FCRA बिल भारत में संशोधित होने से भारत विरोधी विदेशियों और उनकी कठपुतली बना विपक्ष साबित करता है कि बिल कितना भारत के हित में है।
भारत में अमेरिकी राजदूत Sergio Gor के हमारे राज्यों के मुख्यमंत्रियों से मिलने में कोई आपत्ति नहीं है लेकिन इसके लिए या तो भारत सरकार की अनुमति लेनी चाहिए या उसे सूचित किया जाना चाहिए लेकिन लगता है ऐसा नहीं किया गया। जिन विषयों पर उन्होंने तमिलनाडु, केरल और तेलंगाना के मुख्यमंत्रियों से कथित तौर पर बात की है, वे सब केंद्र सरकार के विषय हैं और इसलिए यह माना जा सकता है कि Sergio Gor उन मुख्यमंत्रियों के जरिए FCRA बिल को रुकवाने के लिए दबाव बनाने के लिए कह रहे है।
Sergio Gor -
-22 जून, 2026 को तमिलनाडु के CM से मिले;
-05 अगस्त को तेलंगाना के CM से मिले;
-08 अगस्त को केरल के CM से मिले। और 8 अगस्त को ही अमेरिकी उपराष्ट्रपति J D Vance प्रधानमंत्री मोदी को फ़ोन करते हैं। बात कुछ भी हुई हो लेकिन FCRA का जिक्र घुमाफिरा कर जरूर हुआ होगा।
उसके पहले 4 अगस्त को रिपब्लिकन सांसद ने FCRA पर ऐतराज करते हुए कहा इसके पास होने से ईसाईयों पर बुरा असर पड़ेगा और भारत अमेरिका के रिश्ते ख़राब होंगे।
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| लेखक चर्चित YouTuber |
उससे भी पहले The Catholic Bishops’ Conference of India के अधिकारियों ने 10 जुलाई को और फिर अगस्त के शुरू में गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की।
ऐसा नहीं है भारत में ये कोई नया कानून आ रहा है, बस उसे Regulate करने का प्रयास हो रहा है। अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और EU में इससे भी कड़े कानून हैं लेकिन भारत में नहीं होने चाहिए क्योंकि हिंदुओं का धर्म परिवर्तन आसान होता है। ऐसा धर्म परिवर्तन ये ईसाई मिशनरीज इस्लामिक देशों में नहीं सकती क्योंकि वहां के कानून बहुत सख्त है और इसलिए भारत एक Soft Target है। ईसाइयों के अलावा इस्लामिक संगठन भी इस कानून के विरोध में खड़े हैं।
कैथोलिक चर्च भारत में धर्म परिवर्तन कर ईसाइयत को फैला रहा है लेकिन अपने Bishops/Priests के Child Sexual Abuse पर पर्दा डालने के लिए करोड़ों डॉलर खर्च करता है। ऐसा अनुमान है अमेरिका 4 Billion Dollar पिछले कुछ वर्षों में पीड़ितों को समझौता राशि दे चुका है। वहां के राज्यों के कुछ उदाहरण हैं -
-लॉस एंजिल्स का 2024 का $880 million समझौता 1,353 पीड़ितों से संबंधित था और उसे उस समय अमेरिका में सबसे बड़ा एकल यौन-शोषण समझौता बताया गया। इसके पहले लॉस एंजिल्स 'प्रधान पादरी क्षेत्र’ ( Archdiocese) लगभग $740 million का भुगतान कर चुका था, जिससे दोनों बड़े समझौतों की राशि $1.5 billion से अधिक हो जाती है;
-न्यूयॉर्क आर्चडायोसीज़ ने 2026 में लगभग $800 million के प्रस्तावित समझौते का समर्थन किया है, जिसमें लगभग 1,300 लोगों के दावे शामिल हैं;
-जर्मनी में 2023 की रिपोर्ट के अनुसार लगभग 1,839 आवेदन प्राप्त हुए थे और 1,809 मामलों में भुगतान स्वीकृत हुआ था; कुल राशि लगभग €40 million (उस समय लगभग $43.5 million);-कनाडा में सरकार और चर्च संस्थाओं ने Indian Residential Schools से जुड़े मामलों में कुल मिलाकर 4.6 billion dollar मुआवजा दिया;
-आयरलैंड में धार्मिक संस्थाओं पर अभी भी लगभग €755 million की redress obligations बकाया है;
हमारे देश में तो Bishop Franco Mulakkal केरल की नन का लगातार रेप करने के आरोपों से 2022 में बरी हो गया और पोप ने उसका इस्तीफा मंजूर कर लिया। बरी होने के खिलाफ अभी अपील हाई कोर्ट में लंबित है।
हमारे कानून की चिंता न करे चर्च क्योंकि भारत में धर्म परिवर्तन की दुकान अब बंद होकर रहेगी। आप अपने Bishops/Priests को संभालें।

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