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दिल्ली से गिरफ्तार आतंकियों का खुलासा – देवबंद में ‘छोटी ट्रेनिंग’, फिर Pak में ‘बड़ी’: दुनिया भर में फैलाना चाहते थे इस्लाम

                                                                                                                             प्रतीकात्मक 
किसी देश का इतिहास उसका गौरव होता है, उसके सिर का मुकुट होता है, लेकिन विश्व में भारत एक मात्र ऐसा अनूठा देश है, जहाँ नेता और पार्टियां अपनी कुर्सी की खातिर अपने गौरवमयी इतिहास को धूमिल कर,मुग़ल आतताइयों को महान बता देती हैं। इस्लामिक आतंकवादियों को बचाने एवं संरक्षण देने कितनी बेशर्मी से "हिन्दू आतंकवाद" और "भगवा आतंकवाद" के नाम से हिन्दू धर्म को बदनाम किया जाने लगा था। आज विश्व इस्लामिक आतंकवाद के विरुद्ध एकजुट हो रहा है, लेकिन भारत में तुष्टिकरण पुजारी अपनी सियासत की खातिर समर्थन देने में जुटे हुए हैं।   
दिल्ली से गिरफ्तार जैश-ए-मोहम्मद के दो आतंकियों का देवबंद कनेक्शन सामने आया है। दोनों आतंकियों से पूछताछ के दौरान कई राज खुले। अब उन दोनों आतंकियों को लेकर दिल्ली पुलिस उत्तर प्रदेश के देवबंद रवाना हो गई है, जहाँ उनसे फिर पूछताछ होगी। सोमवार (नवंबर 16, 2020) को बड़ी आतंकी साजिश को नाकाम करते हुए दिल्ली पुलिस ने JeM के दो आतंकियों को गिरफ्तार किया था। उनके मोबाइल फोन्स से कई सबूत भी मिले हैं।
हैरानी की बात यह है कि जो गुप्तचर संस्थाएं सीमा पार आतंकी ठिकानों और वहां चल रही गतिविधियों का पता लगा सकती हैं, भारत में ही चल रहे आतंकी ट्रेनिंग ठिकानों को पकड़ने में क्यों नाकाम हैं?

इन आतंकियों ने एक व्हाट्सप्प ग्रुप बना रखा था। इस ग्रुप का नाम ‘जिहाद’ था, जिसमें एक पाकिस्तानी सरगना भी जुड़ा हुआ था। उसके ही निर्देश पर ये यहाँ आतंकी कार्रवाइयों को अंजाम दे रहे थे। देवबंद, दिल्ली और तेलंगाना के कई लोग इस ग्रुप में जुड़े थे। चूँकि ये आतंकी कई दिनों तक देवबंद में रुके हुए थे, इसीलिए उन्हें वहाँ ले जाया गया है। आतंकी आतंकी अब्दुल लतीफ मीर व मोहम्मद अशरफ खटाना दिल्ली होकर देवबंद जा रहे थे।

उन्हें वहीं पर खतरनाक हथियार चलाने और बम विस्फोट का प्रशिक्षण दिया जाना था। ‘अमर उजाला’ की खबर के अनुसार, आतंकियों को देवबंद में तो ट्रेनिंग दी ही जाती थी, साथ ही इसके बाद उन्हें ‘बड़ी ट्रेनिंग’ के लिए पाकिस्तान भेजा जाता था। उत्तर प्रदेश से लगती नेपाल सीमा का इस्तेमाल कर ये लोग वहीं से पाकिस्तान के लिए रवाना होते थे। स्पेशल सेल को कई ऐसे सबूत मिले हैं, जिससे इनके आतंकी होने का पता चलता है।

पाकिस्तान में बैठे बड़े हैंडलर ने ही इन आतकियों को यूपी जाने को कहा था। उसने बताया था कि देवबंद में उसका अपना आदमी है, जो इन आतंकियों को छोटी ट्रेनिंग देगा। यूपी में आतंकी ट्रेनिंग की बात से खलबली मच गई है और प्रशासन एक्टिव हो गया है। पहले गिरफ्तार किए गए आतंकियों ने हथियार भी यूपी से ही लिए थे। दिल्ली में भी पाकिस्तानी हैंडलर का आदमी होता था, जो इन्हें देवबंद लेकर जाता था।

ये दोनों पिछले 6-8 महीनों से जिहादी बने थे और आतंकी प्रशिक्षण के लिए बेचैन थे। ये जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद-370 के प्रावधानों को निरस्त किए जाने के केंद्र सरकार के फैसले से नाराज़ थे और ‘आज़ादी’ के लिए लड़ना चाहते थे। सितम्बर-अक्टूबर में सीमा पर सख्ती होने के कारण ये पाकिस्तान नहीं जा पाए थे। अब पुलिस इनके व इनके साथियों से जुड़े सारे ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी कर पूरे नेटवर्क का पता लगा रही है।

आतंकियों ने बताया कि वो सोशल मीडिया के माध्यम से मौलाना मसूद अजहर को सुनते थे और पूरी दुनिया में इस्लाम को फैलाना चाहते थे। इसके लिए वो मसूद से जुड़ने की फ़िराक में थे। खबर में ये भी बताया गया है कि ये आतंकी देवबंद के अरशद मदनी व मौलाना मुफ्ती फैजुल वाहिद द्वारा दिए गए व्याख्यान और मुफ्ती मुजफ्फर हुसैन व नजीर अहमद साहा काशी को जम्मू कश्मीर में पढ़ते थे। फेसबुक मैसेंजर के जरिए लाहौर का आफताब मलिक इनसे संपर्क में आया।

उसने इन्हें फेसबुक पर मसूद अजहर की तस्वीर प्रोफाइल पिक लगाने को कहा। इसके बाद वो जैश के एक गुर्गे के सम्पर्क में आए और कुपवाड़ा में एक आतंकी के जरिए इनके पास हथियार पहुँचाए गए। उनके पास से ‘जम्मू एंड कश्मीर बैंक’ के कार्ड्स और मदरसा का पहचान-पत्र मिला है। अब्दुल लतीफ़ के अब्बू कोर्ट में मुंशी हैं। जम्मू कश्मीर में दोनों ने कई स्थानीय कट्टरपंथियों की मदद से जिहाद का पाठ पढ़ा।

केंद्रीय पशुपालन, डेयरी और मत्स्यपालन मंत्री गिरिराज सिंह ने भी कहा था कि देवबंद आतंकवाद की गंगोत्री है, सारे बड़े-बड़े दुनियाँ में जो भी पैदा हुए आतंकवादी, चाहे हाफ़िज सईद हो, बगदादी हो, ये सारे के सारे लोग यहीं से शिक्षा लेते हैं। उन्होंने दावा किया था कि दुनिया में आतंकवाद की घटनाओं का जुड़ाव देवबंद से ही रहा है। साथ ही उदाहरण दिया था कि गुरुकुल से आजतक कोई बच्चा आतंकी नहीं निकला, लेकिन देवबंद से निकले हुए लोग देशभक्त का तो पता नहीं, लेकिन आतंकी जरूर बनते हैं।

‘अपनी भूमि का भारत के खिलाफ इस्तेमाल तुरंत बंद करो’: भारत ने Pak के राजदूत को किया तलब

                                                                                                                  फोटो साभार: ANI
नगरोटा में आतंकियों और भारतीय सुरक्षा बलों के बीच हुई मुठभेड़ के बाद भारत ने पाकिस्तानी राजदूत को समन किया है। भारत ने जिस तरह से एक बड़े आतंकी हमले को नाकाम किया, वो राहत की बात है। लेकिन, अब भारत ने पाकिस्तान को आइना दिखाना भी शुरू कर दिया है, जिसने इस पूरे आतंकी हमले की साजिश रची थी। जम्मू-कश्मीर के नगरोटा में आतंकियों के साथ ये मुठभेड़ गुरुवार (नवंबर 21, 2020) को हुई थी।

विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में जानकारी दी है कि ये सभी आतंकी पाकिस्तान के आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के सदस्य थे, ऐसा शुरुआती जाँच में पता चला है। इसे संयुक्त राष्ट्र समेत कई देशों ने आतंकी संगठन घोषित कर रखा है। भारत सरकार ने जैश-ए-मुहम्मद द्वारा भारतीय सरजमीं पर लगातार किए जा रहे आतंकी हमलों के खिलाफ कड़ी आपत्ति दर्ज कराते हुए याद दिलाया कि फ़रवरी 2019 में हुए पुलवामा आतंकी हमले सहित कई वारदातों में इसकी भूमिका रही है।

भारत सरकार ने कहा है कि जिस तरह से बड़ी मात्रा में खतरनाक हथियार और गोला-बारूद जब्त हुए हैं, उससे पता चलता है कि जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश में शांति और सुरक्षा को अस्थिर करने की एक सम्पूर्ण साजिश थी। बकौल भारतीय विदेश मंत्रालय, इसका एकमात्र उद्देश्य ये था कि जम्मू कश्मीर में स्थानीय जिला विकास परिषद (DDC) के चुनावों के रूप में जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया चल रही है, उसे पटरी से उतारा जाए।

भारतीय विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तानी राजदूत को समन कर उसकी इस करतूत पर कड़ा विरोध दर्ज कराया। मंत्रालय ने कहा कि इस संभावित हमले को भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता के कारण ही रोका जा सका। भारत ने पाकिस्तान से कहा है कि वो न सिर्फ आतंकियों को समर्थन देना बंद करे, बल्कि अपनी जमीन से दूसरे देशों में हमला करने वाले आतंकी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई कर पूरे आतंकी इंफ्रास्ट्रक्चर को नेस्तनाबूत करे।

                              भारत ने पाकिस्तानी राजदूत को किया समन

साथ ही भारत ने पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय नियमों की याद दिलाते हुए कहा कि वो द्विपक्षीय समझौतों का पालन करे और किसी भी हालत में भारत में आतंकवाद फैलाने के लिए अपनी सरजमीं का इस्तेमाल करना बंद करे। साथ ही भारत सरकार ने दोहराया कि वो पूरी मजबूती से और सख्ती के साथ, आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा की हिफाजत के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

ये भी खुलासा हुआ है कि ख़ुफ़िया सूचनाओं के आधार पर हुए ऑपरेशन में जिन 4 आतंकियों को मार गिराया गया, वो मसूद अजहर के भाई मुफ़्ती रउफ असगर के साथ संपर्क में थे। साथ ही वो JeM के सरगना कारी जरार के साथ भी संपर्क में थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस मामले में एक उच्च-स्तरीय बैठक बुलाई थी। ये बता भी पता चली है कि बालाकोट में आतंकियों की ट्रेनिंग का पूराइंफ्रास्ट्रक्चर अब JeM के हवाले ही कर दिया गया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नवंबर 20, 2020 को गृह मंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, विदेश सचिव और शीर्ष खुफिया अफसरों के साथ नगरोटा एनकाउंटर पर समीक्षा बैठक की थी। नगरोटा में मारे गए आतंकी 26/11 की बरसी पर कुछ बड़ा करने की योजना बना रहे थे। पीएम मोदी ने इस समीक्षा बैठक के बाद सेना को उनकी सतर्कता के लिए उनका आभार व्यक्त किया था।