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दिल्ली : सरकारी स्कूलों में साल 2021-22 में कितने बच्चे प्राइवेट स्कूल से आए?


कहावत है सच एक होता है झूठ कई होते हैं। यह भी कहा जाता है कि सच में इतनी ताकत होती है कि कितनी ही सफाई से झूठ बोली जाए एक दिन वह पकड़ में आ ही जाती है। झूठ की खेती करने वाले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल तमाम मुद्दों पर झूठ बोलकर जनता को बरगलाने का काम करते रहे हैं। खस्ताहाल दिल्ली के स्कूलों से सभी वाकिफ हैं लेकिन केजरीवाल दिल्ली के शिक्षा मॉडल का ढोल पीटने के लिए तब भी उतारू दिखते हैं और इसी उतावलापन में उनकी झूठ पकड़ी जाती है। 

कोरोना काल में बड़ी संख्या में लोगों को नौकरी गंवानी पड़ी और आर्थिक संकट की वजह से अभिभावक अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूल से सरकारी स्कूल में दाखिला कराने को मजबूर हुए। केजरीवाल अगर संवेदनशील होते तो उन दुखी अभिभावकों के साथ खड़ा दिखते लेकिन इसमें भी उन्होंने अपनी मार्केटिंग तलाश कर ली। कोरोना काल में साल 2021-22 में दिल्ली के सरकारी स्कूलों में करीब 1.60 लाख बच्चे प्राइवेट स्कूल से आए। अब इस मुद्दे पर केजरीवाल का झूठ देखिए। पहले केजरीवाल की करीबी नेता आतिशी ने कहा कि 2 लाख बच्चे प्राइवेट स्कूलों से सरकारी स्कूलों में आए। उसके बाद केजरीवाल ने पांच बार इस मुद्दे पर चर्चा की और उन्होंने जो आंकड़े दिए वह चौंकाने वाले हैं। पहले उन्होंने कहा कि 2.5 लाख बच्चे प्राइवेट स्कूलों से सरकारी स्कूलों में आए। फिर कहा 2.7 लाख, उसके बाद 3.7 लाख, फिर 3.75 और उसके बाद 4 लाख बता दिया। इसके बाद मैदान में उतरे पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और उन्होंने कहा कि 4.5 लाख बच्चे प्राइवेट स्कूलों से सरकारी स्कूलों में आए।

दिल्ली में कितने बच्चे प्राइवेट स्कूलों से सरकारी स्कूलों में आए, इस पर केजरीवाल और उनके नेताओं की जुबानी सुनिएः

दरअसल 2021-22 कोरोना की वजह से कई लोगों ने अपनी नौकरी गंवा दी थी जिससे अभिभावक अपने बच्चों को प्राइवेट से सरकारी स्कूल में भेजने पर मजबूर हुए थे। इसके पीछे वो कारण नहीं था कि दिल्ली के सरकारी स्कूल अच्छे हो गए हैं तो बच्चों को पढ़ाने के लिए वहीं भेजते हैं। अगर ऐसा है तब तो दिल्ली में आम आदमी पार्टी के सभी नेताओं को अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में दाखिला करना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं है। यहां तक कि एक इंटरव्यू में दिल्ली के शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया से पूछा गया कि दिल्ली के सरकारी स्कूल इतने बेहतर हैं तो आप अपने बच्चे को वहां क्यों नहीं पढ़ाते। इस पर उन्होंने साफ इनकार कर दिया और कहा- नहीं मेरे बच्चे जहां पढ़ते हैं वहीं पढ़ेंगे।

 कोरोना काल में 1.58 लाख छात्रों ने प्राइवेट स्कूलों से सरकारी स्कूलों में दाखिला लिया

तथ्यों की बात करें तो दिल्ली के विभिन्न प्राइवेट स्कूलों में पढ़ने वाले लगभग 2.4 लाख छात्रों ने एकेडमिक ईयर 2021-22 के लिए दिल्ली के सरकारी स्कूलों में एडमिशन के लिए अप्लाई किया। इनमें नर्सरी से लेकर कक्षा 12 में एडमिशन के लिए आवेदन किया गया। 1.58 लाख से छात्रों का एडमिशन पूरा किया गया। सरकारी स्कूलों के प्रिंसिपल्स का कहना है कि इन एडमिशन में 9वीं और 11वीं कक्षा में ज्यादा एडमिशन हुए हैं और वे इस बढ़ोतरी की वजह कोविड -19 में अभिभावकों को हुआ आर्थिक नुकासन बताते हैं। दिल्ली के शिक्षा निदेशालय (DoE) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2021 में लगभग 1030 सरकारी स्कूलों में कक्षा नर्सरी से कक्षा 12 तक के लिए 2 लाख 36 हजार 522 आवेदन प्राप्त हुए थे। इसके तहत 1 लाख 58 हजार 484 छात्रों को एडमिशन दिया गया। दिल्ली शिक्षा विभाग के अनुसार वर्ष 2021 में दिल्ली सरकार के स्कूलों में एनरोल स्टूडेंट्स की कुल संख्या 17.67 लाख तक पहुंच गई है। 2020-21 में यह आंकड़ा 16.28 लाख था, जबकि 2019-20 में यह 15.05 लाख था

प्राइवेट से सरकारी स्कूलों में क्यों गए बच्चे

कोविड -19 के कारण वित्तीय समस्याओं का सामना करने वाले बहुत से माता-पिता ने अपने बच्चों को निजी स्कूलों से सरकारी स्कूलों में शिफ्ट किया। इसका मुख्य कारण निजी स्कूलों द्वारा ली जा रही फीस है। बहुत से पेरेंट्स को लगता है कि चूंकि महामारी के दौरान कक्षाएं ऑनलाइन संचालित की जा रही हैं, इसलिए स्कूल की फीस इतनी अधिक नहीं होनी चाहिए। लॉकडाउन में ज्यादातर स्कूल बंद होने से बच्चों की पढ़ाई पर असर पड़ा। पूरे भारत के स्कूलों को ऑनलाइन शिक्षा में शिफ्ट करना पड़ा। माता-पिता को ऑनलाइन पढ़ाने के लिए स्कूल को ट्यूशन फीस देने के साथ-साथ एक लैपटॉप या स्मार्टफोन की व्यवस्था करनी पड़ी। एक और कारण यह है कि महामारी के कारण बड़े पैमाने पर लोगों की नौकरी चली गई और आर्थिक कठिनाइयों का कारण बना।

केजरीवाल-सिसोदिया के शिक्षा मॉडल की खुली पोल: दसवीं की टॉप 10 रैंकिंग से दिल्ली बाहर

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया सरकारी स्कूलों में पढ़ाई को लेकर देश-दुनिया में काफी ढिंढोरा पीटते रहते हैं। हर जगह दिल्ली मॉडल की बात करते हैं, लेकिन आपको यह जानकर हैरानी होगी कि केजरीवाल सरकार आने के बाद से स्कूली शिक्षा में काफी गिरावट आई है। मनीष सिसोदिया दिल्ली के सरकारी स्कूलों को प्राइवेट स्कूलों से बेहतर बताते हैं, लेकिन इस साल के दसवीं के नतीजे देखकर आप खुद जान जाएंगे कि हकीकत क्या हैं। दिल्ली में सरकारी स्कूलों के दसवीं का रिजल्ट 81.27 प्रतिशत रहा है, जो देश के ओवरऑल 94.40 प्रतिशत से काफी कम है। दिल्ली ना सिर्फ रिजल्ट बल्कि रैंकिंग के मामले में काफी नीचे आ गई है। दसवीं की रैंकिंग में दिल्ली टॉप 10 से बाहर हो गई है। दिल्ली को 15वें नंबर से संतोष करना पड़ा है। नोएडा और पटना रैंकिंग में दिल्ली से आगे हैं। इतना ही नहीं इस बार दिल्ली 10वीं और 12 वीं दोनों की रैंकिंग में टॉप तीन से बाहर है। ये है केजरीवाल के शिक्षा का दिल्ली मॉडल।

सिसोदिया को छोड़कर एक भी शिक्षामंत्री नहीं जो सुबह 6 बजे स्कूलों का दौरा करता हो: केजरीवाल

केजरीवाल अपने झूठ के जाल में कैसे फंस जाते हैं इसकी बानगी देखिए। दिल्ली में शिक्षा व्यवस्था को विफल करने के बाद गुजरात के भावनगर में केजरीवाल ने कहा, ”आज मैं अपने साथ देश ही नहीं दुनिया के सबसे अच्छे शिक्षामंत्री मनीष सिसोदिया को लेकर आया हूं। इन्हें(BJP) लगता है दुनिया में सबकुछ बिकता है। 75 साल के इतिहास में एक भी शिक्षामंत्री का नाम मुझे बता दे कोई जो सुबह 6 बजे स्कूलों को दौरा करता हो?” इसके बाद लोग पूछने लगे कि भला 6 बजे जब स्कूल खुलता ही नहीं है तो वो दौरा किस बात का करने जाते हैं।

नवोदय विद्यालय के लिए नहीं दी जमीन

लोकसभा में दिल्ली के स्कूल पर उठाए गए एक सवाल के जवाब में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की ओर से मनोज तिवारी को पत्र लिखकर जानकारी दी गई थी। प्रधान ने कहा कि 2016-17 के दौरान देशभर में 62 नए जवाहर नवोदय विद्यायल स्‍वीकृत किए गए थे। इनमें से 7 नए नवोदय विद्यालय दिल्‍ली के तहत स्‍वीकृत किए गए थे। हालांकि, दिल्‍ली सरकार की ओर से इन नवोदय विद्यालयों की स्‍थापना के लिए जरूरी भूमि और स्‍थायी आवास उपलब्‍ध न कराए जाने से ये विद्यालय शुरू नहीं हो पाए। इससे पता चलता है कि केजरीवाल सरकार शिक्षा को लेकर कितना संजीदा है।

जिस ‘दिल्ली मॉडल’ का इतना ढोल पीटते हैं केजरीवाल, उसके 1027 में से 824 स्कूल में कोई प्रिंसिपल नहीं; 203 कार्यवाहक प्रिंसिपल

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने 12 अप्रैल, 2022 को दिल्ली के सरकारी स्कूलों में प्रिंसिपल के 824 रिक्त पदों पर स्पष्टीकरण माँगा। दिल्ली के मुख्य सचिव विजय देव को लिखे पत्र में शीर्ष बाल अधिकार निकाय ने कहा है कि अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो के नेतृत्व में एक टीम ने राष्ट्रीय राजधानी के कई स्कूलों का दौरा किया और बुनियादी ढाँचे एवं अन्य पहलुओं के संबंध में खामियाँ पाईं। इसमें आगे कहा गया है कि टीम ने जिन स्कूलों का दौरा किया, उनमें से अधिकतर स्कूलों में स्कूल के प्रमुख (HoS) नहीं थे। यह पद खाली था।

NCPCR ने उल्लेख किया कि NCT सरकार के शिक्षा विभाग के तहत कुल 1027 स्कूल आते हैं। इनमें से केवल 203 में हेड मास्टर या कार्यवाहक हेड मास्टर हैं। इसमें आगे लिखा गया है, “स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए सकारात्मक सीखने का माहौल सुनिश्चित करने और समावेशी संस्कृति को विकसित करने में एक हेड मास्टर या प्रिंसिपल की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। हेड मास्टर या प्रिंसिपल की अनुपस्थिति का बच्चों की सुरक्षा और सलामती पर असर पड़ता है।”

पत्र में शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 का हवाला देते हुए कहा गया है कि जिन स्कूलों में छठी से आठवीं कक्षा के छात्रों की संख्या 100 से ऊपर है, वहाँ स्कूल में पूर्णकालिक प्रिंसिपल होना चाहिए। NCPCR ने मुख्य सचिव से ऐसे पदों की रिक्तियों और शिक्षा विभाग द्वारा 19 अप्रैल तक की गई कार्रवाई के बारे में तथ्यात्मक स्थिति शेयर करने के लिए कहा है।

                                                                                                    साभार: Newsroompost

NCPCR ने दिल्ली के स्कूल में स्वच्छता और सुरक्षा का उठाया मुद्दा

मुख्य सचिव को लिखे एक अन्य पत्र में, NCPCR ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी के सांसद मनोज तिवारी ने सर्वोदय कन्या विद्यालय, सब्जी मंडी, तिमारपुर, दिल्ली का दौरा किया। यहाँ उन्हें स्कूल की बिल्डिंग में स्वच्छता संबंधी कई समस्याएँ दिखी। शीर्ष निकाय ने कहा कि इस तरह की चीजों से स्कूल में गंभीर दुर्घटनाएँ हो सकती हैं।

                                                                                                                 साभार: Newsroompost

पत्र में कहा गया है, “मामले की गंभीरता को देखते हुए आपके कार्यालय से अनुरोध है कि इस मामले में तत्काल कार्रवाई की जाए और इस संबंध में की गई कार्रवाई की रिपोर्ट इस पत्र की प्राप्ति के सात दिनों के भीतर आयोग के साथ शेयर की जाए।”

भाजपा नेताओं ने दिल्ली के स्कूलों की कमियों को किया उजागर

सांसद मनोज तिवारी अकेले भाजपा नेता नहीं हैं, जिन्होंने हाल ही में दिल्ली के स्कूलों में कमियों को उजागर किया है। डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया और सीएम अरविंद केजरीवाल समेत आम आदमी पार्टी (AAP) के नेताओं ने आगामी राज्य विधानसभा चुनाव को देखते हुए गुजरात के स्कूलों पर निशाना साधा था। AAP नेताओं के हमले के बाद दिल्ली के भाजपा नेताओं ने हाल के दिनों में कई स्कूलों का दौरा किया और छात्रों एवं शिक्षकों की समस्याओं के बारे में बताते हुए वीडियो शेयर किया।