जॉर्जिया मेलोनी ने दंगाइयों के खिलाफ बनाया सख्त प्लान, नाबालिग दंगाइयों के लिए माता-पिता जिम्मेदार


जॉर्जिया मेलोनी ने 24 घंटे के अंदर वो कर दिखाया, जो यूरोपियन यूनियन (EU) के बड़े-बड़े नेता 30 साल में भी नहीं कर पाए। मेलोनी ने इटली में दंगों को रोकने के लिए ऐसी पॉलिसी बनाई है, जिसकी वजह से पूरे यूरोप में चर्चा शुरू हो गई है। स्टूडेंट प्रोटेस्ट और हिंसक प्रदर्शनों को रोकने के लिए उन्होंने एक सख्त प्लान तैयार किया है, जिसे 'एंटी-रायट डॉक्ट्रिन' कहा जा रहा है।

मेलोनी ने साफ कह दिया है कि अगर कोई सड़क पर दंगा करेगा, तो उसके परिवार को भी इसकी कीमत चुकानी पड़ सकती है। अगर कोई हिंसक प्रदर्शन में शामिल होता है, तो उसे 5 साल तक की जेल और 20,000 का जुर्माना देना पड़ सकता है। मेलोनी समझ गई हैं कि नकाब पहनकर हिंसा करने वाली भीड़ को सिर्फ आंसू गैस चलाकर नहीं रोका जा सकता। इसके लिए उनके पैसे और हिंसा की तैयारी में मदद करने वाले पूरे नेटवर्क पर चोट करनी होगी।
और जैसे ही इटली में दंगाइयों के माता-पिता पर जुर्माना लगाने और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात सामने आई, मिलान में 500 सैनिकों को तैनात करने की भी बात हुई। इसके बाद अचानक वहां के युवा प्रदर्शनकारी सड़कों से गायब हो गए। पता नहीं कहां छिप गए, जैसे जमीन में समा गए हों!
मेरे हिसाब से यह उस पूरे सिस्टम के खिलाफ एक सीधा जवाब है, जिसमें बड़े-बड़े अमीर लोग एनजीओ (NGOs) को पैसा देते हैं और फिर उन्हीं के जरिए युवाओं को आगे करके किसी देश में अशांति फैलाने की कोशिश करते हैं। इन युवाओं को आगे करके उन्हें एक तरह से ढाल की तरह इस्तेमाल किया जाता है, ताकि देश की सरकार को कमजोर किया जा सके और देश में अस्थिरता पैदा हो।
जब आप हिंसक प्रदर्शन करने वालों के पैसे के इंतजाम और कानून से बचने के रास्ते बंद कर देते हैं, तो इस तरह की गतिविधियों के पीछे काम करने वाले लोगों की असलियत सामने आने लगती है।
मेरे हिसाब से भारत को भी इसी तरह के मॉडल पर विचार करना चाहिए। अगर कोई अधिकारों के नाम पर हाईवे जाम करता है, सरकारी या आम लोगों की संपत्ति तोड़ता है या उसे आग लगाता है, तो नुकसान की भरपाई भी उसी से कराई जानी चाहिए। देश की जनता को परेशान करके और पूरे देश को बंधक बनाकर रखना लोकतंत्र नहीं है।
हां, विरोध करना हर किसी का अधिकार है, लेकिन विरोध करने का भी एक तरीका होता है। अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने का मतलब यह नहीं है कि आप दूसरों के अधिकार छीन लें, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाएं या आम लोगों की जिंदगी मुश्किल बना दें।

No comments: