उद्धव ठाकरे ने अपने 6 सांसदों के शिंदे शिवसेना में विलय को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। उसके वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि केवल विधायक दल में टूट होना कभी भी राजनीतिक दल में टूट के बराबर नहीं हो सकता।
जबकि दल बदल कानून विधायकों पर लागू होता है चाहे वो MLA हों या MP, फिर न जाने कैसी व्याख्या कर रहा है कपिल सिब्बल?
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| लेखक चर्चित YouTuber |
सुप्रीम कोर्ट ने कहा था “ the then-Governor Bhagat Singh Koshyari was wrong to call for a floor test without objective material indicating a loss of confidence”.
और क्योंकि उद्धव ठाकरे त्यागपत्र दे चुके हैं, हम उनकी सरकार को बहाल नहीं कर सकते। कोर्ट ने यह भी कहा था कि दल बदल कानून में याचिकाओं पर निर्णय करना स्पीकर का काम है।
राज्यपाल को जब सामने दीवारों पर लिखा दे रहा था कि एकनाथ शिंदे के पास बहुमत है तो उनके पास Floor Test का आदेश देने के अलावा कोई विकल्प नहीं था क्योंकि राज्यपाल का कर्तव्य है कि वह राज्य में स्थिर सरकार बनने की संभावनाओं को टटोलें। इस लिहाज से सुप्रीम कोर्ट की राज्यपाल के विरुद्ध की गई टिप्पणी उचित नहीं थी।
उद्धव में अगर दम था तो बहुमत परीक्षण का सामना करते लेकिन उन्होंने शिंदे गुट में शामिल समेत सभी सदस्यों को व्हिप जारी कर दिया कि वे शिंदे सरकार के खिलाफ वोट करें। स्पीकर ने शिंदे गुट में शामिल सदस्यों को अयोग्य घोषित करने से मना कर दिया और उस पर अभी तक सुप्रीम कोर्ट ने फैसला नहीं दिया है।
किसी भी विधायक दल में अगर दो तिहाई से ज्यादा सदय पार्टी से अलग होते हैं तो वे दल बदल कानून में अयोग्य नहीं होते। किसी दल में औपचारिक टूट नहीं होती। वह टूट विधायकों और सांसदों में ही होती है। उद्धव सेना के 9 में 6 सांसद शिंदे शिवसेना में शामिल हो गए जो कानूनी दृष्टि ने गलत नहीं है।
अभी कुछ दिन पहले TMC के 80 में से 60 विधायकों ने अलग होकर अपनी पार्टी बना ली और 28 में से 20 लोकसभा सांसद Nationalist Citizens Party of India (NCPI) में शामिल हो गए। ECI ने भी ऋतब्रत बनर्जी की पार्टी को मान्यता दे दी।
अगर किसी दल के दो तिहाई सदस्य अपनी पार्टी से अलग होते है वह राजनीतिक दल में विभाजन (Split in a Political Party) माना जाता है और अगर उससे कम सदस्य अलग होते हैं तो दल बदल कानून में वे अयोग्य घोषित हो जाते हैं। फिर कौन सा कानून पढ़ रहा है कपिल सिब्बल?
यह सीधा सा कानून है फिर न जाने क्यों सुप्रीम कोर्ट 2 साल से लिए बैठा है?

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