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कांग्रेस नेता सिद्धारमैया ने दी देश में खून-खराबे की धमकी

सिद्धारमैयाकर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने सोमवार (अक्टूबर 14, 2019) को यह कहकर विवाद खड़ा कर दिया कि अगर भारतीय संविधान में कुछ भी बदलने की कोशिश की गई, तो ‘खून-खराबा’ हो जाएगा। 
मैसूर के टी नरसीपुरा में एक सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, “खबरदार, अगर संविधान को बदलने की कोई कोशिश की गई तो देश में खून-खराबा हो जाएगा।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सिद्धारमैया आंबेडकर की प्रतिमा का अनावरण करने पहुॅंचे थे। उन्होंने कहा कि आंबेडकर केवल दलितों के लिए नहीं लड़े। वे उन लोगों के साथ भी खड़े हुए जिनका शोषण किया गया था। जातिवाद के कारण समुचित अवसरों से वंचित सभी समुदायों को न्याय दिलाने के लिए आंबेडकर ने ईमानदारी से प्रयास किया।
सिद्धारमैया ने कहा कि कुछ लोग आंबेडकर का विरोध इसलिए करते हैं क्योंकि उन्होंने समाज के हर व्यक्ति को समान अवसर दिए हैं। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों को भारतीय संविधान पसंद नहीं है, क्योंकि डॉ. आंबेडकर ने अपने संविधान के माध्यम से सभी दलित समुदायों को समान अवसर प्रदान किए।
उल्लेखनीय है कि 2018 में राज्य विधानसभा चुनावों के दौरान भी सिद्धारमैया ने इसी तरह की टिप्पणी करते हुए कहा था कि अगर भाजपा की अगुवाई वाली एनडीए सरकार ने संविधान को बदलने की कोशिश की, तो ‘देश में खून-खराबा होगा।’ इस तरह की टिप्पणी कर लोगों को उकसाते वक्त सिद्धरमैया शायद यह भूल जाते हैं कि संविधान में कई बार बदलाव और संशोधन किए गए हैं। इनमें से कई सारे विवादास्पद संवैधानिक संशोधनों के लिए उनकी खुद की पार्टी जिम्मेदार है। इसमें 1972 में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी के जमाने में किया गया 42वां संवैधानिक संशोधन भी शामिल है, जो ‘मिनी संविधान’ के नाम से कुख्यात है।
सिद्धारमैया को यह भी ज्ञात होना चाहिए कि डॉ आंबेडकर ने यदि आरक्षण माँगा था, तो अपने ही जीवनकाल में उसका दुरूपयोग होता देख, तुरन्त समाप्त करने को कहा था, जिसे आज तक वोट के भूखे नेताओं ने समाप्त करने का साहस नहीं दिखाया, क्या यही यही आंबेडकर प्यार है? शर्म आनी चाहिए। इसी ढोंगी हरकतों के कारण चुनावों में NOTA बिना किसी प्रचार के वोट प्राप्त कर रहा है। 

JDS को नहीं BJP कार्यकर्ताओं को कहा था वेश्या: कांग्रेस सिद्धारमैया की सफाई

सिद्धारमैयाकर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता सिद्धारमैया अपने बयानों को लेकर अक्सर सुर्खियों में रहते हैं। जेडीएस कार्यकर्ताओं को वेश्या बताने वाले अपने बयान पर मचे बवाल के बाद उन्होंने सफाई देते हुए कहा है कि उनका संदर्भ बीजेपी से था।
अगर सिद्दारमैया ने बीजेपी पर निशाना साधा था, तो क्या "बीजेपी वैश्या है?"आखिर इतनी ओछी बात बोलकर सिद्दरामैया क्या सिद्ध करना चाहते हैं? 
असल में, सिद्धारमैया से पूछा गया था कि राज्य में गठबंधन सरकार के गिरने के लिए जेडीएस उन्हें जिम्मेदार ठहरा रहा है। जवाब में पूर्व मुख्यमंत्री ने एक कन्नड़ के एक कहावत का इस्तेमाल किया, जिसका मतलब होता है कि जो वेश्याएँ नाच नहीं सकती वे डॉंस फ्लोर का रोना रोती हैं। एएनआई के अनुसार बाद में सफाई देते हुए उन्होंने इस बयान को बीजेपी से जोड़ दिया।

14 महीने पुरानी कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन सरकार इसी साल 22 जुलाई को अपने ही विधायकों की बगावत के कारण गिर गई थी। जेडीएस कार्यकर्ताओं ने सरकार गिरने का सीधा आरोप सिद्धारमैया पर लगाया था। उनका कहना था कि एसटी सोमशेखर, ब्यारथी बासवाराज, एमटीबी नागराज, के सुधाकर जैसे कांग्रेस के बागी विधायक सिद्धारमैया के इशारे पर ही काम कर रहे थे।