कल(फरवरी 28) की ट्रंप और जेलेंस्की की तू तू मैं मैं की कहानी दुनियाभर में वायरल हो रही है। जेलेंस्की को पता था उसे यूक्रेन-रूस के युद्ध विराम और minerals के समझौते के लिए अमेरिका बुलाया जा रहा है। अगर समझौता करना ही नहीं था तो उसे ट्रंप से मिलने जाना ही नहीं चाहिए था।
जेलेंस्की ने युद्ध विराम और समझौते का प्रस्ताव ठुकरा दिया और कहा कि हमें युद्ध विराम नहीं चाहिए और ट्रंप को दोष दे दिया कि वह पुतिन की भाषा बोल रहे हैं। दोनों के अंदाज से लग रहा था जैसे दो सांडों का युद्ध हो रहा हो।
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| लेखक चर्चित YouTuber |
जेलेंस्की ने अमेरिका का अपमान किया;
जेलेंस्की वापस जा सकते हैं;
जेलेंस्की के मन में नफरत है;
नफरत के साथ समझौता संभव नहीं;
जब शांति की जरूरत हो तो जेलेंस्की आएं;
समझौता करो या घर जाओ;
आज से आपके (यूक्रेन) के बुरे दिन शुरू;
आप आदेश देने की स्थिति में नहीं हैं;
WW 3 का जुआ खेल रहे हैं जेलेंस्की;
लोगों की जिंदगी से खेल रहे हैं जेलेंस्की;
जेलेंस्की मूर्ख राष्ट्रपति हैं;
US के बिना यूक्रेन कुछ नहीं है;
हमारी वजह से यूक्रेन सही सलामत है;
हमने यूक्रेन को हथियार दिए;
हमने 350 बिलियन डॉलर के मदद दी;
जेलेंस्की जंग नहीं जीत सकते;
हमारे बिना आपके पास विकल्प नहीं है;
जो जेलेंस्की के साथ खड़े दिखाई दिए, उनमें यूरोपीय संघ, स्वीडन, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा शामिल हैं। जेलेंस्की के दिमाग का फितूर था कि एक बार उसे NATO में शामिल कर दिया जाए तो उसके रूस के साथ विवाद में पूरा नाटो उलझ जाएगा लेकिन अमेरिका और EU के देशों ने जेलेंस्की को केवल हथियारों की मदद की। और आज भी उसे यही फितूर है कि EU देशों की मदद से वह युद्ध आगे लड़ सकता है। उसे लगता है कि उसे अब अमेरिका की जरूरत नहीं है। यह अहंकार उसे ले डूबेगा।
जेलेंस्की को सबक सिखाने के लिए ट्रंप उसे हथियारों की मदद देना पूरी तरह बंद कर सकता है और रूस को भी खुली छूट दे सकता है कि यूक्रेन पर कब्ज़ा कर ले। कोई NATO देश उसके लिए युद्ध में न पहले कूदा था और न अब कूदेगा। कोई NATO देश युद्ध में कूदा तो NATO ही टूट जाएगा। अमेरिका और रूस यूक्रेन पर कब्ज़ा करने के लिए अपना ही समझौता कर सकते हैं और जब जेलेंस्की से अमेरिका का कोई संबंध ही नहीं रहेगा तो कोई अन्य देश अमेरिका से उलझने की कोशिश नहीं करेगा।
ट्रंप की जेलेंस्की को झिड़की उसे चीन के करीब भेजने की एक चाल भी हो सकती है और वह चीन की शरण में चला गया तो चीन और रूस एक दूसरे के सामने होंगे। यह अमेरिका की कूटनीति हो सकती है चीन को रूस से अलग करने की।
कल तो क्रोध में जेलेंस्की ट्रंप को ठोकर मार आया है लेकिन हो सकता है बाद में गलती का अहसास हो और फिर से ट्रंप के पास पहुंच जाए क्योंकि ट्रंप ने दरवाजे बंद नहीं किए हैं, उसने कहा है जब शांति की जरूरत हो तो आ जाना।


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