इस्लामिक नाटो का शुरू होने से पहले ही क्या The End हो गया; बेहतर है सऊदी अरब इज़रायल के साथ खड़ा हो जाए

सुभाष चन्द्र

सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान ने मिलकर 7 अगस्त, 2026 को मक्का में एक कथित Islamic NATO बनाया जिसमें प्रावधान था कि किसी भी एक देश पर हमला अन्य सदस्य देशों पर भी माना जाएगा और ऐसे में सब एक दूसरे के साथ मिलकर युद्ध करेंगे 

लेकिन एक समझौता एक दिखावा बनकर रह गया क्योंकि पाकिस्तान और तुर्की इसे अमलीजामा नहीं पहना रहे अभी इसी महीने ईरान समर्थित हूती ने सऊदी अरब के कंट्रोल वाले मोखा शहर और Bab el-Mandeb strait पर कब्ज़ा कर लिया लेकिन तुर्की और पाकिस्तान सऊदी अरब के साथ diplomatic बातचीत कर रहे हैं जबकि जवाब हमले का देना चाहिए था। 

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पाकिस्तान पर बिना कोई हमला हुए तुर्की उसे हथियार सप्लाई कर रहा है, जाहिर है भारत के खिलाफ युद्ध करने के लिए लेकिन जिस सऊदी अरब पर ईरान समर्थित हूती ने हमला कर दिया उस पर कोई कार्रवाई नहीं चाहता 

दूसरी तरफ पाकिस्तान ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता कराने को आतुर रहा लेकिन फेल हो गया और BRICS की बैठक में ईरान के राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री मोदी से युद्ध ख़त्म कराने के लिए मदद मांगी ऐसे पाकिस्तान की इंटरनेशनल लेवल पर इज़्ज़त उतर गई वैसे पाकिस्तान की इज़्ज़त तो हमारी हॉकी टीम की बेटियां भी उतार आई जो उनके मंत्री मोहसिन नक़वी से ट्रॉफी लेने से मना कर दिया

इज़रायल के संबंध UAE के साथ मधुर हैं और इज़रायल उसे हथियार भी मुहैया करता है दोनों अब्राहम समझौते में शामिल हैं सऊदी अरब के लिए बेहतर होगा अगर वह इज़रायल से रक्षा समझौता करे इज़रायल सऊदी की मदद कर सकता है लेकिन पाकिस्तान और तुर्की हरगिज़ नहीं करेंगे 

सऊदी अरब के इज़रायल से मतभेद केवल फिलिस्तीन को लेकर हैं 

आज की भू राजनीति में एक देश दो अलग अलग देशों से संबंध रख सकता है बेशक उनके आपस में संबंध ठीक न हो जैसे भारत के संबंध फिलिस्तीन से भी हैं और इज़रायल से भी हैं, भारत रूस के साथ भी दोस्ती रखता है और अमेरिका के साथ भी

इसलिए अपनी सुरक्षा के लिए सऊदी अरब को इज़रायल से हाथ मिलाना चाहिए लेकिन सऊदी अरब ने तो इज़रायल के साथ Diplomatic Relations भी नहीं बना कर रखे वो पाकिस्तान पर भरोसा करता है जिसका सऊदी अरब पेट भरता रहता है 

सऊदी अरब को देखना चाहिए कि UAE और ईरान Brics की बैठक में मिले जबकि ईरान UAE में अमेरिकी अड्डों पर हमले करता है फिर भी न जाने क्यों दोनों की मुलाकात हुई सऊदी अरब चाहता तो उसके भी विदेश मंत्री Prince Faisal bin Farhan Al Saud ईरान के राष्ट्रपति से मिल सकते थे

लगता है सऊदी अरब भी इज़रायल को बर्बाद देखना चाहता है और इसलिए ही उसने तुर्की और पाकिस्तान से समझौता किया है वो दोनों देश सऊदी अरब का इस्तेमाल इज़रायल पर हमले के लिए करेंगे लेकिन उससे भी नुक्सान सऊदी अरब का होगा क्योंकि सऊदी अरब इज़रायल की जद में है और वो वहां बैठे तुर्की और पाकिस्तान को भी निपट लेगा

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