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सुप्रीम कोर्ट ने किसके दबाव में यमुना सफाई पर रोक लगाई थी और क्यों? पहले ही साफ हो गई होती यमुना, लेकिन केजरीवाल ने नहीं होने दिया: दिल्ली के LG ने AAP सरकार की कारस्तानी उजागर की

दिल्ली में यमुना की सफाई चालू 
पिछले कुछ समय से सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों पर उंगलियां उठ रही है। यह भी शक किया जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट जनहित में निर्णय देने की बजाए Deep State के इशारे पर अपने फैसले देती है। आखिर किस के दबाव में सुप्रीम कोर्ट ने यमुना की सफाई पर रोक लगाई थी? क्या यमुना के गन्दा रहने में भूतपूर्व मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल के साथ सुप्रीम कोर्ट और कोर्ट में अर्जी लगाने वाला वकील भी दोषी है? सभी खोजी पत्रकार और चैनल भी इस षड़यंत्र पर चुप्पी साधे रहे, क्यों? दिल्ली और केंद्र सरकारों को इन जन-विरोधियों पर सख्त कार्यवाही करनी चाहिए। कौन था सुप्रीम कोर्ट में अर्जी लगाने वाला वकील?     

दिल्ली सरकार गठन से पहले अगर ये विनाशकारी षड़यंत्र सामने आने लगे हैं, गठन के बाद और कितना गंद बाहर आएगा यह मुफ्त रेवड़ियों के मकड़जाल फंस लालची लोगों को अपनी आत्मा/जमीर को धिक्कारना होगा। Many heads to roll. कितना बड़ा अनर्थ किया रहा था? यमुना गन्दी होने से मछली उद्योग भी प्रभावित था क्योकि इतने गंदे पानी में मछली तो क्या कोई जन्तु जीवित नहीं रह सकता।  

उपराज्यपाल विनय सक्सेना का वीडियो सुन स्मरण आते हैं शायद भगत थे, उन्होंने ने वर्तमान उपराज्यपाल की तरह पैदल चल लोगों की समस्याओं को जाना था। उपराज्यपाल सक्सेना ही धन्य है कि वह विकास पुरुष नरेंद्र मोदी के राज में है अन्यथा इनका भी भगत जी वाला हश्र होता।

बात 1986/87 की है जामा मस्जिद क्षेत्र में सुबह मुर्गा मंडी लगती थी। ट्रैफिक जाम रहता था, जिस वजह से स्कूल जाने वाले बच्चों को जरुरत से ज्यादा दिक्कत होती थी। अख़बारों में समाचार छपते थे, लेकिन पुलिस से लेकर सरकार तक मुस्लिम तुष्टिकरण में लगे हुए थे। उपराज्यपाल महोदय स्वयं मौके पर गए और लगभग 2 घंटे तक उनकी कार फंसी रही। सचिव ने पुलिस को सूचित करने को जैसे ही कहा उन्होंने मना कर दिया। खैर क्षेत्र का दौरा कर चुपचाप कार्यालय जाकर अतिक्रमण हटाने को आदेश दे दिया। अंजाम यह हुआ कि इलाके के प्रभावी द्वारा अधिकारी के थप्पड़ मारने पर उनका चश्मा गिर गया। अपना चश्मा उठाने जब अधिकारी झुका प्रभावी के इशारे पर अधिकारी का ढोल बजा दिया। लेकिन उस थप्पड़ और पब्लिक द्वारा अधिकारी का ढोल बजाने की गूंज ने उपराज्यपाल महोदय को सख्त होने पर मजबूर कर दिया।

अपने अधिकारी की बेइज्जती देख क्षेत्र को छावनी बना जामा मस्जिद सर्विस लेन साफ, मुर्गा मंडी साफ अतिक्रमण साफ और मोटर पार्ट्स वालों का सामान क्रेन से दुकानों के अंदर फेंकवा दिया। चावड़ी बाजार मोड़ से लेकर दरिया गंज तक तंग दिखने वाली सड़क चौड़ी दिखने लगी। दुर्भाग्य से सरकार ने उनकी सख्ती देख उनको उनके पद से हटा दिया। आज क्षेत्र में फिर जरुरत से ज्यादा अतिक्रमण हो गया है। देखना है सरकार का इस तरफ कब ध्यान होगा?     

दिल्ली में आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार जाते ही यमुना नदी की सफाई चालू हो गई है। यमुना की सफाई के लिए सबसे पहले बड़ी मशीनें गंदगी निकालने को लगाई गई हैं। यमुना सफाई का यह काम दिल्ली के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना के प्रयास के बाद चालू हुआ है। इस बीच उनका एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें वह बता रहे हैं कि केजरीवाल सरकार के दौरान क्यों यमुना साफ़ नहीं हो पाई और कैसे मुख्यमंत्री रहते हुए अरविन्द केजरीवाल ने ही यमुना की सफाई के खिलाफ रोक लगवा दी थी।

दिल्ली में रविवार (16 फरवरी, 2025) को  ट्रैश स्कीमर, वीड हार्वेस्टर और ड्रेज यूटिलिटी क्राफ्ट जैसी बड़ी-बड़ी मशीनें यमुना के लिए भेजी गईं। इन मशीनों को यमुना में उतार कर जलकुम्भी और पानी की सतह पर पड़ा कचरा उठाया जाने लगा। इसके अलावा ड्रेजर के जरिए यमुना के भीतर से कूड़ा निकाला जा रहा है। इसकी वीडियो भी सामने आई हैं। यमुना में कूड़ा निकालने के अलावा खरपतवार निकालने पर भी काम चल रहा है। यमुना गन्दी ना हो, इसके लिए 4 सूत्रीय कार्यक्रम बनाया गया है।

LG विनय कुमार सक्सेना ने बताया है कि सबसे पहले यमुना से कूड़ा कचरा निकाला जाएगा। दूसरे चरण में यमुना में गंदगी लाने वाले हर प्रकार के नाले की सफाई की जाएगी। तीसरे चरण में दिल्ली सीवर ट्रीटमेंट कैपेसिटी को सही चलाने पर काम होगा। इसके बाद चौथे चरण में दिल्ली में सीवर क्षमता बढ़ाने, नए STP बनाने, नए नाले बनाने समेत बाकी इन्फ्रा से जुड़े हुए काम होंगे। यह रणनीति लागू करने के लिए LG सक्सेना ने दिल्ली सरकार के अफसरों से भी मुलाक़ात की है।

यमुना साफ़ करने को लेकर लगातार प्रयास चलते आए हैं लेकिन दिल्ली की केजरीवाल सरकार ही इसमें अडंगा लगाती रही है। यह खुलासा भी विनय सक्सेना ने किया है। उन्होंने इस संबंध में भाजपा के पूर्व राज्यसभा एमपी विनय सहस्त्रबुद्धे के साथ पॉडकास्ट में खुलासा किया है कि यमुना सफाई का काम अरविन्द केजरीवाल की AAP सरकार ने सुप्रीम कोर्ट जाकर रुकवाया था।

LG सक्सेना ने बताया, “नजफगढ़ नाले से ही 74% कचरा यमुना में आता है। हमने उसको साफ़ करने का बीड़ा उठाया था। नजफगढ़ नाले का 20 किलोमीटर और यमुना का 11 किलोमटर का एरिया हमने साफ करवाना चालू किया था। इसमें जनता ने भी सहभागिता की। हमने NGT के मुखिया को बुलाया और यमुना तथा नजफगढ़ नाला दिखाया… उन्होंने हमारे काम को देख कर सभी विभागों की एक उच्च स्तरीय कमिटी बनाई जिसमें राज्य और केंद्र के विभाग शामिल थे। उन्होंने मुझे इसका चेयरमैन बना दिया।”

उन्होंने आगे बताया, “केजरीवाल साहब मुझसे हमेशा मिलते थे और मेरे काम की प्रशंसा करते थे। वह कहते थे कि हम यह नहीं कर पाए लेकिन आप कर रहे हैं और हम इस में आपका साथ देंगे। मैंने एक बार उनको नजफगढ़ नाला दिखाने के लिए बुलाया। उनको इस बात की जानकारी ही नहीं थी कि 57 किलोमीटर का नजफगढ़ नाला भी दिल्ली में है। इसके कुछ ही दिनों के बाद एक सुप्रीम कोर्ट का ऑर्डर आया और यमुना की सफाई पर रोक लग गई।” LG विनय सक्सेना की यह बातचीत आप नीचे लगे वीडियो में 30 मिनट के बाद सुन सकते हैं।

LG सक्सेना ने बताया कि इस आदेश के लिए केजरीवाल सरकार सुप्रीम कोर्ट गई थी। उन्होंने बताया कि केजरीवाल यमुना सफाई का क्रेडिट नहीं किसी को ले जाने देना चाहते थे, इसीलिए वह सुप्रीम कोर्ट गए। उन्होंने बताया कि तब से ही यमुना में सफाई का काम रुक गया।