कहते हैं सबसे कड़क CEC टी एन शेषन थे। वो 12 दिसंबर 1990 से 11 दिसंबर 1996 तक पद पर रहे। उस समय 3 चुनाव आयुक्त नहीं होते थे और इसलिए शेषन अकेले ही सर्वेसर्वा थे।
शेषन के समय में मई/जून 1991 में लोकसभा चुनाव हुए जिसमें कांग्रेस की पिछले चुनाव से 47 सीट बढ़ कर 244 हो गई जबकि भाजपा की 35 सीट बढ़ कर 120 हुई। तो क्या शेषन ने भी कांग्रेस के लिए वोट चोरी करवाई थी?
उसके बाद शेषन के कार्यकाल में कांग्रेस ने अनेक राज्यों में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई लेकिन किसी ने उन पर वोट चोरी का आरोप नहीं लगाया।
कहां कहां कांग्रेस जीती वो देखिये -
-1991 -असम, हरियाणा, केरल (कांग्रेस का UDF) और पुडुचेरी में कांग्रेस ने गठबंधन सरकार बनाई;
-1992 - पंजाब में कांग्रेस को पूर्ण बहुमत मिला;
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-1994 - गोवा में कांग्रेस को पूर्ण बहुमत मिला;
अन्य राज्यों में विपक्षी दलों की और कांग्रेस गठबंधन की सरकार बनी -
-1991 - तमिलनाडु में AIADMK ने कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनाई, उत्तर प्रदेश में बीजेपी और बंगाल में सी.पी.एम. की सरकार बनी;
-1993 में दिल्ली और राजस्थान में बीजेपी की सरकार, उत्तर प्रदेश में सपा-बसपा की गठबंधन सरकार और त्रिपुरा में सी.पी.एम. की सरकार बनी;
-1994 में आंध्र प्रदेश में तेलुगू देशम, कर्नाटक में जनता दल और सिक्किम में SDF की सरकार बनी;
- 1995 में अरुणाचल प्रदेश में जनता दल गठबंधन, बिहार में जनता दल, गुजरात में बीजेपी, महाराष्ट्र में शिवसेना+बीजेपी गठबंधन, मणिपुर में क्षेत्रीय दलों के गठबंधन और ओडिशा में जनता दल की सरकार बनी; और
-1996 में असम में असम गण परिषद, हरियाणा में HVP+BJP, जम्मू कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस और केरल में वामपंथी गठबंधन, पुडुचेरी में DMK+TMC, बंगाल में सी.पी.एम. की सरकार बनी लेकिन उत्तर प्रदेश में त्रिशंकु विधानसभा होने के कारण राष्ट्रपति शासन लगाया गया
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि तब शेषन के कार्यकाल में किसी दल के दिमाग में वोट चोरी का कीड़ा नहीं उठा। यह EVM और वोट चोरी का बेसुरा राग 2014 के बाद शुरू हुआ जबकि कांग्रेस स्वयं 2004 और 2009 में EVM के जरिए ही सत्ता में आ सकी।
एक बात और महत्वपूर्ण है कि ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल में 2026 का बंगाल का पहला चुनाव था जब हिंसा नहीं हुई और कोई मौत नहीं हुई जबकि शेषन से समय 1991 के बंगाल चुनाव में 20 से ज्यादा और 1996 के चुनाव में 25 से ज्यादा मौतें हुई।
लेकिन आज इतने साफ़ सुथरे चुनाव होने पर भी CEC ज्ञानेश कुमार की बलि लेना चाहते है कांग्रेस और विपक्ष के लोग और कॉकरोच भी जो कभी चुनाव नहीं लड़े।
आज SIR को रो रहे हैं जबकि कांग्रेस शासन में देश के विभिन्न हिस्सों में SIR 1952–56, 1957, 1961, 1965, 1966, 1983–84, 1987–89, 1992, 1993, 1995, 2002, 2003, and 2004 में हुआ और बिहार में 2003 में SIR हुआ था। रोना इस बात का है इस बार के SIR में मरे हुए लोग और विदेशी बांग्लादेशी/रोहिंग्या लपेटे में आ गए।


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