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ठाणे की अवैध मस्जिद गिराने में देरी से उखड़ा हाई कोर्ट, श्री स्वामी समर्थ हाउसिंग की जमीन पर खड़ा कर रखा है ढाँचा: पुणे इमामबाड़ा का वक्फ दर्जा रद्द

                                                 प्रतीकात्मक तस्वीर (फोटो साभार: AI_Bing)
बॉम्बे हाई कोर्ट ने ठाणे नगर निगम को जमकर लताड़ लगाई है। एक अवैध मस्जिद को तोड़ने में देरी पर कोर्ट ने सख्त नाराजगी जताई। बॉम्बे हाई कोर्ट में जस्टिस एएस गडकरी और कमल खाता की बेंच ने कहा कि कानून का पालन करवाना प्रशासन की जिम्मेदारी है।

बॉम्बे हाई कोर्ट ने पहले भी इस मामले में साफ निर्देश दिए थे, फिर भी कार्रवाई नहीं हुई। कोर्ट ने साफ कहा कि कानून से ऊपर कोई नहीं है। कुछ मुस्लिम समूह लगातार इसका विरोध कर रहे हैं, लेकिन कोर्ट ने दो टूक कहा कि विरोध के नाम पर कानून तोड़ने की इजाजत नहीं दी जा सकती।

इस केस में न्यू श्री स्वामी समर्थ बोरिवडे हाउसिंग कंपनी ने कोर्ट से गुहार लगाई थी। कंपनी के पास कासरवडवली के बोरिवडे गाँव में 18,000 वर्ग मीटर से ज्यादा जमीन है। कंपनी ने ठाणे नगर निगम (टीएमसी) से कहा कि उनकी जमीन पर बनी एक अवैध इमारत को तोड़ा जाए। ठाणे नगर निगम ने 1 जनवरी 2025 को जाँच की, तो पता चला कि ये 3,600 वर्ग फुट की ग्राउंड-प्लस-वन मस्जिद है, जिसमें नमाज हॉल भी है। इसका संचालन परदेसी बाबा ट्रस्ट करता है।

मस्जिद के पक्ष वालों का कहना था कि ये तब बनी थी, जब इलाका ग्राम पंचायत के अधीन था, लेकिन ठाणे नगर निगम के रिकॉर्ड में इसके लिए कोई ऑर्डर नहीं मिला। इस मामले में नोटिस और सुनवाई के बाद 27 जनवरी को थाणे नगर निगम ने इसे अवैध ठहराया और तोड़ने का ऑर्डर दिया। हालाँकि दूसरा पक्ष कोर्ट पहुँच गया और अब हाई कोर्ट ने साफ कर दिया है कि ठाणे नगर निगम को जल्द से जल्द ये मस्जिद ढहाना चाहिए।

बॉम्बे हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा, “लोकतंत्र में कोई व्यक्ति, समूह या संगठन यह नहीं कह सकता कि वह कानून नहीं मानेगा। अगर कोई ऐसा करता है, तो प्रशासन को सख्ती से उसे कानून का पालन करवाना चाहिए। यह भी जरूरी है कि लोगों के मन में यह बात बैठे कि कानून तोड़ने या उसका विरोध करने की इजाजत नहीं मिलेगी।”

पुणे इमामबाड़ा का वक्फ दर्जा रद्द, बॉम्बे हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक और बड़ा फैसला सुनाते हुए पुणे के हाजी मोहम्मद जवाद इस्पाहानी इमामबाड़ा ट्रस्ट का वक्फ दर्जा रद्द कर दिया। महाराष्ट्र स्टेट वक्फ ट्रिब्यूनल ने 2023 में इसे वक्फ संगठन माना था, लेकिन अब हाई कोर्ट ने उस फैसले को पलट दिया। जस्टिस संदीप वी. मार्ने ने कहा कि वक्फ बोर्ड ने 2016 में गलत तरीके से इसे वक्फ एक्ट 1995 की धारा 43 के तहत दर्ज किया था। कोर्ट ने साफ किया कि सिर्फ महाराष्ट्र पब्लिक ट्रस्ट एक्ट 1950 के तहत रजिस्ट्रेशन से कोई ट्रस्ट अपने आप वक्फ नहीं बन जाता।
पुणे का ये इमामबाड़ा 1953 से मुस्लिम पब्लिक ट्रस्ट के तौर पर रजिस्टर्ड था। ट्रस्ट में गड़बड़ियों की शिकायतों के बाद वक्फ बोर्ड से इसे वक्फ बनाने की माँग उठी। 2016 में वक्फ बोर्ड ने इसे मंजूरी दी, लेकिन ट्रस्ट के ट्रस्टी इसके खिलाफ वक्फ ट्रिब्यूनल गए। ट्रिब्यूनल ने 2023 में उनकी याचिका खारिज कर दी, तो मामला हाई कोर्ट पहुँचा। अब कोर्ट ने ट्रिब्यूनल को नए सिरे से मामले की सुनवाई करने को कहा है। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि ट्रिब्यूनल अपना फैसला खुद ले, बिना हाई कोर्ट के प्रभाव के।

उत्तराखंड : जमीनों के मालिक खुद ही तुड़वा रहे मज़ार: ऋषिकेश में पुरोहित से लेकर पूर्व सैनिक के घरों में दरगाहें, जागरूक हिन्दुओं ने उठाया बीड़ा

इन दिनों सोशल मीडिया पर उत्तराखंड के ऋषिकेश में मजारों को ध्वस्त करने के कई वीडियो वायरल हो रहे हैं। कुछ हैंडलों पर इसे LIVE भी किया गया है। वीडियो वायरल होने के बाद मुस्लिम तबके के कुछ लोग इस मामले में प्रशासन से कार्रवाई की माँग कर रहे हैं। वहीं ‘देवभूमि रक्षा अभियान’ के स्वामी दर्शन भारती ने अपने संगठन द्वारा मजारों को तोड़े जाने की जिम्मेदारी भी ली है। ऑपइंडिया ने उन लोगों से सम्पर्क किया जिन्होंने मजारों के ध्वस्तीकरण की जिम्मेदारी ली है। उन्होंने अपनी कार्रवाई को पूरी तरह से कानून के दायरे में बताते हुए हमसे अपने काम को एक बड़ी साजिश के खिलाफ संघर्ष का नाम दिया।

ऋषिकेश और आसपास के क्षेत्रों में मजारों के खिलाफ हल्लाबोल की शुरुआत करने की जिम्मेदारी एक स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता चंद्रभूषण शर्मा ने ली है। ऑपइंडिया से मंगलवार (5 सितंबर, 2023) को हुई बातचीत के दौरान उन्होंने हमें विस्तार से पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस अभियान की शुरुआत उन्होंने पिछले माह 26 अगस्त से की थी।

खैर, इस काम से एक बात तो जाहिर हो गयी कि जगह-जगह बनने वाले मजार और कुछ नहीं, बल्कि ज़मीन जिहाद है। यदि इन पद-भ्रष्ट हिन्दुओं ने मजारों की बजाए घर-घर मूर्ति स्थापित की होती, कोई सनातन धर्म पर उंगली उठाने का साहस नहीं करता। 

मजारों से मिलता लव जिहाद/आतंकवाद और मुस्लिम कट्टरपंथियों को वित्तीय सहायता 

देश में फ़ैले लव जिहाद के कारण सूट केसों/फ्रिज में टुकड़े में होती राह भटकी हिन्दू लड़कियों की लाशे, मुस्लिम कट्टरपंथियों द्वारा सर से तन से जुदा करने वालों को रुपयों का लालच के लिए धन कहीं से ओर से नहीं मजारों से आता है, जिसे हिन्दू मजारों पर चढ़ाकर आते हैं। जिस दिन हिन्दू मजारों पर माथा टेकने की बजाए अपने मंदिरों में जाना शुरू कर देंगे, मजारों पर सन्नाटा ही नहीं छाएगा, लव जिहाद/आतंकवाद और फैलती मुस्लिम कट्टरपंथी पर भी चोट लगेगी। 

मजारों पर जाने वाले हिन्दू यदि प्रतिदिन सुबह गायत्री मन्त्र का जाप, बजरंग बली, दुर्गा/काली माता, देवों के देव महादेव, भैरों बाबा या जगत पालनहार विष्णु आदि की पूजा करें और सूर्य देवता को जल अर्पित करने से समस्याओं के समाधान में सहायता जरूर मिलेगी। पत्थर की मूर्तियां जरूर हैं, लेकिन बेदर्द नहीं। जिस दिन श्रद्धा से इनके चरणों में माथा टेक देंगे जीवन तर जाएगा। क्योकि इस दुनिया से बिदा होने पर राम नाम सत्य ही बोल बोले जाएंगे।    

ऋषिकेश व आस-पास घरों में 200 से अधिक मजारें

चंद्रभूषण शर्मा ने दावा किया कि प्राइवेट नौकरी के दौरान फील्ड में रह कर उन्होंने पाया कि ऋषिकेश व आसपास 200 से अधिक मजारें घरों के अंदर बन चुकी हैं। इन्हें हिन्दू धर्म के पूर्व सैनिक, व्यापारी और यहाँ तक कि मंदिर के पुजारियों तक ने अपने घरों में बनवा रखा था। कुछ मजारें बनाने वालों के घर तक ही सीमित थीं जबकि कई अन्य तो धीरे-धीरे सार्वजनिक रूप ले चुकी थीं। यहाँ कव्वाली आदि बजा कर सालाना उर्स मनाया जा रहा था और बाहरी लोग नमाज़ पढ़ने लगे थे।

ऋषिकेश के कई हिस्सों में फैला है जाल

जिन मजारों को 27 अगस्त से 3 सितंबर के बीच ध्वस्त किया है, वो ऋषिकेश के अमित ग्राम, मनसा देवी वार्ड और सुमन विहार इलाके में हैं। चंद्रभूषण शर्मा ने बताया कि ये अभियान अभी आगे भी तब तक जारी रहेगा जब तक ऋषिकेश मजार मुक्त नहीं हो जाता। साथ ही उन्होंने कहा कि यह काम अपने खुद के पैसे और जनसहयोग से किया जा रहा है जिसमें अगली कार्रवाई की जानकारी किसी को भी नहीं दी जाती। आगे भी अवैध मजारों को वैध तरीके से तोड़ने की बात खुद को इस अभियान में सक्रिय भागीदार बताने वाले ऋषिकेश के अनिल कुमार ने भी कही। हमें बताया गया कि घर के अंदर मजार वाली साजिश से ऋषिकेश शहर और 5 किलोमीटर का इलाका बुरी तरह से प्रभावित है।
                                                         अनिल कुमार द्वारा भेजी गई तस्वीर

दरगाहों पर रची जाती है साजिश

चन्द्रभूषण शर्म ने हमें बताया कि जो लोग किसी वजह से छोटी-छोटी बातों से परेशान हो कर दरगाहों पर जाते हैं वहाँ उन्हें घर में मजार बनाने की सलाह दी जाती है। दरगाह के नाम पर चंद्रभूषण ने खासतौर पर रुड़की की पिरान कलियर का नाम लिया। यहाँ उन्हें न सिर्फ घर में मजार बनाने वाले कारीगर दिए जाते हैं बल्कि बाद में अंदर ही अंदर इबादत करने के लिए नमाज़ी टोपी सहित इस्लामी वेशभूषा भी दी जाती है। शर्मा का दावा है कि इसी जगह पर उन्हें इबादत की ट्रेनिंग आदि भी मिलती है।
शर्मा ने बताया कि मंदिर के पुरोहित और सैनिक सहित अन्य व्यापरी भी दरगाहों पर बताए कानून से अंदर ही अंदर इबादत करते थे।

हर ध्वस्तीकरण की लिखित सहमति

हमने चंद्रभूषण शर्मा से सवाल किया कि मजारों पर हथौड़े चलाने पर क्या उनके खिलाफ पुलिस कार्रवाई नहीं कर रही। इस सवाल के जवाब में शर्मा ने कहा कि उन्होंने इस कार्रवाई की लिखित अनुमति और सहमति उन मकान मालिकों से ले रखी है जिन्होंने किसी की बातों में आ कर घर में मजार बनवा ली थी। शर्मा ने यह भी कहा कि ऋषिकेश को मजार मुक्त करने के अभियान से पहले उन्होंने सभी कानूनी पहलुओं पर गंभीरता से विचार किया था।
                                                              सहमति पत्र
घरों में बनी मजारों के ध्वस्तीकरण के अभियान में शामिल एक अन्य व्यक्ति अनिल कुमार ने भी बताया कि उन्होंने घर मालिकों से इसकी अनुमति और सहमति ले रखी थी। अनिल कुमार ने हमें कुछ मकान मालिकों के सहमति पत्र भी भेजे। इस सहमति पत्र में स्वेच्छा और हिन्दू धर्म के सम्मान में अपने घर से मजारों को हटाने की अनुमति लिखी हुई है। साथ ही भविष्य में दोबारा ऐसा कृत्य न करने व कभी न्यायालय आदि न जाने की घोषणा की गई है। सहमति पत्र की शुरुआत ‘श्री गणेशाय नमः’ से की गई है।

कुछ धर्मान्तरित हिन्दू ही हैं साजिश के संचालक

चंद्रभूषण शर्मा ने बताया कि ऋषिकेश में फ़ैल रहा मजारों का जाल पिछले 30 सालों से शुरू हुआ है। पिछले हफ्ते जो मजारें तोड़ी गईं हैं उनमे से कुछ 2 दशक पुरानी हैं। हालाँकि उन्होंने यह भी कहा कि पिछले 5 से 6 साल के बीच तो अंधाधुंध मजारें बनी हैं। इसके पीछे चंद्रभूषण ने कुछ ऐसे हिन्दुओं को सक्रिय बताया जो अंदर ही अंदर धर्म परिवर्तन कर चुके हैं। नाम न बताने की शर्त पर उन्होंने एक ऐसे व्यक्ति का जिक्र किया है जो पहले हिन्दू था लेकिन अब वह इस्लामी रंग-ढंग में रहता है। शर्मा ने कहा कि अथाह पैसे का मालिक और बाउंसरों की सुरक्षा में चलने वाला वह व्यक्ति अब हिन्दू देवी-देवताओं का अपमान कर के लोगों को अपने में मिलाने का प्रयास करता है।
चन्द्रभूषण शर्मा ने इस अभियान में शामिल अपने अन्य साथियों का नाम बताने से इंकार कर दिया। उन्होंने निकट भविष्य में इसे गति देने का भी एलान किया और लोगों से जागरूकता की अपील की।

जिसने बनवाई मजार उसी की बीवी से लव जिहाद

ऑपइंडिया ने इस मामले में देवभूमि रक्षा अभियान के संरक्षक स्वामी दर्शन भारती से बात की। स्वामी दर्शन भारती ने हमें बताया कि ऋषिकेश के जिस अमित ग्राम इलाके में सबसे अधिक मजारें घर में बनी हैं वहाँ के एक मकान में लव जिहाद की घटना घट चुकी है। दर्शन भारती ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि उस हिन्दू परिवार ने लगभग 15 साल पहले घर में मजार बनवाया था जिसका पति इबादत ही करता रह गया और उसकी बीवी मुस्लिम के साथ भाग गई। स्वामी के अनुसार यह घटना लगभग 5 साल पुरानी है।

प्रशासन जता चुका है लाचारी

मजारों के खिलाफ खुद से कार्रवाई के सवाल पर स्वामी दर्शन भारती ने हमें बताया कि उन्होंने इस बाबत पहले प्रशासन से ही बात की थी। उन्होंने दावा किया कि मजारों को निजी मकानों में स्वेच्छा से बने होने की बात कह कर प्रशासन ने किसी भी कार्रवाई में असमर्थता जताई थी। संगठन द्वारा चलाए जा रहे अभियान को उन्होंने कानूनी और अंतिम विकल्प बताया। साथ ही उन्होंने इसे बेहद खतरनाक साजिश बताते हुए कहा कि पहाड़ियों के खिलाफ अंदर ही अंदर पहाड़ी ही खड़े कर दिए गए।

साधु-संतों में मुस्लिमों का डर

धर्मनगरी ऋषिकेश में चुपके से इतनी मजारें बन जाने के पीछे स्वामी दर्शन भारती ने वहाँ तमाम संतों में मुस्लिमों का डर बताया। उन्होंने इस डर को कइयों की मजबूरी कहा और आगे से अवैध मज़ार विरोधी अभियान में शामिल होने की अपील की।