भारत में कट्टरपंथियों ने हिजाब/नकाब/बुर्का पर जितना उपद्रव मचाया हुआ है किसी भी मुस्लिम मुल्क ने इसका पासंग भी नहीं। कई गैर-मुस्लिम देश तो पहले ही बैन कर चुके हैं।
अगस्त 24 इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की खंडपीठ ने निर्णय सुनाया कि स्कूल में स्कार्फ़ या हिजाब पहनने की अनुमति नहीं है, स्कूल यूनिफार्म अनुशासन, बच्चों की बीच समानता, सस्थागत पहचान और धर्मनिरपेक्ष माहौल को बढ़ावा देती है, क्योंकि यह सभी धर्मों के छात्रों पर समान रूप से लागू है।
यह टिप्पणियां पीठ ने प्रयागराज के टैगोर पब्लिक स्कूल की नाबालिग छात्रा सुकैना रिज़वी की याचिका ख़ारिज करते हुए की। सुकैना ने ड्रेस कोड के अतिरिक्त हिज़ाब पहन कर कक्षा में बैठने की अनुमति मांगी थी।
पीठ ने कहा कि हिज़ाब पहनना इस्लाम की धार्मिक प्रथा नहीं है।
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कर्नाटक हाई कोर्ट के निर्णय के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट में अपील में 2 जजों की बेंच ने 13 अक्टूबर, 2022 को Split Verdict दिया। जस्टिस हेमंत गुप्ता ने हिज़ाब पर बैन को सही ठहराया और अपील खारिज कर दी लेकिन जस्टिस सुधांशु धुलिया ने हिज़ाब पर बैन को गैर संवैधानिक कहा। मामला फिर चीफ जस्टिस को भेजा गया बड़ी बेंच गठित करने के लिए लेकिन 4 साल बाद भी बड़ी बेंच गठित नहीं हुई है।
केरल हाई कोर्ट के Justice A. Muhamed Mustaque की एकल पीठ ने फातिमा बनाम केरल राज्य मामले में कहा था कि छात्रा को ड्रेस कोड चुनने का अधिकार और संस्था का प्रबंधन करने का अधिकार दोनों मौलिक हैं लेकिन जब टकराव हो तो संस्था के व्यापक हित को वरीयता मिलनी चाहिए। इसके खिलाफ खंडपीठ ने भी अपील ख़ारिज कर दी थी।
बॉम्बे हाई कोर्ट के Justice A. S. Chandurkar और Justice Rajesh S. Patil ने भी जून, 2024 में टिप्पणी की थी कि सिर ढकना इस्लाम धर्म का अनिवार्य हिस्सा साबित नहीं होता।
देश में इस विषय पर राजनीतिक दलों द्वारा बवाल काटना कुछ वर्षों से ही शुरू हुआ है। जमीयत उलेमा ए हिंद ने बंगलुरु की मुस्कान खान को स्कूल नियमों को ताक पर रख कर हिज़ाब पहनने पर 5 लाख रुपए का इनाम भी दिया था और इससे ही लगा था कि उस वक्त का आंदोलन एक राजनीतिक आंदोलन था।
ऐसा तो कहना उचित नहीं होगा कि हिज़ाब पहने या न पहने, यह महिला की मर्जी है। इस्लाम में अनिवार्य है तो पहनना चाहिए। अरफ़ा खानुम भारत में हिज़ाब नहीं पहनती लेकिन ईरान गई तो हिज़ाब में गई। अभी हाल ही में अकबरूद्दीन ओवैसी की बेटी की शादी लंदन में हुई है। कोई बुरका हिज़ाब नहीं था।
सुप्रीम कोर्ट को मामलों को लेकर सो नहीं जाना चाहिए। जब हाई कोर्ट फैसले कर सकते हैं तो सुप्रीम कोर्ट क्यों नहीं कर सकता? फैसला तो तब होगा जब बड़ी बेंच का गठन होगा। में

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