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भगवान के मिशन पर हैं मोदी और उनका कार्य पूर्ण होने तक मोदी जी नहीं हटेंगे; यह मोदी जी ने खुद कहा - विपक्ष इस खतरे की घंटी को सुन ले

सुभाष चन्द्र

भारत मंडपम में India TV के Editor रजत शर्मा के साथ इंटरव्यू के अंत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुछ ऐसा कहा जो विपक्ष के लिए एक इशारा है कि मेरे हटने की प्रतीक्षा मत करो। रजत शर्मा से जब वे 4 जून की बात कर रहे थे कि विपक्ष के लोग इसके बाद बेहाल होंगे, तब रजत शर्मा ने कहा - “आपने तो 2047 की जो बात कर दी उससे विपक्ष को लग रहा है कि मोदी जी ने तो लंबा कार्यक्रम बना दिया, क्या ये 2047 तक रहेंगे”? इस बात का जवाब जो मोदी जी ने दिया, उसे बड़े ध्यान से पढ़िए उन्होंने कहा :- 

“मेरा मानना है कि ईश्वर ने मुझे किसी विशिष्ट काम करने के लिए भेजा है; परमात्मा ने मुझे किसी purpose के लिए भेजा हुआ है, वरना मैं जिस जिंदगी से निकला हुआ हूं, मेरे यहां आने का कोई logic ही नहीं बैठा जी, कोई रास्ता ही नहीं बनता जो मुझे यहां ले आए; ईश्वर ने मुझे इस काम के लिए कहा है मुझे भेजा है, मेरा मार्गदर्शन भी वे स्वयं करते हैं, मुझे रास्ता भी वो स्वयं दिखा रहे हैं; परिश्रम, पुरुषार्थ और पराक्रम का जो जज्बा है वो भी मुझे परमात्मा की कृपा से मिलता रहता है और उसी को लेकर मैं काम करता हूं और मुझे पक्का लगता है कि विकसित भारत का 2047 का टारगेट भी ईश्वर ने ही मुझसे करवाया है और जब तक वह पूरा नहीं होगा, वो मुझे वापस नहीं बुलाएंगे और मेरे लिए दुनिया में कोई और जगह नहीं है”

लेखक 
चर्चित youtuber 

अंतिम पंक्ति में यह कहने का क्या मतलब है कि 2047 का टारगेट मुझसे भगवान ने ही करवाया है और जब तक वह पूरा नहीं होगा वो मुझे नहीं बुलाएंगे - मतलब मैं कहीं नहीं जाने वाला

क्या विशिष्ट कार्य है जिसके लिए भगवान ने उन्हें भेजा है, ये वही जानते हैं लेकिन यह विपक्ष के लिए खतरे की घंटी जरूर है

मेरे ख्याल में 4 व्यक्ति ऐसे हैं जिन्हें मोदी के लिए दुःख पहुंचाने वाले अपशब्द बोलते हुए, उन्हें बात बात पर बेइज़्ज़त करते हुए, उनका मजाक उड़ाते हुए उस भगवान से डरना चाहिए जिसकी मोदी भक्ति करते हैं कोई ऐसे व्यक्ति को हर समय प्रताड़ित करेगा जो हर बात को सहन करता है तो निश्चित ही उसके दिल को पीड़ा तो होगी ही, लेकिन वह व्यक्ति कहेगा कुछ नहीं परंतु इतना समझ लेना चाहिए ऐसे लोगों को कि उस व्यक्ति से वे हर दिन “श्रापित” होते हैं और उसकी सजा ईश्वर उन्हें अवश्य देगा कब देगा, कहां देगा और कैसे देगा, वह ईश्वर अपने भक्त की पीड़ा समझ कर निश्चित करेगा

अब आप सोच रहे होंगे ऐसे 4 व्यक्ति कौन हैं मेरी नज़र में जिन्हें दंड मिलेगा वो है राहुल गांधी, केजरीवाल, तेजस्वी यादव और अखिलेश यादव इन लोगो को कालचक्र से डरना चाहिए 

कोई शक? 

“वक्त ने कभी भी उन्हें नहीं माफ़ किया, 

जिन्होंने दुखियों के अश्कों से दिल्लगी की है” 

नरेंद्र मोदी को हटाने जॉर्ज सोरोस ने 100 करोड़ डॉलर देने का किया ऐलान; भारत विरोधियों के इशारे पर नाचता विपक्ष

मोदी-योगी विरोध और देश विरोध दोनों में उतना ही अंतर है जितना समुद्र के दो किनारों में। प्रत्येक भारतीय को बहुत ही ठंठे और शांत दिमाग से इस अंतर को समझना होगा। सड़क से लेकर संसद तक मोदी लोकतंत्र की मजबूती के लिए आलोचना को महत्व देने की बात करते रहे हैं, लेकिन भारत विरोधियों के हाथ नाचकर विरोध करने वालों का बहिष्कार कर अंतर समझाना होगा। नहीं चाहिए जयचंदी विपक्ष भारत ने नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने पर कुछ उपलब्ध किया या नहीं, लेकिन सबसे बड़ी उपलब्धि जो भारत ने प्राप्त की है वह है भारत में और भारत से बाहर सक्रिय भारत विरोधी ताकतें का उजागर होना। दूसरी सबसे हैरान करने वाली उपलब्धि है कि जिन नेताओं को आज तक हम अपना हितैषी समझते थे, वही नेतागिरी का चोला ओढ़े भारत विरोधियों के हाथ की कठपुतली बन हमें पागल बनाते रहे हैं। मोदी विरोध की आड़ में देश विरोधियों की कठपतली बनना कौन-सी देश सेवा और समाज सेवा है? नहीं चाहिए देश को ऐसा विपक्ष जो देश विरोधियों के इशारे पर नाचने हो। 

भारतीय समाज में आज भी जयचंद जैसे गद्दार मौजूद हैं!

वर्ष 1191 में तराईन के प्रथम युद्ध में पृथ्वीराज चौहान ने अन्य भारतीय हिन्दू राजाओं (जिनमें जयचंद भी शामिल था) के साथ मिलकर मुहम्मद गौरी को पराजित किया। इस युद्ध के एक साल बाद गौरी ने पुनः अपनी सेना इकट्ठी की और दिल्ली पर आक्रमण किया, लेकिन इस बार उसने सिर्फ सैन्य बल का उपयोग नहीं किया बल्कि उसने कूटनीति के दम पर जयचंद समेत कुछ हिन्दू राजाओं को अपनी ओर कर लिया। युद्ध में मदद के एवज में गौरी ने जयचंद को राजगद्दी का प्रलोभन दिया और जयचंद ने गद्दी के लालच में चौहान के साथ गद्दारी कर दी। अगर तराईन के द्वितीय युद्ध में भी अन्य भारतीय राजाओं ने उसका साथ दिया होता तो वह पुनः गौरी को हरा देता और भारतवर्ष की भूमि पर कभी गौरी, बलबन, बाबर और गजनवी जैसे आक्रांता कदम भी नहीं रख पाते। इस एक युद्ध की हार ने भारत में अरब और मध्य एशिया के तमाम लुटेरों को भारत में घुसने का मौका दे दिया और बाकी सब इतिहास में वर्णित है। हर देशवासी को आज के जयचंदों से सावधान रहने की जरूरत है।

जॉर्ज सोरेस, BBC या हिंडेनबर्ग को दिक्कत भारत से है अड़ानी से नही, अड़ानी को मोहरा बना के ये 'भारत में लोकतांत्रिक पुनरुद्धार' को रोकना चाहते थे उसे पूर्ण रूप से बाधित करना चाहते हैं।

आज अडानी रिपोर्ट का इस्तेमाल कर हताश जॉर्ज सोरोस खुलकर मोदी सरकार के खिलाफ आ गए हैं। आने वाले चुनाव वाकई दिलचस्प है ये चुनाव, मात्र चुनाव भर नही होगा ये चुनाव पानीपत का चौथा युद्ध सरीखा होगा.. भारतीय की सेना का नेतृत्व अनुभवी प्रधानमंत्री मोदी कर रहे है जिनकी सेना में एस जयशंकर, अजीत डोभाल, राजनाथ सिंह, अमित शाह, योगी आदित्यनाथ, हेमंत बिस्वा शर्मा जैसे श्रेष्ठ योद्धा है और विरोधी सेना में देश के सारे वामी, कामी,आपिए, सापिये, टुकड़े टुकड़े गैंग, गज़वा ए हिंद वाली गैंग, जेहादी, और विदेश में बसे वे सभी तत्व जो भारत से भारतीयता से भयंकर नफरत करते है जो किसी भी कीमत पर भारत को खंड खंड करना चाहते है। 

अमेरिकी अरबपति कारोबारी जॉर्ज सोरोस ने भारत को लेकर विवादित बयान दिया है। जार्ज सोरोस ने कहा कि अडानी मामले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भारतीय संसद में जवाब देना होगा। उसने कहा कि अडानी के कारोबारी साम्राज्य में मची उथल-पुथल से शेयर बाजार में बिकवाली आई है और इससे निवेश के अवसर के रूप में भारत में विश्वास हिला है। उसने कहा है कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इससे कमजोर होंगे और इससे देश में लोकतांत्रिक पुनरुद्धार (Democratic Revival) के द्वार खुलेंगे। किसी विदेशी ताकत द्वारा भारत के लोकतांत्रिक ढांचे पर इस तरह खुलकर वार शायद पहली बार किया गया है। इसे कोई भी देशवासी बर्दाश्त नहीं कर सकता। भारत और पीएम मोदी को कमजोर करने की इस  साजिश का देश के 140 करोड़ देशवासी मुंहतोड़ जवाब देंगे।

मोदी सरकार को सत्ता से हटाने में CIA पूरी ताकत से जुटा

पीएम मोदी के नेतृत्व में नया भारत जिस तरह से मजबूत हो रहा है वह अमेरिका को नहीं सुहा रहा है और अब वह मोदी सरकार को सत्ता से बेदखल करने के लिए साजिशें रच रहा है। इसके लिए वह देश के विपक्षी दलों, देशविरोधी गतिविधियों में शामिल तत्वों, लेफ्ट-लिबरल गैंग, खान मार्केट गैंग और अर्बन नक्सलियों को हर तरह से मदद पहुंचा रहा है। इस संबंध में दडायरेक्टरीचडॉटकॉम ने एक लेख प्रकाशित किया था जिसमें मोदी शासन के खिलाफ अमेरिका साजिश का पर्दाफाश किया गया था। लेख में कहा गया है कि मोदी शासन को सत्ता से हटाने के लिए अमेरिका पूरी ताकत से मेहनत कर रहा है। इसके लिए हिलेरी-ओबामा भी इस साजिश का हिस्सा हैं जो कि बाइडन के पीछे की वास्तविक शक्ति हैं। पीएम मोदी के साथ समस्या यह नहीं है कि वह एक हिंदू राष्ट्रवादी हैं, बल्कि यह है कि उन्हें खरीदा नहीं जा सकता। यानी विदेशी ताकतों का हित नहीं सध रहा है।

सोरोस ने म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में अडानी मुद्दा क्यों उठाया?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि सोरोस ने म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में अडानी मुद्दा क्यों उठाया? सोरोस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर क्रोनी कैपटलिज्म को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए कहा कि मोदी और अडानी करीबी सहयोगी हैं। उनका भाग्य आपस में जुड़ा हुआ है। सोरोस ने यह टिप्पणी 16 फरवरी 2023 को जर्मनी में म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन से पहले टेक्निकल यूनिवर्सिटी आफ म्यूनिख में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए की। सोरोस ने कहा कि अडानी एंटरप्राइजेज ने शेयर बाजार में धन जुटाने की कोशिश की, लेकिन वह असफल रहा। अडानी पर स्टॉक हेरफेर का आरोप है। उनका स्टॉक रेत की महल की तरह ढह गया है। सोरोस का यह बयान हिंडनबर्ग रिपोर्ट के करीब तीन हफ्ते बाद आया है। इससे आप समझ सकते हैं कि बीबीसी डॉक्यूमेंट्री और हिंडनबर्ग रिपोर्ट के पीछे कौन लोग हैं। ये वही लोग हैं जो भारत को कमजोर करना चाहते हैं।

सोरोस की तरह भारत को कमजोर करने वाली भाषा क्यों बोलते हैं राहुल गांधी

जार्ज सोरोस के बयान पर गौर करें तो आपको पता चलेगा कि इसी तरह की भाषा का इस्तेमाल तो राहुल गांधी भी करते रहे हैं। राहुल गांधी ही नहीं, लेफ्ट लिबरल इकोसिस्टम से जुड़े विपक्षी दलों के कई और नेता भी इसी भाषा का इस्तेमाल करते हैं। कई बार वे इस तरह की भाषा बोलते हैं कि जिससे आंदोलन भड़के। इससे यह भी साबित हो गया कि कांग्रेसियों, वामपंथियों, उदारवादी धर्मनिरपेक्ष बुद्धिजीवियों, शहरी नक्सलियों के पीछे कौन व्यक्ति खड़ा है। उसके चेहरे से नकाब उतर चुका है। अब भारत के 140 करोड़ देशवासियों के कंधे पर जिम्मेदारी आ गई है कि वे भारत को कमजोर करने वाली इन विदेशी ताकतों को उखाड़ फेंके। और उन विदेशी ताकतों के साथ खड़े देश के जयचंदों को बेनकाब करे।

भारत में विदेशी ताकतों के हितों का संरक्षण चाहता है जार्ज सोरोस

जिस भाषा में कांग्रेस नेता राहुल गांधी पीएम मोदी पर हमला करते हैं उसी तरह की भाषा का इस्तेमाल जॉर्ज सोरोस क्यों करते हैं। इस पर हर देशवासी को सोचने और समझने की जरूरत है। जार्ज सोरोस हिंदुस्तान में विदेशी ताकत के तहत एक ऐसी व्यवस्था बनाना चाहता है जो हिंदुस्तान नहीं, बल्कि उन विदेशी ताकतों के हितों का संरक्षण करेगी। जॉर्ज सोरोस का यह ऐलान कि वो हिंदुस्तान में मोदी को झुका देंगे, हिंदुस्तान की लोकतांत्रिक तरीके से चुनी सरकार को ध्वस्त करेंगे। इससे उसकी नापाक मंसूबे ही जाहिर होते हैं और इसका मुंहतोड़ जवाब हर देशवासी देगा।

सोरोस को भारत से इतना लगाव क्यों? दावोस में उठाया था कश्मीर मुद्दा

सोरोस को आखिर भारत से इतना लगाव क्यों है, यह एक सहज सवाल में मन में आता है। जनवरी 2020 में जॉर्ज सोरोस ने दावोस में विश्व आर्थिक मंच (WEF) के कार्यक्रम में कश्मीर और नागरिकता संशोधन कानून को लेकर पीएम नरेंद्र मोदी पर बड़ा हमला बोला था। उसने कहा कि देश में लोकतांत्रिक तरीके से चुनकर आए पीएम मोदी कश्मीर में प्रतिबंध लगाकर वहां लोगों को दंडित कर रहे हैं और लाखों मुसलमानों से नागरिकता छीनने की धमकी दे रहे हैं। उसने यह भी कहा कि पीएम मोदी भारत को एक हिंदू राष्ट्र बना रहे हैं।

कश्मीर मुद्दा उठाकर देश को करना चाहते हैं अस्थिर

देश को हिंदू-मुसलमान में बांटकर सोरोस देश को कमजोर कर अपने मंसूबे में कामयाब होना चाहते हैं। इसीलिए वे कश्मीर मुद्दा बार-बार उठाकर देश में भावनाएं भड़काकर देश को अस्थिर करने में लगे हुए हैं। सोरोस कहते हैं कि नरेंद्र मोदी हिंदू राष्ट्रवादियों का देश बना रहे हैं, अर्ध-स्वायत्त क्षेत्र कश्मीर पर दंडात्मक कार्रवाई कर रहे हैं और लाखों मुसलमानों को उनकी नागरिकता से वंचित करने की धमकी दे रहे हैं। कितना झूठ फैलाया जा रहा है यह देख लीजिए। कश्मीर में किस मुसलमान की नागरिकता गई है बल्कि अनुच्छेद 370 खत्म होने के बाद कश्मीर खुशहाली की ओर बढ़ रहा है। लेकिन दुख की बात यह है कि देश के कुछ नेता और राजनीतिक दल सोरोस की बातों में सुर में सुर मिलाते दिख जाते हैं और जनता को यह सब दिख रहा है।

राष्ट्रवाद से लड़ने के लिए 100 करोड़ डॉलर देने का किया ऐलान

सोरोस ने साल 2020 में वैश्विक विश्वविद्यालय की शुरूआत करने के लिए 100 करोड़ डॉलर देने की बात कही थी। उसने कहा था कि इस विश्वविद्यालय की स्थापना ‘राष्ट्रवादियों से लड़ने’ के लिए की जाएगी। सोरोस ने ‘अधिनायकवादी सरकारों’ और जलवायु परिवर्तन को अस्तित्व के लिए खतरा बताया था। सोरोस ने कहा था कि राष्ट्रवाद अब बहुत आगे निकल गया है। सबसे बड़ा और सबसे भयावह झटका भारत को लगा है, क्योंकि वहां लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित नरेंद्र मोदी भारत को एक हिन्दू राष्ट्रवादी देश बना रहे हैं।

मोदी को क्यों हटाना चाहता है अमेरिका का अरबपति सोरोस?

सोरोस ने भारत को उन देशों में बताया जहां राष्ट्रवाद अपने लिए रास्ता बना रहा है। लेकिन यह समझ से परे है कि इससे सोरोस को क्यों तकलीफ हो रही है। पीएम मोदी अगर कहते हैं कि राष्ट्र प्रथम तो इससे उन्हें क्यों परेशानी हो रही है। अगर इसकी तह में जाएं तो हम पाते हैं कि पीएम मोदी के नेतृत्व में उन विदेशी ताकतों की दाल नहीं गल रही है, उनका कारोबार, उनका कमीशन नहीं बन रहा है जिससे वे तिलमिलाए हुए हैं। और उनके इस खेल भारतीय भी शामिल हैं जिन्हें 50 सालों से कमीशन खाने की आदत हो चुकी है।

भारत रूस से तेल खरीद कर मुनाफा कमा रहा, सोरोस को इससे भी दिक्कत

सोरोस ने म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस में कहा कि भारत का मामला दिलचस्प है। भारत लोकतांत्रिक देश है लेकिन नरेंद्र मोदी नरेंद्र मोदी लोकतांत्रिक नहीं हैं। मोदी के तेजी से बड़ा नेता बनने के पीछे अहम वजह मुस्लिमों के साथ की गई हिंसा है। सोरोस ने कहा कि भारत क्वाड का मेंबर है जिसमें ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका और जापान भी उसके साथ है। लेकिन भारत इसके बावजूद रूस से बड़े डिस्काउंट पर तेल खरीद रहा है और मुनाफा कमा रहा। 

विदेशी धरती से भारतीय लोकतांत्रिक ढांचे को हिलाने का प्रयास

केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने अमेरिकी अरबपति जॉर्ज सोरोस द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर की गई टिप्पणी को लेकर पलटवार किया है। स्मृति ईरानी ने कहा कि विदेशी धरती से भारतीय लोकतांत्रिक ढांचे को हिलाने का प्रयास किया जा रहा है। जॉर्ज सोरोस ने भारत के लोकतंत्र में दखल देने की कोशिश की है और पीएम मोदी उनके निशाने पर हैं। उन्होंने जॉर्ज सोरोस पर निशाना साधते हुए कहा कि जिस व्यक्ति ने इंग्लैंड के बैंक को तोड़ दिया, एक व्यक्ति जिसे आर्थिक युद्ध अपराधी के रूप में नामित किया गया है, उसने अब भारतीय लोकतंत्र को तोड़ने का ऐलान किया है।

राहुल गांधी और सोरोस की जुगलबंदी क्या कहती है?

सलिल शेट्टी जार्ज सोरोस के एनजीओ ओपन सोसाइटी फ़ाउंडेशन में 2018 से वैश्विक उपाध्यक्ष हैं। शेट्टी राहुल गांधी के भारत जोड़ो यात्रा में हिस्सा ले चुके हैं। इससे कांग्रेस और सोरोस के बीच नजदीकी और संबंध को समझ सकते हैं। शेट्टी 2010 से 2018 तक एमनेस्टी इंटरनेशनल के महासचिव थे, वह 2003 से 2010 तक संयुक्त राष्ट्र के सहस्राब्दी अभियान के निदेशक के पद पर थे। वह एक्शनएड केन्या और एक्शनएड इंडिया का नेतृत्व करने के बाद एक्शनएड इंटरनेशनल के मुख्य कार्यकारी थे।

राजीव गांधी फाउंडेशन को सोरोस की संस्था करती थी फंडिंग

राजीव गांधी फाउंडेशन ने जर्मन एनजीओ फ्रेडरिक नौमन फाउंडेशन (Friedrich Nauman Foundation) से धन प्राप्त किया था जो कि सोरोस द्वारा वित्त पोषित किया गया। क्लिंटन फाउंडेशन ने भी राजीव गांधी चैरिटेबल ट्रस्ट को समर्थन दिया था और क्लिंटन फाउंडेशन को सोरोस फंड करता है। राजीव गांधी फाउंडेशन 2007-08 में ह्यूमन राइट्स लॉ नेटवर्क से जुड़ा था। सोरोस पर आरोप है कि वह कश्मीर में अलगाववादी आंदोलन, शहरी नक्सलियों को समर्थन, रोहिंग्याओं को समर्थन, देशद्रोह विरोधी कानून का समर्थन करने के लिए फंडिंग करता है। सोरोस अमेरिकी खुफिया एजेंसी CiA के साथ मिलकर दुनियाभर में सरकारें बदलने के लिए काम करता है। यह सर्वज्ञात है कि CiA ने अमेरिकी आदेशों का पालन नहीं करने वाली सरकारों को हटाने के लिए कई देशों में विपक्षी दलों को फंड दिया।

वेबसाइट ALTNEWS को भी अप्रत्यक्ष रूप से सोरोस से फंड मिला

क्या आप जानते हैं कि फैक्ट-चेक के नाम पर प्रोपेगेंडा करने वाली वेबसाइट ALTNEWS के संस्थापक को भी अप्रत्यक्ष रूप से सोरोस से धन प्राप्त हुआ है? एक एनजीओ एचआरएनएल (HRNL) है जिसके फाउंडर कॉलिन गोंजाल्विस हैं। एचआरएनएल की पुरानी वेबसाइट के विवरण के अनुसार, जनहित एनजीओ (Janhit NGO) गुजरात में उनके सहयोगी के रूप में काम कर रहा था। यह जनहित HRNL और जन संघर्ष मंच का संयुक्त उपक्रम था जिसके मालिक प्रतीक सिन्हा के माता पिता थे!

HRNL के डोनर में सोरोस, फोर्ड फाउंडेशन, टाटा ट्रस्ट और कई अन्य ईसाई संगठनों और पश्चिमी दूतावासों के सोसाइटी फाउंडेशन शामिल हैं। दिलचस्प बात यह है कि उनकी एक शाखा श्रीनगर में थी जो हुर्रियत कार्यालय के बहुत करीब थी। और यह संयोग नहीं है कि वह एचआरएलएन के संस्थापक कॉलिन गोंजाल्विस ही थे जिन्होंने हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय में ALTNEWS के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर का केस लड़ा।

पेगासस मामला उछालने के पीछे जोर्ज सोरोस का हाथ

मोदी सरकार की छवि खराब करने के लिए जुलाई 2021 में पेगासस जासूसी मामला उछाला गया था। इसे लेकर राष्ट्रीय और अन्तराष्ट्रीय वामपंथी मीडिया हाउस भारत के प्रधानमंत्री मोदी पर कई पत्रकारों की जासूसी के आरोप लगा चुकी हैं। इस पेगासस रिपोर्ट की तह में जायें तो ये कुछ और नहीं, बल्कि जॉर्ज सोरोस का प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ प्रोपेगेंडा दिखाई देगा। पेगासस रिपोर्ट के पीछे दो गैर सरकारी संगठन यानी Amnesty और forbidden stories हैं। अगर इन दोनों ही संगठन की जांच पड़ताल की जाये तो ये बात सामने आती है कि दोनों की ही फंडिंग में जॉर्ज सोरोस का हाथ है जो पीएम मोदी को सत्ता से हटाने की कोशिशों में शामिल रहे हैं।

जॉर्ज सोरोस की संस्थाओं पर कई देश लगा चुके पाबंदी

जॉर्ज सोरोस पर यह आरोप हमेशा से लगते रहे हैं कि वे कई देशों में सरकारें बदलने के लिए काम करते हैं। दुनिया के विभिन्न देशों में कारोबार और समाजसेवा के नाम पर सोरोस की वहां की राजनीति को प्रभावित करते हैं और इसके लिए जॉर्ज सोरोस अपनी दौलत का इस्तेमाल भी करता है। यही कारण है कि कुछ देशों ने उनकी संस्थाओं पर पाबंदी भी लगाई है और कुछ देश उनकी संस्थाओं पर जुर्माना भी लगा चुके हैं।

2024 सोरोस के सपनों का अंत होगा

सोशल मीडिया पर लोग कह रहे हैं भारतीय मतदाताओं को प्रभावित करने वाला यह सोरोस कौन होता है। भारतीय मतदाता निश्चित रूप से 2024 में मोदी जी को फिर से वापस लाएगा! अडानी भारत नहीं है। भारत में अडानी जैसे अनगिनत उद्योगपति हैं। 2024 सोरोस के सपनों का अंत होगा। जिन देशों में उन्होंने शासन परिवर्तन की कोशिश की, वे तुलनात्मक रूप से छोटे थे। भारत में ऐसा कुछ करने की कोशिश करना मुश्किल है। अब देश ने मोदी को दिल में बसा लिया है।

विदेश मंत्रालय का भारतीय राजनयिकों को संदेश, नकारात्मक खबरों से दबाव में आए बिना दें अंतरराष्ट्रीय मीडिया के प्रोपेगेंडा को जवाब

कोरोना की दूसरी लहर का संकट देश के एजेंडा पत्रकारों और भारत विरोधी विदेशी मीडिया के लिए अवसर लेकर आया है। एजेंडा पत्रकारों का उद्देश है कि चाहे देश की दुनियाभर में बदनामी हो, लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को नीचा दिखाने का यह अवसर हाथ से नहीं निकलना चाहिए। इसके लिए श्मशानों से लाइव रिपोर्टिंग के साथ जलती चिताओं की तस्वीरें छापकर यह बताने की कोशिश कर रहे हैं कि हालात काफी खराब है और सरकार इसकों नियंत्रित करने में नाकाम रही है। उधर देश के बाहर भी मोदी और भारत विरोधी काफी सक्रिय है। अमेरिकी मीडिया में भारत के श्मशान घाटों की फोटो पहले पन्ने पर छप रही हैं। हालात को ऐसे पेश किया जा रहा है मानो कोरोना से संक्रमित होने वाला हर मरीज मर रहा है। जबकि कोरोना से ठीक होकर घर जाने वालों के आंकड़े और सरकार के प्रयास नदारद है।
न्यूयॉर्क टाइम्स, वॉशिंगटन पोस्ट, द गार्जियन, द ऑस्ट्रेलियन में कई लेख प्रकाशित हुए, जिनमें हालात को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया। इसमें 
विदेशी मीडिया के भारत में स्थित सहयोगी और एजेंडा पत्रकार उनकी भरपूर मदद कर रहे हैं। अपने मतलब के हिसाब से तस्वीरें ली जा रही है,उन्हें अपने तरीके से पेश किया जा रहा है। श्मशान के दृश्यों को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने वालों में से एक हैं वॉशिंगटन पोस्ट की ऐनी गोवेन जिन्हें जलती हुई चिताओं का ड्रोन द्वारा लिया गया चित्र “स्टनिंग” लगा (जैसा कि उन्होंने ट्वीट में लिखा था जो अब डिलीट कर दिया गया है)। द गार्जियन  ने इसे “नर्क की ओर भारत का अवतरण” कहा।
अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी Reuters के भारत में चीफ फोटोग्राफर दानिश सिद्दीकी ने हिन्दू लाशों के जलने की तस्वीरें शेयर कर के पूरी दुनिया में भारत की ऐसी छवि बनाने की कोशिश की है, जैसे कोरोना वायरस संक्रमण के लिए हिन्दू ही जिम्मेदार हों और वही मर रहे हों। उसने नई दिल्ली के एक श्मशान में जलती चिताओं की तस्वीरें शेयर की, जो सोशल मीडिया पर खासा वायरल हो रहा है। Reuters ने भी अपनी वेबसाइट पर इसे जगह दी। कइयों ने इसे सनसनी फैलाने की कोशिश करार दिया है।
25 अप्रैल को ‘द ऑस्ट्रेलियन’ अखबार में एक आर्टिकल पब्लिश हुआ। जिसका टाइटल था, ‘Modi leads India into viral apocalypse.’ जिसका मतलब है कि ‘मोदी भारत को ‘वायरस जन्य’ प्रलय की तरफ लेकर जा रहे हैं।’ इस रिपोर्ट में भारत में हो रहे चुनावों और रैलियों में जुटी हज़ारों की भीड़ का जिक्र किया गया। कुंभ मेले में जुटे लाखों लोगों का जिक्र किया गया। ऑक्सीजन और वैक्सीन की कमी को लेकर भारत सरकार की आलोचना की गई। इसी मामले में भारतीय दूतावास ने ‘द ऑस्ट्रेलियन’ के एडिटर इन चीफ क्रिस्टोफर डोर को चिट्ठी लिखी। जिसमें बताया कि ये सारी जानकारी गलत और आधारहीन है। साथ ही जवाब मांगते हुए ये भी कहा कि अब अखबार इसका एक प्रत्युत्तर भी प्रकाशित करे। लोगों को बताए कि इंडिया में कोरोना को खत्म करने के लिए कैसे-कैसे कदम उठाये जा रहे हैं।
बरखा दत्त द्वारा एक श्मशान के बाहर अड्डा जमाकर पूछना “क्या कोई मुर्दों की गिनती कर रहा है?” से अधिक अनैतिक क्या होगा। उधर पश्चिमी मीडिया में इनके इस प्रयास की तारीफ की जाती है, क्योंकि भारत को अभी भी सपेरों का देश करार देने का मौका मिलता है। उसकी कमियां दिखाकर उसके आत्मविश्वास को रौंदने की कोशिश की जाती है। भारतीयों को अहसास कराया जाता है कि अभी तुम पिछड़े हुए हो। महाशक्ति के रूप में उभरता हुआ भारत पश्चिमी देशों को खटकता है। इसलिए शक्तिशाली भारत की पहचान को फेक बताने की कोशिश की जाती है। इसमें अपने ही देश के नेता और कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी भी उनकी मदद करते हैं। राहुल ने लिखा कि भारत सरकार की नकली इमेज को बचाने के लिए कहा जा रहा है सरकार सब कुछ कर रही है, लेकिन सच्चाई दुनिया के सामने आ गयी है।
विदेश मंत्रालय अंतरराष्ट्रीय प्रोपेगंडा गिरोह के खिलाफ सख्त 
महामारी की शुरुआत से ही भारत ने दुनिया भर के देशों की मदद की। पहले हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन और अन्य आवश्यक दवाओं का निर्यात करके और बाद में ‘वैक्सीन मैत्री’ के अंतर्गत दुनिया भर के कई देशों को वैक्सीन मुहैया करवा कर।

भारत के इन प्रयासों के बाद भी विश्व का मीडिया भारत के मुश्किल समय में ‘गिद्ध पत्रकारिता’ करने से बाज नहीं आ रहा है। ऐसे में विदेशी मामलों के मंत्री एस. जयशंकर ने राजनयिकों को यह संदेश दिया है कि वो अंतरराष्ट्रीय मीडिया की इस प्रकार की नकारात्मक खबरों से दबाव में न आएँ अपितु अपने कर्त्तव्य का पालन करें।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार एस. जयशंकर ने राजनयिकों को कहा है कि वो महामारी से निपटने में भारत की ‘असफलता’ का नैरेटिव गढ़ने वाली अंतरराष्ट्रीय मीडिया की खबरों को काउंटर करें।

हालाँकि ज्यादातर समय यही चर्चा हुई कि किस प्रकार भारत में कोरोनावायरस के संक्रमण की दूसरी लहर से लड़ने में विश्व के अन्य हिस्सों से उपलब्ध संसाधनों का उपयोग किया जाए लेकिन यह मुद्दा भी उठाया गया कि किस प्रकार अंतरराष्ट्रीय मीडिया के पक्षपाती रवैये का सामना किया जाए। रिपोर्ट के अनुसार विदेश मंत्री जयशंकर ने राजनयिकों को कहा कि मीडिया की इस प्रकार की नकारात्मक रिपोर्टिंग से हताश होने के स्थान पर उसका काउंटर किया जाए।

भारत में कोरोनावायरस संक्रमण की दूसरी लहर के बीच भारत दुनिया भर की मीडिया के बीच चर्चा का केंद्र बन गया। ये मीडिया हाउस हिन्दू रीति से जलाई जाने वाली चिताओं की तस्वीरों को दिखाकर अपने गैर-भारतीय दर्शकों अथवा पाठकों में रोमांच पैदा कर रहे हैं। विवादास्पद पत्रकार बरखा दत्त के द्वारा श्मशान से रिपोर्टिंग करने के बाद अब COVID-19 महामारी के कारण होने वाले मौतों के बाद दुखद अंतिम संस्कार की तस्वीरें, पश्चिमी मीडिया में धड़ल्ले से खरीदी और बेची जा रही हैं।

ब्रिटिश-अमेरिकी मीडिया कंपनी Getty Images ने अपनी वेबसाइट पर भारतीय अंतिम संस्कार की कई तस्वीरें लगा रखी हैं, जो उनकी वेबसाइट पर प्रकाशित होती हैं। इन तस्वीरों को दुनिया भर का कोई भी मीडिया समूह खरीद सकता है। ये तस्वीरें तीन साइज में उपलब्ध हैं जिनमें सबसे बड़ी साइज की तस्वीर की कीमत 23,000 रुपए है। हमने हाल ही में रायटर्स के द्वारा अपने होम पेज पर मात्र दो दिनों में ही भारत में जलती चिताओं पर 6 लेख और 7 तस्वीरें प्रकाशित करने पर रिपोर्ट प्रकाशित की थी।

यहाँ ध्यान देने योग्य बात यह है कि जब भारत अपने कठिन समय से गुजर रहा है तब कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया मंच जैसे न्यूयॉर्क टाइम्स, न्यूयॉर्क पोस्ट, अल-जजीरा, वाशिंगटन पोस्ट आदि ने गिद्ध पत्रकारिता करते हुए भय का माहौल बनाया और फेक न्यूज फैलाई जबकि पिछले साल जब अमेरिका अपने सबसे कठिन दौर में था तब भारतीय मीडिया ने उसका समर्थन किया था।

अप्रैल 2020 में न्यूयॉर्क, वुहान कोरोनावायरस से बुरी तरह से संक्रमित था। घरों से कचरे की तरह लाशें निकाल रही थीं। ये वो लोग थे जिन्हे टेस्ट कराने का अवसर भी नहीं मिला।

डेली बीस्ट ने उस समय लिखा था, “पहली बार गॉथमिस्ट द्वारा बताए गए आपातकालीन चिकित्सा सेवा के आंकड़ों से पता चलता है कि जिन व्यक्तियों की वायरस से मृत्यु होने की संभावना है और वो रिकॉर्ड में नहीं आए हैं, उनकी संख्या बड़े पैमाने पर हैं। अकेले मंगलवार को पांच नगरों में 256 लोगों को घर पर मृत घोषित कर दिया गया था। इस महीने तक न्यूयॉर्क शहर में लगभग 25 लोग अपने घरों में मृत पाए गए थे। यह बताया गया कि मंगलवार की अधिकांश कॉल महामारी से संबंधित थीं जो पहले ही राज्य भर में 5400 से अधिक लोगों को मार चुकी हैं और जिससे 140,386 से अधिक लोग संक्रमित हैं।”

रिपोर्ट में कहा गया कि न्यूयॉर्क सिटी फायर डिपार्टमेंट से प्राप्त आँकड़ों के अनुसार दो हफ्तों में औसतन 2192 ‘डेड ऑन अराइवल’ कॉल प्राप्त हुई थीं। जबकि डिपार्टमेंट ने पिछले साल में उसी समयान्तराल में मात्र 453 ऐसी कॉल प्राप्त की थी। इसके अलावा न्यूयॉर्क शहर में 45 रेफ्रीजरेटेड ट्रक स्टैन्डबाय मोड पर रखे गए थे जिससे लाशों को उनमें रखा जा सके और बाद में गिना जा सके।

महामारी ने बिना किसी भेदभाव के दुनिया भर के देशों को अपना निशाना बनाया है। पश्चिमी देश भी जो भारत की आलोचना को अपना अधिकार मानते हैं, इस महामारी से अछूते नहीं रहे और उनकी मृत्यु दर भी कहीं अधिक रही। जहाँ भारत में 208,330 मौतें हुईं वहीं अमेरिका में 589,207 मौतें दर्ज की गईं। महामारी शुरू होने के बाद से अब तक अमेरिका में 33 मिलियन लोग संक्रमित हो चुके हैं जबकि भारत में यह सँख्या 18 मिलियन ही है जबकि दोनों देशों की जनसँख्या में बहुत बड़ा अंतर है। भारत में महामारी की मृत्यु दर 1% है जबकि अमेरिका में यह 2% है। 

अतः पश्चिमी मीडिया को भारत में कोविड-19 की रिपोर्टिंग पर नैतिकता और धैर्य का परिचय देना चाहिए। इस विषय में विदेश मंत्री एस. जयशंकर का बयान भी मायने रखता है जब वह कहते हैं कि मीडिया के द्वारा भारत के विषय में चलाए जा रहे प्रोपेगंडा से निराश होने के बजाय उसका सामना करना होगा और उसका काउंटर भी किया जाना चाहिए।