एक सामान्य नागरिक के मन में यही विचार आता है कि हिंदुओं के एक दिन के दीपावली के त्योहार को बर्बाद करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के जज बिना सोचे समझे फैसले देते है जैसे predetermined हों।
अपने 2 नवंबर के आदेश में जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी वराले ने कहा कि “पटाखे जलाने से प्रदूषण हो सकता है। NCR में इस समस्या से निपटने के लिए किए गए उपाय अपेक्षित परिणाम नहीं दे सके क्योंकि निर्देशों का पालन सही ढंग से नहीं हुआ। पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना आदर्श समाधान दिखाई देता है”।
ये इतने काबिल जज है कि पटाखों पर बैन लगाने के लिए हिंदू धर्म ग्रंथो जैसे स्कंद पुराण और पद्म पुराण भी पढ़ लिए और कोट कर दिए कि उनमे भी पटाखों का उल्लेख नहीं है। ये यह भी नहीं देखते कि दुनिया के अनेक देशों में युद्ध में पटाखे नहीं चल रहे बम और मिसाइल चल रही हैं और आप यहां पटाखों पर बैन लगाने से खुश हो रहे हैं।
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| लेखक चर्चित YouTuber |
सुप्रीम कोर्ट वर्षों से ऐसे आदेश दे रहा है जिसका बहुत खास असर होता भी नहीं है। आप क्या हजारों लोगों को जेल में डालना चाहते हैं जो पटाखे जलाते हैं और पुलिस का काम बढ़ाना चाहते हैं जो पहले ही कानून व्यवस्था की समस्याओं में उलझी रहती है?
दीपावली से पहले से ही प्रदूषण बढ़ना शुरू हो जाता है और दीपावली के बाद भी कई महीने तक जारी रहता है जबकि दीपावली से पहले और बाद भी पटाखे नहीं जलाये जाते। फिर क्यों दो दिन के लिए हिंदुओं पर कुठाराघात करते हो? कभी ईसाईयों पर क्रिसमस पर पेड़ काटने और बकरीद पर जानवरों के वध पर भी प्रतिबन्ध लगाने की हिम्मत कीजिए जनाब। नहीं करते क्योंकि Hindu is a Holy Cow जिस पर आप हुकुम चलाते हो।
बुधवार यानी 4 नवंबर का दिन दिल्ली NCR में पिछले 288 दिनों में सबसे अधिक प्रदूषित रहा। और आगे भी रहेगा। सुप्रीम कोर्ट के जज बस इतना बता दें कि ये 288 दिन से कौन से पटाखे जल रहे थे जो बुधवार को प्रदूषण रिकॉर्ड तोड़ गया और क्या दीपावली के दो दिन पटाखे जलाने में आसमान गिर जाएगा?
कुछ ही साल पहले तक करवाचौथ के दिन से ही आतिशबाज़ी का हिन्दू आनन्द लेते थे। लेकिन जब से मुस्लिम तुष्टिकरण ने जोर पकड़ा है कोई भी हिन्दू त्यौहार हो जैसे होली, दीपावली या फिर करवाचौथ सनातन विरोधियों को ऐसे तड़पन होने लगती है मानो उनकी बात नहीं मानी गयी तो मर जाएंगे। जबकि मुस्लिम क्षेत्रों में जाइये शब्बे रात और 14/15 अगस्त को कितनी आतिशबाज़ी छोड़ी जाती है तब प्रदुषण नहीं होता क्या? लेकिन चीखना-चिल्लाने हिन्दू त्योहारों पर ही है।
उसके बाद भी अगर प्रदूषण रहा जो रहेगा तो क्या उसके लिए आप जिम्मेदारी लेंगे? मैं तो कहता हूँ और सुप्रीम कोर्ट को ही हिमाचल ले जाया करो कम से कम दो महीने के लिए और ऑनलाइन कार्रवाई किया करो जिससे आप प्रदूषण से बचे रहें। दूसरा रास्ता और भी है। आप अपनी ग्रीष्म कालीन डेढ़ महीने की छुट्टियां अक्टूबर नवंबर में किया करो और बाहर घूमने का भी आनंद मिले।
आदेश ऐसे होने चाहिए जो आम जनमानस को ठेस न पहुंचाएं। लोग फिर आदेशों की अवहेलना करेंगे और वो आपको अच्छा नहीं लगेगा। यह केवल आर्डर आर्डर करने से काम नहीं चलेगा, कुछ Practical भी सोचना चाहिए।


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