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ललित मोदी ने 3 ट्वीट में कांग्रेसियों की हवा निकाल दी : राहुल, गाँधी परिवार, भारत के लुटेरे… भौंकते रहो

ललित मोदी लड़ेंगे राहुल गाँधी से... कोर्ट में!
मोदी सरनेम को लेकर आजकल कांग्रेसी नेता कुछ ज्यादा ही उछल रहे हैं। ‘हर चोर का मोदी सरनेम क्यों’ मामले में राहुल गाँधी को जब से 2 साल की सजा सुनाई गई है, तब से उनकी पार्टी के नेता बिलबिलाए हुए हैं, कुछ भी अल-बल बक रहे हैं। अब लेकिन करारा जवाब मिला है… वो भी मोदी सरनेम वाले से ही, ललित मोदी की ओर से।

ललित मोदी ने 30 मार्च 2023 को 3 ट्वीट किए। तीनों में निशाने पर रहे राहुल गाँधी, उनकी पार्टी कांग्रेस और उनके भ्रष्टाचारी नेता लोग। पहली ही ट्वीट में ललित मोदी ने क्लियर कर दिया कि वो राहुल गाँधी पर केस करने वाले हैं लंदन की अदालत में। सासंदी छिनने के बाद आम आदमी कहते हुए उन्होंने राहुल गाँधी को चेतावनी भी दी कि कोर्ट में सॉलिड बचाव के साथ आना है।

ललित मोदी ने लिखा:  “मैं देख रहा हूँ कि हर ऐरा-गैरा और गाँधी मुझे भगोड़ा कह रहा। क्यों? कैसे? क्या अब तक मुझे कभी भी इसके लिए दोषी ठहराया गया? जबकि इसके विपरीत #Papu उर्फ राहुल गाँधी को तो सजा भी सुना दी गई है, अब वो एक सामान्य नागरिक है… वो यह बोल रहा है। और ऐसा लगता है कि सभी विपक्षी नेताओं के पास करने के लिए और कुछ नहीं है, इसलिए वे भी या तो गलत जानकारी रखते हैं या सिर्फ बदले की भावना रख कर ऐसा बोल रहे हैं।”

ललित मोदी ने इसी ट्वीट में अपने लिए फैसले पर बात की। उन्होंने लिखा कि वो राहुल गाँधी पर इंग्लैंड की अदालत में केस करेंगे। साथ ही कटाक्ष या चेतावनी भरे लहजे में यह भी लिखा कि राहुल को ठोस सबूतों के साथ आना होगा क्योंकि वो उत्सुक हैं उन्हें पूर्ण रूप से #मूर्ख बनते हुए देखने के लिए।

इसी ट्वीट में ललित मोदी ने कुछ कांग्रेसी नेताओं का नाम भी लिखा। इन नेताओं को गाँधी परिवार ने कैसे यूज किया, उसे उजागर किया। उन्होंने लिखा, “आरके धवन #सीताराम केसरी #मोती लाल वोहरा आदि सभी गाँधी परिवार के लिए पंचिंग बैग रहे हैं। #नारायण दत्त तिवारी को भी नहीं भूलना चाहिए।”

दूसरे ट्वीट में ललित मोदी ने कांग्रेसी नेताओं के भ्रष्टाचार पर वार किया। उन्होंने डायरेक्ट सवाल किया कि इन लोगों के पास विदेशों में संपत्ति कैसे है? खुद ही जवाब देते हुए “कमलनाथ से पूछो” वाला सूत्र भी दे दिया। इतना ही नहीं, ललित मोदी ने एक कदम आगे बढ़ कर यह भी लिख डाला कि वो इन संपत्तियों के पते और फोटो आदि भेज सकते हैं। इसके बाद उन्होंने लिखा: “भारत की जनता को बेवकूफ मत बनाओ। असली धूर्त और बदमाश कौन है, सब जानते हैं। #गाँधी परिवार न हो गया मानो वे हमारे देश पर शासन करने के हकदार हैं। और हाँ, जैसे ही आप कड़े कानून पारित करेंगे, मैं वापस आ जाऊंगा। 

🙏जय-हिंद
IPL पर बोलते हुए ललित मोदी ने लिखा कि उन्होंने पिछले 15 सालों में आज तक एक पैसा भी लिया हो, यह साबित नहीं हुआ है। हाँ, यह स्पष्ट रूप से सिद्ध हो गया है कि उन्होंने इस दुनिया में सबसे बड़ा खेल आयोजन बनाया, जिसने 100 बिलियन डॉलर के करीब बिजनेस किया।
तीसरे और अंतिम ट्वीट में उन्होंने याद दिलाया कि एक कांग्रेसी नेता को यह नहीं भूलना चाहिए कि 1950 के दशक की शुरुआत से ही मोदी-परिवार ने उनके लिए और भारत देश के लिए इतना कुछ किया है जिसकी वे कभी कल्पना भी नहीं कर सकते। अपनी तारीफ करते हुए उन्होंने लिखा कि जितना करने का सपना देखा था, उससे कहीं अधिक किया। अन्त में सबसे मारक लाइन ललित मोदी ने लिखी:  
“इसलिए गाँधी परिवार की तरह घोटालेबाज, दागदार, भारत के लुटेरे… भौंकते रहो 🙏 जय हिन्द।”

गुजरात से निकली ‘कांग्रेस तोड़ो यात्रा’… यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष विश्वनाथ सिंह वाघेला का इस्तीफा


ऐसा लगता है कि भारत जोड़ो यात्रा की तैयारियों में लगे पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को आजकल सपने में भी इस्तीफे ही दिखाई दे रहे होंगे। एक के बाद एक इस्तीफा। छोटे से लेकर बड़े नेता तक का इस्तीफा। करीबी से लेकर दूर के नेता तक का इस्तीफा। पुरुष से लेकर महिलाओं तक का इस्तीफा। यकीन मानिए, राहुल गांधी जितनी शिद्दत के भारत जोड़ो में नहीं लगे हैं, उससे कहीं ज्यादा मजबूत, जोशो-जुनून के साथ कांग्रेसी ही कांग्रेस तोड़ो यात्रा बेहद तेजी से चला रहे हैं। अभी कांग्रेसी सियासत की फिजाओं में गुलाम नबी की ‘आजादी’ ही सुर्खियों में थी। कांग्रेसी एक के बाद एक मिल रहे सदमों से उबर भी नहीं पाए थे कि राहुल गांधी की गुजरात यात्रा से पहले एक ओर इस्तीफा उनकी झोली में आ गिरा। सिर्फ इस्तीफा ही नहीं, गांधी परिवार के लिए साथ में धारदार आरोप भी आए हैं।

राहुल के गुजरात विजिट से पहले गुजरात से ही आ गया इस्तीफा, गंभीर आरोप लगाए

यह वाकई दिलचस्प है कि एक ओर कांग्रेस पार्टी भारत जोड़ो यात्रा की तैयारी करने में लगी है, वहीं दूसरी तरफ पार्टी के नेता कांग्रस छोड़ रहे हैं। ऐसे में भारत जोड़ने से पहले कांग्रेस अपने ही नेताओं को जोड़े रखने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। राहुल गांधी की गुजरात यात्रा से पहले इस्तीफा भी गुजरात से ही आया है। गुजरात यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष विश्वनाथ सिंह वाघेला ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस पद से इस्तीफा देने के बाद इसे कांग्रेस के लिए राज्य में एक और बड़ा झटका माना जा रहा है।
कांग्रेस विचारधारा से भटकी, पार्टी में गुटबाजी के चलते युवाओं का कोई भविष्य नहीं
गुजरात कांग्रेस में जारी उठा-पटक थमने का नाम ही नहीं ले रही है। कुछ ही माह पहले गुजरात कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष हर्दिक पटेल ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया था और भाजपा में शामिल हो गए थे। अब विश्वनाथ वाघेला ने कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी और गुजरात कांग्रेस अध्यक्ष जगदीश ठाकोर को पत्र लिखकर अपना इस्तीफा दिया है। वाघेला ने अपने इस्तीफे में कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा है। वाघेला ने इस्तीफा देते हुए कहा कि कांग्रेस में सिर्फ और सिर्फ गांधी परिवार की पूजा होती है। हर ओर सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की तस्वीर लगी रहती है। कांग्रेस अपनी विचारधारा से भटक गई है। पार्टी में गुटबाजी हावी है और इसमें युवाओं का कोई भविष्य नहीं है।
इससे पहले भी हार्दिक पटेल समेत कई नेता छोड़ चुके हैं कांग्रेस का दामन
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी आज (सोमवार) गुजरात का दौरा करने वाले हैं और वाघेला का इस्तीफा उनके दौरे से एक दिन पहले आया है। वाघेला ने कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी और गुजरात कांग्रेस अध्यक्ष जगदीश ठाकोर को पत्र लिखकर इस्तीफा दे दिया। हाल ही के महीनों में गुजरात कांग्रेस के कई नेताओं ने कांग्रेस छोड़ा है। गुजरात कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष हर्दिक पटेल ने कुछ ही माह पहले पार्टी को अलविदा कह दिया था। राजिंदर प्रसाद और कई हाई- प्रोफाइल नेताओं ने भी कांग्रेस का दामन छोड़ अन्य पार्टियों में शामिल हो गए। कांग्रेस नेता राजिंदर प्रसाद ने दो सितंबर को पार्टी के सभी पदों और प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। पेशे से वकील जयवीर शेरगिल ने भी 24 अगस्त को कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा देते हुए पार्टी पर कई आरोप लगाए थे। मालूम हो कि इस साल की शुरुआत में वरिष्ठ कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया था।
आनंद शर्मा ने हिमाचल चुनाव संचालन समिति से दिया इस्तीफा
ताजा मामले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आनंद शर्मा ने हिमाचल प्रदेश चुनाव के लिए गठित संचालन समिति से इस्तीफा दे दिया है। आनंद शर्मा ने इस बारे में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र लिखा है। पत्र में आनंद शर्मा ने लिखा कि 26 अप्रैल को हिमाचल कांग्रेस के स्टीयरिंग कमिटी का प्रमुख बनाने के बावजूद आज तक उनकी भूमिका स्पष्ट नहीं की गई। उन्होंने लिखा कि बीते दिनों दिल्ली और शिमला में हिमाचल चुनाव को लेकर हुई महत्वपूर्ण बैठकों में भी उन्हें आमंत्रित नहीं किया गया। इसे ‘अपमान’ की बात कहत हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आनंद शर्मा ने हिमाचल प्रदेश में अहम पद से इस्तीफा दे दिया है। यह इस्तीफा पार्टी के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है। पूर्व केंद्रीय मंत्री और राज्यसभा में कांग्रेस के उपनेता आनंद शर्मा को 26 अप्रैल को हिमाचल प्रदेश में संचालन समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। आनंद शर्मा को हिमाचल प्रदेश के सबसे बड़े नेताओं में माना जाता है।

कांग्रेस में राज्यसभा टिकट पाने के लिए दो शर्तें जरूरी- नामदार होना और गांधी परिवार की चमचागीरी

अगर कांग्रेस का चरित्र समझना हो तो उन उम्मीदवारों को देख लीजिए, जिसे कांग्रेस ने राज्यसभा का उम्मीदवार बनाया है। ये बेवजह नहीं है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बरसों तक कांग्रेस से जुड़े रहने के बाद भी पार्टी को एक झटके में छोड़ दिया। राज्यसभा के लिए घोषित किए गए सभी उम्मीदवार ऐसे हैं, जिसके पीछे आपको कांग्रेसी कार्यकर्ताओं के परिश्रम की बेकद्री दिखेगी, उनके सपने मरते हुए नजर आएंगे।
किसी उम्मीदवार को गांधी परिवार की वफादारी का इनाम मिला है तो किसी को सिर्फ इस वजह से टिकट दिया गया है क्योंकि वो किसी नामदार का बेटा है। कोई जनता द्वारा नकारे जाने के बाद भी सिर्फ इसलिए थोपा गया है क्योंकि वो गांधी परिवार का करीबी है तो किसी को राष्ट्र विरोधी गतिविधि में शामिल होने का वजीफा मिला है।
कांग्रेस में परिवारवाद को प्राथमिकता
ऐसा कई बार देखा गया है कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जी-तोड़ मेहनत की, लेकिन जब चुनाव की बारी आई तो कार्यकर्ताओं को पूरी तरह से दरकिनार कर दिया गया। हर बार की तरह इस बार भी कांग्रेस में कार्यकर्ताओं के परिश्रम से ज्यादा परिवारवाद, कामदार से ज्यादा नामदारों को तरजीह दी गई है।

कांग्रेस ने जिन नेताओं को राज्यसभा का सांसद बनाने के लिए चुनाव है, उनमें दीपेंद्र हुड्डा का नाम शामिल है। दीपेंद्र 2019 का लोकसभा चुनाव हरियाणा से हार गए थे, लेकिन इसके बाद भी इन्हें सिर्फ इसलिए उम्मीदवार बनाया गया है क्योंकि ये हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के बेटे हैं।
इसी प्रकार गुजरात से कांग्रेस के बड़े नेता और विदेश मंत्री रह चुके माधवसिंह सोलंकी के बेटे भरत सिंह सोलंकी को भी उम्मीदवार बनाया गया है।
महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री रजनीतई सातव के पुत्र राजीव सातव को भी कांग्रेंस ने आगे किया है।
इसी प्रकार छत्तीसगढ़ में लोकसभा चुनाव हार चुकीं फूलो देवी नेताम को कांग्रेस ने सिर्फ इसलिए उम्मीदवार बनाया है, क्योंकि वो कांग्रेस के दिग्गज नेता अरविंद नेताम की बेटी हैं।
कुल मिलाकर ये चारों भी कांग्रेस की वंशवाद परंपरा को आगे बढ़ा रहा है।
गांधी परिवार की वफादारी का इनाम
वैसे कांग्रेस के लिए जहां नामदार होना सबसे बड़ी योग्यता है, वहीं दूसरी योग्यता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है, और वो है गांधी परिवार की वफादारी। राज्यसभा के लिए उम्मीदवार तय करते समय इसका पूरा ख्याल रखा गया है।

जाने माने वकील केटीएस तुलसी का भले ही छतीसगढ़ से कोई लेना-देना न हो, लेकिन उन्हें छत्तीसगढ़ से कांग्रेस का उम्मीदवार बनाया गया है, जानते हैं क्यों, वे फिलहाल रॉबर्ट वाड्रा से जुड़े सभी मामलों को संभाल रहे हैं या फिर ये कह लीजिए कि वाड्रा को कानून के शिकंजे से बचाने की कोशिश कर रहे हैं। जाहिर है गांधी परिवार के इस करीबी को इनाम मिला है।
दिग्विजय सिंह को भला कौन नहीं जानता। हिंदुओं और महिलाओं के खिलाफ विवादित बयान देने के बाद भी इन्हें मध्य प्रदेश से इसलिए उम्मीदवार बनाया गया क्योंकि पिछले तीन दशक से गांघी परिवार के प्रति वफादारी में कोई कमी नहीं होने दी।
अब राजस्थान से के सी वेणुगोपाल के खिलाफ भले ही अधिकतर कांग्रेसी हों, लेकिन जो राहुल गांधी का करीबी हो, उसे भला कौन रोक सकता है।
हारे हुए उम्मीदवारों को थोपने की कोशिश
कांग्रेस में उसी का सिक्का चलता है, जिसे गांधी परिवार का आशीर्वाद हासिल हो, अब जनता भले ही उसे नकार दे।

दीपेंद्र सिंह हुड्डा और दिग्विजय सिंह का एक परिचय ये भी है कि 2019 लोकसभा चुनाव में ये दोनों बुरी तरह हार चुके हैं।
कांग्रेस के ऐसे उम्मीदवारों को भी राज्यसभा उम्मीदवार बनाया है, जो कभी चुनाव लड़े ही नहीं या फिर पिछले चुनाव में लड़ने से इंकार कर दिया। जैसे केटीएस तुलसी और के सी वेणुगोपाल ने कभी चुनाव ही नहीं लड़ा। राजीव सातव ने 2019 में चुनाव लड़ने से ही इंकार कर दिया।
देश विरोधी ताकतों को समर्थन
कांग्रेस की दुर्दशा की एक बड़ी वजह ये भी है कि वो इस समय राष्ट्र विरोधी ताकतों के साथ खड़ी दिखाई देती है। राज्यसभा चुनाव में भी ऐसा ही दिखता है।

कांग्रेस ने असम में राज्यसभा सीट पर संयुक्त उम्मीदवार के प्रस्ताव में बदरुद्दीन अजमल की AIUDF के साथ हाथ मिलाया है। AIUDF के नेता कई बार देशविरोधी बयानों के वजह से सुर्खियां बटोर चुके हैं।
बीजेपी में नामदारों को नहीं कामदारों को टिकट
ये तो कांग्रेस का हाल है, लेकिन जैसे ही राज्यसभा चुनाव में भाजपा उम्मीदवारों की लिस्ट देखेंगे तो आपको पता चलेगा कि यहां नामदारों की नहीं, कामदारों की चलती है। यहां परिवारवाद नहीं, कार्यकर्ताओं के परिश्रम को इनाम मिलता है।

अभय भारद्वाज हों सुमेर सिंह सोलंकी हों या इंदु गोस्वामी – ये सभी छोटी प्रोफाइल के नेता हैं।
अभय भारद्वाज गुजरात के राजकोट से वकील हैं, तो वही सुमेर सिंह सोलंकी मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले में सहायक प्रोफेसर हैं। जबकि इंदु गोस्वामी लगातार महिलाओं के लिए काम कर रही हैं। कई तो यकीन ही नहीं हुआ कि उन्हें राज्यसभा के लिए बीजेपी ने उम्मीदवार बनाया है।
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मध्य प्रदेश में जारी सियासी उठापटक के बीच कांग्रेस के लिए कहीं से भी राहत की खबर नहीं आ रही। मध्य प्रदेश, राजस्थान, .....
इसमें कोई दो मत नहीं कि राज्यसभा का चुनाव हर पार्टी के लिए महत्वपूर्ण है। इसलिए न सिर्फ पार्टी अपनी सीटों की संख्या बढ़ाने में लगी है बल्कि भविष्य की एक तस्वीर भी पेश करने में जुटी है। लेकिन लगता है कि कांग्रेस अपनी पुरानी गलतियों से सीख लेने को तैयार नहीं है। शायद यही वजह है कि अब कांग्रेसी कार्यकर्ताओं का भी अपनी पार्टी से मोहभंग होता जा रहा है।

हरियाणा : हुड्डा के पोस्टर से गॉंधी परिवार गायब; विभाजन के कगार पर

वायरल पोस्टर
आर.बी.एल. निगम 
कहते हैं, जब बुरा समय आता है, साया भी साथ छोड़ देता है, यही बात कांग्रेस के साथ घटित हो रही है। एक तरफ लोग कांग्रेस का दामन छोड़, भाजपा में हो रहे हैं, वहीं हरियाणा में कांग्रेस दो भागों में विभाजित होने की ओर बढ़ रही है।   
विधानसभा चुनाव से पहले हरियाणा में कॉन्ग्रेस का संकट गहराता जा रहा है। सोशल मीडिया में वायरल हो रहे एक पोस्टर से गॉंधी परिवार नदारद है। यह पोस्टर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की 18 अगस्त को होने वाली परिवर्तन रैली को लेकर 4 अगस्त को रोहतक में आयोजित कार्यकर्ता सम्मेलन से जुड़ा है।
वैसे तो गॉंधी परिवार वह ‘फेविकोल’ बताया जाता है जो पूरे कांग्रेस को जोड़कर रखती है। लेकिन इस पोस्टर को देखकर लगता है कि हरियाणा में इस फेविकोल की पकड़ कमजोर हो गई है। क्योकि अब "फेवीक्विक" आदि कई जोड़ने वाली चीजें आ गयीं हैं। 4 अगस्त के परिवर्तन कार्यकर्ता सम्मेलन के पोस्टर में हुड्डा के अलावा उनके पुत्र पूर्व सांसद दीपेंद्र हुड्डा की ही तस्वीर है। इस पोस्टर ने भूपेंद्र सिंह हुड्डा के अलग पार्टी बनाने की अटकलों को और हवा दे दी है।
न्यूज एजेंसी एएनआई ने बताया है कि इस मामले पर दीपेंद्र ने यह कहते हुए प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया कि सोशल मीडिया पर कोई भी कुछ डाल देता है। दीपेंद्र ने राज्य की बीजेपी सरकार पर हमला करते हुए उसे उखाड़ फेंकने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, “राज्य में बदलाव की जरूरत है और हम जनता को विकल्प मुहैया कराएंगे। इसके लिए हम 4 अगस्त को परिवर्तन कार्यकर्ता सम्मेलन और 18 अगस्त की रैली से अपने अभियान की शुरुआत करेंगे।”
दस साल तक हरियाणा के मुख्यमंत्री रहे हुड्डा पर उनके समर्थक विधायकों की ओर से अब कोई ठोस फैसला लेने का दबाव है। यही कारण है कि वे कॉन्ग्रेस आलाकमान को चुनौती देते दिख रहे हैं। माना जा रहा है कि रोहतक रैली से पहले यदि हुड्डा को प्रदेश कांग्रेस की कमान नहीं सौंपी गई तो वे अलग पार्टी बनाकर विधानसभा चुनाव लड़ने का ऐलान कर सकते हैं।
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हरियाणा के नूंह शहर के भूतेश्वर मंदिर में मंगलवार(जुलाई 30) को शिवरात्रि के अवसर पर काँवड चढाने के दौरान मुस्लिम समु...

मीडिया रिपोर्टों की माने तो हुड्डा समर्थक विधायकों ने आलाकमान को दो विकल्प दिए हैं। पहला तंवर को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाकर हुड्डा को कमान सौंपी जाए। दूसरा, हुड्डा को टिकट बॅंटवारे की आजादी दी जाए।