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बांग्लादेश : भगवान राम के पोस्टर पर मारे जूते-चप्पल, जुमे की नमाज के बाद इस्लामी कट्टरपंथियों ने दिखाई हिंदू घृणा: Video वायरल


भारत में घुसपैठियों को अपना दामाद बनाकर पालने वाले नेताओं और उनकी पार्टियों में लेशमात्र भी शर्म है सभी को एकजुट होकर बांग्लादेश में भगवान श्रीराम के पोस्टरों पर जूते-चप्पल मारे जाने का विरोध ही नहीं जहाँ-जहाँ अपनी कुर्सी की खातिर इन्हे छुपाकर रखे हो भारत और राज्य सरकारों को जानकारी देकर देश से बाहर धक्का दो। अन्यथा जनता इन पार्टियों को चुनावों में बंगाल से भी बुरी तरह हराकर सत्ता से बाहर करे।     

बांग्लादेश के रंगपुर डिवीजन में भगवान राम की निर्माणाधीन प्रतिमा को लेकर इस्लामी कट्टरपंथियों का बवाल लगातार जारी है। अब सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियोज सामने आएँ हैं, जिसमें भगवान राम के पोस्टर पर जिहादी जूते-चप्पल मारते दिख रहे हैं।

जानकारी के मुताबिक, गाईबांधा में जुमे की नमाज के बाद कुछ इस्लामी समूहों ने सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया और राम प्रतिमा निर्माण का विरोध जताया। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि प्रदर्शन के दौरान भगवान राम की तस्वीर वाले बैनरों के साथ अपमानजनक व्यवहार किया गया और उन पर जूते-चप्पल मारे गए।

बांग्लादेश के रंगपुर डिवीजन में भगवान राम की निर्माणाधीन प्रतिमा को लेकर इस्लामी कट्टरपंथियों की ओर से विरोध और उसे तोड़ने की धमकियाँ दिए जाने के कुछ दिनों बाद हिंदू मंदिर समिति को प्रतिमा का निर्माण कार्य रोकना पड़ा है।

एक बयान में मंदिर समिति के एक सदस्य ने मीडिया को बताया, “हम आपके हित में, राष्ट्र और समाज के हित में भगवान राम की मूर्ति का निर्माण कार्य रोक रहे हैं। सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखने के लिए हम यह कार्य रोक रहे हैं। भविष्य में, यदि हमें आवश्यकता महसूस हुई, तो हम आपको बुलाएँगे, सभी हितधारकों के सुझाव लेंगे और कार्य पुनः आरंभ करेंगे।”

मुख्यमंत्री हिमंता के राज में असम में 480 से 84 पर आई मातृ मृत्यु दर(MMR)

                                हिमंता बिस्वा की सरकार में घटा मातृ मृत्यु दर (फोटो साभार : ChatGPT)
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने सोशल मीडिया पर राज्य की एक बहुत बड़ी और ऐतिहासिक कामयाबी की जानकारी दी है। असम में मातृ मृत्यु दर (MMR) अब तेजी से घटकर महज 84 पर आ गई है। राज्य के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है जब असम का यह आँकड़ा देश के राष्ट्रीय औसत यानी 88 से भी नीचे चला गया है।

मुख्यमंत्री ने इस पल को अपने सार्वजनिक जीवन का सबसे भावुक करने वाला क्षण बताया है। उन्होंने इस सफलता का पूरा श्रेय असम के हजारों डॉक्टरों, नर्सों, आशा बहुओं और स्वास्थ्य कर्मियों को दिया है। CM हिमंता ने बताया कि साल 2006 में जब उन्होंने स्वास्थ्य विभाग संभाला था, तब राज्य में मातृ मृत्यु दर 480 थी। उस समय इस स्थिति को सुधारना बिल्कुल नामुमकिन लगता था, लेकिन स्वास्थ्य कर्मियों के लगातार काम और त्याग से आज यह सच हो चुका है।

क्या है मातृ मृत्यु दर?

अगर हम आम लोगों की बिल्कुल सरल भाषा में समझें तो जब कोई महिला गर्भवती होती है या बच्चे को जन्म देती है, तब सही इलाज न मिलने या स्वास्थ्य की अन्य जटिलताओं के कारण यदि उसकी मृत्यु हो जाती है, तो उसे मातृ मृत्यु माना जाता है। इस पूरी व्यवस्था में बच्चे के जन्म के बाद के 42 दिनों का नाजुक समय भी शामिल किया जाता है।

स्वास्थ्य विज्ञान की दुनिया में इसे ठीक से मापने के लिए एक पैमाना बनाया गया है जिसे मातृ मृत्यु अनुपात कहा जाता है। इसका मतलब यह होता है कि समाज में हर एक लाख जीवित बच्चों के जन्म लेने पर कितनी माताओं को अपनी जान गँवानी पड़ी है। यह विशेष आँकड़ा किसी भी राज्य या देश की अस्पताल व्यवस्था, डॉक्टरों की उपलब्धता और इलाज की असली मजबूती को दुनिया के सामने साफ-साफ दिखाता है।

असम में पहले और अब के आँकड़ों में अंतर

असम राज्य ने पिछले दो दशकों के भीतर गर्भवती माताओं की देखभाल को लेकर स्वास्थ्य व्यवस्था को पूरी तरह से बदल कर रख दिया है। अगर हम साल 2006 के पुराने आँकड़ों को देखें तो असम की स्थिति पूरे देश में सबसे ज्यादा चिंताजनक और डरावनी मानी जाती थी। उस समय असम में हर एक लाख बच्चों के जन्म पर 480 माताओं की मौत प्रसव के दौरान हो जाती थी।

इसके बाद सरकार, अस्पतालों और जमीनी स्वास्थ्य कर्मियों ने मिलकर एक लंबा और कठिन सफर तय किया। इसी लगातार की गई मेहनत का नतीजा है कि साल 2026 में यह आँकड़ा बहुत तेजी से नीचे गिरकर केवल 84 पर टिक गया है। भारत सरकार के ताजा आँकड़ों के अनुसार इस समय पूरे देश की मातृ मृत्यु दर का औसत आँकड़ा 88 बना हुआ है। इसका सीधा और साफ मतलब यह है कि असम अब देश के सबसे पिछड़े राज्यों की सूची से बाहर निकलकर राष्ट्रीय औसत से भी कहीं ज्यादा बेहतर और शानदार काम कर रहा है।

आखिर किन वजहों से होती है गर्भवती माताओं की मौत

गर्भावस्था और बच्चे के जन्म के समय महिलाओं की अचानक जान जाने के पीछे मुख्य रूप से कुछ बड़ी स्वास्थ्य समस्याएँ जिम्मेदार होती हैं। डॉक्टरों के अनुसार इनमें सबसे बड़ी और जानलेवा समस्या डिलीवरी के तुरंत बाद महिला के शरीर से बहुत ज्यादा खून बह जाना है। अगर इस खून के बहाव को समय पर नहीं रोका जाए तो महिला की कुछ ही घंटों में मौत हो सकती है। इसके अलावा प्रसव के समय या उसके बाद अस्पतालों या घरों में पूरी तरह साफ-सफाई न होने से महिला के शरीर में बहुत तेजी से इंफेक्शन यानी संक्रमण फैल जाता है।

गर्भावस्था के दिनों में अचानक ब्लड प्रेशर यानी रक्तचाप का बहुत ज्यादा बढ़ जाना भी दिमाग और दिल पर गहरा असर डालता है जिसे चिकित्सा की भाषा में एक्लेम्पसिया कहा जाता है। कई बार समाज में बिना डॉक्टरी सलाह के या दाइयों के जरिए गलत तरीके से कराया गया असुरक्षित गर्भपात भी सीधे मौत का कारण बन जाता है। इन सभी समस्याओं के साथ ग्रामीण इलाकों की महिलाओं के शरीर में पहले से पोषण की कमी और खून की भारी कमी यानी एनीमिया का होना स्थिति को प्रसव के समय और ज्यादा नाजुक बना देता है।

माताओं की जान बचाने के सबसे सरल उपाय

चिकित्सा विशेषज्ञों का साफ कहना है कि गर्भवती माताओं की होने वाली इन अधिकांश मौतों को बहुत ही आसान उपायों से पूरी तरह रोका जा सकता है। इसके लिए सबसे जरूरी और प्राथमिक उपाय यह है कि बच्चे का जन्म हमेशा किसी अच्छे और मान्यता प्राप्त अस्पताल में डॉक्टरों और प्रशिक्षित नर्सों की देखरेख में ही होना चाहिए। पुराने तौर-तरीकों से घरों पर प्रसव कराने से अचानक पैदा होने वाले खतरों को संभालना नामुमकिन हो जाता है।

इसके अलावा गर्भावस्था के शुरुआती दिनों से ही महिला की कम से कम चार बार नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में मुफ्त जाँच होनी चाहिए और समय पर सभी जरूरी टीके लगने चाहिए। गर्भवती महिला के रोज के खान-पीने का विशेष ध्यान रखना बेहद जरूरी है, जिसमें हरी पत्तेदार सब्जियाँ, फल, दूध और सरकार द्वारा दी जाने वाली आयरन की गोलियाँ नियमित रूप से शामिल हों। इसके साथ ही किसी भी अचानक पैदा होने वाली आपातकालीन स्थिति के लिए एम्बुलेंस या गाड़ी की व्यवस्था पहले से तैयार रखनी चाहिए ताकि बिना समय गँवाए मरीज को बड़े अस्पताल पहुँचाया जा सके।

सुरक्षा के लिए देश और राज्य में चलाई जा रही योजनाएँ

गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं की सुरक्षा के लिए भारत सरकार और असम सरकार मिलकर कई बेहतरीन और बेहद मजबूत योजनाएँ चला रही हैं। इन योजनाओं का मुख्य लक्ष्य गरीब से गरीब परिवार की महिला को भी बिना किसी खर्च के बड़े अस्पतालों में इलाज की सुविधा देना है।

जननी सुरक्षा योजना– इस दिशा में एक बहुत बड़ा और क्रांतिकारी कदम साबित हुई है। इस योजना के तहत सरकार ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की गर्भवती महिलाओं को सीधे नकद पैसे की मदद देती है ताकि वे पैसों की तंगी छोड़कर अस्पताल में आकर ही सुरक्षित डिलीवरी करवाएँ। इसी तरह जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम को शुरू किया गया है, जिसका पूरा उद्देश्य गर्भवती महिलाओं और बीमार शिशुओं के इलाज में जेब से होने वाले हर एक पैसे के खर्च को पूरी तरह खत्म करना है।

इस योजना के तहत किसी भी सरकारी अस्पताल में महिला का सीजेरियन ऑपरेशन, प्रसव, सभी जरूरी दवाइयाँ, जाँच, खून की जरूरत और डॉक्टर द्वारा बताया गया भोजन पूरी तरह मुफ्त मिलता है। इतना ही नहीं, महिला को घर से अस्पताल लाने और डिलीवरी के बाद वापस घर सुरक्षित छोड़ने के लिए एम्बुलेंस की गाड़ी भी पूरी तरह बिना किसी पैसे के सरकारी स्तर पर उपलब्ध कराई जाती है।

प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत पूरे देश में हर महीने की 9 तारीख को एक विशेष दिन तय किया गया है। इस दिन सभी सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों पर प्रसूति विशेषज्ञों द्वारा हर एक गर्भवती महिला की व्यापक और बिल्कुल मुफ्त जाँच की जाती है। इस अभियान के तहत जिन महिलाओं की गर्भावस्था में ज्यादा खतरा दिखाई देता है, उनकी पहचान करके सुरक्षित प्रसव होने तक आशा वर्कर्स के जरिए लगातार उनकी व्यक्तिगत ट्रैकिंग की जाती है।

माताओं के स्वास्थ्य को और ज्यादा सम्मानजनक बनाने के लिए सरकार ने सुरक्षित मातृत्व आश्वासन यानी ‘सुमन’ योजना भी शुरू की है, जिसमें अस्पताल आने वाली हर महिला को बिना किसी कोताही के गुणवत्तापूर्ण और सुरक्षित इलाज की गारंटी दी जाती है। लेबर रूम की कमियों को दूर करने के लिए ‘लक्ष्य’ नाम का एक विशेष कार्यक्रम चलाया जा रहा है, जिससे अस्पतालों के प्रसव कक्षों को आधुनिक और पूरी तरह साफ-सुथरा बनाया जा सके।

पहली बार माँ बनने वाली महिलाओं के अच्छे खान-पान के लिए प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत सीधे बैंक खाते में 5,000 रुपए भेजे जाते हैं, और मिशन शक्ति के तहत दूसरा बच्चा लड़की होने पर परिवार को 6,000 रुपए की मातृत्व सहायता दी जाती है। ग्रामीण इलाकों में खून की कमी को खत्म करने के लिए एनीमिया मुक्त भारत रणनीति के तहत स्कूलों और गाँवों में आयरन की दवाइयाँ मुफ्त बाँटी जा रही हैं और RCH पोर्टल के जरिए हर गर्भवती महिला का नाम लिखकर ऑनलाइन कंप्यूटर पर उसकी हर जाँच का हिसाब रखा जा रहा है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन का वैश्विक नजरिया और 2030 का बड़ा संकल्प

विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO पूरी दुनिया के स्तर पर मातृ मृत्यु दर को एक बेहद गंभीर और संवेदनशील स्वास्थ्य समस्या मानता है। इस वैश्विक संगठन के अनुसार साल 2023 के आँकड़ों को देखें तो दुनिया भर में हर दिन गर्भावस्था और प्रसव से जुड़ी रोकी जा सकने वाली कमियों के कारण 700 से अधिक महिलाओं को अपनी जान गँवानी पड़ती थी, जिसका मतलब है कि हर दो मिनट में एक माँ दुनिया छोड़ देती थी।

WHO ने दुनिया के सभी देशों के साथ मिलकर सतत विकास लक्ष्य के तहत एक बड़ा संकल्प लिया है कि साल 2030 तक पूरी दुनिया में मातृ मृत्यु दर को घटाकर प्रति एक लाख जन्म पर 70 से भी नीचे लेकर आना है। WHO की रिपोर्ट साफ बताती है कि दुनिया भर में होने वाली कुल मातृ मौतों में से लगभग 92% मौतें सिर्फ कम आय वाले और पिछड़े देशों में होती हैं, जहाँ अमीर और गरीब के बीच स्वास्थ्य सुविधाओं का बहुत बड़ा अंतर है।

संगठन का मानना है कि इन मौतों के पीछे अस्पताल प्रणालियों की खराब जवाबदेही, आवश्यक चिकित्सा उपकरणों की कमी, दूरदराज के इलाकों में डॉक्टरों की अनुपलब्धता और महिलाओं के अधिकारों को कम प्राथमिकता देना जैसे बड़े सामाजिक कारण शामिल हैं। WHO लगातार अनुसंधान और तकनीकी दिशा-निर्देशों के जरिए भारत सहित दुनिया के तमाम विकासशील देशों की स्वास्थ्य प्रणालियों को मजबूत कर रहा है।

संगठन का स्पष्ट संदेश है कि यदि गर्भावस्था और प्रसव के समय हर एक महिला को प्रशिक्षित डॉक्टर या दाई की सही देखरेख मिल जाए, तो दुनिया की अधिकांश माताओं को एक नया और सुरक्षित जीवन दिया जा सकता है।

नॉर्वेजियन पत्रकार Helle Lyng के फेर में यूट्यूबर दलाल पत्रकार अभिसार शर्मा की पोल खुली, गौतम अडानी से मिलकर माँगना चाहता था माफी: कांग्रेस समर्थक तहसीन पूनावाला ने किया खुलासा

         अभिसार शर्मा और तहसीन पूनावाला ( फोटो साभार-x@abhisarsharma,x@tahseenpoonawala)
इस देश को सबसे ज्यादा नुकसान अगर पहुंचा रहे हैं तो विदेशों में बैठे भारत विरोधी नहीं बल्कि इनके उनके दलाल। इसमें विरोधी तो शामिल हैं ही कुछ पत्रकार भी शामिल हैं। ये वही दलाल पत्रकार जिनके कहने पर 2014 से पहले की सरकारों में मंत्री और संवैधानिक पदों पर नियुक्तियां होती थी। लेकिन वर्तमान मोदी सरकार ऐसे किसी दलाल को घास तक नहीं डालती।  
सरकार की कार्यशैली की आलोचना करना गलत नहीं है, करनी चाहिए लेकिन भारत विरोधियों की मंशा पूरी करने के लिए नहीं। देश का दुर्भाग्य है कि दलाल पत्रकारों की फ़ौज जनता की समस्याओं की नहीं बल्कि विदेशों में बैठे अपने आकाओं की जी-हजूरी कर पत्रकारिता को कलंकित कर रहे हैं।   

इतना ही नहीं, चर्चा थी कि जिस नॉर्वेजियन पत्रकार Helle Lyng की अभिसार शर्मा दलाली करता घूम रहा है उसने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी कुछ प्रश्न करने की इच्छा जाहिर की थी लेकिन मोदी ने भी इसे घास नहीं डाली। 

 

कांग्रेस समर्थक तहसीन पूनावाला ने खुलासा किया है कि यूट्यूबर अभिसार शर्मा ने गौतम अडानी से मिलकर उनसे रहम की भीख माँगी थी।इस मुद्दे पर मंगलवार (19 मई 2026) को सोशल मीडिया पर कांग्रेस समर्थक तहसीन पूनावाला और यूट्यूबर अभिसार शर्मा के बीच तीखी बहस छिड़ गई।

दरअसल नॉर्वेजियन पत्रकार हेले लिंग ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बदसलूकी और विदेश मंत्रालय (MEA) की प्रेस ब्रीफिंग में की गई टिप्पणियों से जुड़े विवाद को लेकर पूनावाला ने भारत के रुख का समर्थन किया था।

हेले लिंग को संबोधित अपने पोस्ट में उन्होंने लिखा- “मैं भारत में विपक्ष की आवाज में से एक हूँ और रोजाना टेलीविजन और सोशल मीडिया पर सरकार पर हमला करता हूँ, प्रधानमंत्री और उनके मंत्रियों की कड़ी आलोचना करता हूँ, लेकिन आज तक किसी ने मेरे खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की है। मुझे यह बात बेहद आपत्तिजनक लगती है कि आप मेरे देश की प्रेस की स्वतंत्रता की तुलना अमीरात या क्यूबा से कर रहे हैं… बेशक, सभी भारतीय अभिव्यक्ति की और भी अधिक स्वतंत्रता चाहेंगे, लेकिन भारत में मीडिया की स्वतंत्रता की तुलना उन शासन व्यवस्थाओं से करना, जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर रोक लगाती हैं, सरासर गलत और दुर्भाग्यपूर्ण है।”

इस पर यूट्यूबर शर्मा ने पोस्ट कर पूनावाला पर बीजेपी के लिए काम करने और विपक्षी रुख को छोड़ने का आरोप लगाया। शर्मा ने कहा, “विपक्ष की आवाज होने का दिखावा करना बंद करो। तुम भाजपा और उसके समर्थकों की नफरत को नॉर्मल बना रहे हो। तुम सत्ता प्रतिष्ठान के चाटुकार के सिवा कुछ नहीं हो। विपक्ष की आवाज होने का यह ढोंग बंद करो,”

सोशल मीडिया पर हो रही बहस के बीच एक यूजर ने पूनावाला पर अडानी एजेंट होने का आरोप लगाया। इसका जवाब देते हुए पूनावाला ने अभिसार शर्मा पर पलटवार किया।

पूनावाला ने आरोप लगाया कि शर्मा ने खुद अडानी ग्रुप ने जो कानूनी कार्रवाई शुरू की थी, उस सिलसिले में उद्योगपति गौतम अडानी से मिलने का समय माँगा था। उन्होंने कहा कि शर्मा सार्वजनिक टिप्पणियों में अक्सर अडानी ग्रुप पर निशाना साधते हैं। इसके बावजूद गौतम अडानी से संपर्क करने की कोशिश की थी।

दिलचस्प बात यह है कि शर्मा का आत्मविश्वास जल्द ही गायब होता दिखा और उन्होंने पूनावाला के दावे पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।

माना जा रहा है कि यह विवाद अभिसार शर्मा और ब्लॉगर राजू पारुलेकर के खिलाफ अडानी ग्रुप के किए गए आपराधिक मानहानि मामले से जुड़ा है।

सितंबर 2025 में अडानी ग्रुप ने शर्मा और पारुलेकर के खिलाफ आपराधिक मानहानि की शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद गाँधीनगर की एक मजिस्ट्रेट अदालत ने उन्हें नोटिस जारी किए थे। अडानी ग्रुप के वकील संजय ठक्कर ने कथित तौर पर कहा कि ये नोटिस भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 223 के तहत जारी किए गए थे। इसके मुताबिक किसी अपराध का संज्ञान लेने से पहले आरोपी को सुनवाई का अवसर दिया जाना आवश्यक है।

शिकायतों में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 356(1-3) के तहत प्रावधानों का हवाला दिया गया, जो पूर्ववर्ती भारतीय दंड संहिता के तहत मानहानि प्रावधानों के अनुरूप हैं।

अडानी ग्रुप ने आरोप लगाया कि शर्मा ने एक वीडियो अपलोड किए थे, जिसमें असम में भूमि आवंटन और कथित राजनीतिक पक्षपात के संबंध में आपत्तिजनक दावे किए गए थे, जबकि परुलेकर पर कथित ‘घोटालों’ और ‘राजनीतिक पक्षपात’ का जिक्र करते हुए सोशल मीडिया पोस्ट करने का आरोप लगाया गया था। अडानी ग्रुप ने इन आरोपों को ‘बेबुनियाद और भ्रामक’ बताया था और दोनों के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया था।

J&K को दिखाया पाकिस्तान का हिस्सा, नॉर्थ ईस्ट को चीन में घुसाया: गलत मैप शेयर करने पर नेपाल एयरलाइंस को गाली पड़ी तो बोले- SORRY, गलती हो गई

    नेपाल एयरलाइंंस ने भारत के J&K को पाकिस्तान और नॉर्थ ईस्ट को चीन का हिस्सा दिखाते मैप किया शेयर (साभार: X-Nepal Airlines)
नेपाल में बालेन शाह की सरकार बनने के बाद एक और भारत-विरोधी कारनामे सामने आ रहे हैं। अब नेपाल एयरलाइंस ने नक्शा (मैप) जारी किया, जिसमें पूरे जम्मू-कश्मीर को पाकिस्तान का और पूरे नॉर्थ ईस्ट को चीन का हिस्सा दिखाया गया है। भारत के सोशल मीडिया अकाउंट्स ने एयरलाइन से जवाबदेही माँगी, तब जाकर एयरलाइन ने ऐसा भ्रामक नक्शा दिखाने के लिए माफी माँगी है।

दरअसल, नेपाल की ‘नेपाल एयरलाइंस’ ने 29 अप्रैल 2026 ने अपने आधिकारिक ‘एक्स’ अकाउंट पर अपने फ्लाइट नेटवर्क को दिखाते हुए पूरी दुनिया का एक नक्शा पोस्ट किया। इस नक्शे में सबसे आपत्तिजनक बात थी कि इसमें भारत के अधिकतर हिस्सों को चीन और पाकिस्तान के नक्शे में दिखाया गया।

नक्शे में खासकर पूरे जम्मू-कश्मीर को पाकिस्तान का हिस्सा दिखाया गया, जिस पर भारत के नेटिजन्स भड़क गए। इतना ही नहीं भारत के पूर्वोत्तर के राज्यों जैसे सिक्किम, दार्जीलिंग समेत पूरे नॉर्थ ईस्ट को भी चीन के हिस्से में दिखाया गया। यह देखकर भारत के नेटिजंस और ज्यादा गुस्सा गए।

नेपाल एयरलाइंस पर भारत के नेटिजन्स का फूटा गुस्सा

इस हरकत के बाद नेपाल एयरलाइंस भारत के नेटिजन्स के निशाने पर आ गया। लोगों ने नेपाल एयरलाइंस से जवाबदेही माँगी। ‘एक्स’ पर #NepalAirlines और #JammuKashmir से जुड़े हैशटैग के साथ पोस्ट वायरल होने लगे, जिसमें यूजर्स ने इसे भारत-विरोधी और जानबूझकर किया गया गलत काम बताया।

दिव्या गंडोत्रा ​​टंडन नाम की यूजर ने लिखा, “भारत ने दशकों से नेपाल की अर्थव्यवस्था को मजबूती दी है। खुली सीमा से लेकर लाखों नेपाली नागरिकों को रोजगार देने तक, व्यापार के लिए भारत के बंदरगाह उपलब्ध कराने से लेकर ईंधन पाइपलाइन, बिजली परियोजनाएँ, आपदा के समय मदद, बुनियादी ढाँचे का निर्माण, स्कॉलरशिप और सैन्य सहयोग तक, भारत हमेशा नेपाल के साथ खड़ा रहा है।”

उन्होंने आगे लिखा, “लेकिन ऐसे में नेपाल एयरलाइंस की ओर से जारी एक फ्लाइट नेटवर्क मैप ने हैरान कर दिया। इस मैप में जम्मू-कश्मीर के पूरे क्षेत्र को पाकिस्तान के साथ दिखाया गया। यह कोई साधारण डिजाइन की गलती नहीं लगती, बल्कि एक गंभीर और संवेदनशील मामला है। जब भारत आज भी नेपाल का सबसे बड़ा और भरोसेमंद साझेदार है, तब एक राष्ट्रीय एयरलाइन से ऐसी लापरवाही बिल्कुल स्वीकार नहीं की जा सकती। यह केवल एक नक्शा नहीं, बल्कि एक ऐसा संदेश है, जो कई सवाल खड़े करता है।”

असम के वोकेशनल टीचर्स एसोसिएशन के आधिकारिक हैंडल ने भी आपत्ति जताते हुए लिखा, “भारत कई दशकों से नेपाल का सबसे बड़ा और भरोसेमंद साथी रहा है। ऐसे में नेपाल एयरलाइंस द्वारा अपने फ्लाइट मैप में जम्मू-कश्मीर को पाकिस्तान का हिस्सा दिखाना बेहद गैर-जिम्मेदाराना है। यह एक गंभीर गलती है, जिसे सुधारा जाना चाहिए।”

ऐसे ही भोजपुरी स्टार और RJD नेता खेसारी लाल यादव ने भी लिखा, “कोई बता पाएगा की क्या सोच के नेपाल एयरलाइंस भारत के नक्शे में ऐसा छेड़ छाढ़ किया है और वो भी जम्मू कश्मीर को लेकर? ये मामूली बात नहीं है, जानबूझकर किया हुआ काम लगता हैं। इसको चिढ़ाना बोलते हैं।”

‘द दार्जीलिंग क्रोनिकल’ नाम के एक्स हैंडल ने लिखा, “नेपाल एयरलाइंस की नजर में दुनिया कुछ अलग ही है। उनके नक्शे को देखें तो ऐसा लगता है कि भारत का पूरा उत्तर-पश्चिम, पूरा उत्तर-पूर्व, दार्जिलिंग, सिक्किम और यहाँ तक कि म्यांमार का हिस्सा भी चीन में शामिल कर दिया गया है। काठमांडू में आजकल लोग क्या फूँक रहे हैं?”

नेपाल एयरलाइंस ने माँगी माफी

भारत के यूजर्स की कड़ी आलोचना के बाद नेपाल एयरलाइंस ने आखिरकार सार्वजनिक तौर पर माफी माँगी। एयरलाइन ने कहा कि वे अपने सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म पर हाल ही में साझा किए गए फ्लाइट नेटवर्क मैप में हुई गलती के लिए दिल से माफी माँगते हैं।

यह भी कहा कि इस नक्शे में अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को लेकर गंभीर त्रुटियाँ थीं, जो नेपाल सरकार या नेपाल एयरलाइंस की आधिकारिक स्थिति को बिल्कुल भी नहीं दर्शाती है।

नेपाल का भारत-विरोधी रुख और बालेन शाह सरकार में उथल-पुथल

नेपाल में नई बालेन शाह सरकार बनने के बाद से ही नेपाल का भारत-विरोधी रुख सामने आता जा रहा है। हाल ही में बालेन शाह सरकार नई भंसार नीति लाई थी, जिसके तहत भारत से लाए जाने वाले 100 से अधिक नेपाली रुपये (लगभग ₹63) के सामान पर कस्टम ड्यूटी लगाई थी, जिसके बाद भी बालेन शाह सरकार का विरोध हुआ था।

यह भी किसी से नहीं छिपा कि बालेन शाह सरकार अपने ही फैसलों से गतिरोध का सामना कर रही है, उनके बड़े-बड़े मंत्रियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे जिसके बाद उन्हें इस्तीफा तक देना पड़ा। कुल मिलाकर नई बालेन शाह सरकार देश को चलाने में असमर्थ साबित हो रही है।

तेलंगाना : कांग्रेस की हिटलरशाही, आलोचना करने वालों पर आतंकवाद वाला कानून क्यों? संविधान और लोकतंत्र का रोना-रोने वाले राहुल गाँधी चुप क्यों?


इमरजेंसी में जिस तरह प्रेस और अभिव्यक्ति की आज़ादी पर तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी ने गला घोंटा था उसका तेलंगाना कांग्रेस सरकार द्वारा जीवंत उदाहरण पेश कर रही है। फिर शोर मचाते हैं मोदी सरकार में लोकतंत्र और संविधान खतरे में हैं। जनता को गुमराह करती है कांग्रेस। हकीकत में  लोकतंत्र और संविधान कांग्रेस राज में ही खतरे में रहे हैं। अपने राज में कांग्रेस ने संविधान में इतने ज्यादा संशोधन कर संविधान की मूलभावना को ही चकनाचूर कर दिया। सुप्रीम कोर्ट तक चुपचाप बैठे देखती रही।  

कांग्रेस पार्टी और राहुल गाँधी राष्ट्रीय स्तर पर खुद को अभिव्यक्ति की आजादी का सबसे बड़ा चैंपियन बताते हैं। वे अक्सर भाजपा सरकार पर ‘आवाज दबाने’ का आरोप लगाते हैं, लेकिन तेलंगाना में उनकी अपनी सरकार का रवैया कुछ और ही कहानी बयाँ कर रहा है। तेलंगाना की रेवंत रेड्डी सरकार अब सोशल मीडिया पर आलोचना करने वालों के खिलाफ देश के सबसे कड़े कानून ‘यूएपीए’ (UAPA) का इस्तेमाल कर रही है।

X हैंडल पर UAPA लगाने का क्या है पूरा मामला?

दरअसल, तेलंगाना पुलिस के इंटेलिजेंस विभाग के डीआईजी (CI Cell) आर. भास्करन का एक आधिकारिक पत्र सामने आया है। 18 अप्रैल 2026 को जारी इस पत्र में एक्स कॉर्प (X Corp) को संबोधित करते हुए एक ट्विटर हैंडल @TeluguScribe के खिलाफ कार्रवाई की माँग की गई है। इस पत्र में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 94 और गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) की धारा 43F का हवाला दिया गया है।

पुलिस ने अपने आधिकारिक पत्र में लिखा, “हम आपसे इस विशिष्ट एक्स (X) खाते से संबंधित निम्नलिखित विवरण प्रदान करने का अनुरोध करते हैं: खाता पंजीकरण की जानकारी, उपयोग लॉग और गतिविधि विवरण, तथा कोई भी अन्य प्रासंगिक डेटा जो हमारी जाँच में सहायता कर सके। यह जानकारी मामले की गहन जाँच के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।”

आलोचना पर आतंकवाद वाला कानून क्यों?

हैरानी की बात यह है कि UAPA जैसा सख्त कानून, जो आमतौर पर आतंकवाद और देश विरोधी गंभीर गतिविधियों को रोकने के लिए बनाया गया है, उसे महज कुछ ट्वीट्स के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। पत्र के अनुसार, उक्त हैंडल पर आपत्तिजनक भाषा और कथित तौर पर ‘पब्लिक फिगर’ की छवि खराब करने वाले ट्वीट किए गए थे। लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या किसी सरकार या नेता की आलोचना करना अब आतंकवाद की श्रेणी में आता है?

कांग्रेस और मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी पर उठते सवाल

मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा इस कार्रवाई से कांग्रेस के दोहरे चरित्र को उजागर करती है। एक तरफ राहुल गाँधी ‘संविधान बचाने’ और ‘बोलने की आजादी’ का नारा देते हैं, वहीं दूसरी तरफ उनकी सरकार असहमति की आवाज को कुचलने के लिए UAPA जैसे दमनकारी प्रावधानों का सहारा ले रही है।

इस मामले को देखें तो साफ है कि तेलंगाना में सत्ता मिलते ही कांग्रेस की ‘अभिव्यक्ति की आजादी’ वाली परिभाषा बदल गई है। क्या रेवंत रेड्डी सरकार इतनी डर गई है कि उसे साधारण ट्वीट्स से राज्य की सुरक्षा को खतरा महसूस होने लगा है? यह सीधे तौर पर लोकतंत्र में विपक्ष और जनता की आवाज को खामोश करने की एक तानाशाही कोशिश नजर आती है।

‘See my Banana’: प्राइवेट पार्ट की फोटो भेज हिंदू लड़की से बोला अशरफ सिद्दीकी, जिहादी का सपा कनेक्शन आया सामने

                              आरोपित अशरफ सिद्दीकी का निकला सपा कनेक्शन  (साभार : Organiser)
मुंबई के एग्रीपाड़ा इलाके में एक 19 साल की हिंदू लड़की को उसके पूर्व मुस्लिम सहकर्मी ने अश्लील मैसेज, वीडियो और गंदी बातों से मानसिक तौर पर प्रताड़ित किया। जानकारी के मुताबिक, पुलिस ने इस मामले में आरोपित अशरफ सिद्दीकी को गिरफ्तार कर लिया है। चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपित समाजवादी पार्टी की पार्षद इरम सिद्दीकी का भतीजा है।

व्हाट्सएप ग्रुप से नंबर चोरी कर शुरू की गंदी बातें

पीड़िता महालक्ष्मी स्थित पिरामल कंस्ट्रक्शन में टेलीकॉलर का काम करती थी। नौकरी छोड़ने के बाद, आरोपित अशरफ सिद्दीकी ने कंपनी के व्हाट्सएप ग्रुप से उसका नंबर निकाल लिया। 21 अप्रैल 2026 को उसने मैसेज कर अपनी पहचान ‘अशरफ पिरामल वाला’ के तौर पर दी।

शुरुआत में उसने लड़की को ‘क्यूट’ बताया, लेकिन जल्द ही वह अपनी औकात पर आ गया। उसने करीब एक घंटे तक लड़की से व्हाट्सएप कॉल पर बात की और बेहद गंदी माँगें रखीं। पीड़िता ने पड़ोसी के फोन से कॉल रिकॉर्ड कर ली, जिसमें अशरफ उसे ‘लव फ्रेंडशिप’ करने, लॉज चलने और शारीरिक संबंध (Sex) बनाने के लिए मजबूर कर रहा था। उसने फोन पर ओरल सेक्स जैसी घिनौनी बातें भी कीं।

प्राइवेट पार्ट की फोटो भेजी और कहा- ‘See my banana’

अगले दिन यानी 22 अप्रैल को अशरफ की बदतमीजी और बढ़ गई। उसने पीड़िता को अन्य लड़कियों की तस्वीरें भेजीं और दावा किया कि उसने उन सबके साथ संबंध बनाए हैं। हद तो तब हो गई जब उसने अपने प्राइवेट पार्ट की फोटो लड़की को भेजी और मैसेज में लिखा, “See my banana”।
इसके बाद उसने पीड़िता को कई अश्लील वीडियो भेजे और बेहद भद्दे मैसेज किए जैसे, “Show me your ass”। इन हरकतों से पीड़िता बुरी तरह डर गई और उसने अपने पिता को सब बताया।

‘हिंदू लड़कियों को मुस्लिम लड़के पसंद हैं’

FIR में यह भी दर्ज है कि जब पीड़िता ने अपने धर्म का हवाला दिया, तो अशरफ ने विवादित टिप्पणी करते हुए कहा, “आजकल हिंदू लड़कियों को मुस्लिम लड़के पसंद आते हैं।” उसने लड़की को फँसाने के लिए यह भी कहा कि अगर वे शादी करते हैं, तो वह उसे धर्म बदलने के लिए मजबूर नहीं करेगा।

पीड़िता के पिता का आरोप है कि आरोपित ने कंपनी के डेटा का गलत इस्तेमाल कर कई हिंदू लड़कियों के नंबर निकाले थे। जब पीड़िता ने अपनी अन्य सहेलियों से बात की, तो पता चला कि अशरफ उन्हें भी ऐसे ही अश्लील मैसेज भेज चुका था, जिसके बाद उन्होंने उसे ब्लॉक कर दिया था।

पुलिस की कार्रवाई और राजनीतिक कनेक्शन

एग्रीपाड़ा पुलिस ने 23 अप्रैल 2026 को मामले की गंभीरता को देखते हुए FIR (नंबर 187/2026) दर्ज की। आरोपित पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 75, 78(2), 79 और आईटी एक्ट की धारा 67(A) के तहत मामला दर्ज कर उसे जेल भेज दिया गया है।

आरोपित के परिवार से जुड़े साजिद सिद्दीकी ने कहा है कि पुलिस को सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। फिलहाल पुलिस कॉल रिकॉर्डिंग और चैट की जाँच कर रही है ताकि आरोपित को सख्त से सख्त सजा दिलाई जा सके।

नोएडा हिंसा : ‘X Storm’ से निकली चिंगारी, पुलिस को मिला फर्जी खबरें फैलाने वाला 274 लोगों का वॉट्सऐप ग्रुप

                                                                                                                    साभार: इंडियन एक्सप्रेस
राजधानी दिल्ली से सटे उत्तर प्रदेश के नोएडा में हुए हिंसक प्रदर्शनों की जाँच कर रही पुलिस ने दावा किया है कि सोशल मीडिया के जरिए एक संगठित नेटवर्क ने तनाव बढ़ाने और हिंसा भड़काने का काम किया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ‘X Storm’ नाम का एक वॉट्सऐप ग्रुप सामने आया है जिसमें 274 लोग शामिल थे। पुलिस का कहना है कि यह ग्रुप खास तौर पर मजदूरों के आंदोलन के दौरान भड़काऊ वीडियो और गलत जानकारी फैलाने के लिए बनाया गया था। आदित्य आनंद को इस ग्रुप का एडमिन और बनाने वाला बताया जा रहा है।

इस वॉट्सऐप ग्रुप के बारे में पुलिस को तब पता चला जब वह 13 अप्रैल की हिंसा के मुख्य आरोपित आदित्य आनंद से पूछताछ कर रही थी। शुरुआत में यह प्रदर्शन मजदूरों की बेहतर वेतन की माँग को लेकर शांतिपूर्ण था, लेकिन बाद में यह तेजी से हिंसक हो गया। इस दौरान आगजनी, पत्थरबाजी और हमले की घटनाएँ हुईं जिसमें कई औद्योगिक इकाइयों और दफ्तरों पर हमला किया गया और वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया।

पुलिस ने कहा है कि ‘X Storm’ वॉट्सऐप ग्रुप ने बिना पुष्टि वाले कंटेंट को फैलाने और सोशल मीडिया के जरिए लोगों को भड़काने में अहम भूमिका निभाई। अधिकारियों को शक है कि कई वॉट्सऐप ग्रुप मिलकर संगठित तरीके से भड़काऊ सामग्री फैलाने और बड़े स्तर पर अशांति फैलाने की कोशिश कर रहे थे। इस ग्रुप के अन्य सदस्यों की भी पहचान की जा रही है और डिजिटल सबूतों की जाँच की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस हिंसा की योजना और साजिश में कोई बाहरी तत्व शामिल थे या नहीं।

अवलोकन करें:-

फर्जी वीडियो शेयर करने से नोएडा हिंसा में RJD नेताओं का भी हाथ, प्रियंका भारती और कंचना यादव के खि
फर्जी वीडियो शेयर करने से नोएडा हिंसा में RJD नेताओं का भी हाथ, प्रियंका भारती और कंचना यादव के खि
 

नोएडा पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स ने शनिवार (18 अप्रैल 2026) को आदित्य आनंद को तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार किया था। यह गिरफ्तारी गौतम बुद्ध नगर पुलिस कमिश्नरेट और उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की संयुक्त टीम ने की थी।

ईरानी उड़ाए पाकिस्तान का मजाक, कहे अमेरिका का ‘दलाल’: मिडिल ईस्ट युद्ध के बीच घुसे पाकिस्तान को हर ओर से पड़ रही लात, दोनों देशों को गुमराह करने में आतंकिस्तान का हाथ

                                                                                                      साभार : BBC, Nationalherald
अमेरिका और ईरान के बीच 6 हफ्तों से चल रही भीषण जंग पर दो हफ्ते के लिए ‘ब्रेक’ तो लग गया है, लेकिन इस ब्रेक के पीछे ‘शांतिदूत’ बनने की कोशिश करने वाले पाकिस्तान की अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर थू-थू हो रही है। खुद को मध्यस्थ बताने वाला पाकिस्तान अब ‘दलाली’ के आरोपों और सोशल मीडिया पर भद्दी गालियों का सामना कर रहा है। वजह है… सीजफायर की शर्तों को लेकर पैदा की गई वो गफलत, जिसने ईरान और इजरायल को फिर से आमने-सामने खड़ा कर दिया है।

प्रस्तावों की गफलत: ईरान के 10-सूत्रीय प्लान में लेबनान का जिक्र

 ईरान ने युद्धविराम के लिए 10 शर्तों का एक प्रस्ताव रखा था, जिसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बातचीत के लिए एक सही आधार माना। इस प्रस्ताव में ईरान ने मुख्य रूप से तीन बड़ी माँगें रखी थीं, पहली यह कि अमेरिका भविष्य में दोबारा हमला न करने की पक्की गारंटी दे, दूसरी यह कि व्यापार के लिए बेहद जरूरी ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ वाले समुद्री रास्ते पर ईरान का ही कब्जा बना रहे, और तीसरी सबसे महत्वपूर्ण शर्त यह थी कि लेबनान में हिजबुल्लाह समेत तमाम मोर्चों पर चल रही जंग को तुरंत रोका जाए।

यही लेबनान वाला मुद्दा इस पूरे समझौते में विवाद और फजीहत की सबसे बड़ी वजह बन गया। दरअसल, पाकिस्तान ने बीच में पड़कर ईरान को यह यकीन दिला दिया था कि अमेरिका लेबनान में भी हमले रोकने के लिए तैयार है। लेकिन जैसे ही सीजफायर शुरू हुआ और इजरायल ने लेबनान पर ताबड़तोड़ बमबारी जारी रखी, वैसे ही पाकिस्तान के दावों की पोल खुल गई। इससे यह साफ हो गया कि पाकिस्तान ने दोनों देशों के बीच तालमेल बैठाने के बजाय गलत जानकारी फैलाई थी, जिसके कारण अब उसकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारी किरकिरी हो रही है।

जेडी वेंस का करारा जवाब: ‘लेबनान शामिल ही नहीं था’

जब लेबनान हमलों पर सवाल उठा, तो अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने स्पष्ट कर दिया कि पाकिस्तान ने ‘कन्फ्यूजन’ पैदा की है। जेडी वेंस ने कहा, “लेबनान का मुद्दा सीजफायर की शर्तों में शामिल ही नहीं था। ईरानियों को शायद गलतफहमी हुई या गलत जानकारी दी गई।” ट्रंप और नेतन्याहू ने भी साफ कर दिया कि यह सीजफायर सिर्फ ईरान और अमेरिका के बीच है, लेबनान के हिजबुल्लाह के लिए नहीं। पाकिस्तान ने अपनी ‘पीठ थपथपाने’ के चक्कर में दोनों पक्षों को अलग-अलग बातें बता दीं, जिसका नतीजा अब गालियों के रूप में सामने आ रहा है।

सोशल मीडिया पर ‘आतंकिस्तान’ की शामत: ईरानियों ने भी लताड़ा

पाकिस्तान को केवल भारत ही नहीं, बल्कि अब ईरानी नागरिक भी जमकर खरी-खोटी सुना रहे हैं। सोशल मीडिया पर #FuckPakistan ट्रेंड कर रहा है। खुद को ईरानी बताने वाले अकॉउंट्स पाकिस्तान को जमकर लताड़ रहे हैं और साथ ही भारत की तारीफ कर रहे हैं।

ی (Sana Ebrahimi) ने साफ लिखा, “ईरानियों के पाकिस्तान से नफरत करने के कई कारण है।” फिर, “पाकिस्तान को फिर से भारत बना दो। मैं उस देश पर भरोसा नहीं करती जिसने ओसामा बिन लादेन को पनाह दी।” उन्होंने यहाँ तक कहा कि ‘जम्मू-कश्मीर भारत का है।’

کاپیتان (The Captwin) ने लिखा, “पाकिस्तानी बिना इंटरनेट के शहबाज का बचाव करने कैसे आएँगे?”, अन्य पोस्ट में लिखा, “पाकिस्तान बम।” इन्होंने भारतीय मीम्स की तारीफ की और 1971 में भारत के सामने 93,000 पाकिस्तानी सैनिकों के सरेंडर की याद दिलाई।

صادُقِ زَمَند (Zamandaam) ने तंज कसा, “एक ऐसा देश जो आतंकवाद का पालना है और परमाणु बम की धमकी देता है, वो शांति कराएगा? पाकिस्तान और शांति? मज़ाक है क्या! पाकिस्तान, बांग्लादेश और मौजूदा पाकिस्तान को ‘ग्रेटर भारत’ (Greater India) में मिला देना चाहिए।”

इसके अलावा, यूजर ने लिखा, “ईरान का सबसे ज़्यादा परेशान करने वाला पड़ोसी पाकिस्तान है। यह सचमुच एक बेकार और घटिया देश है। पाकिस्तान से हमेशा एक गंदी, पिछड़ी, अंधविश्वासी और प्रदूषित सी वाइब आती है। सच कहूँ तो, मुझे हमेशा से पाकिस्तान और पाकिस्तानियों से नफरत रही है। मुझे उम्मीद है कि भारत इस बेकार और गंदे देश का किस्सा हमेशा के लिए खत्म कर देगा।”

डूब मरने की सलाह और कड़वा सच

पाकिस्तान की हालत आज उस बिन बुलाए बाराती जैसी है जो शादी में क्रेडिट लेने के चक्कर में जूते खा रहा है। एक तरफ उसका अपना मुल्क आर्थिक तंगहाली में डूबा है, और दूसरी तरफ वह दो परमाणु शक्तियों के बीच ‘शांतिदूत’ बनने का स्वांग रच रहा था। पाकिस्तान ने सोचा था कि वह इस मध्यस्थता के जरिए दुनिया में तारीफ बटोरेगा, लेकिन उसकी ‘कॉपी-पेस्ट’ कूटनीति ने उसे दुनिया के सामने एक ‘मैसेंजर बॉय’ और ‘दलाल’ बनाकर छोड़ दिया है।

ईरानियों का यह कहना कि ‘पाकिस्तान उनके पड़ोस का सबसे गंदा और बेकार देश है’, यह बताने के लिए काफी है कि मजहब के नाम पर भी पाकिस्तान की कोई इज्जत नहीं बची है। भारत की विदेश नीति जहाँ स्वतंत्र और अडिग है, वहीं पाकिस्तान आज भी ‘किराए के बिचौलिए’ से ज्यादा कुछ नहीं बन पाया। कुल मिलाकर, पाकिस्तान के लिए यह सीजफायर ‘गले की हड्डी’ बन गया है, न निगलते बन रहा है, न उगलते।

आम दिनों में करो महिलाओं का अपमान, चुनावों के वक्त चिल्लाओ ‘नारीवाद’: कांग्रेसी नेताओं की दोगलई फिर उजागर, फेक वीडियो देख उड़ाया पत्रकार का मजाक

                                                                                        साभार: एक्स @NayakRagini, @chitraaum
कांग्रेस पार्टी जिसका नारा रहा है-‘लड़की हूँ लड़ सकती हूँ’, लेकिन उसने कभी लड़कियों, महिलाओं की इज्जत को समाज में उछालने में कोई शर्म नहीं की है। पार्टी के नेता कभी सोशल मीडिया पर तो कभी किसी इंटरव्यू में नारी को मजाक का केंद्र बनाते रहे हैं। अब कांग्रेस नेत्री डॉक्टर रागिनी नायक ने भी इसी नीचता में अपनी सहभागिता सुनिश्चित की है।

रागिनी नायक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर आज तक की एंकर और पत्रकार चित्रा त्रिपाठी का एक वीडियो शेयर करते हुए ना सिर्फ उनका अपमान किया है, बल्कि सच्चाई सामने आने के बावजूद अपने पोस्ट को डिलीट नहीं किया है। आईए जानते हैं कि वीडियो में क्या है और कैसे कांग्रेस पार्टी का इतिहास ही हमेशा महिलाओं के अपमान का रहा है।

इस फेक वीडियो में कथित तौर पर चित्रा कहती दिखती हैं, “बलूचिस्तान को देखिए, खैबर पख्तूनख्वा को देखिए।” इस पर पाकिस्तानी कहता है, “चित्रा जी बलूचिस्तान को देखने के लिए जनरल आसिफ मुनीर काफी हैं, मैं तो सिर्फ आपको ही देखूँगा आज, अगर मेरी नजरें आपसे हटी तो 50 किलो मेकअप, जो आप अपने चेहरे पर थोप के आई हैं उसका क्या फायदा?”

इस पर चित्रा कहती हैं, “मेकअप पर टिप्पणी मत करिए, आपके पाकिस्तान में भी खातूने करती हैं मेकअप।” तो वह कहता है, “बिल्कुल पाकिस्तानी औरतें मेकअप करती हैं, मगर अपने खर्चे से, आपके मेकअप का खर्चा तो मोदी जी का है ना।”

वीडियो के साथ रागिनी नायक ने लिखा, “चित्रा – मेरे Makeup पर टिप्पणी मत करिए..पाकिस्तानी खातूनें भी Makeup करती हैं। Pak पैनलिस्ट- बिल्कुल, पाकिस्तानी औरतें Makeup करती हैं, पर अपने खर्चे से..आपके Makeup का खर्चा मोदी जी का है ना। पाकिस्तानियों को शो पर बुला कर, उनके हाथों यूँ जलील होने की क्या मजबूरी है भला???”

अगले ही ट्वीट में रागिनी नायक ने लिखा, “अब चित्रा कह रही हैं कि ये Video Fake है! चलिए अच्छा है! ऐसी बेइज्जती तो भगवान दुश्मन की भी ना कराए!” सोचने वाली बात है कि अगर चित्रा ने ये पुष्टि कर दी है कि वीडियो फेक है और रागिनी यह मान भी रहीं है तो भी अपना पोस्ट हटाया क्यों नहीं।

दरअसल उनका असल मुद्दा तो केवल एक महिला का मजाक उड़ाना था, बेइज्जती करना था। वो भी तब, जब बेइज्जती कर रहा व्यक्ति पाकिस्तान जैसे आतंकी देश का हो। साफ समझा जा सकता है कि नारीवाद के नाम पर चिल्लाने वाली इस पार्टी की नेताओं की मानसिकता क्या है।

इन्होंने ये बातें एक फर्जी वीडियो पर बोली हैं। यानी इन्हें प्रमाणिकता से लेना-देना नहीं होता, पाकिस्तान ही अगर इनके मतलब की बात कर देगा तो ये उसे कोट करके भारतीयों का मजाक उड़ा लेंगे।

रागिनी के साथ अलका लांबा को भी चित्रा त्रिपाठी ने दी नसीहत

कांग्रेस नेत्री लका लांबा ने भी X पर वहीं वीडियो शेयर करते हुए लिखा था, “चित्रा की क्या मजबूरी होगी जो पाकिस्तान के लोगों को अपने चैनल/शो में बुला कर चर्चा करवाने की? और यूँ उनके हाथों जलील होने की ??” अलका लांबा की पोस्ट पर जवाब देते हुए चित्रा ने लिखा, “अलका लांबा जी पाकिस्तान का यूट्यूबर अपने व्यूज बढ़ाने के लिये मेरे वीडियो में काँट छाँट करके फेक न्यूज तैयार करता है। आजतक कभी भी ये व्यक्ति मेरे शो का हिस्सा नहीं रहा।”

चित्रा ने आगे लिखा, “हैरानी होती हूँ जब कांग्रेस के बड़े पद पर बैठी महिला एक न्यूज एंकर के पीछे पड़ जाये, आप लगातार मेरे उपर टिप्पणी करती हैं और मैं इग्नोर करती हूँ। मगर मैडम पाकिस्तानी फेक न्यूज के एजेंडे में मत पड़ें। पाकिस्तान से आपकी मोहब्बत आपका ही नुकसान करेगी।”

मंडी में रं&… रेट सही मिलता है’: कॉन्ग्रेसियों ने कंगना रनौत पर की थी अभद्र टिप्पणी

भाजपा की ओर से हिमाचल प्रदेश की मंडी लोकसभा सीट से अभिनेत्री कंगना रनौत को टिकट मिलने के बाद उनके खिलाफ भी अभद्र टिप्पणियों की बाढ़ आ गई थी। टिप्पणी करने वालों में कांग्रेस के पदाधिकारी और इस्लामी नामों वाले अकाउंट थे।

खुद को नारीवादी और पत्रकार बताने वाली मृणाल पांडे ने एक्स पर लिखा, “शायद यूँ कि मंडी में सही रेट मिलता है?” हालाँकि चौतरफा छीछालेदर के बाद कांग्रेस मुखपत्र नेशनल हेराल्ड की संपादक मृणाल पांडे ने अपना ट्वीट डिलीट कर दिया।

कांग्रेस की ही राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत के अकाउंट से लिखा गया, “क्या भाव चल रहा है मंडी में कोई बताएगा?” यह पोस्ट भी श्रीनेत के अकाउंट से हटा दिया गया है। इस पर सुप्रिया श्रीनेत ने सफाई दी है कि उनके फेसबुक और इन्स्टाग्राम अकाउंट को किसी और का भी एक्सेस था और उसने यह पोस्ट की। उन्होंने कहा है कि वह ऐसा पोस्ट कभी नहीं करती।

सबसे घटिया बात कि कंगना का विरोध करने वालों ने भाषाई स्तर की बिलकुल भी परवाह नहीं की। एक और ट्विटर यूजर ने कंगना की एक फोटो के साथ अभद्र भाषा का प्रयोग किया।

‘भगवा रंग की ब्रा पहन भक्तों को जवाब दें’: पठान के बचाव में कॉन्ग्रेसी उदित राज का बयान

बॉलीवुड एक्टर शाहरुख खान की फिल्म पठान (Pathaan) में ‘भगवा रंग’ के गाने को लेकर काफी विवाद हुआ था। इस बीच कांग्रेस के नेता उदित राज (Udit Raj) ने नारीवादियों से भगवा रंग की बिकनी और ब्रा पहनने की सलाह दी थी। इसको लेकर वो सोशल मीडिया यूजर के निशाने पर भी आ गए थे।

अक्सर विवादों में रहने वाले भाजपा के पूर्व नेता और वर्तमान में कांग्रेस पार्टी में शामिल उदित राज ने अपने ट्वीट में लिखा था, “स्त्रीवादियों से मेरी सलाह है बिकनी और ब्रा आदि भगवा रंग का ही पहनकर इन भक्तों को जवाब दें।” सोशल मीडिया पर एक यूजर ने लिखा कि इसकी शुरुआत उन्हें अपने घर से करनी चाहिए।

वहीं कुछ यूजर ने उन्हें मानसिक रूप से बीमार बताया है। एक अन्य यूजर ने लिखा, “जरा अपनी पार्टी के सबसे बड़े लीडर तक यह जवाब पहुँचा तो दो। यह जानबूझकर खाली सुनवाने के लिए यह ट्वीट किया गया लगता है। कसम खा लिए हो जबतक राहुल गांँधी को कॉन्ग्रेस का अध्यक्ष नहीं बना देते ऐसे ही passive mode में गाली सुनवाते रहेंगे।”

अपनी असली मानसिकता स्वीकारो: नारीवाद को लेकर ढोंग क्यों?

देखा जाए तो कांग्रेस पार्टी को किसी भी महिला की इज्जत से कोई खास फर्क पड़ता नहीं है, तो फिर सवाल ये है कि नारीवाद-नारीवाद चिल्लाने की जरुरत क्या है? ये वहीं पार्टी है, जिसने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दिवगंत माँ को भी नहीं छोड़ा था। पार्टी अपने फायदे के लिए किसी को भी निशाना बना सकती है, चाहे आधार ही झूठा क्यों ना निकल जाए।

जिस पार्टी में देश की आधी आबादी की भी इज्जत ना हो, वह पार्टी, ‘लड़की हूँ लड़ सकती हूँ’ जैसे नारे देकर ऐसे झूठे दिखावे करती है। सब छोड़िए पार्टी की महिला नेत्री भी खुद महिला होकर जब एक महिला की सरेआम बेइज्जती कर सकती हैं, तो फिर पार्टी के अन्य नेताओं से तो महिलाओं की इज्जत की क्या ही उम्मीद करना।

X पर सक्रिय ट्रोल पर हुई कार्रवाई तो भड़क गई कांग्रेस, मोदी सरकार को बनाने लगे निशाना: इन हैंडल्स से फैलाया जा रहा था एंटी इंडिया प्रोपगैंडा

सुप्रिया श्रीनेत ने किया प्रेस कॉन्फ्रेंस (साभार: X_SupriyaShrinate)

केंद्र सरकार ने IT एक्ट की धारा 69ए का इस्तेमाल करते हुए बुधवार (18 मार्च 2026) को कई ऐसे एक्स हैंडल्स पर कार्रवाई की है, जिनके माध्यम से सोशल मीडिया पर एंटी-इंडिया प्रोपगैंडा फैलाया जा रहा था। ये एक्स हैंडल अधिककर विपक्षी पार्टियों और उसके इकोसिस्टम से जुड़े थे, जिन्हें भारत में अब ‘Withheld’ कर दिया गया है। इस कार्रवाई का मकसद ऐसे कटेंट का प्रसार रोकना है, जो समाज में अव्यवस्था और देश की सुरक्षा को खतरे में डाल सकते हैं।

इस घटना के तुरंत बाद भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने सरकार पर अभिव्यक्ति की आजादी छीनने का आरोप लगाते हुए अभियान शुरू कर दिया। दिल्ली में पार्टी की सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म विभाग की प्रमुख सुप्रिया श्रीनेत ने इस मुद्दे पर प्रेस कॉन्फ्रेंस की।

श्रीनेत ने इस कदम को बढ़ती सेंसरशिप की संस्कृति बताया और केंद्र पर आरोप लगाया कि वो असहमति को दबा रही है डिजिटल चर्चा पर अपना कब्जा मजबूत कर रही है और अपनी नीतियों की आलोचना करने वालों पर हमला कर रही है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने सभी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर स्वतंत्र असहमति वाली आवाजों को चुप कराने का पैटर्न अपनाया है।

श्रीनेत ने कहा कि ऐसे कदम दरअसल नौकरशाहों को खुली जानकारी तक पहुँचने के फैसले पर पावर दे देते हैं। सुप्रिया ने कहा, “यह सिर्फ कहानी गढ़ने की बात नहीं है बल्कि अभिव्यक्ति की आजादी की आत्मा पर हमला है।” उन्होंने यह भी दावा किया कि सरकार मुख्यधारा के मीडिया में दखल के बाद अब सोशल मीडिया की दुनिया में भी अपना दखल बढ़ा रही है।

श्रीनेत ने आगे लिखा, “जिन लोगों पर असर पड़ा है उनमें से कई कांग्रेस के साथ नहीं हैं। कुछ तो हमारी फैसलों की आलोचना भी करते हैं लेकिन हम उनके समर्थन में आवाज उठाते हैं। हमने राहुल गाँधी से सीखा है कि किसी भी अन्याय का सामना करने वाले का साथ दें चाहे वो हमारे खिलाफ रहे हों और वो हमारे आधिकारिक सिस्टम का हिस्सा न हों बावजूद इसके कि भाजपा और उसके ट्रोल्स क्या कहते हैं।”

श्रीनेत यहीं नहीं रुकी, बल्कि कहा कि अकाउंट्स ब्लॉक करने से सवाल नहीं रुकेंगे। उन्होंने यह भी शिकायत की कि यह मुद्दा एक बड़ी समस्या का हिस्सा है और सरकार को बढ़ते संसदीय आर्थिक चुनौतियों और विदेश नीति की कमियों से ध्यान हटाने का आरोप लगाया।

श्रीनेत ने इसी तरह के तर्कों वाला एक वीडियो भी अपलोड किया और बैन किए गए अकाउंट्स के समर्थन में ट्वीट किया जिसमें उन्होंने फैसले को ‘अस्वीकार्य’ बताया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘कायर’ कहा।

दिलचस्प बात यह है कि यह पुरानी बड़ी पार्टी असहमति कुचलने का लंबा इतिहास रखती है और अक्सर अभिव्यक्ति की आजादी का उल्लंघन करती रही है। फिर भी वह इन लोगों के पीछे खड़ी हो गई है न कि ऊँचे आदर्शों की सच्ची चिंता से बल्कि इसलिए कि वे विपक्ष की कहानी फैलाते हैं। बेशक यह उनके खिलाफ कार्रवाई का एकमात्र कारण नहीं हो सकता क्योंकि उनकी ऑनलाइन गतिविधियों में काफी कुछ शामिल है।

फेक न्यूज फैलाने में माहिर हैं ये अकाउंट

नेहर_हू 2 लाख 42 हजार 300 फॉलोअर्स वाला एक पॉपुलर अकाउंट है जो इस्लामो-लिबरल गुट का है जिस पर रोक लगी है। इसने बार-बार न सिर्फ झूठी खबरें फैलाईं बल्कि नस्लवाद दिखाया और भारतीय सेना पर आरोप लगाए। उसने न्यायपालिका की भी निंदा की क्योंकि उसने मशहूर जिम मालिक ‘मोहम्मद’ दीपक कुमार को सुरक्षा नहीं दी जो पहलगाम आतंकी हमले के शिकारों का मजाक उड़ा रहा था और कह रहा था ‘केवल भारत में हीरो को विलेन बना दिया जाता है।’

उसने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर का भाषण शेयर किया जिसमें ब्रिटेन की विविधता का जश्न था और कहा कि ‘भारत में ठीक उलटा है’ देश की निंदा करने का कोई मौका नहीं छोड़ा भले ही झूठ बोलकर। यह अकाउंट ‘अल्पसंख्यक खतरे में’ वाली बनाई गई कहानियाँ फैलाने में सबसे आगे रहा जबकि हिंदुओं पर हमलों को साफ कर दिया या उनके नरसंहार का मजाक उड़ाया।

साल 2024 में उसने ओपइंडिया के हिंदूफोबिया ट्रैकर का हवाला देकर कहा कि कश्मीर में हिंदू उत्तर प्रदेश से ज्यादा सुरक्षित हैं ताकि अपनी आश्चर्यजनक अपमानजनक और असंवेदनशील सोच दिखा सके। वह कश्मीरी पंडितों के जिहादियों के कारण पलायन को जानता है लेकिन फिर भी उनके दर्द का मजाक उड़ाता है।

इसी महीने अमेरिका के भारत राजदूत सर्जियो गोर और इंडो-पैसिफिक कमांड के कमांडर सैमुअल जे पापारो भारत की वेस्टर्न आर्मी कमांड के चंडीगढ़ मुख्यालय गए। बातचीत पश्चिमी थिएटर की गंभीर सुरक्षा मुद्दों पर केंद्रित थी जो पाकिस्तान से सैन्य गतिरोध और दुश्मनी के कारण महत्वपूर्ण है।

लेकिन इस मीटिंग का इस्तेमाल प्रधानमंत्री मोदी को समझौता करने का आरोप लगाने के लिए किया गया जो कांग्रेस पार्टी अक्सर लगाती है और इससे रक्षा बलों की ईमानदारी पर सवाल उठाए गए।

नेहर_हू ने बिहार के लोगों पर उनके वोटिंग चॉइस के लिए नस्लवादी हमला किया और कहा ‘टॉयलेट में माइग्रेशन का मजा लो अगले 5 साल’ मेहनतकश मजदूर वर्ग का अपमान करने के लिए सिर्फ इसलिए क्योंकि उन्होंने उसकी पसंदीदा पार्टियों को वोट नहीं दिया।

“उत्तर प्रदेश और बिहार से लाखों प्रवासी त्योहार पर घर जाने के लिए भयानक तकलीफ झेलते हैं। कुछ तो मर भी जाते हैं” उसने 2024 में इसी तरह कहा और उन्हें केसरिया पार्टी को सपोर्ट करने के लिए कोसा और आरोप लगाया कि उसकी सरकार ने वंदे भारत अमीरों के लिए शुरू किया। उसने इसमें ‘जैसा बोया वैसा काटा’ जैसे तंज भी खुशी खुशी जोड़े। इस आदमी ने लगातार राज्य और उसके रहने वालों को स्वच्छता और दूसरी चीजों पर नीचा दिखाया है।

एक महिला ने बताया कि उसने उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में समाजवादी पार्टी को वोट दिया था लेकिन उसे भाजपा का स्लिप मिल गया। हालाँकि उसने ये भी कहा कि मेरे साथ छोटा बच्चा था वोटिंग के समय जिस वजह से गलत बटन दब गया और मुझे ईवीएम से कोई समस्या नहीं है।” लेकिन उसकी झूठी बात का इस्तेमाल करके उसने भारत के चुनाव आयोग की निंदा की।

उसने और अल्ट न्यूज के मोहम्मद जुबैर ने पत्रकार निशा पाल को निशाना बनाने की कोशिश की क्योंकि उन्होंने पहलगाम आतंकी घटना ऑपरेशन सिंदूर और इजराइल-हमास युद्ध के बारे में कुछ मुस्लिम बच्चों से सवाल पूछे थे।

उसने एक वीडियो भी अपलोड किया जिसमें कथित पाकिस्तानी आदमी भारतीय क्रिकेट टीम की जीत का जश्न मना रहा था और कह रहा था कि इस्लामिक रिपब्लिक भारत से बेहतर देश है जबकि अपने देश के खिलाफ आतंकवाद समेत सभी बड़े अपराधों को नजरअंदाज कर रहा था।

मोदी सरकार के खिलाफ नाराजगी के रूप में छिपा एंटी इंडिया प्रोपगैंडा

डॉ निमो यादव 2.0 एक और प्रमुख अकाउंट जो भारत में बैन हो गया है उसने दो केंद्रीय मंत्रियों को राष्ट्र विरोधी गतिविधियों से जोड़ने तक की हद पार कर दी। उसने कहा, “क्या यह सच है कि एन सीतारमण का ऑफिस और राजीव चंद्रशेखर ट्विटर पर उस व्यक्ति को फॉलो कर रहे थे जो भारत में आतंकियों को ट्रेनिंग दे रहा था।” इसने इन नेताओं की जाँच NIA से कराने की डिमांड तक रख डाली।

इस बीच जिन पार्टियों को ये लोग सपोर्ट करते हैं वे वोट बैंक के लिए माफिया और गैंगस्टरों को बढ़ावा दे रही हैं और अपनी एजेंडा थोपने के लिए मानवीय सीमाओं को पार कर रही हैं। उसने भारतीय सेना के अधिकारियों के दिखने पर मजाक भी किया और कहा, “यह तब होता है जब मिड-डे मील में अंडे बैन कर दो।” इस तरह से वो वर्दीधारी सैनिकों का सम्मान करता है, जिन्होंने युद्धक्षेत्र में पाकिस्तान और चीन जैसे दुश्मनों से लड़ते हुए अद्भुत शौर्य का प्रदर्शन किया।

इन हैंडल्स पर निखिल गुप्ता की गिरफ्तारी पर मजा लिया जो खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू के असफल हत्या षड्यंत्र में शामिल था और चाहा कि उसकी कहानी धुरंधर 2 में दिखाई जाए, जिसमें आर माधवन भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार का रोल करते हैं। यह भारतीय खुफिया एजेंसियों का मजाक उड़ाने का उसका दयनीय प्रयास था।

डॉ निमो यादव 2.0 ने एक और पोस्ट में दावा किया कि ‘भारत के लिए चीजें अच्छी नहीं लग रही’ क्योंकि ‘रूस ने पाकिस्तान को सस्ते दाम पर कच्चा तेल ऑफर किया’ जिसे उसने सरकार की बड़ी असफलता बताया। दूसरी तरफ भारत रूस से बहुत सस्ते दाम पर तेल खरीद रहा है खासकर 2022 में अमेरिका की धमकियों और टैरिफ के बावजूद।

वह जानता है कि रूस का पाकिस्तान को ऑफर भारत की इजराइल से निकटता की तरह दोनों देशों के रिश्तों में बाधा नहीं डालता फिर भी उसने अपनी प्रचार से मुँह नहीं मोड़ा।

अलग-अलग अकाउंट्स लेकिन काम एक जैसा

इसी तरह की पाबंदी मनीष आरजे के अकाउंट पर भी लगी है। उसने दावा किया था कि बिहारी वोटरों ने अपनी आत्मा 10 हजार में बेच दी क्योंकि उन्होंने भाजपा को सपोर्ट किया। यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया इस गुट को तभी स्वीकार्य लगती है जब उनकी पसंदीदा पार्टियाँ जीतती हैं।

उसने भी बाकियों की तरह झूठी जानकारी फैलाने से खुद को नहीं रोका और इजराइल को ‘फादरलैंड’ कहा गलत तरीके से प्रधानमंत्री मोदी को इसका श्रेय देते हुए जबकि मोदी ने भारतीय यहूदियों के बारे में कहा था कि वे पश्चिम एशिया के उस देश को अपना पिता मानते हैं जबकि भारत को मातृभूमि।

आरजे ने कोलकाता मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में हुई भयानक बलात्कार और हत्या की घटना में पीड़िता की माँ को भी अपनी छोटी राजनीति में घसीट लिया और आरोप लगाया कि न्याय की उनकी गुहार दरअसल भाजपा टिकट पर चुनाव लड़ने की इच्छा से थी। उसने शोक संतप्त महिला की बेइज्जती की, जबकि उसे सत्तारूढ़ तृणमूल कॉन्ग्रेस सरकार से जवाब माँगना चाहिए था।

उसने लगातार उन पोस्ट्स को रीट्वीट किया जो भू-राजनीतिक संकट से भारतीयों पर पड़ने वाले नुकसान का मजाक उड़ाती हैं।

‘एक्टिविस्ट और सोशल वर्कर’ संदीप सिंह लिस्ट में एक और नाम है जो कांग्रेस का खासकर हरियाणा यूनिट का खुलकर समर्थन कर रहा है कई पोस्ट्स के जरिए जो श्रीनेत के दावे का खंडन करता है कि ये अकाउंट उनकी पार्टी को सपोर्ट नहीं करते।

इसके अलावा वह भारत में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर प्रतिबंध चाहता है जैसा कि हालिया विवादित रिपोर्ट में अमेरिका के अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग ने कहा है धार्मिक स्वतंत्रता के नाम पर और भेदभाव रोकने के लिए। रिपोर्ट ने रिसर्च एंड एनालिसिस विंग पर टारगेटेड सैंक्शंस की भी सिफारिश की।

डॉ रंजन जिनके अकाउंट का भी यही हाल हुआ। उसने एक कार्यक्रम का वीडियो पोस्ट किया और गलत दावा किया कि मोदी सरकार के प्रभाव में भारतीय मीडिया नागरिकों से संकट और आपदाएँ छिपा रही है। उसका साफ मकसद है लोगों में डर पैदा करना और सरकार के खिलाफ नफरत भड़काना, बिना देश पर पड़ने वाले असर को सोचे।

उसने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान को भी तोड़ मरोड़ कर पोस्ट किया और जातीय विभाजन पैदा करने की कोशिश की।

कुछ लोगों ने घटना के बाद अपने ट्वीट्स लॉक कर लिए जिससे कई सवाल उठे।

ये वही लोग हैं, जो हिंदू एक्टिविस्ट विजय पटेल के अकाउंट सस्पेंड होने पर खुश थे और मालाबार गोल्ड चाहता था कि उन्हें जेल भेजा जाए क्योंकि उन्होंने उनके पाकिस्तानी इन्फ्लुएंसर्स को हायर करने की आलोचना की थी जो ऑपरेशन सिंदूर की निंदा कर रहे थे। वे ‘सेंसरशिप’ का मजा लेते हैं जब तक वो उनके विरोधियों पर अन्यायपूर्ण तरीके से लगे। पाखंड और दोहरे मापदंड वाकई हैरान करने वाले हैं।

अप्रैल 2024 में लोकसभा चुनाव से ठीक पहले अमित शाह ने कांग्रेस को उसके एडिटेड वीडियो का इस्तेमाल करने के लिए फटकार लगाई जिसमें आरोप था कि भाजपा की सत्ता आने पर आरक्षण खत्म हो जाएगा। यह वीडियो कांग्रेस के नेतृत्व वाले इंडिया गठबंधन और उनके पूरे नेटवर्क द्वारा असली बताकर फैलाया गया था। इस तरह नुकसान पहुँचाने के इरादे से गलत सूचना फैलाने को हल्के में नहीं लिया जा सकता। ठीक वैसे ही देश की सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी जो ऐसी तकनीकें इस्तेमाल करती रही है उसके इन अकाउंट्स के खिलाफ कार्रवाई के बाद नाराज होना आश्चर्य की बात नहीं है।