अराजक तत्वों के बचाव के लिए, मीलॉर्ड रविवार को भी सुनवाई पर बैठ गए; पुलिस फोर्स के लिए जब एक तरफा राय रखेंगे मीलॉर्ड, तो अराजकता फैलना तय है

सुभाष चन्द्र

अराजक तत्वों के लिए रविवार के दिन सुप्रीम कोर्ट खुलने से बुजुर्गों की कहावत शत-प्रतिशत ठीक साबित हो गयी कि जिसके पैरों में लोहे का जूता और सोने के हाथ हैं वो मुवक्किल हारा हुआ मुकदमा भी जीत जाएगा वरना जीतने वाला मुकदमा भी हार जाएगा। क्या मीलॉर्ड को पिछले जंतर मंतर का अनुभव नहीं था? अगर अनुभव होता तो न रविवार को कोर्ट खोलते और न ही दंगाई क्षेत्रों में इंटरनेट बंद को कहती। यानि जब तक उपद्रवियों के लपेटे में मीलॉर्ड नहीं आएंगे तब तक बेवक्त अदालत को खोलना और अराजक तत्वों मालपुए खिलाने बंद नहीं होंगे।    

गजबे है सुप्रीम कोर्ट के दो जज आज रविवार को छुट्टी के दिन पुलिस के कल किये गए इंतज़ाम के खिलाफ सुनवाई के लिए बैठ गए और निर्देश जारी कर दिए, ये मत करो, वो मत करो, ये कर दो और वो कर दो। लेकिन ये दोनों जस्टिस बागची और जस्टिस वी मोहना भूल गए कि अगर पुलिस ने कल सावधानियां न बरती होती तो जुलाई से बहुत बड़ा दंगा हो सकता था। 

BNSS के सेक्शन 163 से सुप्रीम कोर्ट का इलाका भी अछूता नहीं है। आपके वकील जो कॉकरोचों के समर्थन में नारेबाजी कर रहे थे क्या वो सुप्रीम कोर्ट में हिंसा नहीं कर सकते थे, उन्हें तो बचने के हजार तरीके मालूम होते हैं। सुप्रीम कोर्ट को यह भी पता होना चाहिए था कि कल के प्रदर्शन के लिए पुलिस ने अनुमति नहीं दी थी और सुप्रीम कोर्ट के अपने निर्णय के अनुसार ऐसा प्रदर्शन गैर कानूनी है अगर पुलिस की अनुमति नहीं है।

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सुप्रीम कोर्ट को लगता है दिपके, दास, रांका को प्लेन से और ध्रुव राठी को गुरुग्राम से हिरासत में लेने से तकलीफ हुई है। वह पुलिस ने सतर्कता के लिए किया लेकिन सुप्रीम कोर्ट देखो कितनी छूट देना चाहता है अराजक तत्वों को।

सुप्रीम कोर्ट के महान जजों ने कहा -

-बिना कानूनी प्रक्रिया हिरासत में नहीं लिया जाना चाहिए खासकर peaceful और unarmed assemblies outside active prohibitory zones - 163 के हिस्से के बाहर तो हथियार पहुंचाने में न कोई विलंब हो सकता है और न किसी की नज़र पड़ सकती है और वो लोग आसानी से 163 के इलाके में घुस कर पुलिस पर हमला कर सकते हैं; फिर कौन जिम्मेदार होगा?

-केंद्र को नोटिस जारी किया गया political leaders, lawyers, students और पत्रकारों को हिरासत में लिए जाने के लिए। मीलॉर्ड क्या ये सब दूध के धुले हुए हैं या कानून से ऊपर हैं? उन्हें हिरासत में लेना पुलिस के अधिकार क्षेत्र में था कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए और अगर आप चाहते हैं कि कानून व्यवस्था बिगड़े तो फिर उसकी जिम्मेदारी पुलिस के कन्धों पर मत डालिए; कौन छात्र थे, वो videos भी देखिये जिनमें अनेक लड़किया undergarments में दिखाई देंगी;

-मेट्रो और ट्रेन सर्विस सुचारू रूप से जारी रखने के भी निर्देश दिए जिससे लोगों को आवागमन में परेशानी ना हो। ऐसे निर्देश देते हुए यह भी बता देते कि करोड़ों की लागत से बनी मेट्रो ट्रेंस को नुकसान होता या उनमे दंगाई आग लगा देते तो जिम्मेदार कौन होता? क्या आप जिम्मेदारी लेते;

-इंटरनेट सर्विस जारी रहनी चाहिए subject only to necessary law and order conditions; कानून व्यवस्था को ध्यान में रख कर ही इंटरनेट बंद किया जाता है, पुलिस कोई पागलों की संस्था नहीं है जो बिना वजह इंटरनेट बंद कर दे;

-सुप्रीम कोर्ट से तुरंत BNSS की धारा 163 के बोर्ड हटाने के निर्देश दिए। कल को दंगाई अगर सुप्रीम कोर्ट में घुस जाएं तो पुलिस को दोष मत दीजिए क्योंकि वो 163 आपकी सुरक्षा के लिए लगाई गई थी; और 

-सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अवांछनीय बैरिकेड्स को भी हटाने के भी निर्देश दिए। मीलॉर्ड ने लगता है वो वीडियो नहीं देखे जिसमें राहुल गांधी और जुलाई में कॉकरोच बेरिकेड्स को तोड़ कर घुसने की और पुलिस पर हमले की कोशिश कर रहे थे।

मैंने तो पहले भी कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के जजों को प्रदर्शन के दौरान पुलिस के साथ खड़ा होना चाहिए। ऐसे कोर्ट में आर्डर आर्डर देने से क्या लाभ है? आपका नजरिया पुलिस के खिलाफ एक तरफ़ा है। अभी तो कांग्रेस ने कल प्रदर्शन करना है। आज आपके कहने से बेरिकेड्स हटा दे पुलिस और कल कांग्रेस के लोगों को दंगा करने की खुली छूट मिल जाए, क्या ऐसा ही चाहते है आप ?

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