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पेरिस: फ़्रांस ने की मृतक शिक्षक को सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘ला लिगियन डी ऑनर’

भारत में तुष्टिकरण के चलते छद्दम धर्म-निरपेक्षी जनता को वास्तविकता से भ्रमित करने वीर सावरकर, नाथूराम गोडसे, आरएसएस, हिन्दू महासभा और अन्य हिन्दू संगठनों को बदनाम करने सेकुलरिज्म के नाम पर इस्लामिक आतंकवादियों को बचाने के लिए "हिन्दू आतंकवाद" और "भगवा आतंकवाद" के नाम हिन्दुत्व को अपमानित करने का कोई मौका नहीं छोड़ते। 
इतना ही नहीं, अयोध्या में हिन्दू और मुसलमानों को गुमराह करने खुदाई में मिले मंदिर के मिले सबूतों को कोर्ट से छुपा लिया और खानापूर्ति के लिए मात्र एक खम्बा कोर्ट में दिखा दिया, राम और रामायण को काल्पनिक बता देने से भी गुरेज नहीं किया। यदि स्थिति विपरीत होती यानि इस्लाम के विरुद्ध ऐसा हलफनामा कोर्ट में दे दिया होता, हालत काबू से बाहर होते। लेकिन भारत में कुर्सी के भूखे नेता और पार्टियां कुर्सी की खातिर हिन्दू को अपमानित करने का कोई मौका नहीं छोड़ते। 
कुर्सी की खातिर किस तरह भारत में अवैध रूप से रह रहे पाकिस्तानियों, बांग्लादेशियों और रोहिंग्यों को बचाने नागरिकता संशोधक कानून के विरुद्ध हुए धरनों और प्रदर्शनों की आड़ में हिन्दुत्व के विरुद्ध नारेबाजी हुई, किसी से नहीं छुपा। और बेशर्म हिन्दू भी हिन्दुत्व विरोधी नारों में इन अराजकों का साथ दे रहे थे। लेकिन फ्रांस में किस तरह जेहादी द्वारा के शिक्षक की हत्या करने पर इस्लामिक संगठनों के विरुद्ध कार्यवाही करने के साथ-साथ उस मृतक शिक्षक को मरोपरांत सर्वोच्च नागरिक सम्मान से आभूषित किया जा रहा है। क्योंकि वहां कोई #intolerance, #freedom of express, आदि सरकार के विरुद्ध गैंग नहीं है। भारत में तुष्टिकरण कर रहे समस्त नेताओं और पार्टियों को फ्रांस से शिक्षा लेनी चाहिए। 
पेरिस में आतंकी घटना में जान गँवाने वाले 47 वर्षीय इतिहास के शिक्षक सैमुअल पैटी (Samuel Paty) को फ्रांस ने अपना सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार देने का फैसला किया है। यह घोषणा मंगलवार (अक्टूबर 20, 2020) की सुबह बीएफएम टीवी को दिए एक इंटरव्यू में वहाँ के शिक्षा मंत्री जीन-मिशेल ब्लैंकर (Jean-Michel Blanquer) ने की है। इस सर्वोच्च पुरस्कार का नाम ‘ला लिगियन डी ऑनर’ (Legion d’Honneur) है।

पेरिस में अक्टूबर 16, 2020 को सैम्युल पैटी नामक शिक्षक की हत्या की गई थी। उनकी गलती बस ये थी कि उन्होंने क्लास के दौरान ‘शार्ली एब्दो’ अख़बार में प्रकाशित पैगम्बर मोहम्मद का कार्टून दिखाया, जिसके बाद एक लड़के ने दिन दहाड़े उनका सिर कलम कर के उनकी हत्या कर दी। बाद में पुलिस ने भी हत्यारे छात्र को मार गिराया।

पड़ताल में पता चला कि उसने एक किचेन नाइफ का प्रयोग करते हुए शिक्षक का सिर कलम किया। पुलिस ने जानकारी दी कि इस घटना की जाँच एंटी-टेरर जज द्वारा की जा रही थी। पुलिस ने बताया है कि हत्यारा मॉस्को चेचन्या मूल का मुस्लिम था।

मामले की जाँच में जुटी पुलिस ने अब तक इस संबंध में 15 लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें 4 स्कूल के छात्र हैं। इसके अतिरिक्त पुलिस ने सोमवार को 40 जगहों पर रेड भी मारी है। शिक्षक की हत्या की निंदा हर ओर से की जा रही है। शार्ली एब्दो की ओर से भी मृतक के परिवार के साथ संवेदनाएँ व्यक्त की गई।

शिक्षक की हत्या करने वाले ‘छात्र’ की उम्र महज 18 साल थी। रिपोर्ट्स में घटना को लेकर बताया गया कि 47 वर्षीय इतिहास-भूगोल के प्रोफेसर स्कूल में क्लास ले रहे थे। फ्राँस में ये दोनों ही विषय साथ में ही पढ़ाए जाते हैं। इसके अलावा उन्हें ‘नैतिक और व्यवहार विषयक शिक्षा’ का भी दायित्व सौंपा गया था। क्लास में सारे विद्यार्थी लगभग 12-14 वर्ष के थे। क्लास के दौरान ही शिक्षक ने ‘फ्रीडम ऑफ स्पीच’ (FoE) के बारे में समझाते हुए ‘शार्ली एब्दो’ में प्रकाशित पैगम्बर मोहम्मद का कार्टून दिखाया।

इसके बाद कई छात्रों के परिवार इससे नाराज हो गए और उन्होंने पुलिस में औपचारिक शिकायत दायर की। ‘नाराज’ आरोपित ने उक्त शिक्षक पर हमला बोल दिया और उन्हें मार डाला। उसने हमले की तस्वीरों को सोशल मीडिया पर भी अपलोड किया। स्थानीय पुलिस ने राष्ट्रीय स्तर के अधिकारियों को इस पर सूचित किया कि पेरिस सबअर्ब स्थित य्वेलिनेस कंफ्लॉस-सेंट-हॉरोनिन में एक लाश मिली है। ये इलाका पेरिस के नार्थ-वेस्ट में स्थित है।

इसके बाद पुलिस ने तत्काल हत्यारे का पीछा करना शुरू किया और उस पर कई गोलियाँ दागी गईं। पुलिस द्वारा कई बार चेतावनी देने के बावजूद उसने आत्मसमर्पण करने से इनकार कर दिया और उल्टा पुलिस को धमकी भी दी। उसने सुसाइड वेस्ट भी पहन रखा था, जिस कारण पुलिस को उस पूरे एरिया को सील करना पड़ा। शिक्षक का हत्यारा ‘अल्लाहु अकबर’ भी चिल्ला रहा था।

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन ने इस घटना पर रोष जताते हुए कहा था, “यह एक इस्लामी आतंकवादी हमला है। देश के हर नागरिक को इस चरमपंथ के विरोध में एक साथ आगे आना होगा। इसे किसी भी हालत में रोकना ही होगा क्योंकि यह हमारे देश के लिए बड़ा ख़तरा साबित हो सकता है।”

शिक्षक का गला रेतने के बाद इस्लामी कट्टरपंथियों के विरुद्ध फ्रांस का सख्त एक्शन: 231 कट्टरपंथी किए जाएँगे देश से बाहर

इस्लामी कट्टरपंथी द्वारा शिक्षक का गला काटने की घटना के बाद फ्रांस ने इस तरह की समस्याओं का सामना करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। फ्रांस 231 विदेशी कट्टरपंथी नागरिकों को बाहर निकालने की तैयारी कर रहा है। फ्रांस सरकार की तरफ से होने वाली यह कार्रवाई कट्टरपंथ और आतंकवाद के विरुद्ध लड़ाई में एक अहम कदम माना जा रहा है।

रायटर्स में प्रकाशित ख़बर में इस पूरी कार्रवाई की विस्तृत जानकारी दी गई है। फ्रांस सरकार में मंत्री गेरल्ड डरमानिन (Gerald Darmanin) ने कहा, “निष्कासन की यह कार्रवाई 47 वर्षीय इतिहास शिक्षक सैमुएल पैटी की गला काटकर हत्या करने के बाद की जा रही है। जिन्होंने पढ़ाने के दौरान कक्षा में पैगंबर मोहम्मद के कार्टून दिखाए थे।” 

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्क्रों ने भी इस घटना पर रोष जताया था। उन्होंने कहा था, “यह एक इस्लामी आतंकवादी हमला है। देश के हर नागरिक को इस चरमपंथ के विरोध में एक साथ आगे आना होगा। इसे किसी भी हालत में रोकना ही होगा क्योंकि यह हमारे देश के लिए बड़ा ख़तरा साबित हो सकता है।” 

फ्रांस कट्टरपंथियों को कुछ इस तरह परिभाषित करता है, “इस तरह के लोग जो कट्टरता को बढ़ावा देने की प्रक्रिया में शामिल होते हैं। जो देश के बाहर जाकर आतंकवादी समूहों में शामिल होते हैं और आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देते हैं।” फ़ाइल ऑफ़ अल्टर्सफ़ॉर द प्रिवेंशन ऑफ़ टेररिस्ट अटैक्स (एफ़एसपीआरटी) की रिपोर्ट के अनुसार 231 विदेशी नागरिकों में से 180 कारावास में कैद हैं। इसके अलावा बचे हुए 51 को अगले कुछ घंटों में गिरफ्तार किया जाना था। एफ़एसपीआरटी की रिपोर्ट के तहत कुल 850 गैर क़ानूनी अप्रवासी पंजीकृत हैं। 

इस्लाम एक ऐसा मज़हब है जो फ़िलहाल पूरी दुनिया में संकट का सामना कर रहा है : इमैनुएल मैक्क्रों, फ्रांस राष्ट्रपति

इस महीने की शुरुआत में फ्रांस के राष्ट्रपति ने फ्रांस के धर्म निरपेक्ष मूल्यों को कट्टरपंथी इस्लामी ताकतों से सुरक्षित रखने की योजना का ऐलान किया था। इसके बाद उन्होंने कहा था कि इस्लाम एक ऐसा मज़हब है जो फ़िलहाल पूरी दुनिया में संकट का सामना कर रहा है। हाल ही में मैक्रों ने कहा था कि उनकी सरकार दिसंबर में एक विधेयक (बिल) लेकर आएगी जो साल 1905 के एक क़ानून को और मज़बूत करेगा। 

यह क़ानून चर्च और स्टेट को अलग करता है जिससे देश में धर्म के प्रति उदासीनता बनी रहे। उन्होंने अपने भाषण में यहाँ तक कहा कि आगामी कुछ समय में इस बात को सुनिश्चित किया जाएगा कि मज़हब, फ्रांस की शिक्षा व्यवस्था और सार्वजनिक क्षेत्र (पब्लिक सेक्टर) से दूर रहे। मैक्रों के मुताबिक़ यह सभी निर्णय कट्टरपंथ और अलगाववाद को रोकने के लिए लिए जा रहे हैं। इतना ही नहीं फ्रांस के इमामों को फ्रांसीसी भाषा भी सीखनी होगी। उन्होंने कहा कि इस्लाम को विदेशी प्रभाव से मुक्ति पानी होगी।

मैक्रों ने कहा, “इस्लाम एक ऐसा मज़हब है जिस पर पूरी दुनिया में संकट है, ऐसा सिर्फ हम अपने देश में नहीं देख रहे हैं।” इसके बाद उन्होंने युवाओं की शिक्षा पर भी ज़ोर दिया जिससे उन्हें धर्मनिरपेक्ष आदर्शों वाला बनाया जा सके। इसकी शिक्षा बच्चों को शुरूआती स्तर से या उनके स्कूल के समय से ही देनी होगी। उन्होंने इस बात के भी संकेत दिए कि फ्रांस इस्लाम को विदेशियों के प्रभाव से भी आज़ाद करेगा, इसके लिए मस्जिदों को मिलने वाली फंडिंग में सुधार किया जाएगा।

राष्ट्रपति मैक्रों ने यह बातें उस घटना के ठीक कुछ दिन बाद कही हैं जिसमें एक आदमी ने धारदार हथियार से दो लोगों पर हमला कर दिया था। घटना ठीक उस जगह पर हुई थी जहाँ कट्टरपंथी इस्लामियों ने साल 2015 में शार्ली हेब्दो के कर्मचारियों का नरसंहार किया था। फ्रांस की सरकार ने इस हरकत को भी इस्लामी आतंकवाद का नतीजा बताया था। साल 2015 में इस्लामी कट्टरपंथियों ने शार्ली हेब्दो के कार्यालय पर आतंकवादी हमला किया था जिसमें कई मशहूर कार्टूनिस्ट समेत कुल 12 लोगों की मौत हो गई थी।