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बंगाल : पाकिस्तानी औरत से निकाह कर कोलकाता का जफर रियाज बना ISI का जासूस, 20 साल तक भारत के इनपुट आतंकी मुल्क को बेचे: सरकार बदलने के बाद NIA ने दबोचा


जिस तरह बंगाल में सत्ता बदलने के बाद मुख्यमंत्री सुवेन्दु अधिकारी काम कर रहे हैं उनसे दिल्ली की महिला मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को सीखने की जरुरत है। मध्य प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री और वर्तमान केन्द्रीय मंत्री "मामाजी" शिवराज सिंह के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और असम के मुख्यमंत्री हिमंत सरमा अपने काम के बलबूते पर मोदी के हाथ मजबूत कर मुख्यमंत्री बनते रहे हैं। जिस तरह बंगाल में वामपंथी सरकारों से लेकर ममता बनर्जी के राज में हुए अनधिकृत निर्माण और सरकारी जमीनों पर कब्ज़ा हुआ, उसी तरह दिल्ली में भी शीला दीक्षित से लेकर अरविन्द केजरीवाल तक जो अनधिकृत निर्माण और सरकारी जमीनों पर कब्जे हुए हैं लेकिन रेखा गुप्ता द्वारा मुख्यमंत्री बनने के इतने दिनों राज करने पर भी कोई कार्रवाही नज़र नहीं आ रही। यमुना नदी वही गन्दी।  

क्या हुआ CAG रिपोर्ट्स का? कहाँ गए बांग्लादेशी, रोहिंग्या और पाकिस्तानी घुसपैठिये? चुनावों में बहुत शोर मचाया था। कुर्सी मिल गयी जाए जनता भाड़ में। लगभग हर मेट्रो और लाल बत्ती(चौक)पर रिक्शाओं और थ्री-व्हीलर का जमावड़ा। चावड़ी बाजार, लाल कुआँ, नई सड़क, जामा मस्जिद और अन्य क्षेत्रों में पटरियों पर कब्जे। जनता पटरी पर चलने की बजाए सड़क पर चलने को मजबूर। पुराने समय में निकले छज्जों के नीचे सरकारी जमीन पर कब्ज़ा कर दुकानों, ढाबे और होटलों में शामिल आदि आदि।   

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने पाकिस्तान के लिए जासूसी करने वाले जफर रियाज उर्फ रिजवी को गिरफ्तार किया है। वह कोलकाता का रहने वाला है और उसने पाकिस्तानी से निकाह किया है। फिलहाल जफर की बीवी और बच्चे पाकिस्तान में ही रहते हैं।

मंगलवार (20 मई 2026) देर रात NIA ने जानकारी दी कि जफर रियाज के खिलाफ पहले से ही लुक आउट सर्कुलर जारी था। साथ ही उसे अपराधी घोषित करने की प्रक्रिया भी चल रही थी। इसी दौरान एजेंसी ने उसे गिरफ्तार कर लिया। आरोपित पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) , आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम और गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत केस दर्ज किया गया है।

पाकिस्तानी एजेंसियों से कैसे बिठाए संपर्क?

जाँच एजेंसी के अनुसार जफर रियाज का निकाह एक पाकिस्तानी औरत से हुआ था और उसके बच्चे भी पाकिस्तान के नागरिक हैं। NIA की जाँच में सामने आया कि वह साल 2005 से लगातार भारत और पाकिस्तान के बीच यात्रा करता रहा। इसी दौरान पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी के अधिकारियों ने उसे अपने संपर्क में लिया और जासूसी की ट्रेनिंग दी।

पाकिस्तानी खुफिया अधिकारियों ने जफर को पैसों का लालच दिया था। इसके अलावा उसे पाकिस्तान की नागरिकता दिलाने का भी वादा किया गया था। इसके बदले आरोपित भारत से जुड़ी संवेदनशील और गोपनीय सुरक्षा जानकारियाँ पाकिस्तान तक पहुँचाने का काम कर रहा था।

जासूसी के आरोप में पहले भी गिरफ्तार हो चुका जफर

NIA ने बताया कि जफर रियाज पहले भी जासूसी के एक मामले में दोषी ठहराया जा चुका है। उस समय उसके खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) और आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम के तहत कार्रवाई हुई थी। इसके बावजूद वह लगातार पाकिस्तान के संपर्क में बना रहा।

NIA अब इस पूरे जासूसी नेटवर्क की गहराई से जाँच कर रही है। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि इस रैकेट में और कौन-कौन लोग शामिल हैं और भारत-विरोधी साजिश कितनी बड़ी थी। अधिकारियों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियाँ हो सकती हैं।

उत्तर प्रदेश : 9 साल से बरेली में पाकिस्तानी महिला कर रही थी सरकारी टीचर की नौकरी, पोल खुलने पर बर्खास्त: जाँच में फर्जी निकले सारे प्रमाण-पत्र, 2021 में अम्मी भी ऐसे ही पकड़ी गई थी

                                  शुमायला खान की सेवाएँ समाप्त, कानूनी कार्रवाई शुरू (फोटो साभार: भास्कर)
उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। शुमायला खान नाम की महिला ने खुद को भारतीय नागरिक बताकर फर्जी दस्तावेजों के सहारे सरकारी स्कूल में सहायक अध्यापक की नौकरी हासिल कर ली। यह नौकरी उन्होंने 2015 में शुरू की और 9 साल तक सरकारी वेतन भी लिया। मामला तब खुला जब एक शिकायत के बाद प्रशासन ने उनके निवास प्रमाण पत्र और अन्य दस्तावेजों की जाँच की। फिलहाल, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने 3 अक्तूबर, 2024 को शुमायला खान को निलंबित कर दिया। इसके बाद, उन्हें नियुक्ति की तिथि से ही पद से हटा दिया गया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, शुमायला ने रामपुर के एसडीएम कार्यालय से फर्जी निवास प्रमाण पत्र बनवाया था। तहसीलदार की जाँच में पता चला कि यह प्रमाण पत्र गलत तथ्यों पर आधारित था। तहसीलदार की रिपोर्ट ने यह साफ किया कि शुमायला वास्तव में पाकिस्तान की नागरिक हैं। इसके बाद जिला शिक्षा अधिकारी ने शुमायला को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया और उसके खिलाफ पुलिस में मामला दर्ज कराया।

 शुमायला ने अपनी अम्मी से प्रेरणा लेते हुए फर्जीवाड़ा किया। उन्होंने प्राथमिक विद्यालय माधौपुर में सहायक अध्यापक के पद पर नौकरी पाई। जाँच में पाया गया कि शुमायला के माता-पिता पाकिस्तानी नागरिक थे। रामपुर तहसील से निवास प्रमाण पत्र बनवाते समय उन्होंने यह तथ्य छिपाया।

फतेहगंज पश्चिमी के खंड शिक्षा अधिकारी भानु शंकर ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के निर्देश पर फतेहगंज पश्चिमी थाने में शुमायला के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई। अब उनके खिलाफ धोखाधड़ी और दस्तावेजों की हेराफेरी के आरोपों में कानूनी कार्रवाई हो रही है। पुलिस शुमायला की गिरफ्तारी की तैयारी कर रही है।

शुमायला की अम्मी माहिरा अख्तर को साल 2021 में बर्खास्त कर दिया गया था, जब वो रिटायरमेंट से सिर्फ 2 दिन दूर थी। 11 मार्च 2021 को रिटायर होने जा रही शुमायला की अम्मी माहिरा अख्तर को 9 मार्च 2021 को बर्खास्त किया गया था, जबकि शुमायरा को सस्पेंड किया गया था। माहिरा अख्तर ने भी खुद को भारतीय नागरिक बताया था, लेकिन जाँच में वे पाकिस्तानी पाई गईं। माहिरा का मामला राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग तक पहुँचा और अभी हाईकोर्ट में लंबित है।

यह मामला शिक्षा विभाग और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाता है। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सरकारी नौकरी पाना न केवल सिस्टम की खामियों को उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि कैसे एक संगठित तरीके से सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग किया जा सकता है।

बहरहाल, शिक्षा विभाग ने इस घटना के बाद जाँच प्रक्रिया को और सख्त बनाने का निर्णय लिया है। यह घटना प्रशासनिक लापरवाही का बड़ा उदाहरण है और इस बात की ओर इशारा करती है कि सरकारी दस्तावेजों की सत्यापन प्रक्रिया में सुधार की कितनी जरूरत है।