अरशद मदनी लगता है पगला गए है या दिमाग में भूसा भरा है; हर मुस्लिम यूनिवर्सिटी मुस्लिमों के हाथ में है, कोई भी किसी हिंदू के हाथ में नहीं है

सुभाष चन्द्र


सनातन में कहते हैं कि बुढ़ापे में आदमी सठिया जाता है और मृत्यु से पहले सच्चाई बोलना शुरू कर देता है जिसे हम समझ नहीं पाते। मुसलमान अरशद मदनी के आतंकवाद बयान पर उसे पागल जरूर कह सकते हैं। लेकिन positive angle से देखें तो सच 
बोल रहा है। ज़िन्दगी भर मुसलमानों को हिन्दुओं के विरुद्ध भड़काने के बाद सच्चाई बोलनी शुरू कर दी है कि आतंकवाद का नाम ही इस्लाम है। 

कुछ समय इस मदनी दिल्ली के रामलीला मैदान में एक सच्चाई बोली कि ॐ और अल्लाह एक हैं। यानि मतलब समझ सकते हो। दूसरे, जब भी आतंकवाद को इस्लाम से जोड़ा जाने पर कुछ कपटी मौलाना, मौलवी और इस्लामिक विद्वान कहते हैं कि आतंकवाद का कोई मजहब नहीं होता। लेकिन मदनी ने एक बार फिर सच्चाई कबूल दी कि आतंकवाद का मजहब इस्लाम होता है। मदनी से पूछो जब ब्लास्ट हुआ तब क्यों नहीं बोला लेकिन बोल कब रहा है जब आतंकवादियों की धड़पकड़ हो रही। इन बयानों को बोलते हैं दोगलापन। यानि गुड़ खाएंगे लेकिन गुलगुलों से परहेज।   

अरशद मदनी जमीयत उलेमा-ए-हिंद के दो हिस्सों में टूटने के बाद एक हिस्से के लीडर हैं और अपनी बकवास बातों से देश में जहर घोलने का काम करने में कोई कसर नहीं छोड़ते अब अरशद ने कहा था या महमूद मदनी ने कहा था, ये कहीं मिल नहीं रहा क्योंकि गूगल ऐसे बयानों को गायब कर देता है लेकिन कहा जरूर था कि अगर हिंदुओं को मुसलमान पसंद नहीं हैं तो वे हिंदुस्तान छोड़ कर चले जाएं यह भी कहा था कि ॐ और अल्लाह एक ही हैं

ऐसी बातें कह कर अरशद मदनी अपने पागल होने का सबूत दे रहे हैं किस यूनिवर्सिटी की बात कर रहे हैं जिसमें मुस्लिम कुलपति नहीं बना? उन्हें याद होना चाहिए कि AMU में 1920 से लेकर अब तक 12 चांसलर और 24 VC रहे हैं जो सभी मुस्लिम थे; जामिया मिलिया यूनिवर्सिटी में भी 1920 से लेकर अब तक 12 चांसलर और 16 VC  सब मुस्लिम रहे हैं; देश में करीब 125 इस्लामिक मदरसे, यूनिवर्सिटी, और संस्थान हैं जो सभी मुस्लिमों द्वारा चले जाते हैं जिनमे अल फ़लाह भी शामिल है जो आतंकी पैदा करने की फैक्ट्री साबित हुई। या यूँ कहा जाए कि मुस्लिम यूनिवर्सिटी में तो सिर्फ और सिर्फ मुसलमान ही VC या चांसलर होने के अलावा दूसरी यूनिवर्सिटी में भी मुसलमान चाहिए, लेकिन कोई यह नहीं बोलता कि AMU और Jamia में हिन्दू VC या चांसलर क्यों नहीं हो सकता?    
लेखक 
चर्चित YouTuber 
अब अरशद मदनी एक और बयान लेकर सामने आए हैं कि न्यूयॉर्क में एक मुस्लिम मेयर बन सकता है, लंदन का मेयर मुस्लिम बन सकता है लेकिन भारत में एक यूनिवर्सिटी का कुलपति मुस्लिम नहीं बन सकता और बनेगा तो जेल में डाल दिया जाएगा जैसे आज़म खान और अल फ़लाह का VC जेल भेज दिया गया और पता नहीं कब तक जेल में रहेगा
 मुसलमानों को देश में दबाया जा रहा है और उनसे भेदभाव हो रहा है। वाकई मदनी पगला गया है, न्यूयॉर्क में मुस्लिम मेयर बना है वह खोजा जाति से है जिस जाति को मुसलमान मुसलमान नहीं मानता। यानि इस्लाम में जातियों के भेदभाव तो रहेगा लेकिन इस्लाम के नाम पर एक। मुस्लिम कट्टरपंथियों के आगे माथा टेकने वाले नेताओं और उनकी पार्टियों को इस कड़वी सच्चाई को समझना चाहिए और हिन्दुओं को जातियों में बाँटने का नीचता का काम करने से बाज़ आएं।   

पाकिस्तान के आतंकियों को भी आतंकी नहीं कहा मदनी ने जबकि आतंकी हमलों में लोगों के खून बहाने वालो की वकालत कोर्ट में करता है जमीयत और दूसरी तरफ तालिबान को मदनी ने Freedom Fighters कहा था - मदनी पर वैसे ओवैसी ने अपना क्रोध बरसाया है और उसके विचारों को देश से दुश्मनी कहा है -

मदनी को कहते हुए शर्म नहीं आती कि देश में मुसलमानों को दबाया जा रहा है केवल इसलिए कि अल फ़लाह के chancellor Javed Siddiqui और आज़म खान को जेल में डाला गया लेकिन वो भूल जाता है कि देश में 3 राष्ट्रपति मुस्लिम बने Dr. Zakir Hussain, Fakhruddin Ali Ahmed, and Dr. A.P.J. Abdul Kalam और 3 उपराष्ट्रपति मुस्लिम बने ज़ाकिर हुसैन, हिदायतुल्लाह और हामिद अंसारी जो 10 साल कुर्सी पर बैठने के बाद भी कह गया कि भारत में मुस्लिम सुरक्षित नहीं हैं - देश के पहले 5 शिक्षा मंत्री मुसलमान बने जिन्होंने हिंदू इतिहास को ही मिटटी में मिला दिया -

अरशद मदनी भूल जाते हैं कि जो पाकिस्तान मुसलमानों ने मांगा था वो चरमपंथी इस्लामिक मुल्क बन गया और आज भिखारी मुल्क है जबकि भारत रहने वाले मुस्लिम मौज में रह रहे हैं - भाजपा को छोड़ कर सभी दल मुस्लिम वोट बैंक बन गए हैं और इसलिए वो हिंदुओं को जूती की नोक पर रखते हैं जबकि पाकिस्तान ने अपने संविधान में लिख दिया कि कोई भी हिंदू वहां प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति नहीं बन सकता और हम “सेकुलर” बन कर सब कुछ दे रहे मुस्लिमों को लेकिन उनका पेट ही नहीं भरता -

मदनी ही नहीं बल्कि सभी कट्टरपंथी मुसलमानों को Introspection करना होगा कि जो उनके लोग आतंक के मार्ग पर चल रहे हैं उससे क्या कौम का भला होगा - एक बात उन्हें दिमाग से निकाल देनी चाहिए कि अब दोबारा देश का विभाजन होगा जिसकी भाषा मदनी जैसे लोग बोलते हैं - विभाजन इसलिए नहीं होगा क्योंकि अब 1947 नहीं है और गांधी / नेहरू नहीं है, अब 2025 है  और देश की फ़ौज नेहरू जैसे किसी निकम्मे के हाथ में नहीं है - देश की फ़ौज जब पाकिस्तान को झेल सकती है तो देश के भीतर के दुश्मनों को भी ठोक सकती है -

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