आज मेरे एक मित्र ने मेरा UGC पर कल लिखे लेख पर कहा कि “आपके मन में ब्राह्मणों के बहुत नफरत है”। मैंने उन्हें कहा ऐसा बिल्कुल नहीं है, ब्राह्मण सदैव आदरणीय हैं लेकिन आज भटके हुए हैं लेकिन हो सकता है इसके कुछ कारण हों लेकिन जो नफरत उन्होंने पाल ली है मोदी के लिए और मैं बस उसे ही दूर करने का प्रयास कर रहा हूँ।
![]() |
| लेखक चर्चित YouTuber |
मोदी ने क्या नहीं दिया देश को और समाज के हर वर्ग को। कांग्रेस कभी राम मंदिर नहीं बनने देती लेकिन मोदी ने बनवाया, वह क्या केवल SC/ST/OBC के लिए है, क्या वह सवर्णों और खासकर ब्राह्मणों के लिए नहीं है; देश में आज करीब 1600 startups हैं जो लाखों लोगों को रोजगार दे रहे हैं और उसमें भी 125 Unicorns हैं जिनकी हर एक की वैल्यू एक बिलियन डॉलर है मतलब 9000 करोड़ रुपये है। क्या उन्हें चलने वाले सवर्ण/ब्राह्मण नहीं होंगे; देश भर में वंदे भारत ट्रेन चलाई जा रही हैं, क्या उनमें सवर्णो / ब्राह्मणो को यात्रा के अनुमति नहीं है। Digital Payment का लाभ क्या किसी खास वर्ग को मिल रहा है और क्या सवर्ण/ब्राह्मण समाज उसका लाभ नहीं उठा रहे। देश भर फैलाया गया Infrasturucture समाज के सभी वर्गों के लिए किया गया और आज EU से व्यापार समझौता भी सभी वर्गों को लाभ देगा न कि किसी एक समुदाय को। देश को ताकतवर बनाया है सभी की सुरक्षा के लिए किसी एक समुदाय के लिए नहीं -ये तो कुछ ही चीज़े हैं जो सर्वसमाज के लिए हुई हैं।
लेकिन फिर भी केवल एक UGC को लेकर सवर्ण समाज(ब्राह्मणों) ने मोदी को अपनी नफरत का अधिकारी बना दिया है। यह उचित नहीं है। ये लोग ओवैसी की भाषा भूल रहे हैं। उसने कहा था कि जब मोदी हिमालय पर चले जाएंगे और योगी मठ में चले जाएंगे तब तुम्हें कौन बचाएगा क्योंकि मुसलमान कुछ नहीं भूलेंगे, वक्त का इंतज़ार कर रहे हैं। कल्पना कीजिए अगर मोदी योगी न रहे तो वो क्या कर सकते हैं जो आए दिन हिंदुओं को धमकी दे रहे हैं।
UGC के नियम मैं फिर कहता हूं सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर लाए गए हैं जिसमें सबसे गलत प्रावधान झूठी शिकायतों पर कोई कार्रवाई न करने का है। दूसरा OBC वर्ग में जातीय भेदभाव का फायदा मुसलमानों को भी दिया गया है वह गलत है क्योंकि मुसलमानों में जातीय व्यवस्था नहीं हैं।
सरकार ने तो संसद में 15 दिसंबर को The Viksit Bharat Shiksha Adhishthan Bill, 2025 पेश किया था जो अभी संसदीय समिति के पास है। इस विधेयक के पारित होने के बाद UGC, All India Council for Technical Education (AICTE) और National Council for Teacher Education (NCTE) को ख़त्म करके एक नया प्राधिकरण बनाया जाएगा जिसके नियम अलग से तय किए जाएंगे और UGC के नए नियम स्वत ही समाप्त हो जाएंगे। इस प्राधिकरण में Legal और Medical Education का कोई स्थान नहीं होगा।
इसलिए यह कहना उचित नहीं होगा कि सरकार के किसी कानून में UGC के नियम बने है और उसके इन नियमों के विरोध में सुप्रीम कोर्ट जाया जा सकता है। कुछ वकीलों के नाम लोग लिख रहे हैं कि उन्होंने PIL दायर की है लेकिन गूगल पर उसमें किसी का नाम नहीं है केवल दो नाम है विनीत जिंदल और नीरज शर्मा के। इस बारे में सही जानकारी ही सोशल मीडिया पर देनी चाहिए।

No comments:
Post a Comment