किसके दम पर जेलेंस्की टकरा गया ट्रंप से; ये अमेरिका का खाता है और उसी पर गुर्राता है

सुभाष चन्द्र

कल(फरवरी 28) की ट्रंप और जेलेंस्की की तू तू मैं मैं की कहानी दुनियाभर में वायरल हो रही है।  जेलेंस्की को पता था उसे यूक्रेन-रूस के युद्ध विराम और minerals के समझौते के लिए अमेरिका बुलाया जा रहा है अगर समझौता करना ही नहीं था तो उसे ट्रंप से मिलने जाना ही नहीं चाहिए था 

जेलेंस्की ने युद्ध विराम और समझौते का प्रस्ताव ठुकरा दिया और कहा कि हमें युद्ध विराम नहीं चाहिए और ट्रंप को दोष दे दिया कि वह पुतिन की भाषा बोल रहे हैं दोनों के अंदाज से लग रहा था जैसे दो सांडों का युद्ध हो रहा हो

लेखक 
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जेलेंस्की का व्यक्तित्व किसी की भी समझ से परे है जिस अमेरिका ने उसे 350 बिलियन डॉलर की मदद दी, उसी पर जेलेंस्की गुर्राने लगा ये तो अहसान फरामोशी है आखिर कौन सी ताकत है जिसके दम पर जेलेंस्की ने ट्रंप से झगड़ा मोल लिया और उसके घर से बेइज़्ज़त होकर निकला जो कदाचित किसी भी देश के राष्ट्रपति के साथ पहली बार हुआ होगा “अतिथि देवो भव” के स्थान पर “अतिथि अनाथ भव” हो गया और अमेरिका में घोर अपमान हो गया ट्रंप ने जेलेंस्की से या उसके लिए जो कहा, वह देखिए -

जेलेंस्की ने अमेरिका का अपमान किया;

जेलेंस्की वापस जा सकते हैं;

जेलेंस्की के मन में नफरत है;

नफरत के साथ समझौता संभव नहीं;

जब शांति की जरूरत हो तो जेलेंस्की आएं;

समझौता करो या घर जाओ;

आज से आपके (यूक्रेन) के बुरे दिन शुरू;

आप आदेश देने की स्थिति में नहीं हैं;

WW 3 का जुआ खेल रहे हैं जेलेंस्की;

लोगों की जिंदगी से खेल रहे हैं जेलेंस्की;

जेलेंस्की मूर्ख राष्ट्रपति हैं;

US के बिना यूक्रेन कुछ नहीं है;

हमारी वजह से यूक्रेन सही सलामत है;

हमने यूक्रेन को हथियार दिए;

हमने 350 बिलियन डॉलर के मदद दी;

जेलेंस्की जंग नहीं जीत सकते;

हमारे बिना आपके पास विकल्प नहीं है;

जो जेलेंस्की के साथ खड़े दिखाई दिए, उनमें यूरोपीय संघ, स्वीडन, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा शामिल हैं जेलेंस्की के दिमाग का फितूर था कि एक बार उसे NATO में शामिल कर दिया जाए तो उसके रूस के साथ विवाद में पूरा नाटो उलझ जाएगा लेकिन अमेरिका और EU के देशों ने जेलेंस्की को केवल हथियारों की मदद की और आज भी उसे यही फितूर है कि EU देशों की मदद से वह युद्ध आगे लड़ सकता है उसे लगता है कि उसे अब अमेरिका की जरूरत नहीं है यह अहंकार उसे ले डूबेगा

जेलेंस्की को सबक सिखाने के लिए ट्रंप उसे हथियारों की मदद देना पूरी तरह बंद कर सकता है और रूस को भी खुली छूट दे सकता है कि यूक्रेन पर कब्ज़ा कर ले कोई NATO देश उसके लिए युद्ध में न पहले कूदा था और न अब कूदेगा कोई NATO देश युद्ध में कूदा तो NATO ही टूट जाएगा अमेरिका और रूस यूक्रेन पर कब्ज़ा करने के लिए अपना ही समझौता कर सकते हैं और जब जेलेंस्की से अमेरिका का कोई संबंध ही नहीं रहेगा तो कोई अन्य देश अमेरिका से उलझने की कोशिश नहीं करेगा

ट्रंप की जेलेंस्की को झिड़की उसे चीन के करीब भेजने की एक चाल भी हो सकती है और वह चीन की शरण में चला गया तो चीन और रूस एक दूसरे के सामने होंगे यह अमेरिका की कूटनीति हो सकती है चीन को रूस से अलग करने की

कल तो क्रोध में जेलेंस्की ट्रंप को ठोकर मार आया है लेकिन हो सकता है बाद में गलती का अहसास हो और फिर से ट्रंप के पास पहुंच जाए क्योंकि ट्रंप ने दरवाजे बंद नहीं किए हैं, उसने कहा है जब शांति की जरूरत हो तो आ जाना 

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