राहुल गांधी की आज फैली हुई अराजकता के लिए सिर्फ सुप्रीम कोर्ट जिम्मेदार है; अभी “दामाद जी” के एक केस पर फिर रोक लगा दी

सुभाष चन्द्र

इसमें कोई शक नहीं कि सुप्रीम कोर्ट आज राहुल गांधी के उद्दण्ड बर्ताव के लिए पूरी तरह जिम्मेदार है। क्या हुआ अगर आज सुप्रीम कोर्ट ने उसे कोर्ट के बाहर प्रदर्शन ने लिए फटकार लगा दी? ऐसा करने का साहस भी तो उसे सुप्रीम कोर्ट ने ही दिया जो राहुल गांधी का हर केस उसे “दामाद” समझ कर रोक देता है। अब भुगतो उसकी कारगुजारी।

कहते हैं ना कि जब आग की लपटें अपने ऊपर आती हैं तभी मालूम होता है आग क्या है। सुप्रीम कोर्ट पर उद्दण्ड़ होने पर सुप्रीम कोर्ट को मालूम हुआ कि विपक्ष द्वारा CAA से लेकर पहलवानों के हंगामे को कभी कोर्ट ने गंभीरता से नहीं लिया। लेकिन अब वर्तमान उद्दण्ड जब सुप्रीम कोर्ट के अंदर पहुँचने पर होश आया। रविवार को क्यों खोली कोर्ट?  

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सुप्रीम कोर्ट के  Justices B.R. Gavai, P.S. Narasimha, and Sanjay Kumar ने मोदी सरनेम वाले केस में राहुल गांधी की दोषसिद्धि पर रोक लगा कर उसे उद्दंड बना दिया। गवई ने शुरू में ही कह दिया था कि वो कांग्रेस परिवार से आते हैं। भाजपा विधायक पूर्णेश मोदी को तभी उनके बेंच में बैठने पर ऐतराज उठा देना चाहिए था। गवई ने राहुल को 4 अगस्त 2023 को जीवनदान दे दिया।

उसके बाद से राहुल गांधी देश में ही नहीं विदेशों में भी भारत को बदनाम करने में लग गया। और अब वोट चोरी के और ज्ञानेश कुमार के विरोध के नाम पर देश में अराजकता फैला रहा है। गवई ने अगर न छोड़ा होता तो अभी और कई साल सांसद भी न होता।

जो भी केस राहुल गांधी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, उसे बर्फ में लगा दिया गया। सावरकर के अपमान का केस तो खारिज ही कर दिया और सेना के अपमान का केस लटका हुआ है। CBI/ED की राहुल गांधी की संपत्ति की जांच पर रोक लगा दी। सोनिया गांधी का नाम वोटर लिस्ट में बिना नागरिकता जुड़ने के केस की सुनवाई 29 सितंबर को ACJM कोर्ट में होनी थी लेकिन सेटिंग ऐसी हुई कि सुनवाई हुई ही नहीं और कुछ पता भी नहीं कब होगी।

राहुल गांधी को भरोसा हो गया कि सुप्रीम कोर्ट उसे हर मामले में बचा लेगा और इसलिए ही वह आपे से बाहर हो रहा है।

पिछले महीने 8 सितंबर, 2026 को बॉम्बे हाई कोर्ट जस्टिस एनआर बोरकर ने राहुल गांधी को 2019 में मजिस्ट्रेट कोर्ट के समन पर रोक लगाने से इंकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि “2019 में मजिस्ट्रेट के आदेश में कोई गैर कानूनी बात नहीं मिली”। मामला भाजपा सदस्य एमएच श्रीश्रीमल की मानहानि की शिकायत पर दर्ज हुआ था कि राहुल गांधी ने 2018 राफेल सौदे को लेकर प्रधानमंत्री मोदी को “चोरों का सरदार” (Commander in Thief”) कहा था। ध्यान दीजिए हाई कोर्ट में समन के मामले में आदेश 7 साल बाद हुए।

फिर क्या था राहुल गांधी सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ। जैसा पहले होता आया है, सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस अपरेश कुमार सिंह महाराष्ट्र सरकार और शिकायतकर्ता को 4 हफ्ते में जवाब दाखिल करने के लिए नोटिस जारी कर दिया और ट्रायल कोर्ट में कार्रवाई पर रोक जारी रखने के आदेश दे दिए। राहुल गांधी का वकील था सुप्रीम कोर्ट में अभिषेक मनु सिंघवी।

ये 4 सप्ताह का नोटिस कितना लंबा होगा, कह नहीं सकते, ये 4 महीने भी चल सकता है और 40 महीने भी क्योंकि सिंघवी पक्का तिकड़मी वकील है।

सारा लफड़ा यह है कि सुप्रीम कोर्ट ट्रायल कोर्ट में फैसला होने की नौबत ही नहीं आने देता। बस मोदी सरनेम में फैसला हुआ और वो भी सुप्रीम कोर्ट ने गंगा जी में बहा दिया। और इसलिए ही राहुल गांधी अनाप शनाप बोलता है। उसे जैसे सुप्रीम कोर्ट से अभय दान मिला हुआ है।

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