कर्नाटक : भगवान राम भी नए ले आए, मुस्लिम वोट की खातिर कांग्रेस पगला गयी

सुभाष चन्द्र

कांग्रेस का इतिहास साक्षी है कि किसी भी मुद्दे को विवादित बनाकर मालपुए खाना। पहले इतिहास को झुठलाते हुए अयोध्या मुद्दे को विवादित बनाकर हिन्दू-मुसलमानों के बीच दरार डाली। पुरुषोत्तम श्रीराम को काल्पनिक बता दिया, खुदाई में मिले राम मन्दिर समस्त प्रमाणों से कोर्ट को गुमराह किया। जनता को चाहिए कांग्रेस और अन्य राम मन्दिर विरोधियों से पूछे कि अगर राम काल्पनिक थे फिर दशहरे पर रामलीला मैदान में क्यों जाते थे? अगर पुरातत्व विभाग के तत्कालीन क्षेत्रीय निदेशक के के मोहम्मद ने अपनी पुस्तक में रहस्योघाटन नहीं किया होता कांग्रेस और वामपंथी अपना घिनौना खेल खेल गए थे। मोहम्मद ने अपनी पुस्तक में स्पष्ट लिखा है कि "मंदिर कभी का बन गया होता अगर कांग्रेस और वामपंथियों ने खुदाई में मिले मंदिर के अवशेषों को कोर्ट से नहीं छुपाया होता।"

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दूसरे, जब सोमनाथ मंदिर के जीणोंद्वार के बाद उद्घाटन में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद को निमंत्रित करने पर तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने राजन बाबू को रोकने का भरसक प्रयास किया था, लेकिन नेहरू के अवरोधों को ठोकर मार राजन बाबू सोमनाथ मंदिर का उद्घाटन करने गए थे।   

कर्नाटक में कांग्रेस के युवराज राहुल “कालनेमि” की खुली मोहब्बत की दुकान पर कुछ कहने से पहले कांग्रेस के एक नए पागलपन पर नज़र डालिए। कैसे कैसे पापड़ बेल रहे हैं मुस्लिम वोटों के लिए कर्नाटक के पूर्व मंत्री H Anjaneya ने आज मुख्यमंत्री सिद्धरमैया को ही “राम” बता दिया उसने कहा सिद्धरमैया खुद “राम” हैं जबकि अयोध्या में तो “BJP के राम” हैं हमारे “राम” तो सब जगह हैं और मेरे नाम का मतलब भी समझना चाहिए 

आपके राम हर जगह हैं तो वो काल्पनिक राम कौन थे जिनके लिए अदालत में हलफनामा दिया था?

दूसरी तरफ कांग्रेस का super cartoon उदित राज कह रहा है राम मंदिर नहीं बना बल्कि “मनुवाद” आ रहा है

अब देखते हैं कर्नाटक में कैसी “मोहब्बत की दुकान” खुली है:-

चुनाव से पहले बजरंग दल पर बैन लगाने की बात करके कांग्रेस ने ऐलान किया था कि कांग्रेस पूरे कर्नाटक में हनुमान मंदिर बनाएगी चुनाव ख़त्म और बात भी ख़त्म पूरे राज्य में कहीं कोई मंदिर बनाने की बात शुरू नहीं हुई मुसलमानों के वोट मिले थे, उन्हें कैसे नाराज़ कर सकते हैं; मंदिर के लिए प्रतिबद्धता भाजपा से सीखनी पड़ेगी चाहे सत्ता में रहे या न रहे, राम मंदिर नहीं छोड़ा

इसी तरह अखिलेश यादव ने भी 2017 में उत्तर प्रदेश में विष्णु मंदिर बनाने की प्रतिज्ञा की थी लेकिन सब कुछ भूल गया

-लेकिन सिद्धारमैया सरकार ने मुस्लिमों को खुश करने के लिए 4 से 5 हज़ार करोड़ रुपए आरक्षित कर दिए यह है असली मोहब्बत की दुकान क्योंकि हिन्दुओं को ठेंगा दिखाया गया है;

-राज्य के 68 प्राइवेट स्कूलों में धमकी दी जाती है कि इस्लाम कबूल करो वरना क़त्ल कर दिए जाओगे;

-पिछली सरकार ने विवाद के चलते हिज़ाब पर बैन लगाया था जिस पर हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने दखल देने से मना कर दिया था लेकिन सिद्धारमैया सरकार बैन हटाने के लिए तैयार है यानी मुस्लिमों को खुश करने के लिए स्कूलों में कोई Dress Code नहीं होगा; 

-सबसे बड़ा काम तो बंगलुरु में हुआ जब 27 दिसंबर को कन्नड़ रक्षणा वेदिके (KRV) संगठन ने महाअभियान चला कर दुकानों और Show Rooms के अंग्रेजी में लिखे साइनबोर्ड, विज्ञापन बोर्ड और होर्डिंग्स तोड़ दिए और मांग की कि यह सब कुछ कन्नड़ भाषा में लिखे होने चाहियें

संगठन के कार्यकर्ताओं ने स्टारबक्स, थर्ड वेव, टोयोटा, हाउस ऑफ़ मसाबा, फारेस्ट एसेंशियल्स, थियोब्रोमा और अन्य को निशाना बनाया

इस तोड़फोड़ ने निवेशकों को सीधा पैगाम दे दिया कि कर्नाटक से दूर रहो, इस राज्य को किसी विकास की कोई जरूरत नहीं है इस अभियान को समर्थन मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने भी दे दिया उन्होंने कह दिया कि यदि राज्य में व्यापार करना है तो 60% साइनबोर्ड कन्नड़ में होने चाहिएं और घोषणा कर दी कि सरकार इसके लिए अध्यादेश जारी करेगी

सिद्धारमैया दूसरी तरफ कह चुका है कि जनकल्याण की योजनाओं के लिए सरकार के पास पैसा नहीं है जबकि चुनाव में जमकर रेवड़ियां बांटते फिर थे 

अवलोकन करें:-

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उत्तर प्रदेश और गुजरात ऐसे ही नहीं उच्चतम निवेश प्राप्त करने वाले राज्य नहीं बने हैं कर्नाटक को कांग्रेस वैसे ही 10 वर्ष पीछे धकेल देगी जैसे अशोक “ठगलोत” ने राजस्थान को धकेल दिया 

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