राहुल गांधी का एक और कछुए की चाल से चलने वाला केस देखो; 7 साल लगा दिए बॉम्बे हाई कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के समन रद्द करने की याचिका ख़ारिज करने में

सुभाष चन्द्र

राहुल गांधी के खिलाफ 2018 में गिरगांव मजिस्ट्रेट कोर्ट में भाजपा कार्यकर्ता महेश श्रीश्रीमल ने एक आपराधिक  मुकदमा दर्ज किया था राहुल गांधी पर आरोप था कि उसने राफेल मामले में राजस्थान की रैली में।    

प्रधानमंत्री मोदी को “चोरों का सरदार” (“Commander-in-Thief) कहा था

गिरगांव मजिस्ट्रेट ने 28 अगस्त, 2019 को राहुल गांधी को समन जारी किए थे जिन्हें राहुल गांधी ने 2021 में बॉम्बे हाई कोर्ट में चुनौती दी (writ petition No 4391 of 2021) 

अब 8 सितंबर, 2026 को हाई कोर्ट के जस्टिस NR Borkar ने राहुल गांधी की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि “the court did not find any ‘perversity and illegality’ in the magistrate’s order and hence no reason to interfere”.

अब आप हिसाब लगा लीजिए कैसे कछुए की चाल से चलते हैं राहुल गांधी के खिलाफ केस 28 अगस्त, 2019 के समन पर फैसला होने में 7 साल लग गए स्वयं हाई कोर्ट ने राहुल की याचिका पर निर्णय देने में 5 साल लगा दिए

जस्टिस बोरकर ने यह भी कहा कि वो अपने 2021 के आदेश को बरकरार रखते हैं जिसमें मजिस्ट्रेट को सुनवाई 6 हफ्ते के लिए टालने के लिए कहा गया था जिससे राहुल गांधी सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सकें 2021 का कोई और आदेश मुझे नहीं मिला जिसको राहुल गांधी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देता लेकिन अब देगा और जैसे अन्य मामलों में होता आया है, सुप्रीम कोर्ट इस केस में गिरगांव कोर्ट के समन पर रोक लगा देगा जिससे मामला फिर बर्फ में लग जाएगा 

में पहले भी कहा है राहुल गांधी VVIP/दामाद है अदालतों का 5 साल हाई कोर्ट का उसकी याचिका पर बैठे रहना भी इसका एक सबूत है 

मजे के बात है राहुल गांधी के वकील सुदीप पसबोला और कुशल मोर ने कोर्ट में कहा कि शिकायत करता पीड़ित पक्ष नहीं है, उसे शिकायत दर्ज करने का कोई अधिकार नहीं है उनका मतलब था कि शिकायतकर्ता की कोई मानहानि नहीं हुई और इसलिए aggrieved party तो मोदी हैं, उन्हें शिकायत दर्ज करनी चाहिए 

मतलब कांग्रेस का तर्क है कि हमारे लोग दिन रात प्रधानमंत्री को गाली देंगे और अगर मोदी जी आहत होते हैं तो खुद कोर्ट में जाए नया संविधान लिखना चाहता है राहुल गांधी लेकिन जब गांधी परिवार के किसी सदस्य खिलाफ कुछ कहा जाता है तो कांग्रेस के लोग क्यों FIR दर्ज करते हैं, खुद गांधी परिवार के लोग क्यों नहीं करते ऐसी दलीले देकर कांग्रेस अपने ही जाल में फंस जाएगी और जो भी मुक़दमे उसने किसी के खिलाफ भी फायर किये हुए हैं वो सब पिट जाएंगे

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