केरलम में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने वामपंथियों के गढ़ में सेंध लगाई है। एबीवीपी ने कॉलेज यूनियन चुनावों में सभी सीटें जीतकर स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) से त्रिपुनिथुरा गवर्नमेंट संस्कृत कॉलेज यूनियन का कंट्रोल अपने हाथ में ले लिया है।
इस नतीजे के साथ ही केरलम में एसएफआई के गढ़ों में से एक माने जाने वाले इस कॉलेज में उसका बरसों से चला आ रहा दबदबा खत्म हो गया है। एसएफआई कई सालों से कॉलेज यूनियन चला रही थी लेकिन इस बार एबीवीपी ने चुनाव में बड़ी जीत हासिल की और सभी छह मुख्य पदों पर कब्जा जमा लिया।
यह जीत इलाके में हुए एक और राजनीतिक बदलाव के ठीक बाद मिली है। हाल ही में बीजेपी ने त्रिपुनिथुरा नगरपालिका की कमान संभाली है, जिससे स्थानीय निकाय में वामपंथी दलों का 45 साल पुराना शासन खत्म हो गया है। एबीवीपी ने अब कैंपस के एक कॉलेज में बड़ी कामयाबी हासिल की है जो चार दशकों से ज्यादा समय तक वामपंथियों के कंट्रोल में रहा था।
एबीवीपी ने इस नतीजे को एसएफआई की छात्र-विरोधी नीतियों को नकारने जैसा बताया। संगठन के एक प्रतिनिधि ने कहा कि इस कॉलेज में मिली जीत से केरल के कैंपस में मौजूद एबीवीपी की दूसरी यूनिट्स को भी काफी बढ़ावा मिलेगा। प्रतिनिधि ने एसएफआई के नेतृत्व वाली पिछली यूनियनों पर संस्कृत को बढ़ावा न देने का आरोप भी लगाया, छात्रों से इकट्ठा किए गए फंड के इस्तेमाल पर सवाल उठाए और कहा कि एसएफआई के कार्यकाल में छात्रों के लिए पर्याप्त कार्यक्रम आयोजित नहीं किए गए।
स्निग्धा एम. हरि को चेयरपर्सन चुना गया, जबकि आदित्य टी. ए. ने वाइस-चेयरपर्सन का पद जीता। विग्नेश भट्ट को जनरल सेक्रेटरी, विग्नेश डी. को मैगजीन एडिटर और अंजलि टी. को आर्ट्स क्लब सेक्रेटरी चुना गया। निवद्या के. एन. ने यूनिवर्सिटी यूनियन काउंसलर का पद जीता, जबकि शिवानी आर. और अवनी सी. बी. को क्रमशः सेकंड यूजी रिप्रेजेंटेटिव और सेकंड पीजी रिप्रेजेंटेटिव चुना गया।
एबीवीपी ने त्रिपुनिथुरा के उस कॉलेज में बड़ी जीत हासिल की है जहां सालों से एसएफआई का दबदबा था और ये संगठन के लिए एक बड़ी कामयाबी मानी जा रही है। यह नतीजा केरल के कैंपस में राजनीतिक जगह बनाने के लिए छात्र संगठनों के बीच चल रही होड़ में एबीवीपी को नई रफ्तार भी देगा।
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