चीफ जस्टिस सूर्यकांत जी ने कल नरीमन मेमोरियल लेक्चर में कहा कि “Justice Delayed is not justice denied, it is justice destroyed” - बात बहुत बढ़िया है लेकिन तथ्यों पर ध्यान देना होगा।
सुप्रीम कोर्ट में लंबित मुकदमों की संख्या यह है -
Over 30 years: 26 cases
Over 20 years (including the 30+ bracket): 558 cases
Over 10 years: More than 10,000 cases
General breakdown ranges: Roughly 31,500 under 1 year; 24,200 (1–3 years); 17,300 (3–5 years); and 12,800 (5–10 years)
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| लेखक चर्चित YouTuber |
Over 30 years: 80,660 cases
20 to 30 years: 3,71,492 cases
10 to 20 years: 11,62,505 cases
5 to 10 years: 13,60,504 cases
1 to 5 years: 22,68,167 cases
Less than 1 year: 12,29,208 cases
यह सूचना NJDG की है -(National Judicial Data Grid)
क्या इसका मतलब यह निकलता है कि 20 से 30 वर्ष से लंबित मुकदमों में तो न्याय Destroy हो ही गया है।
पिछले दिनों चीफ जस्टिस पुराने लंबित मुकदमों के निपटारे के लिए सुप्रीम कोर्ट के जजों की 4 बेंच बनाई थी।
आशा की जाती है कि वो benches सबसे पुराने मुकदमों का निपटारा वरीयता के आधार पर करेंगी।

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