री की जिम्मेदारी है।
देश का पहला ‘वर्चुअल स्कूल’ खोलने का फर्जी दावा
केजरीवाल ने 31 अगस्त 2022 को सोशल मीडिया पर पोस्ट कर घोषणा की कि दिल्ली में देश का पहला ‘वर्चुअल स्कूल’ (DMVS) शुरू हो रहा है। यह दावा तुरंत झूठा साबित हुआ क्योंकि उत्तराखंड में बीजेपी सरकार के तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने वर्ष 2020 में ही देहरादून में भारत के पहले वर्चुअल स्कूल का उद्घाटन कर दिया था। इसके अलावा केंद्र सरकार का NIOS भी पहले से वर्चुअल ओपन स्कूल चला रहा था।
स्वदेशी कोरोना वैक्सीन को लेकर फैलाई थी भ्रांतियां  
केजरीवाल ने 16 जनवरी 2021 को भारत में राष्ट्रव्यापी टीकाकरण अभियान शुरू होने के बाद भारत बायोटेक की स्वदेशी ‘कोवैक्सीन’ (Covaxin) की सुरक्षा और प्रभावकारिता पर सवाल उठाकर जनता में भ्रम फैलाया था। उन्होंने चरणबद्ध परीक्षण आंकड़ों का हवाला देकर वैक्सीन पर संशय जताया था और केंद्र सरकार से इसकी जगह विदेशी टीकों को लाने की वकालत की थी। यह भी कहा था कि इस तरह लोगों को टीके लगाने में दो साल लग जाएंगे। बाद में जब वैज्ञानिक परीक्षणों और आंकड़ों से कोवैक्सीन पूरी तरह सुरक्षित व असरदार साबित हुई, तो केजरीवाल के इस बयान की देश भर के वैज्ञानिकों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कड़ी निंदा की थी।
कोविड योद्धाओं के मुआवजे पर RTI से खुला झूठ
केजरीवाल ने 30 सितंबर 2022 से पहले दावा किया था कि उनकी सरकार ने 31 पहले और 28 हाल ही में मिलाकर कुल 59 मृत कोरोना योद्धाओं के परिवारों को 1-1 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया है। लेकिन 30 सितंबर 2022 को RTI कार्यकर्ता कन्हैया कुमार द्वारा मांगी गई जानकारी में उजागर हुआ कि सरकार को कुल 54 आवेदन मिले थे, जिनमें से केवल 17 को मंजूरी दी गई थी, 7 खारिज हुए थे और 30 लंबित थे।

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