Showing posts with label burden. Show all posts
Showing posts with label burden. Show all posts

कर्नाटक : 45% बढ़ा मेट्रो का किराया, पहले बस फेयर में हुआ था 15% इजाफा: लोगों ने पूछा- क्या यही कांग्रेस का ‘खटाखट मॉडल’?

बेंगलुरु मेट्रो 
कर्नाटक सरकार द्वारा फ्री बस यात्रा की रेवड़ी बाँटने के बीच अब आम जनता पर और बोझ डालने की तैयारी हो गई है। सरकार द्वारा फ्री यात्रा की सुविधा का ऐलान करने के बाद सरकार का खजाना खाली हो गया था और अब इसे भरने के लिए कर्नाटक सरकार ने जनता के परिवहन खर्च को बढ़ाने का कदम उठाया है। कर्नाटक में राज्य परिवहन निगम द्वारा बसों का किराया 15 प्रतिशत बढ़ाए जाने के बाद अब बेंगलुरु मेट्रो (Namma Metro) के किराए में भी 45 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की जाएगी। यह वृद्धि 20 जनवरी से लागू होने की संभावना है, जिससे मेट्रो में सफर करने वालों को बड़ा झटका लगेगा।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, बैंगलोर मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BMRCL) ने 17 जनवरी को अपनी बोर्ड मीटिंग में मेट्रो किराए में 45 प्रतिशत बढ़ोतरी का प्रस्ताव मंजूर किया है। इस वृद्धि के तहत, मेट्रो का न्यूनतम किराया 10 रुपये से बढ़कर 15 रुपये हो जाएगा, जबकि अधिकतम किराया 60 रुपये से बढ़कर 85 रुपये हो जाएगा। इस वृद्धि का कारण मुख्य रूप से ऑपरेशनल खर्चों में बढ़ोतरी बताया जा रहा है। बिजली के खर्च और पुराने बुनियादी ढाँचे की मरम्मत में हो रही वृद्धि को देखते हुए यह फैसला लिया गया है।

BMRCL अधिकारियों के अनुसार, नए किराए की घोषणा जल्दी ही की जाएगी और यह बढ़ोतरी 20 जनवरी से लागू हो सकती है। इसके अलावा स्मार्टकार्ड उपयोगकर्ताओं को 5 प्रतिशत की छूट दी जाएगी, जो मेट्रो यात्रा को थोड़ा सस्ता बनाए रखने में मदद करेगा। हालाँकि यह फैसला यात्रियों के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है, क्योंकि 45 प्रतिशत की वृद्धि एक बड़ा बदलाव है और इस कारण बेंगलुरु में मेट्रो के उपयोगकर्ता खर्च बढ़ने से परेशान हो सकते हैं।

इस फैसले का सोशल मीडिया पर विरोध भी हो रहा है। लोग कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार की मुफ्त की रेवड़ियों को लेकर तंज भी कस रहे हैं।

शिल्पा नाम की एक्स यूजन ने इसे ‘खटा खट कॉन्ग्रेस मॉडल’ करार दिया।

सिद्दाराम नाम के यूजर ने इसे कॉन्ग्रेस की कार्यप्रणाली करार दिया है। उन्होंने नम्मा मेट्रो के किराए की बढ़ोतरी को जनता के साथ धोखा कहा।

बसों में बढ़ाया गया था 15% किराया

इससे पहले, कर्नाटक सरकार ने 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी बसों के किराए में की थी, और इसके पीछे भी वही कारण थे – ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी और कर्मचारियों के खर्च में वृद्धि। कर्नाटक के कानून और संसदीय मामलों के मंत्री एच.के. पाटिल ने बताया था कि इन बढ़ती लागतों को देखते हुए यह कदम उठाया गया है, ताकि राज्य परिवहन निगमों की वित्तीय स्थिति को मजबूत किया जा सके। इन परिवहन सेवाओं में लगातार बढ़ती लागत के कारण राज्य सरकार को यह निर्णय लेना पड़ा। उन्होंने बताया कि ईंधन और कर्मचारियों के खर्च में बढ़ोतरी के कारण राज्य परिवहन निगमों को लगभग 74.84 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा था, जिसे भरने के लिए यह कदम जरूरी था।
मेट्रो और बसों के किराए में बढ़ोतरी का यह कदम तब उठाया गया है, जब कर्नाटक सरकार ने अपने नागरिकों को मुफ्त बस यात्रा की सुविधा दी थी और अब इसे भरने के लिए आम आदमी को और अधिक खर्च उठाना पड़ रहा है। इस बढ़ोतरी का प्रभाव केवल मेट्रो और बसों के यात्रियों पर नहीं पड़ेगा, बल्कि बेंगलुरु शहर के ट्रैफिक और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पर भी इसका असर देखने को मिलेगा। कई लोग पहले ही बढ़ते हुए किराए की वजह से मेट्रो और बसों के उपयोग में संकोच कर सकते हैं, जिससे निजी वाहन उपयोग में वृद्धि हो सकती है और इससे शहर में ट्रैफिक की समस्या और बढ़ सकती है।

बांग्लादेश के लिए ‘बोझ’ बने रोहिंग्या , कहा- अब सीमा में घुसने नहीं देंगे, सुरक्षा के लिए बन गए हैं खतरा: भारत से भी की बात

भारत के मुसलमानों उठो आंखें खोलो और रोहिंग्यों का समर्थन कर रहे नेताओं और उनकी पार्टियों से पूछों जिस रोहिंग्या को कोई मुस्लिम देश रखने को तैयार नहीं, तुम लोग क्यों इनके समर्थन में कभी शाहीन बाग बनाते हो, और अब UCC का विरोध सिर्फ अपनी कुर्सी और तिजोरी के लिए कर, क्यों आम मुसलमान को बदनाम कर रहे हो? क्या विश्व में कोई देश घुसपैठियों को अपने देश में रहने देता है? केंद्र और राज्य सरकारों को चाहिए कि जिन-जिन रोहिंग्यों के पहचान पत्र और राशन कार्ड आदि सरकारी प्रमाण बने हैं, जाँच करे कब बने थे? कौन-कौन नेता एवं अधिकारी शामिल थे सभी पर सख्त कानूनी कार्यवाही होनी चाहिए। केवल कर्मचारी अथवा अधिकारी पर नहीं, क्योकि बिना राजनीतिक संरक्षण के कोई कर्मचारी अथवा अधिकारी ऐसा दुस्साहस नहीं कर सकता। अगर यह मांग मुस्लिम समाज से नहीं उठती, फिर हिन्दू समाज को मजबूती के साथ आवाज़ बुलंद करनी होगी। 
बांग्लादेश ने रोहिंग्याओं को शरण देने से मना कर दिया है। वहाँ के नेताओं ने कहा है कि म्यामांर के रास्ते वो अब ज्यादा मात्रा में रोहिंग्याओं को बांग्लादेश की सीमा में नहीं आने देंगे क्योंकि इन लोगों के आने से देश की सुरक्षा में खतरा पैदा हो गया है।

बांग्लादेश के सड़क परिवहन और पुल मंत्री ओबैदुल कादिर ने बुधवार (7 फरवरी 2023) को पत्रकारों से कहा, “हम किसी और रोहिंग्या को देश में प्रवेश करने की अनुमति नहीं देंगे… वे पहले ही हमारे लिए बोझ बन चुके हैं।” उन्होंने बताया कि देश को मिलने वाली विदेशी सहायता पहले ही कम हो चुकी है ऐसे में उन लोगों को समर्थन कैसे दिया जाएगा।

इसी तरह बांग्लादेश के शरणार्थी राहत और प्रत्यावर्तन आयुक्त मोहम्मद मिजानुर रहमान ने कहा कि म्यांमार में जुंटा शासन व विद्रोहियों के बीच जारी जंग के बीच सैकड़ों लोग बांग्लादेश में प्रवेश करने के लिए म्यांमार की सीमा पर एकत्रित हैं। इनमें ज्यादातर चकमा समुदाय के लोग और रोहिंग्या हैं।

उन्होंने कहा, “बांग्लादेश पहले ही रोहिंग्याओं के अत्यधिक बोझ से दबा हुआ है। 7 साल हो गए हैं और अभी तक जो रोहिंग्या पहले से बांग्लादेश में हैं उन्हें उनकी सीमा में नहीं भेजा जा चुका है। अब ये लोग हमारे लिए, हमारी सुरक्षा के लिए खतरा बन गए हैं।”

बांग्लादेश का रोहिंग्याओं पर ऐसा बयान तब आया है जब भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर भी वहाँ के दौरे पर थे। एस जयशंकर से मिलने के बाद बांग्लादेश के विदेश मंत्री हसन महमूद ने कहा, “हमने बहुत अच्छी चर्चा की। हमने तमाम मुद्दों समेत क्रॉस बॉर्डर मुद्दे, रोहिंग्या मुद्दे, सुरक्षा मुद्दे समेत कई मुद्दों पर बात की।”

मालूम रहे कि रोहिंग्याओं की संदिग्ध गतिविधियाँ भारत में भी कम नहीं हैं। कुछ साल पहले खबर आई थी कि बांग्लादेश से एक नाव में भरकर 66 रोहिंग्या अंडमान आए थे। पुलिस ने जानकारी होते ही सबको हिरासत में लिया। इनमें 24 पुरुष, 27 औरतें और 15 बच्चे थे। पुलिस ने फौरन उन सबको वापस भेजने की व्यवस्था हुई।