मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पूरी तरह एक्शन में आ गए हैं। राहुल गांधी को शायद लग रहा था कि अब चुनाव आयोग दबाव में होगा और कोई बड़ा कदम नहीं उठा पाएगा। लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं हुआ। चुनाव आयोग ने अपना काम शुरू कर दिया है।दरअसल, इस साल के खत्म होते ही अगले साल कई राज्यों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। पांच राज्य तो ऐसे हैं, जहां चुनाव बिल्कुल सामने हैं। ये राज्य हैं गोवा, मणिपुर, पंजाब, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड। इन राज्यों को लेकर चुनाव आयोग ने एक बड़ा आदेश जारी किया है। यह आदेश चुनाव से जुड़े अधिकारियों की ट्रांसफर और पोस्टिंग को लेकर है।
आदेश में साफ कहा गया है कि अगर कोई अधिकारी एक ही जिले में तीन साल से ज्यादा समय से तैनात है, तो उसका ट्रांसफर किया जाए। इसके अलावा, जो अधिकारी अपने ही गृह जिले में तैनात हैं, उनका भी तबादला किया जाए। यह सब इसलिए किया जा रहा है ताकि चुनाव की पूरी व्यवस्था निष्पक्ष तरीके से हो सके और किसी तरह का पक्षपात न हो।
अगले साल कुल सात राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। इनमें गोवा, पंजाब, उत्तराखंड, मणिपुर, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और गुजरात शामिल हैं। लेकिन इन पांच राज्यों की चुनावी टाइमलाइन पर खास ध्यान दीजिए। उत्तर प्रदेश और गोवा जैसे महत्वपूर्ण राज्यों में भी चुनाव होने हैं।
अब सवाल यह है कि बाकी नेता आखिर कर क्या रहे हैं?
राहुल गांधी की बात करें तो वो अभी भी रणनीति बनाने, रैलियों की तैयारी करने और धरना-प्रदर्शन में ही लगे हुए हैं। पिछले एक महीने से उनका ज्यादातर समय धरने और प्रदर्शनों में ही बीत रहा है। क्या आपको लगता है कि वो चुनाव वाले राज्यों में जाकर वहां की जनता से जुड़ने, उनकी समस्याएं समझने या पार्टी को मजबूत करने के लिए कोई काम कर रहे हैं? बिल्कुल नहीं।
लेकिन बाकी नेता क्या कर रहे हैं, जरा वो भी देखिए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ही देख लीजिए। अगले साल गुजरात में भी चुनाव होने हैं और पीएम मोदी ने अभी से वहां पूरी ताकत लगानी शुरू कर दी है। वो बनासकांठा जाकर लोगों से मिल रहे हैं, उनकी समस्याएं समझ रहे हैं और यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि लोगों से बेहतर तरीके से कैसे जुड़ा जाए। अगर कहीं कोई समस्या है या कोई काम बाकी रह गया है, तो उसे कैसे ठीक किया जाए।
इसी तरह गृह मंत्री अमित शाह को देखिए। उन्होंने भी उत्तर प्रदेश की कमान अभी से संभाल ली है। वो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश में अगर कहीं कोई उलझन या परेशानी है, तो उसे भी दूर करने की कोशिश कर रहे हैं।
अब मैं आपसे एक सवाल पूछना चाहती हूं। राहुल गांधी लगातार सवाल उठा रहे हैं कि हम चुनाव क्यों हार जाते हैं, हमारी पार्टी क्यों नहीं जीतती? लेकिन भाई, चुनाव जीतने के लिए कुछ मेहनत भी तो करनी पड़ेगी। जनता के बीच जाना पड़ेगा, उनकी समस्याएं समझनी पड़ेंगी और जो कमियां हैं, उन्हें दूर करना पड़ेगा।
अगले साल इतने सारे राज्यों में चुनाव होने हैं। कुछ राज्यों में तो चुनाव होने में सिर्फ दो-तीन महीने ही बचे हैं। ऐसे में राहुल गांधी आखिर कर क्या रहे हैं? कम से कम अभी से चुनावी राज्यों में जाकर मेहनत तो कीजिए, जनता से जुड़ने की कोशिश तो कीजिए।
लेकिन राहुल गांधी की तरफ से ऐसा कुछ होता हुआ दिखाई नहीं दे रहा है।
दूसरी तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह दोनों अभी से चुनावी तैयारियों में जुट गए हैं और खुद मैदान में उतरकर काम कर रहे हैं।
अब आप ही सोचिए और फैसला कीजिए कि जब चुनाव के नतीजे आएंगे, तो जीत किसकी होगी और हार किसकी?

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