कपिल सिब्बल ने संसद में UPA सरकार के कानून मंत्री होकर बयान देते हुए वोट कटने के 3 कारण बताए थे। वो कारण थे -
-पहला कारण : जब कोई व्यक्ति एक विधानसभा क्षेत्र से अपना मकान बदलकर दूसरे क्षेत्र में चला जाता है तो कानूनन उसका नाम पुराने क्षेत्र से हटा दिया जाता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि उसका वोट छीन लिया गया है बल्कि इसका मतलब ये है कि वो अब दूसरे क्षेत्र का मतदाता बन चुका है;
-दूसरा कारण : नाम का दोहराव यानी रेप्लिकेशन- अगर किसी व्यक्ति का नाम पुरानी जगह भी चल रहा है और नई जगह भी दर्ज हो गया है तो नियम के मुताबिक एक जगह से उसका नाम रद्द करना पड़ेगा क्योंकि एक नागरिक दो जगह वोट नहीं डाल सकता;
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| लेखक चर्चित YouTuber |
जब जब कांग्रेस के समय में SIR हुआ, इन नियमों का पालन किया गया होगा जो सिब्बल ने गिनाए। सिब्बल का भाषण संसद के रिकॉर्ड में उपलब्ध होगा।
आज कांग्रेस और कपिल सिब्बल स्वयं उन्हीं बातों का विरोध कर रहे हैं जो उन्होंने खुद कही थी। जो नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए उनमें 2.8 करोड़ लोग मर गए, 6.3 करोड़ जगह छोड़ कर चले गए और एक करोड़ डुप्लीकेट नाम के वोटर थे। अब जो जगह छोड़ कर चले गए उन्होंने अपने नाम दूसरे क्षेत्र में जुड़वा लिए होंगे बशर्ते वो विदेशी होने के कारण देश छोड़ कर न चले गए हो जैसे रोहिंग्या और बांग्लादेशी और अपनी भारतीय नागरिकता साबित न कर पाए हों।
कांग्रेस का ड्रामा देखिए - वो पहले कुछ और विपक्षी दलों को लेकर वोट चोरी का आरोप लेकर राष्ट्रपति के पास गए और राहुल गांधी ने झूठ फैला दिया कि राष्ट्रपति ने वोट चोरी की बात मानी। उन्होंने हमसे सबूत मांगे। जब सबूत मांगे तो राष्ट्रपति ने वोट चोरी की बात कैसे मान ली?
खड़गे साहब ने भी कहा कि राष्ट्रपति ने हमसे सबूत मांगे हैं और हम सबूत जुटा रहे हैं।
अगर सबूत जुटा लिये तो राष्ट्रपति को दो, सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत से बिना सबूत के मिलने का समय मांगने का क्या औचित्य है? चीफ जस्टिस जब पहले ही CEC को निलंबित करने के मांग करने वाली याचिका ख़ारिज कर चुके हैं, तब भी राहुल गांधी और खड़गे CEC को हटाने के लिए चीफ जस्टिस से मिलना चाहते थे लेकिन चीफ जस्टिस से मिलने से मना कर दिया।
कांग्रेस को अगर CEC को हटाना है तो वह उनके विरुद्ध संसद में महाभियोग प्रस्ताव लेकर आए। सड़क पर हिंसक राजनीति करने उन्हें नहीं हटाया जा सकता - यह बात सिब्बल बेहतर जानते होंगे जो उन्हें कांग्रेस और विपक्ष को समझा देनी चाहिए। लेकिन सिब्बल का भरोसा जब सुप्रीम कोर्ट से उठ गया है तो संसद पर क्या भरोसा रहा होगा। अब उन्हें संयास ले लेना चाहिए।
आज प्रशांत भूषण ने भी हिंसा फ़ैलाने की बात कही है। उसकी हिंसा फ़ैलाने की बात का जवाब हिंसा से ही दिया जाए तो उचित ही होगा। एक बड़ी भीड़ अगर उसका काम तमाम कर दे तो कैसा रहेगा? यह इलाज योगेंद्र यादव का भी होना चाहिए। सड़क की हिंसक राजनीति का यही उपचार है।


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