कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने महाकुंभ के विरुद्ध सबसे पहले विषवमन आरम्भ किया जब उन्होंने पूछा कि संगम में स्नान करने से क्या गरीबी दूर होगी; भूखे को खाना मिलेगा और लोगों को नौकरी मिलेगी। खड़गे की बात सुनकर किसी भी कांग्रेसी नेता को संगम स्नान के लिए नहीं जाना चाहिए था। लेकिन फिर भी कुछ नेता गए और इस तरह उन्होंने पार्टी की विचारधारा के विरुद्ध काम किया जिसके लिए उन्हें कांग्रेस से निष्काषित किया जाना चाहिए।
इस विषवमन को शशि थरूर ने आगे बढ़ाते हुए कहा कि “गंगा भी स्वच्छ रखनी है और पाप भी यहीं धोने हैं, इस संगम में सब नंगे हैं, जय गंगा मैया की”। फिर तो कहानी ही ख़त्म हो गई और किसी कांग्रेसी को गंगा में नंगा होने के लिए जाने की जरूरत ही नहीं थी। वैसे ये शशि थरूर अपने को हिंदू धर्म का बहुत बड़ा ज्ञानी समझता है।
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गूगल सर्च में यह भी जानकारी नहीं है कि कौन कौन कांग्रेसी संगम स्नान के लिए गया। फिर भी कुछ जानकारी के अनुसार अमृतसर से कांग्रेस के सांसद गुरजीत औजला स्नान के लिए गए।
कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी के शिवकुमार अपनी पत्नी सहित गए और योगी जी के प्रबंधों की बहुत तारीफ की। एक यह भी कांग्रेस नीति के विरोध में था, भला वह योगी की प्रशंसा कैसे कर सकते हैं।
इसके अलावा हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुखु भी अपने परिवार के साथ संगम स्नान के लिए गया।
उत्तर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष अजय राय ने कहा है कि - “मैंने खुद कुंभ में पहुंचकर स्नान किया था और आशीर्वाद लिया था। मैं कांग्रेस परिवार और गांधी परिवार की ओर से वहां गया था और मैंने कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर डुबकी लगाई थी”।
अब कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे और गांधी परिवार को सफाई देनी चाहिए कि अजय राय को कांग्रेस और गांधी परिवार की तरफ से स्नान करने के लिए किसने अधिकृत किया था। अब बताओ खड़गे और थरूर कि अजय राय ने क्या पार्टी के विरुद्ध काम नहीं किया और क्या उसके स्नान करने से कांग्रेस और गांधी परिवार के पाप धुल गए?
कांग्रेस ने क्योंकि शुरू से महाकुंभ का आधिकारिक तौर पर विरोध किया और इसलिए जो भी कांग्रेसी नेता संगम स्नान के लिए गए, उन्हें पार्टी से निकाल देना चाहिए। खड़गे में ऐसा करने का साहस है क्या?

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