चीफ जस्टिस सूर्यकांत जी, फिर तो 30 साल से लटके मुकदमों में न्याय मर ही चुका है

सुभाष चन्द्र

चीफ जस्टिस सूर्यकांत जी ने कल नरीमन मेमोरियल लेक्चर में कहा कि “Justice Delayed is not justice denied, it is justice destroyed” - बात बहुत बढ़िया है लेकिन तथ्यों पर ध्यान देना होगा। 

सुप्रीम कोर्ट में लंबित मुकदमों की संख्या यह है -

 Over 30 years: 26 cases

Over 20 years (including the 30+ bracket): 558 cases

Over 10 years: More than 10,000 cases

General breakdown ranges: Roughly 31,500 under 1 year; 24,200 (1–3 years); 17,300 (3–5 years); and 12,800 (5–10 years)

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विभिन्न हाई कोर्ट में लंबित मुकदमों की संख्या है -

Over 30 years: 80,660 cases

20 to 30 years: 3,71,492 cases

10 to 20 years: 11,62,505 cases

5 to 10 years: 13,60,504 cases

1 to 5 years: 22,68,167 cases

Less than 1 year: 12,29,208 cases 

यह सूचना NJDG की है -(National Judicial Data Grid)

क्या इसका मतलब यह निकलता है कि 20 से 30 वर्ष से लंबित मुकदमों में तो न्याय Destroy हो ही गया है

पिछले दिनों चीफ जस्टिस पुराने लंबित मुकदमों के निपटारे के लिए सुप्रीम कोर्ट के जजों की 4 बेंच बनाई थी

 

आशा की जाती है कि वो benches सबसे पुराने मुकदमों का निपटारा वरीयता के आधार पर करेंगी

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