एक चपड़गंजु नेता है केजरीवाल की पार्टी का संजय सिंह। उसने अगस्त 31 को आरोप लगाया है कि 43 कंपनियों पर बकाया 5.44 लाख करोड़ में से करीब 1.90 लाख करोड़ की वसूली हुई जबकि 3.53 लाख करोड़ का कर्ज माफ़ कर दिया गया।
संजय सिंह को याद नहीं केजरीवाल की दिल्ली सरकार ने अकेले ही लाखों करोड़ का घोटाला कर दिया और कांग्रेस ने अपने करीबी उद्योगपतियों को लाखों करोड़ रुपए के लोन फ़ोन बैंकिंग पर ही दे दिए जो डूब गए। मोदी को कर्ज माफ़ करने होते तो विजय माल्या और नीरव मोदी की सम्पत्तियां जब्त करके बैंको का कर्ज न चुकाता।
बैंकों में दो तरह लोन को डील किया जाता है। एक Write Off करके और दूसरा कर्ज माफ़ करके जिनके लिए अलग अलग mechanism होते हैं।
ये फेक नैरेटिव चलाने वाले Write Off को ही लोन माफ़ी मांग कर हाय हाय मचाते हैं क्योंकि आम जनता को अक्सर पता ही नहीं होता कि लोन Write Off और लोन माफ़ क्या होता है?
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| लेखक चर्चित YouTuber |
बैंक लोन 'राइट-ऑफ' (Write-off) का सीधा मतलब है कि बैंक ने अपने बही-खाते (Balance Sheet) से उस डूबे हुए कर्ज या नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (NPA) को हटाकर नुकसान के रूप में दर्ज कर लिया है। इसे आम भाषा में 'बट्टे खाते में डालना' कहते हैं।
मुख्य बातें (Key Points)
कर्ज़ माफ नहीं होता: राइट-ऑफ का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आपका लोन माफ (Waive-off) हो गया है;
कानूनी obligación (दायित्व): उधारकर्ता (Borrower) अभी भी कानूनी रूप से वह पैसा चुकाने के लिए बाध्य रहता है;
वसूली जारी रहती है: बैंक कानूनी या अन्य तरीकों से पैसे वसूलने की कोशिश जारी रखता है।
सिर्फ अकाउंटिंग प्रक्रिया: बैंक अपनी बैलेंस शीट को साफ-सुथरा दिखाने और टैक्स लाभ पाने के लिए ऐसा करते हैं;
सिबिल स्कोर पर असर: यह स्थिति आपके सिबिल (CIBIL) या क्रेडिट रिपोर्ट में साफ़ दिखती है, जिससे भविष्य में लोन मिलना कठिन हो जाता है-
राइट-ऑफ और वेव-ऑफ में अंतर
राइट-ऑफ (Write-off): बही-खाते से हटाना; वसूली का अधिकार सुरक्षित रहता है-
वेव-ऑफ (Waive-off): कर्ज पूरी तरह माफ करना; अब कोई पैसा नहीं वसूला जाएगा-
अंबानी अंबानी चिल्लाने वाले शहजादे अब बोल... सांसद ने तो तेरे परिवार की पोल खोल दी! pic.twitter.com/ApxuLUEhyD
— Arnab Goswami Satire (@Asksindia_) June 27, 2026
बैंकों का नेट प्रॉफिट 2021 - 22 से किस तरह बढ़ा है, यह भी देखिए -
FY 2021 -22: ₹0.67 lakh crore (approx. ₹66,543 crore)
FY 2022–23: ₹1.05 lakh crore (approx. ₹1,04,649 crore)
FY 2023–24: ₹1.41 lakh crore (approx. ₹1,41,202 crore)
FY 2024–25: ₹1.78 lakh crore (approx. ₹1,78,364 crore)
FY 2025–26: ₹1.98 lakh crore
Gross NPA: Declined to a historic low of 1.93% (down from 7.3% in FY22).
Net NPA: Dropped to 0.39% जो 2014 में 2.3% था -
कांग्रेस के समय में बैंक डूबने की कगार पर थे लेकिन वर्तमान में ये खासा मुनाफा कमा रहे हैं।
रिज़र्व बैंक द्वारा सरकार को दिया हुआ लाभांश भी मजबूत आर्थिक स्तिथि को दर्शाता है जो इस प्रकार रहा है -
FY 2021–22: ₹30,307 crore
FY 2022–23: ₹87,416 crore
FY 2023–24: ₹2,10,874 crore (approx. ₹2.10 lakh crore)
FY 2024–25: ₹2,68,276 crore (approx. ₹2.69 lakh crore)
FY 2025–26: ₹2,86,588 crore (₹2.87 lakh crore)
वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 7.8% की GDP में वृद्धि दर से विपक्ष को जरूर दर्द हुआ होगा- और हां, विदेशी मुद्रा भंडार भी 729 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर है। लेकिन विपक्ष फेक नैरेटिव चलाने से बाज नहीं आएगा।

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