गिलहरी का रामसेतु बनाने में योगदान

आज अयोध्या में राम मंदिर के जीणोद्धार होने पर सनातन विरोधी नितरोज कुछ न कुछ जहर उगल रहे हैं। जो इस बात को स्पष्ट प्रमाणित कर रहा है कि ये लोग बुद्धिविहीन, शिक्षित होते हुए किसी अशिक्षित से कम नहीं। यदि समय रहते इन लोगों ने अपने विवेक का प्रयोग नहीं किया, निश्चितरूप से वह दिन भी बहुत दूर नहीं होगा, जब ये अस्तित्वविहीन हो जायेंगे। इतिहास साक्षी है कि सनातन विरोधियों का कोई नामलेवा नहीं। 
राम को मिथ्या और रामसेतु को काल्पनिक कहने वालों को जानना चाहिए कि गिलहरी पर कथ्थई निशान किसी और के नहीं पुरुषोत्तम श्रीराम के हाथ के हैं, जब रामसेतु निर्माण के दौरान रामसेतु निर्माण गिलहरी के असहाय योगदान से प्रसन्न हो राम ने अपने कोमल हाथ फेरते जो आशीर्वाद दिया था, उस समय से लेकर आज तक प्रभु श्रीराम के हाथों के निशान गिलहरी पर नज़र आते है, जबकि प्रभु राम ने आशीर्वाद दिया था त्रेता युग में और आज द्वापर युग के बाद चल रहा है कलयुग। 
उस मर्यादा पुरुषोत्तम की भूमि को अपवित्र करने से पहले दुश्मन के हाथ काँपने चाहिए थे, लेकिन इसका ठीकरा हम अपनी कायरता या हमारे एकजुट न रहने पर फोड़ें या फिर सामने वाले की क्रूरता पर - हम उस भूमि को बचा नहीं पाए।
आज हमने 500 वर्षों के संघर्ष के बाद वर्तमान न्यायिक व्यवस्था का सहारा लेकर फिर से अपने गौरव को स्थापित किया है, तो फिर हमारे ही देश के कुछ कीड़ों को इससे जलन हो रही है। जो राम को लेकर बुरे विचार रखे और हर उस व्यक्ति को दंड मिलना चाहिए जो राम के अस्तित्व पर सवाल खड़ा करे। ऐसा नहीं है कि राम आलोचना से परे हैं, बात ये है कि राम की आलोचना करने के लिए भी पूर्णरूपेण सनातनी होना प्रथम शर्त है। अगर आप सनातनी नहीं हैं, आपने शास्त्रों को पढ़ा नहीं है - तो आपको राम की आलोचना का भी अधिकार नहीं है। जो तुलसी-हनुमान की तरह भक्त है, उसे प्रभु से शिकायत का अधिकार है, वो कुछ भी कह सकता है। वर्तमान युग में ऐसा कोई नहीं, इसीलिए राम विरोधी सनातनी नहीं हो सकता।

धिक्कार है उस स्वतंत्रता को जहाँ रामभक्तों का खून बहा, धिक्कार है उन नेताओं को जिन्होंने तुष्टिकरण के लिए राम को टेंट में रखा, धिक्कार है उस पीढ़ी को जिसने राम मंदिर की जगह कुछ और बनाए जाने की माँग की और धिक्कार है उन राक्षसों को जिन्होंने सब जानबूझकर भी मस्जिद के लिए जिद पकड़ी। धिक्कार है हर उस वोट को जिससे मुलायम सिंह यादव की सरकार बनी, धिक्कार है हर उस व्यक्ति को जिसने सेक्युलरिज्म की बातें कर के राम मंदिर का विरोध किया और धिक्कार है उन कालनेमियों को जिन्होंने अयोध्या में राम मंदिर के पुनर्निर्माण की महत्ता को नहीं समझा। अयोध्या राम की है, जन्मभूमि है। किष्किंधा राम का है, पंचवटी राम की है, रामेश्वरम राम का है, लंका राम की है, मिथिला राम का है। संपूर्ण भारत-भूमि राम की है। इस राष्ट्र के कण-कण में राम समाए हैं, उन्हें कोई अनदेखा नहीं कर सकता। अगर ये संभव होता, तो हम राम मन्दिर को मिटा दिए जाने के 5 शताब्दी बाद राममय न हो रहे होते। राम के दिव्यलोकगमन के हजारों वर्षों बाद राम-राम न रट रहे होते। जो पहले संभव नहीं था, आगे भी नहीं हो पाएगा। अब तक बार-बार साजिशों के बावजूद जो न हो पाया, आगे कैसे होगा? 2024 राम का वर्ष है, इसकी गंभीरता को समझिए। भगवान हमें दर्शन देने आ गए हैं।
हिंदुओं को अपने वोट की कीमत समझ नहीं होगी। वैसे पार्टी या व्यक्ति को अपना समर्थन दे जो हिंदू हित की बात करें।
कर्नाटक में श्री राम मंदिर आंदोलन से जुड़े 30 साल पुराने केस को फिर से खोला गया है और आंदोलनकारी की गिरफ्तारी की गई है क्योंकि वहां भाजपा की सरकार नहीं है।
इसलिए अपना वोट सोच समझ कर दें।
अब आते हैं मूल विषय पर:
माता सीता को वापस लाने के लिए रामसेतु बनाने का कार्य चल रहा था। भगवान राम को काफी देर तक एक ही दिशा में निहारते हुए देख लक्ष्मण जी ने पूछा भैया आप इतनी देर से क्या देख रहें हैं? भगवान राम ने इशारा करते हुए दिखाया कि वो देखो लक्ष्मण एक गिलहरी बार-बार समुद्र के किनारे जाती है और रेत पर लोटपोट करके रेत को अपने शरीर पर चिपका लेती है। जब रेत उसके शरीर पर चिपक जाता है फिर वह सेतु पर जाकर अपना सारा रेत सेतु पर झाड़ आती है। वह काफी देर से यही कार्य कर रही है।

लक्ष्मण जी बोले प्रभु वह समुन्द्र में क्रीड़ा का आनंद ले रही है और कुछ नहीं। भगवान राम ने कहा, नहीं लक्ष्मण तुम उस गिलहरी के भाव को समझने का प्रयास करो। चलो आओ उस गिलहरी से ही पूछ लेते हैं कि वह क्या कर रही है? दोनों भाई उस गिलहरी के निकट गए। भगवान राम ने गिलहरी से पूछा कि तुम क्या कर रही हो? गिलहरी ने जवाब दिया कि कुछ भी नहीं प्रभु बस इस पुण्य कार्य में थोड़ा बहुत योगदान दे रही हूँ। भगवान राम को उत्तर देकर गिलहरी फिर से अपने कार्य के लिए जाने लगी, तो भगवान राम ने उसे टोकते हुए कहा- तुम्हारे रेत के कुछ कण डालने से क्या होगा ?
गिलहरी बोली प्रभु आप सत्य कह रहे हैं। मै सृष्टि की इतनी लघु प्राणी होने के कारण इस महान कार्य हेतु कर भी क्या सकती हूँ? मेरे कार्य का मूल्यांकन भी क्या होगा? प्रभु में यह कार्य किसी आकांक्षा से नहीं कर रही। यह कार्य तो राष्ट्र कार्य है, धर्म की अधर्म पर जीत का कार्य है। राष्ट्र कार्य किसी एक व्यक्ति अथवा वर्ग का नहीं बल्कि योग्यता अनुसार सम्पूर्ण समाज का होता है। जितना कार्य वह कर सके नि:स्वार्थ भाव से समाज को राष्ट्र हित का कार्य करना चाहिए। मेरा यह कार्य आत्म संतुष्टि के लिए है प्रभु। हाँ मुझे इस बात का खेद अवश्य है कि मै सामर्थ्यवान एवं शक्तिशाली प्राणियों की भाँति सहयोग नहीं कर पा रही। भगवान राम गिलहरी की बात सुनकर भाव विभोर हो उठे। भगवान राम ने उस छोटी सी गिलहरी को अपनी हथेली पर बैठा लिया और उसके शरीर पर प्यार से हाथ फेरने लगे। भगवान राम का स्पर्श पाते ही गिलहरी का जीवन धन्य हो गया।

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