हाथरस में हुए नरसंहार के लिए कथित बाबा सूरजपाल लापता है और उसके समागम में 80,000 लोगों की अनुमति की जगह ढाई लाख लोग एकत्र हुए और यह संयोग की बात है कि भाजपा उम्मीदवार अनूप प्रधान हाथरस से 2024 चुनाव में सपा के जसवीर वाल्मीकि को ढाई लाख वोट से ही हरा कर जीते थे। इसका मतलब यह भी निकाला जा सकता है कि सूरजपाल अखिलेश यादव के लिए वोट नहीं दिला सका।
अखिलेश के घनिष्ठ संबंध सूरजपाल से ऐसे भी समझे जा सकते हैं कि अखिलेश ने ही उसके लिए कसीदे पढ़ते हुए कहा था। “नारायण साकार हरि की सम्पूर्ण ब्रह्मांड में सदा-सदा के लिए जय जयकार हो”। ये कथित बाबा दावा करता था कि ब्रह्मा, विष्णु, महेश ने उसे अपना गुरु स्वीकार किया हुआ है लेकिन फिर भी अखिलेश का व्यक्ति चुनाव हार गया। क्या यह नहीं हो सकता कि हाथरस की जनता को सबक सिखाने के लिए यह षड़यंत्र करके लोगों की जान ली गई हो।
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| लेखक चर्चित YouTuber |
आज अखिलेश और राहुल गांधी 121 लोगों के शवों को गिद्ध की तरह नोंच कर आग सेक रहे हैं, राहुल तो पर्यटन के लिए हाथरस पहुंच गया और सारा दोष योगी सरकार पर मढ़ दिया लेकिन तमिलनाडु में जहरीली शराब से करीब 70 लोगों की मौत पर सन्नाटे में है क्योंकि वहां राहुल के पिता की हत्या में आरोपी रही DMK की सरकार है जो राहुल की जोड़ीदार पार्टी है।
योगी सरकार ने हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं लेकिन फिर भी एक वकील गौरव द्विवेदी ने इलाहाबाद हाई कोर्ट में याचिका दायर की है हाथरस मामले की CBI जांच कराने के लिए और एक वकील विशाल तिवारी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करके मांग की है कि सुप्रीम कोर्ट के जज की निगरानी में जांच होनी चाहिए। क्या ऐसे वकीलों को हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज पर भरोसा नहीं है? सुप्रीम कोर्ट और इलाहाबाद हाई कोर्ट को ऐसी याचिकाओं को तुरंत खारिज कर देना चाहिए। विपत्ति के समय योगी सरकार काम करे या अदालत में समय बर्बाद करे।
एक खबर के अनुसार तमिलनाडु सरकार ने जहरीली शराब पीकर मरने वालों को 10-10 लाख के मुआवजा देने का ऐलान कर दिया जैसे वे लोग कोई बहादुरी का काम करके शहीद हुए हों, जिस पर मद्रास हाई कोर्ट ने टिप्पणी करते हुआ कहा कि यह रकम कुछ ज्यादा है। अभी सुनवाई चल रही है। हाथरस में सरकार को दोष दे रहे हो तो तमिलनाडु सरकार की जिम्मेदारी कौन तय करेगा।
ऐसे कई कथित बाबा रहे हैं जिनके स्वर्गलोक जैसे आलीशान आश्रम रहें है। उनमे एक कथित संत रामपाल भी थे जिसकी सेना से लड़ने में पुलिस को कई दिन लग गए थे। एक और हैं कथित संत राम रहीम जिसका आशियाना किसी स्वर्गलोग से कम नहीं था पर उसे हत्या के आरोप में बरी कर दिया गया हाई कोर्ट ने।
लेकिन इस्लाम और ईसाई धर्म के खलीफा मौज में रहते हैं और उनके खिलाफ तो सेकुलर लोग आवाज़ नहीं उठा सकते।



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