सुप्रीम कोर्ट में इंडी गठबंधन की याचिका स्वीकार नहीं हो सकी


सुप्रीम कोर्ट में इंडी गठबंधन की याचिका स्वीकार नहीं हो सकी।

बस उसमे चौदह कमियां ही हैं। मतलब हद चल रहा है देश में।
अभिषेक मनु सिंघवी के साथ करीब पांच सौ वकीलों का जत्था प्रदर्शन में था। विपक्ष के पास एक से एक धुरंधर वकील हैं। फिर भी ऐसा हुआ। साफ बात है कि यह जान-बूझ कर किया गया ताकि यह कहकर हंगामा काटा जाए कि देखो सुप्रीम कोर्ट भी इनसे मिला हुआ है।
मुख्य न्यायाधीश ने आर्टिकल 32 के तहत याचिका डालने को कहा था, जिसमें किसी नागरिक के मौलिक अधिकारों के हनन के किसी मामले मे किसी सरकार या संस्था को प्रतिवादी बनाया जाता है। इन्होंने तीनों चुनाव आयुक्तों को व्यक्तिगत तौर पर प्रतिवादी बनाया है।
दूसरा सबसे मजेदार मामला है कि ग्यारह याचिकाकर्ताओं में से नौं ने वकालतनामे पर हस्ताक्षर ही नहीं किये हैं। वे हैं तेजस्वी यादव, अखिलेश यादव, सौगत राय, संजय राउत, सुप्रिया सुले, डी राजा, एम ए बेबी, महुआ माझी और ई टी मोहम्मद् बशीर।
मतलब यही कि राहुल गाँधी और खड़गे को छोड़कर किसी ने हस्ताक्षर नहीं किया। मतलब साफ है कि कांग्रेस के साथ विपक्ष हंगामे मे बेशक साथ रहे लेकिन लीगल ग्राउंड पर कोई साथ नहीं।
हद दर्जे की दोगलयी देखिये कि खड़गे के पहचान पत्र की फोटोकॉपी ही नहीं साफ है, उसमें उनका नाम तक नहीं पढ़ा जा रहा।
और उससे भी मजेदार खामी यह रही कि फीस भी 220 रूपये कम जमा की गयी थी। भीख मांग लेते भाई।
इनको करना कुछ भी नहीं है, बस देश में आग लगाना है, झूठ फैलाना है।
इतना नंंगा सच भी जिन्हें दिखाई न पड़े।

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