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5000 साल पुराना इतिहास : दुनिया का इकलौता विभीषण मंदिर: हर साल दाने के बराबर जमीन में धंसती जा रही प्रतिमा; वक्फ संपत्ति बता हड़पने की हुई कोशिश

                               कोटा के कैथून में है विभीषण का एकमात्र मंदिर (फोटो साभार: पंजाब केसरी )
राजस्थान के कोटा जिले के कैथून कस्बे में हर साल होली के अवसर पर एक बेहद अनोखी परंपरा देखने को मिलती है। देशभर में होलिका दहन के साथ होली का त्योहार मनाया जाता है लेकिन कैथून में इसके अगले दिन यानी धुलेंडी पर हिरण्यकश्यप के पुतले का दहन किया जाता है।

इसी खास परंपरा के साथ यहाँ पाँच दिवसीय विभीषण मेला आयोजित होता है, जिसमें हजारों श्रद्धालु आस्था और परंपरा का संगम देखने के लिए पहुँचते हैं। इस वर्ष भी मेले की शुरुआत धूमधाम से हुई। राजस्थान के शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर मेले के उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।

उन्होंने पहले विभीषण मंदिर में पूजा-अर्चना की और फिर मेला स्थल पर परंपरा के अनुसार हिरण्यकश्यप के पुतले का दहन कर अधर्म पर धर्म की विजय का संदेश दिया।

              प्रदेश के शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर ने किया मेले का शुभारंभ (साभार:ETV भारत)

होली के बाद हिरण्यकश्यप दहन की अनोखी परंपरा और देव विमानों की शोभायात्रा

कैथून का विभीषण मेला देश में अपनी तरह का अनूठा आयोजन माना जाता है। यहाँ परंपरा के अनुसार, पहले होलिका दहन होता है और उसके अगले दिन धुलेंडी पर हिरण्यकश्यप के पुतले को जलाया जाता है। इस परंपरा का संबंध भक्त प्रह्लाद और भगवान विष्णु की कथा से जोड़ा जाता है।

मान्यता है कि जब होलिका आग में जलकर नष्ट हो गई, तब असुर राजा हिरण्यकश्यप अत्यंत क्रोधित हो गया और उसने अपने पुत्र प्रह्लाद को मारने का प्रयास किया। उसी समय भगवान विष्णु ने नृसिंह अवतार लेकर हिरण्यकश्यप का वध किया और भक्त प्रह्लाद की रक्षा की। इसी घटना की स्मृति में कैथून में धुलेंडी के दिन हिरण्यकश्यप के पुतले का दहन किया जाता है।

यह परंपरा लगभग 45 वर्षों से लगातार निभाई जा रही है और हर साल इसके साथ भव्य मेले का आयोजन होता है। विभीषण मेले की शुरुआत धार्मिक अनुष्ठानों के साथ होती है। आसपास के कई मंदिरों से देवताओं की प्रतिमाओं को सजाए गए देव विमानों में बैठाकर भव्य शोभायात्रा निकाली जाती है।

ये देव विमान श्रद्धालुओं की भीड़ के साथ विभीषण मंदिर तक पहुँचते हैं, जहाँ विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। इसके बाद सभी देव विमानों को मेला स्थल लाया जाता है। मेला स्थल पर आतिशबाजी, सांस्कृतिक गतिविधियाँ और धार्मिक आयोजन होते हैं। कार्यक्रम के अंतिम चरण में मुख्य अतिथि द्वारा हिरण्यकश्यप के पुतले का दहन किया जाता है, जो धर्म की जीत और अधर्म के अंत का प्रतीक माना जाता है।

दुनिया का इकलौता विभीषण मंदिर: हर साल दाने के बराबर जमीन में धंसती जा रही प्रतिमा

कैथून की पहचान केवल मेले तक सीमित नहीं है। यहाँ स्थित विभीषण मंदिर को दुनिया का इकलौता मंदिर माना जाता है जहाँ रावण के भाई विभीषण की पूजा होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह मंदिर लगभग पाँच हजार वर्ष पुराना बताया जाता है। मंदिर परिसर में एक विशाल चबूतरे के ऊपर छतरी के नीचे विभीषण की बड़ी प्रतिमा स्थापित है।

                                                                     (साभार: News 18)

इस प्रतिमा की खासियत यह है कि इसका केवल धड़ से ऊपर का हिस्सा ही दिखाई देता है, जबकि बाकी भाग जमीन के अंदर धँसा हुआ माना जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह प्रतिमा हर साल थोड़ा-थोड़ा जमीन में और धँसती जाती है। मंदिर के पास एक प्राचीन कुंड भी है, जिसके निकट विक्रम संवत 1815 का शिलालेख मौजूद है।

विभीषण मंदिर से जुड़ी पौराणिक कथा

मंदिर की स्थापना को लेकर एक पौराणिक कथा भी प्रचलित है। कहा जाता है कि भगवान राम के राज्याभिषेक के समय सभी देवी-देवता, ऋषि-मुनि और राजा अयोध्या पहुँचे थे। इसी दौरान भगवान शिव ने पृथ्वी लोक की यात्रा करने की इच्छा जताई। यह सुनकर विभीषण ने निवेदन किया कि वह शिव और हनुमान को कांवड़ में बैठाकर भारत भ्रमण कराना चाहते हैं।

भगवान शिव ने यह प्रस्ताव स्वीकार कर लिया लेकिन एक शर्त रखी कि यात्रा के दौरान काँवड़ जहाँ भी जमीन से टिक जाएगी, वहीं यात्रा समाप्त मानी जाएगी। विभीषण ने एक विशाल लकड़ी की काँवड़ तैयार की जिसकी लंबाई लगभग 8 कोस (करीब 32 किलोमीटर) बताई जाती है। काँवड़ के एक हिस्से में भगवान शिव और दूसरे हिस्से में हनुमान जी विराजमान थे।

जब यह यात्रा प्राचीन नगर कौथुनपुर (आज का कैथून) से गुजर रही थी, तब काँवड़ का एक सिरा जमीन से लग गया। जिस स्थान पर शिवजी का भाग जमीन से टिका, वह स्थान आज चौरचौमा के नाम से जाना जाता है और वहाँ चोमेश्वर महादेव का प्राचीन मंदिर है।

दूसरा हिस्सा कोटा के रंगबाड़ी क्षेत्र में आकर टिका, जहाँ आज हनुमान जी का मंदिर स्थित है। वहीं कैथून में जहाँ विभीषण रुके, वहाँ विभीषण मंदिर की स्थापना मानी जाती है।

मंदिर के वर्तमान स्वरूप का इतिहास और वक्फ विवाद

मंदिर को पौराणिक रूप से हजारों साल पुराना माना जाता है लेकिन इसके वर्तमान ढाँचे का निर्माण बाद में हुआ। माना जाता है कि कोटा के शासक महाराव उम्मेद सिंह प्रथम ने 1770 से 1821 के बीच मंदिर की छतरी और संरचना का निर्माण करवाया था। मंदिर के आसपास के कई हिस्सों का समय-समय पर जीर्णोद्धार भी किया गया।

स्थानीय गौतम परिवार ने प्राचीन कुंड और अन्य संरचनाओं के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आज भी इस परिवार के सदस्य विशेष अवसरों पर यहाँ पूजा करने आते हैं। मेला उद्घाटन के दौरान मंत्री मदन दिलावर ने मंदिर की जमीन से जुड़े विवाद का भी जिक्र किया। उनके अनुसार, इस भूमि को वक्फ संपत्ति बताकर कब्जाने की कोशिश की गई थी।

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा लाए गए नए वक्फ संशोधन कानून के बाद यह स्पष्ट कर दिया गया है कि केवल वही संपत्ति वक्फ के नाम दर्ज होगी जो वास्तव में मुस्लिम समाज द्वारा दान की गई हो। इस कानूनी बदलाव और लंबे समय से चल रहे संघर्ष के बाद कोर्ट ने विभीषण मंदिर की जमीन हिंदू समाज को वापस सौंपने के आदेश दिए।

दिलावर ने यह भी कहा कि राजस्थान सरकार ने निर्णय लिया है कि आबादी क्षेत्र में स्थित मंदिरों की जमीन के पट्टे मंदिर की मूर्ति के नाम जारी किए जाएँगे, ताकि भविष्य में कोई अवैध कब्जा न कर सके। मेला समारोह में मंत्री दिलावर ने कहा कि विभीषण ने अधर्म के मार्ग पर चल रहे अपने भाई रावण का साथ छोड़कर भगवान राम का साथ दिया था।

रामायण की कथा में विभीषण का यह निर्णय धर्म के पक्ष में खड़े होने का प्रतीक माना जाता है। यही कारण है कि कैथून में उन्हें विशेष सम्मान के साथ पूजा जाता है। होली के बाद हिरण्यकश्यप दहन की परंपरा, दुनिया का इकलौता विभीषण मंदिर और उससे जुड़ी कथाएँ इस स्थान को भारत के धार्मिक मानचित्र पर एक अलग पहचान देती हैं।

राजस्थान : सरकारी स्कूल में जबरन पढ़वाते थे नमाज, हिंदू छात्रा के TC में लिखा ‘इस्लाम’

सरकारी स्कूल में चल रहे इस्लामी साजिशों को लेकर हिंदू संगठन ने शिक्षा मंत्री को सौंपा ज्ञापन (साभार: voiceofpublic.live)
राजस्थान में बनी नई सरकार ने अभी अंगड़ाई भी नहीं ली है कि पिछली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हो रही धांधलियां/तुष्टिकरण की चरम सीमा सामने आनी शुरू हो गयी है। यदि वर्तमान भाजपा सरकार सख्ती से काम करती है, निश्चित रूप से कांग्रेस का राजस्थान का सफाया हो जाएगा। अभी राजस्थान के कोटा जिले के एक सरकारी स्कूल में धर्मांतरण और लव जिहाद की साजिशों का खुलासा होने के बाद दो शिक्षक सस्पेंड किए गए हैं। यह स्कूल सांगोद कस्बे के पास स्थित खजूरी राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय है। स्कूल की एक हिंदू छात्रा के स्थानांतरण पत्र (TC) में ‘इस्लाम’ लिखे जाने और छात्राओं से जबरन नमाज पढ़वाए जाने का मामला सामने आया है।

स्कूल में चल रहे इस्लामी षड्यंत्र का खुलासा राज्य के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के दौरे के दौरान हुआ। 21 फरवरी 2024 को सर्व हिन्दू समाज के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात करने यह मामला उनके संज्ञान में लाया। संगठन ने सरकारी स्कूल में इस्लामिक जिहादी गतिविधियाँ चलने का आरोप लगाया। बताया जा रहा है कि प्रतिबंधित कट्टरपंथी इस्लामी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) और दावत-ए-इस्लामी के इशारे पर लव जिहाद और धर्मान्तरण की यह साजिश चल रही थी।

इसके बाद स्कूल के दो शिक्षक फिरोज खान और मिर्जा मुजाहिदीन को सस्पेंड कर दिया गया है। महिला शिक्षिका शबाना को मुख्यालय से अटैच (APO) कर दिया गया है। पूरे घटनाक्रम की जाँच करवाई जा रही है। शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने घटना की पुष्टि करते हुए कहा है कि हिंदू होने के बावजूद स्कूल की एक छात्रा की टीसी भी इस्लाम लिख दिया गया था।

उन्होंने कहा, “वहाँ धर्मान्तरण का षड्यंत्र हो रहा है। लव जिहाद का षड्यंत्र चल रहा है। हिंदू लड़कियों से जबरन नमाज पढ़ाई जा रही है। यह पता चलने के बाद 2 शिक्षकों को निलंबित कर दिया गया है। इनमें से एक फिरोज खान अध्यापक लेवल 1 है और दूसरा मिर्जा मुजाहिदीन शारीरिक शिक्षक है। शबाना के खिलाफ भी आगे कार्रवाई हो रही है। तीनों को मैंने बीकानेर भेज दिया है। विस्तृत जाँच करा कर इनके खिलाफ कठोर कार्रवाई करूँगा और बर्खास्त करने जैसी स्थिति बनी तो बर्खास्त भी करूँगा।”

हिंदू संगठन ने अपने ज्ञापन में बताया था कि स्कूल में न सिर्फ हिंदू छात्राओं से नमाज पढ़वाई जाती है, बल्कि उनकी जान-पहचान सोची समझी साजिश के तहत मुस्लिम लड़कों से करवाई जाती है। साल 2019 की एक घटना का भी जिक्र ज्ञापन में था। इसमें एक हिन्दू छात्रा के TC में उसका धर्म इस्लाम लिख दिया गया था। इसी छात्रा का साल 2024 में स्कूल के ही मुस्लिम छात्रों द्वारा अपहरण कर लिया गया था, जिसकी FIR सांगोद थाने में दर्ज है। इस पूरी साजिश के सूत्रधार के तौर पर स्कूल के फिजिकल टीचर मिर्जा मुजाहिदीन, फिरोज खान के अलावा सहायक अध्यापिका शबाना को आरोपित किया गया था।

सर्व हिन्दू समाज ने शिक्षा मंत्री से आरोपितों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की थी। शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने तत्काल इस मामले का संज्ञान लेते हुए कार्रवाई के आदेश जारी किए। 21 फरवरी को ही कोटा के मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी ने मिर्जा मुजाहिदीन और फिरोज खान को सस्पेंड कर दिया। इसके अलावा महिला टीचर शबाना को APO (मुख्यालय अटैच) कर दिया गया। मंत्री मदन दिलावर के मुताबिक मामले की उच्चस्तरीय जाँच करवाई जा रही है।

चम्बल मे मिला हजारों साल पुरानी शिव परिवार मूर्ति; वीडियो

 महादेव का अद्भुद चमत्कार

कोटा: शहर में 12 जून 2023 को चम्बल रिवर फ्रण्ट के कार्य के दौरान श्री बिजासन माता मन्दिर के पास बालाजी के मन्दिर के नीचे कुनाड़ी में मिली शिव परिवार की हजारों साल पुरानी मूर्तियाँ। 

8 दिन से निकल रही थी मोटी जल धारा, इंजीनियरों के बहुत प्रयास के बाद भी नहीं मिला समाधान अंत में हार कर खुदाई कराने पर मिला वर्षों पुराना मठ, कुंड, तथा शिव परिवार की मूर्तियाँ। मूर्तियाँ मिलने की खबर सुनते ही साधु संतो ने पहुँच कर की वैदिक मंत्रो से पूजा पाठ।

राजस्थान : छात्रा को पहले फेल किया, फिर पास करने के लिए सेक्स का दबाव: छात्र को बना रखा था दलाल

                   छात्रा से सेक्स की माँग करने वाले प्रोफेसर  गिरफ्तार (फोटो साभार: एनबीटी)
राजस्थान के कोटा में सेक्स की डिमांड करने वाला प्रोफेसर गिरीश परमार पकड़ा गया है। उस पर एक छात्रा को पहले फेल करने और फिर पास करने के बदले शारीरिक संबंध बनाने का दबाव डालने का आरोप है। पुलिस ने अर्पित अग्रवाल नाम के एक छात्र को भी पकड़ा है। बताया जा रहा है कि वह परमार के लिए बिचौलिए के तौर पर काम करता था।

राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय (RTU) में पढ़ने वाली बीटेक की छात्रा ने आरोप लगाया है कि गिरीश परमार नाम के एसोसिएट प्रोफेसर ने टेस्ट में अच्छे अंकों से पास करने के बदले उस पर शारीरिक संबंध बनाने का दबाव डाला। इसके लिए प्रोफेसर ने छात्रा के अर्पित नाम के सहपाठी का सहयोग लिया। छात्रा का आरोप है कि प्रोफेसर ने पहले तो उसे फाइनल ईयर के सेमेस्टर परीक्षा में फेल कर दिया। इसके बाद छात्रा को पास करवाने के बदले सेक्स की डिमांड की। अर्पित अग्रवाल प्रोफेसर का प्रस्ताव छात्रा तक पहुँचा रहा था। आहत छात्रा ने सारी बात अपने परिवारजनों को बता दी। जिसके बाद प्रोफेसर गिरीश परमार और अर्पित अग्रवाल के खिलाफ मामला दर्ज कराया गया।

प्रोफेसर पर मामला दर्ज होते ही कई और छात्राओं को टारगेट करने की बात भी सामने आई। पता चला है कि अर्पित के जरिए प्रोफेसर ने परीक्षा में पास करने की बात कह कर अन्य छात्राओं पर भी इसी तरह दबाव डाला था। एक अन्य छात्रा ने भी प्रोफेसर के खिलाफ मामला दर्ज कराया है। रिपोर्ट्स की मानें तो प्रोफेसर के खिलाफ कुछ ऑडियो क्लिप भी पुलिस के हाथ लगे हैं। इनकी जाँच की जा रही है। सूत्रों की मानें तो गिरीश परमार लंबे समय से छात्राओं को फेल कर रहा है। फिर पास करने के एवज में सेक्स की डिमांड करता था।

47 साल का गिरीश परमार आईआईटीयन और गोल्ड मेडलिस्ट रहा है। गिरीश मूलतः श्रीगंगानगर का रहने वाला है। वहीं अर्पित अग्रवाल महावीर नगर का रहने वाला बताया जा रहा है। छात्रों ने आरोप लगाया है कि यूनिवर्सिटी ने पहले छात्रा के इल्ज़ाम को नकार दिया था। जिससे आरोपित एसोसिएट प्रोफेसर गिरीश परमार बचता रहा। रिपोर्ट्स के मुताबिक कई छात्राओं ने तो उसके खिलाफ शिकायत ही नहीं दी। जिससे उसके हौसले बढ़ते गए। पुलिस के मुकदमा दर्ज कर लेने के बाद यूनिवर्सिटी भी सक्रिय हुई है। कहा जा रहा है कि यूनिवर्सिटी ने तीन सदस्यीय जाँच कमेटी बनाई है।