मोदी, तू क्या, तेरा बाप भी जाएगा! तेरा बाप भी जाएगा!
ये कांग्रेस अध्यक्ष खरगे जी पटना में एक सभा के दौरान ऐसा कहा।
और फिर एक बार कांग्रेस के साथ वही हुआ, जिसे देखकर लगता है कि वोट चोरी हो गई। कांग्रेस के खाते से लाखों वोट कट गए और बीजेपी के खाते में जुड़ गए।
हुआ यूँ कि पटना में खरगे जी एक सभा में भाषण दे रहे थे। वही पुराना राग अलाप रहे थे, वोट चोरी हो रही है, न जाने क्या-क्या। तभी कांग्रेस का एक कार्यकर्ता खड़ा हुआ और खरगे जी को आईना दिखाते हुए कह दिया कि मोदी कहीं नहीं जा रहे हैं।
फिर क्या था! खरगे जी गुस्से से लाल हो गए और चिल्लाकर बोले, "मोदी... मोदी का बाप भी जाएगा, बाप भी जाएगा! मोदी का बाप भी जाएगा, चल!"
वैसे मोदी जी की किस्मत भी कमाल की है। जब-जब कांग्रेस उन्हें गालियाँ देती है, तब-तब उनका वोट शेयर बढ़ता हुआ दिखाई देता है। सोनिया गांधी ने मोदी जी को 'मौत का सौदागर' कहा था, उसके बाद मोदी जी बार-बार गुजरात के मुख्यमंत्री बने। राहुल गांधी पूरे देश में 'चौकीदार चोर है' का नारा लेकर घूमे और नतीजा ये हुआ कि मोदी जी दोबारा प्रधानमंत्री बन गए।
इसी तरह, जब जंतर-मंतर पर इन लोगों ने मोदी जी की माँ को जमकर गालियाँ दीं, तो उसके बाद हुए उपचुनावों में बीजेपी ने अच्छा प्रदर्शन किया। इतना ही नहीं, जिन यूनिवर्सिटी के चुनावों में जेन-ज़ी यानी नई पीढ़ी के युवा वोट कर रहे थे, वहाँ भी बीजेपी की छात्र शाखा अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के उम्मीदवारों को बड़ी जीत मिली।
अब इन लोगों को कौन समझाए कि अगर मोदी जी को सत्ता से हटाना है, तो जनता के सामने उनसे बेहतर गवर्नेंस मॉडल और काम करने का तरीका पेश करना पड़ेगा। लेकिन राहुल गांधी और कांग्रेस इस झंझट में पड़ना ही नहीं चाहते। उन्हें तो बस किसी तरह सरकार बदलवानी है, यानी रिजीम चेंज करवाना है।
इसीलिए कांग्रेस ने 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में 10 लाख लोगों को इकट्ठा करके विरोध प्रदर्शन करने का ऐलान किया है।
अब वहाँ भी मोदी जी को गालियाँ दी जाएँगी और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का फिर से इस्तीफा माँगा जाएगा। लेकिन चिंता की बात ये है कि कांग्रेस ने कहा है कि इसके बाद वो मार्च भी निकालेगी। अब सवाल ये है कि 10 लाख लोगों की ये मार्च कहाँ निकाली जाएगी, इसकी जानकारी अभी तक नहीं दी गई है।
देखिए, आजकल फ्रांस और यूरोप के दूसरे देशों में जो विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं, उनमें एक नया तरीका देखने को मिल रहा है। वहाँ कुछ प्रदर्शनकारी खतरनाक पटाखे जलाकर सरकारी इमारतों पर फेंकते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या कांग्रेस भी दिल्ली में इसी तरह का रास्ता अपनाने वाली है? इसलिए अमित शाह और दिल्ली पुलिस को पूरी तरह सतर्क रहना पड़ेगा।
वैसे, इन लोगों और राहुल गांधी ने अक्टूबर में दिल्ली में जो आंदोलन किया था, उससे दिल्ली के व्यापारियों को 3,000 करोड़ रुपये का नुकसान होने की बात कही जा रही है। और अगर कांग्रेस ने फिर से दिल्ली में हंगामा और अराजकता फैलाने की कोशिश की, तो दिवाली तक व्यापारियों का नुकसान बढ़कर 10,000 करोड़ रुपये तक पहुँच सकता है।
अब आप ही बताइए, ऐसे हालात में कोई भी समझदार इंसान इन दिमागी नक्सलियों और हर बात पर नाराज रहने वाले फ़ुफ़ाओं को वोट क्यों देगा? अगर जनता का वोट चाहिए, तो जनता के लिए काम करना पड़ेगा, बेहतर विकल्प देना पड़ेगा। सिर्फ गालियाँ देने, वोट चोरी का आरोप लगाने और विरोध प्रदर्शन करने से सरकार नहीं बदलती।


No comments:
Post a Comment