Showing posts with label #Cyclospora outbreak. Show all posts
Showing posts with label #Cyclospora outbreak. Show all posts

US में साइक्लोस्पोरियासिस का प्रकोप, तेजी से फैल रहा आँखों से न दिखने वाला यह खतरनाक पैरासाइट: जानिए, कैसे ये भारत में भी फैल सकता है, बचाव के लिए करें कौन से उपाय

अमेरिका के कई राज्यों में इन दिनों एक छोटा पैरासाइट यानी पैरासाइट के कारण फैली बीमारी ने स्वास्थ्य अधिकारियों और आम जनता की चिंता को काफी बढ़ा दिया है। इस बीमारी का नाम साइक्लोस्पोरियासिस है, जो मुख्य रूप से हमारे पाचन तंत्र पर हमला करती है।

हाल के हफ्तों में इस संक्रमण के मामलों में अप्रत्याशित और बहुत तेजी से बढ़ोतरी देखी गई है, जिसके कारण अस्पतालों और जाँच प्रयोगशालाओं पर भारी दबाव बन गया है।

इस बीमारी की चपेट में आने वाले मरीजों को बेहद गंभीर गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, जिसमें हफ्तों तक चलने वाले अनियंत्रित और बहुत तेज दस्त यानी डायरिया की शिकायत सबसे ज्यादा है।

मिशिगन जैसे राज्य में तो स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि वहाँ कुछ ही दिनों के भीतर सैकड़ों मामले दर्ज किए गए हैं, जो आम दिनों के मुकाबले कई गुना ज्यादा हैं। हालाँकि स्वास्थ्य विभाग और संघीय एजेंसियाँ लगातार इस बात की जाँच कर रही हैं कि आखिर इस संक्रमण की मुख्य वजह क्या है, लेकिन अभी तक किसी भी एक विशेष खाद्य पदार्थ, ब्रांड या सप्लायर की पहचान नहीं हो सकी है।

शुरुआती जाँच में दूषित ताजे फल और सब्जियों को इसका मुख्य कारण माना जा रहा है, क्योंकि यह पैरासाइट अक्सर खेतों और फसलों के जरिए ही इंसानी आबादी तक पहुँचता है। चूँकि भोजन की आपूर्ति श्रृंखला कई राज्यों से होकर गुजरती है, इसलिए इस संक्रमण के सटीक स्रोत का पता लगाना जाँच कर्ताओं के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।

क्या है साइक्लोस्पोरियासिस और कैसे होता है इसका हमला

साइक्लोस्पोरियासिस असल में भोजन या पानी के जरिए फैलने वाली एक गंभीर बीमारी है, जो एक बेहद छोटे और छोटा  पैरासाइट  साइक्लोस्पोरा कायटैनेन्सिस के कारण होती है।

सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन यानी CDC के मुताबिक, यह पैरासाइट इंसानी आँखों से दिखाई नहीं देता और जब कोई व्यक्ति इससे दूषित खाना या पानी लेता है, तो यह उसके शरीर के भीतर प्रवेश कर जाता है।

शरीर में पहुँचने के बाद यह पैरासाइट मुख्य रूप से छोटी आंत को अपना निशाना बनाता है और वहाँ जाकर अपनी संख्या बढ़ाने लगता है, जिससे आँतों का सामान्य कामकाज पूरी तरह प्रभावित हो जाता है।

यह संक्रमण आम तौर पर गर्मी के महीनों में यानी मई की शुरुआत से लेकर अगस्त के अंत तक बहुत ज्यादा सक्रिय रहता है क्योंकि इस मौसम में इस पैरासाइट के पनपने की अनुकूल परिस्थितियाँ होती हैं।

हालाँकि यह बीमारी आमतौर पर जानलेवा नहीं मानी जाती है, लेकिन अगर इसका सही समय पर इलाज न किया जाए तो यह हफ्तों तक शरीर को निचोड़ सकती है। सबसे खास बात यह है कि इसके लक्षण एक बार ठीक होने के बाद दोबारा वापस आ सकते हैं, जिससे मरीज लंबे समय तक कमजोरी और थकावट महसूस करता रहता है।

शरीर पर दिखने वाले लक्षण और डायरिया का खतरनाक रूप

जब कोई व्यक्ति इस खतरनाक पैरासाइट के संपर्क में आता है, तो उसके शरीर में तुरंत लक्षण दिखाई नहीं देते बल्कि इसे उभरने में दो दिन से लेकर चौदह दिन तक का समय लग सकता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, इस संक्रमण का सबसे प्रमुख और डरावना लक्षण पानी जैसा तेज दस्त होना है, जिसे कई बार विस्फोटक मलत्याग भी कहा जाता है। इसके अलावा मरीजों को पेट में बहुत तेज और असहनीय मरोड़ या ऐंठन महसूस होती है, जो उन्हें पूरी तरह से बेहाल कर देती है।

संक्रमण के अन्य लक्षणों में लगातार जी मिचलाना, उल्टी होना, शरीर में भारी थकान, भूख में भारी कमी आना और बहुत तेजी से वजन का घटना शामिल है। इसके अतिरिक्त मरीजों को पेट में बहुत ज्यादा गैस बनने, शरीर में तेज दर्द होने और हल्का बुखार रहने की शिकायत भी होती है।

नोरोवायरस जैसे आम पेट के इन्फेक्शन के विपरीत, जो कुछ ही दिनों में खुद-ब-खुद ठीक हो जाता है, साइक्लोस्पोरियासिस का असर बहुत लंबा चलता है। इसके गंभीर दौर में मरीजों के शरीर से पानी इतनी तेजी से निकलता है कि उन्हें डिहाइड्रेशन यानी पानी की गंभीर कमी के कारण अस्पताल में भर्ती तक कराना पड़ जाता है।

अमेरिका में अचानक बढ़े मामले और जाँच की जमीनी हकीकत

इस समय अमेरिका के कई राज्यों जैसे मिशिगन, ओहियो, इलिनोइस, न्यूयॉर्क, टेक्सास, नॉर्थ कैरोलिना और इंडियाना में इस संक्रमण के मामलों में भारी उछाल आया है।

मिशिगन के स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, वहाँ पिछले कुछ ही हफ्तों में मामलों की संख्या तेजी से बढ़कर सात सौ से ऊपर पहुँच गई है, जबकि आम तौर पर इस पूरे राज्य में सालभर में सिर्फ चालीस से पचास मामले ही सामने आते थे।

मिशिगन के दक्षिण-पूर्वी हिस्से के कई काउंटियों जैसे मोनरो, वाश्टेनॉ, लेनावी, शियावासी, वेन, जैक्सन, ओकलैंड और लिविंगस्टन में इसका सबसे घातक असर देखा जा रहा है। 

मामलों की संख्या इतनी ज्यादा है कि मरीजों का परीक्षण करने वाली प्रयोगशालाएँ पूरी तरह से थक चुकी हैं और जहाँ पहले टेस्ट की रिपोर्ट चौबीस घंटे में आ जाती थी, वहीं अब इसमें दो से तीन दिन का समय लग रहा है।

इस भारी दबाव के कारण डॉक्टरों को यह भी सोचना पड़ रहा है कि अगर जाँच में देरी जारी रही, तो वे केवल लक्षणों के आधार पर ही इलाज शुरू कर देंगे। मिशिगन की मुख्य चिकित्सा कार्यकारी डॉ नताशा बगदासारियन ने बताया कि इतने बड़े पैमाने पर मरीजों का इंटरव्यू लेना और उनके खान-पान का पता लगाना मुस्किल काम हो गया है।

स्वास्थ्य कर्मी दिन-रात काम करके मरीजों की ग्रोसरी लिस्ट खंगाल रहे हैं और यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि उन्होंने पिछले दिनों में किस रेस्टोरेंट में क्या खाया था।

कैसे फैलता है यह पैरासाइट और क्यों है इसे ढूँढना मुश्किल

साइक्लोस्पोरा पैरासाइट के फैलने का मुख्य जरिया इंसानी मल यानी व्हीकल-ओरल रूट होता है, जब किसी संक्रमित व्यक्ति के मल से दूषित हुआ पानी या मिट्टी फसलों के संपर्क में आती है।

हालाँकि स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने यह साफ किया है कि यह बीमारी सीधे तौर पर एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में तुरंत नहीं फैलती है, क्योंकि शरीर से बाहर निकलने के बाद इस पैरासाइट के अंडों को पर्यावरण में संक्रामक यानी एक्टिव होने के लिए कम से कम एक से दो सप्ताह का समय चाहिए होता है।

इसका सीधा मतलब यह है कि यह संक्रमण घर में खाना पकाने के दौरान नहीं, बल्कि सीधे खेतों के स्तर पर असुरक्षित सिंचाई जल या खराब स्वच्छता के कारण फैलता है। चूँकि बहुत से फल और सब्जियाँ कच्चे ही खाए जाते हैं, इसलिए वे इस संक्रमण को फैलाने के सबसे बड़े वाहक बन जाते हैं।

इस जाँच को सबसे ज्यादा जटिल अमेरिका की विशाल फूड सप्लाई चेन बनाती है, जहाँ एक राज्य में उगाई गई फसल को दूसरे राज्य में पैक और प्रोसेस किया जाता है और फिर उसे देश के दर्जनों अलग-अलग राज्यों में बिक्री के लिए भेज दिया जाता है।

पूर्व में हुए इसके आउटब्रेक बताते हैं कि पैक्ड सलाद, धनिया, तुलसी, रास्पबेरी, स्नो पीज और हरी प्याज जैसी चीजें इसके फैलने का मुख्य कारण रही हैं और इस बार भी FDA and CDC प्याज, खीरा और धनिए जैसी चीजों पर अपनी जाँच केंद्रित कर रहे हैं।

संक्रमण से बचाव के उपाय और फल-सब्जियों को साफ करने के तरीके

इस पैरासाइट से सुरक्षित रहने के लिए स्वास्थ्य अधिकारियों और न्यूयॉर्क राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने बहुत ही कड़े दिशा-निर्देश और व्यावहारिक सुझाव जारी किए हैं। चूँकि यह पैरासाइट फल और सब्जियों की सतह से बहुत मजबूती से चिपक जाता है, इसलिए केवल साधारण पानी से इसे ऊपर-ऊपर से धो देना काफी नहीं होता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि रास्पबेरी जैसी बेरीज को साफ करना और भी मुश्किल होता है क्योंकि उनके ऊपर छोटे-छोटे बाल होते हैं जिनमें यह पैरासाइट आसानी से छिपा रहता है। इससे बचने के लिए सबसे पहले ताजी सब्जियाँ या फल छूने से पहले और बाद में अपने हाथों को साबुन और पानी से बहुत अच्छे से धोना चाहिए।

सभी कटी हुई या पकी हुई सब्जियों को तैयार करने के दो घंटे के भीतर तुरंत रेफ्रिजरेटर में रख देना चाहिए। इसके अलावा सलाद के पत्तों को इस्तेमाल करने से पहले उनके बाहरी पत्तों को पूरी तरह से हटाकर फेंक देना चाहिए और खीरे या तरबूज जैसी सख्त चीजों को साफ ब्रश से अच्छी तरह रगड़कर धोना चाहिए।

किसी भी फल या सब्जी के खराब हिस्से को खाने से पहले काटकर अलग कर देना चाहिए। हालाँकि इसे जमाने यानी फ्रीज करने से इस पैरासाइट के मरने की कोई गारंटी नहीं होती है, लेकिन भोजन को कम से कम 158 डिग्री फारेनहाइट यानी 70 डिग्री सेल्सियस तक अच्छी तरह पकाना इसे खत्म करने का एकमात्र सबसे सुरक्षित और निश्चित तरीका है।

चिकित्सा परामर्श की आवश्यकता और इलाज के उपलब्ध विकल्प

यदि किसी व्यक्ति को लगातार कई दिनों तक पानी जैसे दस्त हो रहे हों, पेट में तेज मरोड़ उठ रही हो या शरीर में पानी की कमी के लक्षण जैसे चक्कर आना, अत्यधिक प्यास लगना, पेशाब कम होना और बहुत ज्यादा कमजोरी महसूस हो रही हो, तो उसे बिना किसी देरी के तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

इम्यूनोकॉम्प्रोमाइज्ड यानी कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों के लिए यह संक्रमण और भी ज्यादा खतरनाक हो सकता है क्योंकि उनके शरीर में यह बीमारी लंबे समय तक टिकी रह सकती है और उन्हें ठीक होने में बहुत ज्यादा समय लगता है।

हालाँकि अभी तक इस संक्रमण से किसी के भी मौत की खबर नहीं आई है, लेकिन स्थिति बिगड़ने से रोकने के लिए समय पर इलाज बहुत जरूरी है।