क्या मुख्यमंत्री हेमंत बदलेंगे पाला? JMM-कांग्रेस के इनकार के बावजूद बढ़ी बेचैनी

                                                              झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन
झारखंड के मुख्यमंत्री 
हेमंत सोरेन पिछले कुछ दिनों से अपनी पत्नी और गांडेय एमएलए कल्पना सोरेन के साथ दिल्ली में हैं। इससे दोनों गठबंधन पार्टनर्स कांग्रेस और आरजेडी के कुछ हिस्सों में बेचैनी बढ़ रही है। पॉलिटिकल सर्कल और सोशल मीडिया पर यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि जेएमएम, बीजेपी के साथ नजदीकी बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, क्योंकि राज्य को सेंट्रल फंड में 'कमी' के कारण फंड की बढ़ती कमी का सामना करना पड़ रहा है।

बिहार में महागठबंधन की करारी हार के बाद अब पड़ोसी राज्य झारखंड में सियासी पारा चरम पर है। हेमंत सोरेन की पार्टी जेएमएम (JMM) को बिहार में एक भी सीट ना देने वाले महागठबंधन को झारखंड में झटका लग सकता है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, बीते दिनों दिल्ली में सीएम हेमंत सोरेन और उनकी पत्नी कल्पना सोरेन ने बीजेपी के शीर्ष नेता से मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद सियासी खिचड़ी पकनी शुरू हो गई है।

सियासी गलियारों में कयास लगाए जा रहे हैं कि हेमंत सोरेन और बीजेपी नेता के बीच बातचीत केवल औपचारिक नहीं थी। बल्कि, दावे यहां तक किए जा रहे हैं कि दोनों दलों (बीजेपी और जेएमएम) के साथ आने की प्रारंभिक सहमति बन चुकी है।

हेमंत सोरेन 29 नवंबर से दिल्ली में

बिहार में हार के बाद, अफवाहों ने और जोर पकड़ लिया कि जेएमएम, आरजेडी और कांग्रेस से अलग होने के ऑप्शन पर सोच-विचार कर सकता है। बिहार चुनाव में सीटें न मिलने के बाद, रूलिंग जेएमएम ने पहले ही कांग्रेस और आरजेडी के साथ अपने गठबंधन की गहरी समीक्षा की बात कही थी। हालांकि जेएमएम और कांग्रेस दोनों ने ऑफिशियली इसे खारिज कर दिया, जैसा कि अपोजिशन कैंप ने भी किया।

हेमंत सोरेन और कल्पना सोरेन 29 नवंबर की शाम को दिल्ली के लिए निकले थे। जेएमएम के अंदर के लोगों ने आज कहा कि वे 5 दिसंबर से झारखंड असेंबली के विंटर सेशन से पहले बुधवार को लौट सकते हैं।

भाजपा ने गठबंधन की संभावना को नकारा

इन अटकलों के बीच, भाजपा ने भी जेएमएम के साथ किसी भी समझौते की संभावना से साफ इनकार किया है। झारखंड भाजपा के प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने कहा कि भाजपा और जेएमएम 'समुद्र के दो किनारे' हैं, जिनके बीच की दूरी इतनी है कि वे एक-दूसरे को देख भी नहीं सकते। उन्होंने जोर दिया कि दोनों पार्टियों की नीतियाँ बिल्कुल विपरीत हैं।

जेएमएम और कांग्रेस का कड़ा खंडन

जेएमएम और कांग्रेस दोनों ने इन अफवाहों को सिरे से खारिज़ करते हुए विपक्ष पर निशाना साधा है। जेएमएम के केंद्रीय महासचिव विनोद पांडे ने मुख्यमंत्री के दिल्ली प्रवास को एक 'निजी यात्रा' बताया। उन्होंने भाजपा पर 'फेक एजेंडा' चलाने का आरोप लगाया और कहा कि बाकी जो कुछ भी फैलाया जा रहा है, वह सिर्फ बीजेपी का एजेंडा है, जो फर्जी खबरें फैलाकर झारखंड में खुद को प्रासंगिक बनाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि सीएम शीतकालीन सत्र से पहले जरूर लौटेंगे।

कांग्रेस विधायक दल के उप नेता राजेश कच्छप ने भाजपा को चेतावनी दी कि वह गठबंधन सरकार को अस्थिर करने में पहले भी नाकाम रही है। उन्होंने कहा कि आगामी राज्यसभा चुनावों से पहले, यह भाजपा की ओर से प्रायोजित अफवाहें हैं, जो लोगों में भ्रम पैदा करने की कोशिश कर रही है।

कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता लाल किशोर नाथ शाहदेव ने कहा कि सीएम के दिल्ली जाने का मतलब सरकार बदलना नहीं है। उन्होंने कहा कि भाजपा आईटी सेल लगातार अफवाहें फैलाकर अस्थिरता पैदा करना चाहती है, लेकिन वे सफल नहीं होंगे।

चर्चा तो यह भी है कि डिप्टी सीएम के पद को लेकर भी बातचीत फाइनल हो गई है। अब अगर हेमंत सोरेन एनडीए में जाने का फैसला करते हैं तो झारखंड विधानसभा में समीकरण क्या होंगे?

झारखंड की कुल 81 विधानसभा सीट में बहुमत के लिए 41 चाहिए। अभी सरकार हेमंत सोरेन चला रहे हैं। उनकी पार्टी झामुमो के पास 34 सीटें हैं। उनके साथ गठबंधन में कांग्रेस, राजद और लेफ्ट हैं। कांग्रेस के पास 16, राजद के पास 4 और लेफ्ट के पास 2 विधायक हैं। कुल संख्या 56 है।

वहीं, अगर हेमंत सोरेन एनडीए के साथ जाने का फैसला करते हैं तो नंबर गेम काफी बदल जाएगा। जेएमएम के पास 34, बीजेपी के पास 21, लोजपा के पास 1, आजसू के पास 1, जेडीयू के पास 1 सीट है। ऐसे में कुल 58 विधायक होंगे, जो बहुमत से काफी ज्यादा होंगे।

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