8 कैमरामैन और डायरेक्टर लेकर स्टेशन पहुँचे राहुल गाँधी, 'नकली' लोको पायलट वाले वीडियो के लिए पहले से तय थी स्क्रिप्ट: रेलवे अधिकारी ने बताया – नहीं था कोई ‘असली’ कर्मचारी; राहुल के खिलाफ एक्शन की तैयारी


कांग्रेस के नेता राहुल गाँधी लोकसभा चुनाव से पहले काफी स्टंटबाजी की थी। कभी मकैनिक की दुकान पर गए, तो कभी खेतों में काम कर रहे किसानों के बीच, लेकिन अब सरकार को घेरने की कोशिश में स्क्रिप्टेड ड्रामा की पोल खुल चुकी है। दरअसल, शुक्रवार (5 जुलाई 2024) को राहुल गाँधी नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पहुँचे थे। वहाँ उन्होंने कथित तौर पर लोको पायलटों से बातचीत की थी, जिसकी असलियत अब सामने आ रही है।

चर्चा यह भी है कि राहुल के तथाकथित लोको पायलट को किसी चीज को छूने की किसने इजाजत दी? क्या कोई बाहरी किसी सरकारी चीजों को छू सकता है? सबकी गंभीरता से जाँच होनी चाहिए और सरकार को सख्त कदम उठाने होंगे। अन्यथा ये विपक्ष का नेता कभी भी देश को किसी गंभीर संकट में डाल सकता है। 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गाँधी शुक्रवार (5 जुलाई 2924) को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर पहुँचे और कथित तौर पर करीब 50 लोको पायलट्स से मुलाकात कर उनकी परेशानियों को जाना था। लेकिन राहुल के रेलवे स्टेशन के दौरे को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। उत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी दीपक कुमार ने दावा किया कि राहुल गाँधी ने जिन लोको पायलटों से मुलाकात की, वे कहीं और से लाए गए थे और वे भारतीय रेलवे लॉबी से नहीं थे। रेलवे के मुताबिक, राहुल गाँधी 8 कैमरामैन के साथ नई दिल्ली स्टेशन पहुँचे थे। ऐसा लग रहा था कि वे स्टेशन पर फिल्म या रील बना रहे हैं।

कांग्रेस नेता राहुल गांधी अपनी हरकतों से खुद को बालक बुद्धि साबित करने में लगे हैं। शुक्रवार, 5 जुलाई को कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी के बेटे राहुल गांधी का एक नया रूप देखने को मिला। सोशल मीडिया पर पप्पू के नाम से फेमस राहुल गांधी 8 कैमरामैन और एक डायरेक्टर के साथ नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पहुंच गए। वहां उन्होंने करीब 50 लोको पायलट से मुलाकात की। 8 कैमरामैन और एक डायरेक्टर को देखकर शुरू में लोगों को लगा कि किसी फिल्म की शूटिंग हो रही है। लेकिन जब मीडिया में आया कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के बेटे राहुल गांधी ने नई दिल्ली रेलवे स्टेशन 50 पर लोको पायलट से मुलाकात कर उनकी परेशानियों के बारे में जाना तब ये साफ हो पाया कि कांग्रेस नेता तो यहां रील बनाने आए थे। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के मंसूबे का खुलासा सीसीटीवी कैमरे से भी हुआ जिसमे साफ दिख रहा है कि वो 8 कैमरामैन और एक डायरेक्टर के साथ समस्या सुनने नहीं, बल्कि रेलवे को बदनाम कर अपना पीआर करने के लिए रील बनाने आए थे।

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के इस कारनामे पर उत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी दीपक कुमार ने साफ कहा है कि उन्होंने जिन लोको पायलटों से मुलाकात की वे भारतीय रेलवे लॉबी के नहीं थे, बल्कि कहीं और से लाए गए थे। 

बताया जा रहा है कि अब रेलवे ने राहुल के खिलाफ एक्शन की भी तैयारी शुरू कर दी है। असल में रील बनाने के दौरान राहुल गांधी ने ना सिर्फ संवेदनशील चीजों को सोशल मीडिया पर दिखाया, बल्कि रेलवे की छवि भी खराब करने की कोशिश की। इतना ही नहीं उन्होंने इस दौरान कई संवेदनशील चीजों को उठाकर इधर-उधर कर दिया, जिससे कर्मचारियों को परेशानियों का भी सामना करना पड़ा।

राहुल गाँधी पर सोशल मीडिया यूजर्स ने निकाली भड़ास

बालक बुद्धि राहुल गांधी के इस कारनामे की सोशल मीडिया पर काफी चर्चा हो रही है। लोग राहुल गांधी पर तंज कस रहे हैं। आप भी देखिए लोग क्या कह रहे हैं।

बाला नाम के एक्स यूजर ने लिखा, “राहुल गाँधी को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर आठ कैमरों और एक निर्देशक के साथ देखा गया, जहाँ वे “लोको पायलटों” से बात कर रहे थे, जिन्हें वे खुद लेकर आए थे। उन्हें किसी चीज़ की परवाह नहीं है; उन्हें सिर्फ़ ड्रामा की परवाह है। शर्मनाक!”

मिस्टर सिन्हा ने एक्स पर लिखा, “राजधानी ट्रेन के ड्राइवर का चौंकाने वाला दावा: उसने कहा कि जब उसे पता चला कि राहुल गाँधी नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर हैं, तो वह उनसे मिलने गया, लेकिन पाया कि जिन “लोको पायलटों” से वह बात कर रहा था, उनमें से कोई भी जाना-पहचाना चेहरा नहीं था। वह किसी को पहचान नहीं सका क्योंकि वे बाहरी लोग थे। धोखेबाज़ परिवार।”

कांग्रेस ने राहुल गाँधी के स्टेशन दौरे को लेकर एक्स पर पोस्ट किया और लिखा, “नेता विपक्ष राहुल गाँधी ने नई दिल्ली में लोको पायलट्स से मुलाकात कर उनकी समस्याएँ सुनीं। लोको पायलट्स के कंधों पर रेलवे सुरक्षा की बहुत बड़ी जिम्मेदारी होती है। उनकी समस्याओं को दूर कर ही हम सुरक्षित रेलवे के लक्ष्य को पूरा कर सकते हैं।”

राहुल ने शुक्रवार को अपनी इस मुलाकात को लेकर कहा था, “नई दिल्ली में देश भर से आए 50 लोको पायलटों से मुलाकात की। प्रतिदिन हज़ारों ट्रेन यात्रियों की ज़िम्मेदारी होती है इनके कंधों पर है मगर, देश के यातायात की ये रीढ़ सरकार की उपेक्षा और अन्याय का शिकार हैं। बिना उचित आराम और सम्मान के काम करने पर विवश हैं। उनकी समस्याएँ सुन कर उनकी आवाज़ बुलंद करने का आश्वासन दिया – पहले भी किया है, और न्याय मिलने तक करता रहूँगा।”

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