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गुजरात : सूरत में ‘साधु’ बन भीख माँग रहा था सलमान एंड गैंग; पूछे संस्कृत के श्लोक तो देने लगे दुआ, बताया हिन्दुओं के सिर्फ एक भगवान का नाम

        भगवा वस्त्र में साधु वेश बना कर हिन्दुओं से भीख माँग रहा था सलमान (चित्र साभार- वायरल वीडियो स्क्रीनशॉट)
गुजरात के सूरत का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस वीडियो में कुछ लोग भगवा वस्त्र पहनकर साधु वेश में भीख माँगते दिखाई दे रहे हैं। इन तीनों से वीडियो में कुछ लोग बहस कर रहे हैं। इन लोगों का आरोप है कि वो सभी हिन्दू साधु नहीं, बल्कि मुस्लिम हैं। ये सभी न तो ठीक से हिन्दू देवताओं का नाम बता सके और न ही किसी शास्त्र से कोई श्लोक सुना पाए।

यह वीडियो 43 सेकेंड का है, जो शनिवार (2 नवंबर 2024) को शेयर हुआ। वीडियो में दिख रहे तीनों भगवाधारियों ने लम्बी दाढ़ी रखी है। माथे पर त्रिपुण्ड लगा रखा है। वीडियो बना रहे व्यक्ति ने इन लोगों से श्लोक बोलने के लिए कहा तो जवाब मिला, “दुआ है हमारा दुआ।” जब सामने वाले ने पूछा कि उन्हें कितने भगवान के नाम आते हैं तो उन्होंने सिर्फ भोलेनाथ का नाम बताया।

वीडियो बना रहे व्यक्ति ने कहा कि क्या एक हिन्दू भगवान का नाम जानकर वो साधु बन गए हैं? तभी तीनों में से एक ने अपनी दाढ़ी पर हाथ फेर कर कहा कि वो खेल करने वाले मदारी हैं। पास खड़े एक व्यक्ति ने इन तीनों को रोहिंग्या बताया तो एक अन्य व्यक्ति ने दावा किया कि उन तीनों में से एक का नाम सलमान है। कुछ ही देर में वहाँ भीड़ जमा हो गई।

भीड़ में से एक अन्य व्यक्ति ने तीनों से कोई श्लोक पूछा पर वो नहीं बता पाए। इनमें से एक व्यक्ति साधुओं में से एक का आईडी कार्ड चेक करता है तो उसका नाम सलमान लिखा मिलता है। वीडियो को शेयर करते हुए ज़ी 24 कलक ने कैप्शन में लिखा, “साधु के वेश में पकड़ा गया सलमान नाथ। सूरत में भीख माँग रहे एक साधु का आईडी कार्ड चेक करते हुए भंडा फूट गया।”

1 नवंबर को उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में भी पुलिस ने गेरुआ वेश पहन कर साधु वेश में घूम रहे 3 मुस्लिमों को गिरफ्तार किया था। तब इन तीनों ने खुद को गोरखनाथ मठ से जुड़ा योगी बताया था। जब लोगों ने इनसे गंगाजल पीने को कहा तो इन्होंने ऐसा करने से मना कर दिया। इसके बाद लोगों ने इन्हें पुलिस को सौंप दिया।

अभी कुछ ही दिन पूर्व एक मुस्लिम महिला द्वारा मंदिर में पूजा करने पर कट्टरपंथियों ने कहा कि अगर गलती से की है तो तौबा कर ले। लेकिन साधु बन भीख रहे मुसलमानों पर क्यों चुप्पी साधे हुए हैं? क्या ये कट्टरपंथियों के कहने पर हिन्दू क्षेत्रों की रेकिंग कर रहे थे? पुलिस द्वारा इनसे गहन पूछताछ करनी चाहिए। ये कोई षड़यंत्र जान पड़ता है।     

‘सरकार नागरिकों पर मानहानि का मुकदमा नहीं कर सकती’: बचने के लिए अरविंद केजरीवाल ने खुद को बताया ‘जनता’, PM मोदी के डिग्री विवाद में चल रहा केस

भारत में एक मुख्यमंत्री ऐसा है जिसने रंग बदलने में गिरगिट को भी फेल कर रखा है, वह है दिल्ली का मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल। जो आरोप लगाकर ऐसे पलटी मारता है पलटीमार सर्प भी क्या पलटी मारेगा। फिर भी जनता क्यों इसकी चिकनी-चुपड़ी बातों में आकर वोट दे आते हैं। आज तक इस मुख्यमंत्री जितने भी अपने विरोधियों पर आरोप लगाए हैं अधिकतर में माफ़ी मांगी हैं। आखिर बकरे की माँ कब तक खैर मनाएगी, एक दिन तो उसे भी छुरे से दो-चार होना पड़ता है। ठीक वही स्थिति अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डिग्री पर विवाद खड़ा करने पर केजरीवाल की हो गयी है। देखना यह ऊंट किस करवट बैठता है। 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डिग्री को लेकर सवाल उठाने वाले आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल फँसते नजर आ रहे हैं। इस मामले में आपराधिक मानहानि का मुकदमा झेल रहे केजरीवाल और पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने अहमदाबाद सत्र न्यायालय में अपना जवाब दाखिल किया।

अपने जवाब में आम आदमी पार्टी ने नेताओं ने तर्क दिया कि सरकार या इसके किसी अंग द्वारा नागरिकों पर मानहानि का मुकदमा नहीं किया जा सकता है। इस तरह केजरीवाल ने खुद को आम नागरिक बताकर मुकदम से बचने की कोशिश की। वहीं, कोर्ट की ओर से तलब किए जाने के फैसले को चुनौैती देते हुए AAP नेताओं ने पुनरीक्षण याचिका दाखिल की।

अरविंद केजरीवाल की ओर पेश वकील सोमनाथ वत्स ने कोर्ट में दलील दी कि गुजरात यूनिवर्सिटी सरकार का एक अंग है और इसकी ओर से मानहानि का मुकदमा दर्ज नहीं कराया जा सकता है।

 वहीं, संजय सिंह की ओर से पेश वकील फारूख खान ने कहा कि मजिस्ट्रेट को गुमराह किया गया है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट कह चुका है कि सरकार नागरिकों पर मानहानि का मुकदमा नहीं कर सकती है, क्योंकि ऐसा हुआ तो रोज मानहानि के मुकदमे होंगे।

खान ने अपने तर्क में आगे कहा कि शिकायतकर्ता पटेल ने आरोप लगाया है कि राजनीतिक बढ़त के लिए टिप्पणियाँ की गई थीं। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी के लिए गुजरात यूनिवर्सिटी राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी नहीं है। इसलिए दलील ठीक नहीं है।

फारूख खान ने कहा, “अगर मुझे किसी बात को लेकर आशंका है, भले मैं सही हूँ या नहीं, तो क्या मैं सवाल उठाने का हकदार नहीं हूँ? अगर मेरा दोस्त दिल्ली यूनिवर्सिटी, गुजरात यूनिवर्सिटी, बनारस यूनिवर्सिटी से डिग्री फोटोशॉप करता है तो उसने फर्जीवाड़ा किया है, यूनिवर्सिटी ने नहीं।”

2 सितंबर 2023 को मुख्य जिला एवं सत्र न्यायधीश ने इस याचिका को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश जेएम ब्रह्मभट्ट को सौंप दिया था। दरअसल, गुजरात हाईकोर्ट ने 10 दिन के भीतर इस पर फैसला लेने को कहा है। इसके बाद ऐसा किया गया है।

दरअसल, गुजरात यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार पीयूष पटेल ने अरविंद केजरीवाल और संजय सिंह के खिलाफ अहमदाबाद के मजिस्ट्रेट कोर्ट में आपराधिक मानहानि का मामला दर्ज कराया था। अपनी शिकायत में पीयूष पटेल ने कहा था कि अरविंद केजरीवाल और संजय सिंह ने पीएम मोदी के डिग्री के बहाने गुजरात यूनिवर्सिटी पर अपमानजनक टिप्पणी कीं।

’17 साल की उम्र से तुम्हारी बेटी का रेप कर रहा हूँ, जो करना है कर लो’: क्रिकेट कोच महबूब ने कराया हिन्दू लड़की का धर्मांतरण

आरोपित कोच महबूब बुखारी (बाएँ), पीड़िता के माता-पिता (दाएँ) (फोटो साभार: भास्कर)
गुजरात के राजकोट में हिंदू लड़की का बलात्कार और धर्मांतरण के आरोप में महबूब बुखारी नामक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया। आरोप है कि महबूब बुखारी क्रिकेट कोचिंग के बहाने 17 साल की उम्र से पीड़िता का बलात्कार कर रहा है। यही नहीं, उसने लड़की का धर्मांतरण कराकर उसका नाम नाजनीन रख दिया था। पीड़िता गत 26 जून से लापता है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पीड़िता का परिवार मूल रूप से भावनगर जिले के तलाजा का रहने वाला है। लेकिन वे लंबे समय से राजकोट में रह रहे हैं। क्रिकेटर बनने का सपना लिए पीड़ित लड़की ने 17 साल की उम्र में महबूब बुखारी नामक व्यक्ति की क्रिकेट कोचिंग जॉइन की थी। जहाँ महबूब ने इउसे अपने प्रेम जाल में फँसा लिया। इसके बाद बीते 4 साल से वह पीड़िता को अपनी हवस का शिकार बना रहा था। पीड़ित लड़की के परिजनों का आरोप है कि उनकी बेटी गत 26 जून को महबूब बुखारी के घर से लापता हुई है।  

‘जय द्वारकाधीश बोलने वाली लड़की लगाती थी अल्लाहु अकबर के नारे’: पीड़ित परिवार

पीड़िता के परिवार ने शिकायत में कहा है “हमारी बेटी कुंडलिया कॉलेज में पढ़ रही है। उसे बचपन से ही क्रिकेट का शौक था। इसलिए हमने क्रिकेट कोच महबूब अंसारी से बात करके उसे कोचिंग भेजना शुरू कर दिया। वह 17 साल की उम्र से क्रिकेट सीखने जा रही है। लेकिन महबूब बुखारी ने कोचिंग में क्रिकेट सिखाने के बजाय नाबालिग बेटी को प्रेम जाल में फँसाया और उसका ब्रेनवॉश कर दिया। महबूब ने उसका नाम बदलकर नाजनीन रख दिया था। ‘जय द्वारिकाधीश’ बोलने वाली हमारी बेटी ने ‘अल्लाह-हू-अकबर’ के नारे लगाने लगी। यही नहीं उसने नमाज पढ़ना भी शुरू कर दिया था।”
पीड़ित लड़की के पिता का कहना है उनकी बेटी अब 21 साल की हो चुकी है। घर पर रहने के दौरान वह अक्सर मस्जिद जाकर नमाज पढ़ती थी। परिवार ने उसे कई बार समझाने की कोशिश की। लेकिन महबूब के दबाव के आगे वह सब करती जा रही थी। जब पीड़ित लड़की के पिता महबूब बुखारी से बात करने गए तो उसने उन्हें हाथ-पैर तोड़ने और जान से मारने की धमकी दी। साथ ही कहा, “मैं तुम्हारी बेटी के साथ तब से बलात्कार कर रहा हूँ जब वह 17 साल की थी। अब तुम जो कर सकते हो कर लो”
महबूब बुखारी की हवस का शिकार हुई पीड़ित हिंदू लड़की के परिजन का कहना है, “मेरी बेटी अक्सर कहती थी कि अब जिंदगी बर्बाद हो गई है। अगर मैं किसी और से शादी करूँगी तो महबूब मुझे मार देगा और अगर मैं महबूब के साथ रही तो वह मेरी जिंदगी नर्क बना देगा। क्रिकेटर बनने का मेरा सपना भी एक तरीके से खत्म हो गया है।” परिजनों का यह भी कहना है कि महबूब के उकसाने और धमकी देने के चलते पीड़ित लड़की ने अपने घर से डेढ़ लाख रुपए के सोने के गहने चुराकर महबूब को दे दिए।
पीड़िता के परिजनों की शिकायत और बयानों के आधार पर मामला दर्ज करते हुए पुलिस ने आरोपित कोच महबूब बुखारी को गिरफ्तार कर किया है। हालाँकि, गत 26 जून से लापता हिंदू लड़की का अब तक कोई सुराग नहीं मिल सका है। पुलिस लगातार उसकी तलाश में जुटी हुई है।

गुजरात : बकरीद पर बच्चों को पहनाई इस्लामी टोपी, फिर करवाई नमाज की प्रैक्टिस: 2 स्कूलों की वीडियो वायरल

प्रतीकात्मक तस्वीर/ AI फोटो
गुजरात में बकरीद के मौके पर स्कूलों में बच्चों से नमाज पढ़ाने की प्रैक्टिस कराने के 2 मामला सामने आए हैं। इनमें एक मामला कच्छ का है। दूसरा महेसाणा का है। दोनों ही जगह स्कूल में एक्टिविटी के नाम पर बच्चों से एक्टिविटी के नाम नमाज की प्रैक्टिस करवाई गई।

कच्छ की घटना मुंद्रा के पर्ल स्कूल की है। वहाँ स्कूली बच्चों के सिर पर नमाजी टोपी पहनाकर उसे नमाज की प्रैक्टिस करवाई गई। बाद में ये वीडियो स्कूल के पेज पर डाला गया जिससे ये पूरे सोशल मीडिया पर वायरल होने लगी। इसे देख लोग गुस्से में आ गए।

लोगों के गुस्से में आने का कारण है कि अगर स्कूल का संस्कृति(cultural) प्रोग्राम होता, बात अलग थी, लेकिन ईद के दिन केवल हिन्दू बच्चों को इस्लामी टोपी पहनाकर नमाज़ पढ़वाना आपत्तिजनक है।

 

घटना के प्रकाश में आने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी ने मामले की जाँच के आदेश दिए। उन्होंने कहा कि वह इस मामले को गंभीरता से ले रहे हैं। अगर कुछ गलत पाया जाता है तो फिर स्कूल के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है या उसकी मान्यता भी रद्द हो सकती है। ये टीम जरूरी जाँच के लिए माता-पिता, बच्चों और स्कूल प्रबंधन से जाँच करेगी।

इस पूरे विवाद के बाद स्कूल ने इस संबंध में माफी माँग ली है। सोशल मीडिया से भी इस वीडियो को हटा दिया गया है। स्कूल की प्रिंसिपल प्रीति वाघवानी ने मीडिया को बताया, “ईद के त्योहार के मौके पर हमने स्कूली बच्चों के लिए इस कार्यक्रम का आयोजन किया था, हम समाज के लिए अलग-अलग धर्मों के त्योहार मनाने के लिए इस तरह के कार्यक्रम करते हैं। हम स्कूल में बहुत सारी गतिविधियाँ करते हैं, लेकिन हमारा इरादा किसी को भी चोट पहुंचाना नहीं था। मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि दूसरी बार ऐसी कोई गलती नहीं होगी।”

इसी तरह महेसाणा के एक प्राइवेट अंग्रेजी मीडियम स्कूल में भी ऐसी घटना सामने आई। जब इसकी सूचना बच्चों के अभिभावकों को लगी तो उन्होंने जमकर हंगामा काटा। वहीं हिंदू संगठन भी इस पर भड़क गए और स्कूल के बाहर प्रदर्शन हुई। बताया जा रहा है कि स्कूल में बच्चों को सिखाया जा रहा था कि नमाज कैसे पढ़ी जाती है। इस प्रैक्टिस की फोटोज भी अभिभावकों के पास थी। विरोध के नाम पर स्कूल के बाहर रामधुन और हनुमान चालीसा का पाठ हुआ।

मामले को तूल पकड़ता देख स्कूल के मालिक राशी गौतम ने कहा कि वे हिंदू हैं। उन्होंने मुस्लिम धर्म को बढ़ावा देने का कोई काम नहीं किया। देश में जो त्योहार मनाए जाते हैं वे बस उसकी जानकारी बच्चों को दे रहे थे इसीलिए स्कूल में बकरीद का सेलीब्रेशन रखा गया था। स्कूल ने इस हरकत पर माफी माँग ली है। हालाँकि वीएचपी ने माँग की है कि ऐसे आयोजन स्कूल में न किए जाएँ।

गुजरात के अलावा  खंडवा के सेंट पाॅयस सीनियर सेकेंडरी स्कूल में बकरीद से पहले छात्रों से नमाज और कलमा पढ़वाने का मामला सामने आया है। मिशनरी स्कूल में 28 जून को हुई इस घटना की जाँच के आदेश एसडीएम ने दे दिए हैं। 

जूनागढ़ में पुलिस पर हमले की इस्लामी भीड़ ने पहले से कर रखी थी तैयारी : ट्रक में पत्थर, डम्पर में धारदार हथियार, बाहरी लोगों को थमाए लाठी-डंडे

                                 पूर्व नियोजित था जूनागढ़ में पुलिस पर हमला (चित्र साभार: संदेश)
गुजरात के जूनागढ़ में 16 जून 2023 को दरगाह के आगे पुलिस बल पर इस्लामी भीड़ के हमले की जाँच में अहम खुलासे हुए हैं। यह हिंसा पूर्व नियोजित थी। पुलिस पर हमला करने के लिए बाहर से भी लोगों को बुलाया गया था। हमले से पहले ही लोगों को लाठी-डंडे और पत्थर थमा दिए गए थे। पत्थरों को घटनास्थल पर लाने के लिए ट्रक का प्रयोग किया गया था।

दिव्य भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक अब तक की जाँच में यह बात निकल कर सामने आई है कि हिंसा से पहले पूरी तैयारियाँ की गईं थी। नगर निगम ने अवैध अतिक्रमण को चिन्हित करते हुए कुल 8 जगहों की लिस्ट बनाई थी। इसमें दरगाह के साथ मंदिर भी थे। माना जा रहा है कि नगर निगम में जब इन स्थलों को चिन्हित किया जा रहा था तभी वहाँ के किसी कर्मचारी ने इसकी सूचना बाहरी लोगों को कर दी थी। हालाँकि अभी तक सूचना लीक करने वाले कर्मचारी का नाम सार्वजानिक नहीं किया गया है।

जानकारी लीक होने के बाद कुछ लोगों ने पूरी प्लानिंग के साथ 16 जून की तारीख हंगामे के लिए तय की। इसकी तैयारी के लिए लाठी-डंडे, धारदार हथियार और पत्थर जमा किए गए थे। पत्थरों को ट्रक और डम्पर में भर कर घटनास्थल के आसपास रखा गया था। हमले से ठीक पहले बाहर से हिंसक भीड़ बुलाई गई थी। जूनागढ़ के डीएसपी हतेश धंडालिया ने भी हमले से पहले साजिश का अंदेशा जताया है। उन्होंने कहा कि सब कुछ थोड़े ही समय में घटित हुआ।

दरगाह मजावाड़ी गेट के पास है और यह खुला हुआ है। आसपास CCTV कैमरे भी लगे हुए हैं। माना जा रहा है कि ऐसे में अगर पत्थर खुले में रखे जाते तो वे नजर में आ जाते। ऐसे में ईंट-पत्थर रखने के लिए ट्रकों और डम्परों का इस्तेमाल किया गया। ट्रकों को भी ऐसे स्थान देखकर खड़ा किया गया जहाँ वो कैमरे की नजर में न आएँ। कहा जा रहा है कि इन्हीं डम्परों में हथियार भी छिपा कर रखे गए थे जिसे पुलिस पर हमले के लिए प्रयोग किया गया।

दरगाह पर अवैध अतिक्रमण के लगे नोटिस के विरोध में 16 जून को गुजरात के जूनागढ़ में हिंसा भड़क गई थी। इस हिंसा में अल्लाह हू अकबर और नारा ए तकबीर चिल्लाती 500 से 600 की भीड़ ने पुलिस बल पर हमला किया था। हमले में महिलाएँ भी शामिल थीं। भीड़ पुलिसकर्मियों की हत्या के लिए ललकार रही थी। इस हमले में एक हिन्दू नागरिक की मौत हो गई थी, जबकि आधे दर्जन पुलिसकर्मी घायल हुए थे। महिला पुलिस स्टाफ की शिकायत पर हिंसा में शामिल 31 लोगों को नामजद कर जाँच की जा रही है।

गुजरात : अवैध निर्माण हटाने का चला अभियान तो रातोंरात जुट गए 2000 मुस्लिम, मुस्तैद प्रशासन ने फिर भी नहीं रोकी कार्रवाई

                अतिक्रमण विरोधी अभियान के खिलाफ मुस्लिमों का हुआ जुटान (फोटो साभार: दिव्य भास्कर)
गुजरात के जूनागढ़ में ऊपरकोट किले के आसपास के इलाकों को अतिक्रमण मुक्त किया जा रहा है। शुक्रवार (26 मई 2023) को शुरू हुआ अतिक्रमण विरोधी अभियान 27 मई की सुबह तक जारी रहा। इस दौरान कई अवैध मंदिरों, मजारों और दरगाहों को ध्वस्त किया गया। लेकिन स्थानीय मुस्लिम इसे मजहबी रंग देने की कोशिश कर रहे हैं। इस कड़ी में एक बैठक कर तय किया गया कि मुस्लिम समाज के 8 नेता ऊपरकोट का दौरा कर तोड़े गए मजहबी जगहों का मुआयना करेंगे।

दिव्य भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक स्थानीय प्रशासन की कार्रवाई के बाद नरसिंह विद्या मंदिर में मुस्लिम समुदाय की एक बैठक हुई। जूनागढ़ नगर निगम के नगरसेवक (Corporator) वहाबभाई कुरैशी ने समाज के लोगों को अवैध निर्माणों पर कार्रवाई की जानकारी दी। इसके बाद नरसिंह विद्या मंदिर के मैदान में मुस्लिम तबके की बैठक बुलाई गई।

26 मई की रात तकरीबन 2 बजे जूनागढ़ के नगरसेवकों अदरेमान भाई पंजा, आसिफ साँड, वहाब भाई कुरैशी के साथ भारी संख्या में मुस्लिम स्कूल परिसर में पहुँचे। इनमें स्थानीय मौलवी, मुफ्ती और मौलाना भी शामिल थे। बताया जा रहा है कि 1500-2000 की संख्या में पहुँचे लोगों ने प्रशासन की कार्रवाई भी प्रभावित करने की कोशिश की। लेकिन गुजरात पुलिस पहले से ही तैयार थी। प्रशासन ने भारी पुलिस बलों की तैनाती के बीच अपना अभियान जारी रखा।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक नरसिंह विद्या मंदिर स्कूल में आयोजित मीटिंग में बैठक के बाद मुस्लिम समाज के लोगों ने ऊपरकोट जाकर जायजा लेने का निश्चय किया। इसे लेकर स्थानीय प्रशासन से इजाजत भी माँगी गई। प्रशासन ने उनका निवेदन स्वीकार कर लिया है। डीएसपी हितेश धाँधल्या के अनुसार एसडीएम से चर्चा के बाद मुस्लिम समाज के लोगों को ऊपरकोट जाने का समय दिया जाएगा।

178 मजारों के साथ 11 मंदिरों पर भी हुई कार्रवाई

राज्य सरकार ने 70 करोड़ की लागत से जूनागढ़ स्थित ऊपरकोट किले का जीर्णोद्धार कराया है। इसे अब आम लोगों के लिए खोल दिया जाएगा। इसके पहले प्रशासन किले के आसपास के इलाकों को अवैध कब्जों से मुक्त करा रही है। शुक्रवार और शनिवार को चलाए गए अभियान में भारी पुलिस बलों की तैनाती के बीच 11 मंदिरों और 176 अवैध मजारों को ध्वस्त कर दिया गया।
पूरे ऑपरेशन के दौरान कमिश्नर, एसपी और कलेक्टर समेत सभी बड़े अधिकारी देर रात से सुबह तक मौजूद रहे। अतिक्रमण के खिलाफ इस अभियान को गोपनीय तरीके से अंजाम दिया गया इसमें आठ से अधिक बुलडोजर समेत कई दूसरी मशीनों का इस्तेमाल किया गया। जूनागढ़ की एसडीएम भूमि केशवाला ने मीडिया को जानकारी दी है कि वर्ष 1950 के बाद अवैध रूप से किए गए सभी निर्माणों को गिरा दिया जाएगा। अभियान शुरू कर दिया गया है और पूरा होने के बाद ही इस संबंध में विस्तृत जानकारी दी जाएगी।
ऊपरकोट में अतिक्रमण के खिलाफ जारी अभियान को लेकर मुस्लिम पक्ष ने गुजरात हाईकोर्ट में अर्जी दी है। मुस्लिम पक्ष ने इस पर तत्काल सुनवाई की माँग की है। उनका कहना है कि हाईकोर्ट ने इस संबंध में प्रशासन को नोटिस जारी किया है। मामले की सुनवाई 24 जुलाई को होनी तय हुई है, तब तक प्रशासन को किसी तरह की कार्रवाई न करने के निर्देश दिए गए हैं।

काफी पुराना है किले का इतिहास

ऊपरकोट का किला राज्य सरकार द्वारा संरक्षित महत्वपूर्ण स्थान है। प्रशासन ने पिछले दिनों इस स्थान से अतिक्रमण हटाने का नोटिस जारी किया गया था, जिसे अनसुना कर दिया गया। इस किले को मौर्य सम्राज्य के शासन काल में बनवाया गया था। गुप्त सम्राज्य के शासन तक किले की अहमियत बनी हुई थी। इसके बाद किले का पुनर्निर्माण जूनागढ़ स्टेट के दीवान हरिदास विहारीदास ने साल 1893-94 में करवाया था।

गुजरात : सूरत में 6 और पार्षदों ने छोड़ी AAP, जुड़े BJP के साथ: अब तक 10 पार्षद भाजपा में शामिल

6 आप पार्षद बीजेपी में शामिल
एक तरफ आम आदमी पार्टी राष्ट्रीय पार्टी होने का जश्न मना रही है, तो दूसरी इसको चोट भी लग रही है। दरअसल पार्टी के कर्णधारों के भ्रष्टाचार में लिप्त होने के कारण हो रही जेल से पार्टी में अंतर्कलह शुरू हो चुकी है, जिसका परिणाम गुजरात में देखने को मिल रहा है। चर्चा है कि अन्य राज्यों में भी ये सिलसिला शुरू होने वाला है। यानि जिस तेजी से भारतीय राजनीति में अपना अस्तित्व बनाया है, बहुत जल्द कांग्रेस की तरह नाम की पार्टी होने वाली है। 

गुजरात में आम आदमी पार्टी को बड़ा झटका लगा है। 14 अप्रैल 2023 को सूरत में AAP के 6 पार्षद भाजपा में शामिल हो गए। गुजरात के गृह मंत्री हर्ष संघवी ने सभी पार्षदों का पार्टी में स्वागत किया। सूरत म्युनिसिपल कारपोरेशन (SMC) चुनाव में आम आदमी पार्टी के 27 पार्षद जीत कर आए थे जिनमें से 10 पार्षद भाजपा में शामिल हो चुके हैं।

सूरत भाजपा कार्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान निराली पटेल, धर्मेंद्र वावलिया, अशोक धामी, किरण खोखानी, घनश्याम मकवाना औऱ स्वाति क्याड ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली। इसके पहले आम आदमी पार्टी के 4 पार्षद रीता खैनी, ज्योति लाठिया, भावना सोलंकी और विपुल मोवालिया ने पार्टी की सदस्यता से इस्तीफा देकर भाजपा का दामन थाम लिया था।

साल 2021 में हुए SMC चुनावों में आम आदमी पार्टी ने 120 में से 27 सीटों पर जीत हासिल की थी। भाजपा ने 93 सीटें जीत का परचम लहराया था। इन चुनाव में कॉन्ग्रेस एक भी सीट नहीं जीत सकी थी। अब आम आदमी पार्टी के 10 पार्षदों के भाजपा में शामिल हो जाने के बाद एसएमसी में भाजपा पार्षदों की संख्या 103 हो गई है।

दक्षिण गुजरात खासकर सूरत भाजपा का गढ़ माना जाता रहा है। विधानसभा चुनाव 2022 में भी सूरत जिले की सभी 16 सीटें भाजपा ने जीत ली थीं। सूरत शहर की बात करें तो पिछले 15 वर्षों से भाजपा शहर की एक भी सीट नहीं हारी है। हालाँकि 2021 में 27 पार्षद जिताने के बाद आम आदमी पार्टी को सूरत से काफी उम्मीदें थी लेकिन 2022 के विधानसभा चुनाव में आप का एक भी उम्मीदवार कामयाब नहीं हो सका। यहाँ तक कि आम आदमी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष गोपाल इटालिया को भी कटारगाम विधानसभा सीट पर हार का सामना करना पड़ा था।

ये भी मालूम हो कि गुजरात विधानसभा चुनाव में भाजपा ने इस बार बड़ा रिकॉर्ड बनाया था। 182 विधानसभा सीटों वाले गुजरात में भाजपा के 156 प्रत्याशी विजयी रहे। आज तक गुजरात के इतिहास में इतनी बड़ी जीत किसी भी पार्टी को नहीं मिली थी।


बुर्के की आड़ में हिना शेख कर रही ड्रग्स का धंधा, शौहर के जेल जाने के बाद सँभाला कारोबार

गुजरात की सूरत पुलिस ने ड्रग्स की स्मगलिंग करने के आरोप में एक महिला को गिरफ्तार किया है। आरोपित की पहचान हिना शेख के रूप में हुई है। पुलिस ने उसके पास से 507 ग्राम प्रतिबंधित मेफेड्रोन ड्रग्स बरामद किया है। इस ड्रग्स की कीमत 50 लाख रुपए से अधिक बताई जा रही है। गिरफ्तार आरोपित हिना शेख पति के जेल जाने के बाद से ड्रग्स का कारोबार संभाल रही रही।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि एक खूबसूरत महिला बुर्के की आड़ में ड्रग्स का धंधा कर रही है। इसके बाद पुलिस ने आरोपित महिला पर नजर रखनी शुरू कर दी। साथ ही छापेमारी करते हुए उसके घर से 507 ग्राम मेफोड्रोन समेत 10 हजार रुपए और मोबाइल फोन बरामद किया है। जब्त ड्रग्स की कीमत 50 लाख रुपए से अधिक बताई जा रही है।

पुलिस का कहना है कि हिना शेख को ड्रग्स की सप्लाई साहिल अरविंद भाई गोसाईं नामक व्यक्ति करता था। वह मुंबई से ड्रग्स लाकर यहाँ सप्लाई करता था। इसके अलावा पुलिस वसीम मुस्ताक मिर्जा शेख नामक व्यक्ति की भी तलाश में जुटी है। आरोप है कि वसीम भी ड्रग्स के इस काले धंधे में शामिल था।

पति के जेल जाने के बाद हिना ने संभाला था ड्रग्स का धंधा

हिना शेख का शौहर इस्माइल मुबारक शेख गुजरात के सूरत जेल में बंद है। आरोप है कि वह भी ड्रग्स का कारोबार करता था। पुलिस ने उसके पास से कोकीन बरामद की थी। इसके अलावा इस्माइल के ऊपर हत्या की कोशिश और हत्या का भी आरोप है। कहा जा रहा है कि इस्माइल के जेल जाने के बाद से हिना ड्रग्स के धंधे में उतर गई थी।
इस मामले में सूरत पुलिस कमिश्नर अजय कुमार तोमर का कहना है कि पुलिस सितंबर 2020 से ‘नो ड्रग्स इन सूरत सिटी’ नामक एक अभियान चला रही है। इस अभियान के तहत ड्रग्स के धंधे को पूरी तरह से खात्मे के लिए काम किया जा रहा है। पुलिस की टीम लगातार छापेमारी कर ड्रग्स के नेटवर्क का पर्दाफाश कर रही है। अब तक करीब 15 करोड़ रुपए की ड्रग्स के साथ 257 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

अब काजल हिंदुस्तानी के पीछे पड़ा जुबैर एंड गैंग; बना रहा माहौल; सरकार 'सर तन से जुदा' गैंग पर कब प्रहार करेगी?

हिन्दू मंदिरों पर हमलों, हिन्दू धार्मिक यात्राओं पर होते पत्थराव और पेट्रोल बम फेंके जाने वाला मोहम्मद जुबेर क्यों चुप रहता है? क्या इसके घर में मातम मन रहा होता है? मोदी सरकार जुबेर और 'सर तन से जुदा' गैंग पर कब सख्त कानून लाएगी? पहले ही जुबेर नूपुर शर्मा के कथन को तोड़-मरोड़ कर पेश कर तिल का ताड बनाकर देश में कितना उपद्रव मचवा चूका है। इसका मुंह तोड़ जवाब 'TimesNow नवभारत' पर एंकर सुशांत सिन्हा ने दिया था। आखिर ऐसी धमकियों से कब तक हिन्दुओं को डराया जाता रहेगा? क्यों नहीं सरकार ऐसे उपद्रवियों को मिलने वाली सरकारी सुविधाओं से वंचित करती?

30 मार्च 2023 को गुजरात के गिर-सोमनाथ जिले के उना में रामनवमी के अवसर पर शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा के बाद एक धर्म सभा का भी आयोजन हुआ। इस सभा को सामाजिक कार्यकर्ता काजल सिंगला (काजल हिंदुस्तानी) ने संबोधित किया। उनके भाषण को विवादास्पद बताकर स्थानीय मुस्लिमों ने पूरे शहर में हिंसक प्रदर्शन किए। जगह-जगह पथराव और आगजनी की। दो दिनों तक उना में उत्पात जारी रहा।

अब काजल सिंगला पर तथाकथित फैक्ट चेकर मोहम्मद जुबैर समेत कई इस्लामवादी हमलावर हैं। इस्लामवादी गुजरात समेत देश के कई शहरों में रामनवमी शोभा यात्रा पर हमलों के बाद हुई हिंसा का दोष हिंदुओं पर मढ़ने की कोशिश कर रहे हैं। इसी सिलसिले में काजल हिंदुस्तानी को भी निशाना बनाया जा रहा है, ताकि उना में हुई हिंसा का दोष उनके सिर पर मढ़ा जा सके। सोशल मीडिया पर हिंदुत्व वॉच और मोहम्मद जुबैर जैसे लोग काजल हिंदुस्तानी का नाम उछाल रहे हैं।

खबरों के मुताबिक उना में हुई रामजी की शोभायात्रा में 30 हजार से ज्यादा लोग शामिल हुए। जुलूस के बाद त्रिकोण बाग के पास रावणवाड़ी में धार्मिक सभा का आयोजन किया गया। इसमें काजल हिंदुस्तानी ने भाषण दिया। काजल हिंदुस्तानी ने अपने भाषण में लव जिहाद और लैंड जिहाद समेत कई मुद्दों पर बात की।

इसके बाद शुक्रवार (31 मार्च, 2023) को बड़ी संख्या में मुस्लिम सड़कों पर उतरे और रामनवमी के अवसर पर दिए गए भाषण को विवादास्पद कहते हुए उग्र प्रदर्शन शुरू कर दिया। गौरतलब है कि यह जुमे का दिन था। मुस्लिम भीड़ ने एक पुलिस थाने के आगे ‘सर तन से जुदा’ के नारे लगाए गए। इससे संबंधित एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है।

जुमे के दिन मुस्लिमों द्वारा प्रदर्शन और नारेबाजी के बाद सांप्रदायिक तनाव फैलने लगा। जिसे देखते हुए उना पुलिस ने हिंदू और मुस्लिम पक्ष के नेताओं को बुलाया। अगले दिन बैठक के बीच दोनों पक्षों के बीच विवाद हो गया और स्थिति तनावपूर्ण होने पर मुस्लिम नेता बैठक छोड़कर चले गए। शहर में इसकी भनक लगते ही पूरा बाजार बंद हो गया। गिर-सोमनाथ एसपी ने सर्किट हाउस में दोनों समुदाय के पाँच-पाँच नेताओं को बुलाकर समझौता कराया। इस दौरान शहर में पुलिस ने गश्ती बढ़ा दी।

सुलह के कुछ ही घंटों बाद शाम को फिर से माहौल बिगड़ गया और शहर में पथराव की घटना हो गई। देर शाम उना के कुंभरवाड़ा, कोलीवाड़ और चंद्रकिरण समाज क्षेत्र में असामाजिक तत्वों ने पथराव किया गया और सोडा की बोतलें भी फेंकी गईं। पुलिस ने किसी तरह सड़क पर उतरी भीड़ को नियंत्रित किया। शुक्रवार (31 मार्च, 2023) को मुस्लिम युवकों ने चक्का जाम कर ‘सर तन से जुदा’ के नारे लगाए। इसके बाद शनिवार की शाम पथराव हुआ। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 70 पत्थरबाजों को हिरासत में लिया।

उना में पुलिस को पत्थरबाजों व दंगाइयों की धर-पकड़ के दौरान भारी मात्रा में हथियार मिले, जो एक पूर्व नियोजित साजिश की ओर इशारा कर रहे हैं। पुलिस को मिले हथियारों में तलवार, कुल्हाड़ी, चाकू, उस्तरा, लोहे का पाइप, लकड़ी और काँच की बड़ी बोतलें मिली हैं। पुलिस हथियारों को जब्त कर आगे की कार्रवाई कर रही है।

2 अप्रैल को काजल हिंदुस्तानी ने इंडिया टीवी को इंटरव्यू दिया। तब तक जिहादियों ने काजल हिंदुस्तानी को ‘सर तन से जुदा’ की धमकी देनी शुरू कर दी थी। ऐसे में लोगों को उम्मीद थी कि काजल हिंदुस्तानी अपने उना वाले भाषण पर सफाई दे सकती हैं। इंडिया टीवी के शो ‘सवाल तो बनता है’ में काजल सिंगला ने हेट स्पीच पर पूछे गए सवाल के जवाब में कहा कि आज अगर देश में कोई हिंदू साँस लेता है तो कुछ लोग इसे हेट स्पीच समझते हैं।

काजल ने लगभग 40 मिनट के साक्षात्कार के दौरान कई मुद्दों पर खुलकर अपने विचार प्रकट किए। उन्होंने कहा कि मैंने आज तक कभी किसी जाति, धर्म या भगवान के बारे में बुरा नहीं बोला। मैंने सच कहा है और अगर इसमें भी किसी को बुरा लगता है तो मैं जिम्मेदार नहीं हूँ। उन्होंने कहा कि पीएफआई की साजिश के तहत देश में लव जिहाद, जमीन जिहाद और धर्मांतरण की घटनाएँ हो रही हैं। पीएफआई भारत के लिए एक खतरनाक संगठन है जो मुस्लिम नौजवानों को कट्टरवाद, आतंकवाद और अलगाववाद सिखाता है।

काजल हिंदुस्तानी ने आगे कहा, “मैं उनकी लव जिहाद, लैंड जिहाद जैसे मंसूबों के खिलाफ बोल रही हूँ, इसलिए मुझे नहीं लगता कि मैं कुछ गलत कह रही हूँ या हेट स्पीच दे रही हूँ।” सोशल एक्टिविस्ट ने कहा कि जब मैं मुस्लिम समाज में महिलाओं के फायदे के लिए यूनिफॉर्म सिविल कोड की बात करती हूँ तो लोगों को बुरा लगता है। बता दें इन दिनों गुजरात में लव जिहाद और लैंड जिहाद के कई मामले सामने आए हैं।

रामनवमी के अवसर पर आयोजित सभा में लव जिहाद और लैंड जिहाद के खिलाफ आवाज उठाने वाले भाषण के बाद कई मुस्लिम नेताओं ने काजल के खिलाफ पुलिस में शिकायत दी। उनपर एफआईआर दर्ज कर लिया गया। उन पर भड़काऊ भाषण देने का आरोप लगाया गया। इस बीच अलग-अलग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इस्लामवादी यूजर सक्रिय हुए और काजल हिंदुस्तानी को निशाना बनाना शुरू किया। हमेशा की तरह यह दिखाने की कोशिश हुई कि दंगों के पीछे हिंदुओं का ही हाथ है।

कुख्यात ट्विटर अकाउंट हिंदुत्व वाच(@HindutvaWatchIn) ने काजल हिंदुस्तानी के एक वीडियो को पोस्ट करते हुए लिखा, “एक हिंदू जागृति सम्मेलन में काजल शिंगला उर्फ ​​काजल हिंदुस्तानी ने मुस्लिमों को निशाना बनाते हुए घृणास्पद भाषण दिया। वो बार-बार यह अपराध करती हैं। उन्होंने हिंदुओं से आह्वान किया कि अपनी रक्षा के लिए जाग जाएँ और हथियार उठा लें।”

इस वीडियो में सुना जा सकता है कि काजल हिंदुओं से खतरे का सामना करने के लिए शस्त्र उठाने की बात कर रही हैं न कि किसी पर हमला करने के लिए। काजल आत्मरक्षा की बात कर रही हैं। हालाँकि इसके तुरंत बाद प्रोपेगेंडा पोर्टल ऑल्ट न्यूज के सह-संस्थापक और तथाकथित फैक्ट चेकर मोहम्मद जुबैर ने हिंदुत्ववाच के वीडियो को शेयर किया। उसने दिल्ली पुलिस को टैग करते हुए लिखा, “काजल सिंगला (काजल हिंदुस्तानी) कहती हैं- उठो हिंदुओं, खड़े हो जाओ, अपनी रक्षा के लिए शस्त्र उठा लो। क्या यह हथियार उठाने के लिए उकसाना नहीं है?”

यहाँ भी यह फ़ैक्टचेकर ज़ुबैर आत्मरक्षा में हथियार उठाने के आह्वान को भड़काऊ बता रहा है। गौरतलब है कि यह वही फैक्ट चेकर है जिसने बीजेपी की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा को सोशल मीडिया पर इसी तरह निशाना बनाया था और इसके परिणामस्वरूप इस्लामवादियों से उन्हें ‘सर तन से जुदा’ की धमकी मिली थी। जुबैर के भड़काने के बाद ही कट्टरपंथियों ने उदयपुर में कन्हैया लाल नाम के एक व्यक्ति की सिर्फ इसलिए हत्या कर दी थी, क्योंकि उसने सोशल मीडिया पर नूपुर शर्मा के समर्थन में एक पोस्ट लिखा था।

उसके बाद नूपुर शर्मा के समर्थन में पोस्ट लिखने पर महाराष्ट्र के अमरावती में उमेश कोल्हे की भी इस्लामवादियों ने बेरहमी से हत्या कर दी थी। इन इस्लामवादियों खासकर मोहम्मद जुबैर जैसे लोगों ने नूपुर शर्मा के जीवन को खतरे में डाल दिया है। उसी तरह का माहौल अब वे काजल हिंदुस्तानी के लिए बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

2 अप्रैल के बाद से काजल हिंदुस्तानी के किसी भी सोशल मीडिया हैंडल पर कोई पोस्ट या स्टेटस नहीं देखा गया है। ऑपइंडिया की टीम ने उनसे संपर्क करने की कोशिश की है, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है। अब यह देखना होगा कि काजल हिंदुस्तानी की आगे की जिंदगी क्या नूपुर शर्मा की तरह ही जिहादियों से डरकर छिपने में गुजरेगी। या इस बार स्थिति बिगड़ने से पहले ही सरकार और सिस्टम द्वारा कुछ कदम उठाए जाएँगे।


वडोदरा में मस्जिद से शोभायात्रा पर हुआ पथराव, कट्टरपंथी मुस्लिम महिलाओं ने पुलिस को गाली बकी

गुजरात में मस्जिद से पत्थरबाजी
गुजरात के वडोदरा जिले में रामनवमी की शोभा यात्रा पर पथराव के कई वीडियो सामने आए हैं। शोभा यात्रा पर हमले के बाद इलाके में तनाव फैल गया है। सामने आए वीडियो में दिख रहा है कि पथराव एक मस्जिद के पास से की जा रही है, जबकि कट्टरपंथी मुस्लिम महिलाएँ पुलिस का रास्ता रोककर खड़ी हैं।

सामने आए ताजा वीडियो में दिख रहा है कि शोभा यात्रा पर पथराव सिर्फ मस्जिद के आसपास की छतों से ही नहीं, बल्कि मस्जिद से भी की गई। वीडियो में दिख रहा है कि नमाजी टोपी पहना एक शख्स मस्जिद से शोभायात्रा में शामिल लोगों पर पत्थर फेंकता और फिर भाग जाता है।

इस वीडियो को इंडिया टीवी के पत्रकार निर्णय कपूर ने साझा किया है। वीडियो को शेयर करते हुए उन्होंने लिखा है, “वड़ोदरा का ये वीडियो इस बात की पुष्टि कर रहा है कि गुरुवार को कुम्भारवाड़ा से निकली यात्रा पर मस्जिद में मौजूद लोगों ने पथराव किया था। देखिये इस आदमी को- मस्जिद के गेट पर बने छपरे से पत्थर फेंक कर मस्जिद के अंदर कूदता दिख रहा है, जिसके बाद पुलिस मस्जिद में दाखिल होते दिख रही है।”

इसके साथ ही एक और वीडियो सामने आया है। इस वीडियो में दिख रहा है कि शोभा यात्रा पर पथराव करने वाले अपराधियों को गिरफ्तार करने के लिए पुलिस जब मुस्लिम इलाके में गई तो मुस्लिम महिलाओं ने उन्हें घेर लिया। वीडियो में साफ दिख रहा है कि मुस्लिम महिलाएँ ना सिर्फ पुलिस का रास्ता रोक रही हैं, बल्कि उनके साथ गाली-गलौच भी कर रही हैं।

कट्टरपंथी मुस्लिम महिलाएँ पुलिस के चीख-चिल्ला रही हैं, बल्कि ‘पत्थर मारो सालों को’ कहकर गाली भी दे रही हैं और आसपास के लोगों को पुलिस के खिलाफ भड़का भी रही हैं। इस वीडियो में इनकी गाली को सुना जा सकता है।

30 मार्च 2023 को देश भर में हर्ष और उल्लास के साथ रामनवमी मनाया गया, लेकिन कुछ राजनीतिक वजह से और कुछ कट्टरपंथियों की महजहबी वजह से कई राज्यों में शोभा यात्रा पर हमले किए गए। बंगाल में सीएम ममता बनर्जी द्वारा जूलुस को मुस्लिम इलाके में ले जाने की धमकी के बाद वहाँ बड़े पैमाने पर हिंसा भड़क उठी। कट्टरपंथियों ने उनके बयान में उनका सहयोग माना।

वहीं, महाराष्ट्र और गुजरात के कई इलाकों में भी हिंसा की खबर है। गुजरात के वड़ोदरा जिले के फतेहपुरा गराना पुलिस चौकी क्षेत्र में हिंदुओं द्वारा रामनवमी की शोभा यात्रा निकाली गई थी। शोभा यात्रा जैसे ही एक मस्जिद के सामने से गुजरने लगी, उस पर पथराव कर दिया गया। कट्टरपंथियों ने इस हमले के लिए हिंदुओं पर आरोप लगाया था, लेकिन वीडियो सामने आने के बाद उनका यह झूठ भी पकड़ा गया है।

सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पुलिस आरोपितों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार करने में जुटी। है। हालाँकि, जैसा कि ऊपर के वीडियो में दिख रहा है, पुलिस प्रशासन को उनके काम को करने से भी रोका जा रहा है और कट्टरपंथी मुस्लिम महिलाएँ इस काम में बढ़-चढ़कर अपनी भूमिका निभा रही हैं।


राहुल गाँधी को 2 साल की जेल, फिर तुरंत ही मिल गई बेल

गुजरात के सूरत सेशन कोर्ट ने राहुल गाँधी को पीएम मोदी पर दिए एक बयान के मामले में दोषी ठहराया है। कोर्ट ने उन्हें 2 साल की सजा सुनाई। हालाँकि उन्हें तुरंत जमानत भी मिल गई। राहुल गाँधी ने 2019 में कर्नाटक की एक रैली को संबोधित करते हुए कहा था, “सभी चोरों का सरनेम मोदी क्यों होता है?” इस बयान के बाद राहुल गाँधी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया था।

सुनवाई के दौरान राहुल गाँधी भी सूरत की कोर्ट में उपस्थित थे। उनके साथ कॉन्ग्रेस के कई बड़े नेता भी कोर्ट में मौजूद रहे। राहुल गाँधी को दोषी ठहराए जाने के बाद केंद्रीय कानून मंत्री किरण रिजिजू का बयान आया। रिजिजू ने कहा कि राहुल गाँधी जो भी बोलते हैं उससे उनकी पार्टी और देश को भी नुकसान होता है।

13 अप्रैल 2019 को राहुल गाँधी ने कहा था, “नीरव मोदी, ललित मोदी, नरेंद्र मोदी इन सभी के नाम में मोदी लगा हुआ है। सभी चोरों के नाम में मोदी क्यों लगा होता है।” इस बयान के बाद भाजपा नेता पूर्णेश मोदी ने कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष के खिलाफ सूरत में मामला दर्ज कराया था। राहुल गाँधी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 499 और 500 के तहत केस दर्ज करवाया था, जो आपराधिक मानहानि से संबंधित है। 4 साल के बाद अदालत ने मामले में राहुल गाँधी को दोषी पाते हुए सजा सुना दी।

इस केस के सिलसिले में राहुल गाँधी कई बार सूरत पहुँचे। जून 2021 में राहुल गाँधी ने पेशी के दौरान अपना बयान दर्ज कराया था। कॉन्ग्रेस नेता ने अदालत को बताया था कि उन्होंने चुनाव के दौरान राजनीतिक कटाक्ष किया था। उन्होंने यह बात किसी समाज के लिए नहीं कही थी। साथ ही कहा कि इस मामले में अब उन्हें ज्यादा कुछ याद नहीं है। 

केजरीवाल क्या अब बताएंगे ये हवाई जहाज किसके हैं, इस पर कितना खर्च हुआ?

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल जब दिल्ली की सत्ता में आए थे तो उन्होंने दिल्ली की जनता से वादा किया था कि ना मैं बंगला लूंगा ना मैं गाड़ी लूंगा लेकिन बीते दिनों लगाई गई आरटीआई का जो जवाब सामने आया उसे स्पष्ट हो गया है कि वो जो कहते हैं वो करते नहीं। आरटीआई से अब यह साफ हो गया है कि केजरीवाल द्वारा गाड़ियों के ऊपर दिल्ली की जनता की गाढ़ी कमाई को पानी की तरह बहाया गया है। मुख्यमंत्री ने अब तक एक करोड़ 43 लाख 35 हजार 135 रुपये अपनी गाड़ियों में फूंके हैं। जबकि दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने अपनी गाड़ियों को खरीदने के लिए 44 लाख 29 हजार 515 रुपये खर्च किए हैं। ये तो हुई गाड़ियों की बात लेकिन अब केजरीवाल का स्तर ऊंचा हो गया है। अब वे प्राइवेट जेट से राज्यों का दौरा करते हैं। कभी प्राइवेट जेट पर सवाल उठाने वाले केजरीवाल जब प्राइवेट जेट से गुजरात में चुनाव प्रचार के पहुंचने लगे तो सवाल उठना लाजिमी था। केजरीवाल का वीडियो वायरल होने के बाद लोग तमाम तरह के सवाल उठा रहे हैं।

अब केजरीवाल की पार्टी यानी आम आदमी पार्टी जनता से लेकर राजनेताओं के निशाने पर आ गई है। इसके पीछे वजह है अरविंद केजरीवाल का वो वीडियो जिसमें वो एक प्राइवेट जेट से उतरते हुए नजर आ रहे हैं। इस वीडियो में केजरीवाल के साथ पंजाब के सीएम भगवंत मान भी नजर आ रहे हैं। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है और इसी के साथ केजरीवाल के पुराने बयान भी अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, जिसमें वो इलेक्शन में दूसरी पार्टियों द्वारा प्राइवेट जेट के इस्तेमाल पर होने वाले खर्च का ब्योरा मांगते दिखते हैं। अब लोग उनसे पूछ रहे हैं कि प्राइवेट जेट पर सवाल उठाने वाले केजरीवाल क्या अब बताएंगे ये हवाई जहाज किसके हैं, इस पर कितना खर्च हुआ?

आम आदमी की सवारी और गुजरात में ऑटो-रिक्शा नौटंकी

केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि ये है आम आदमी की सवारी और फिर गुजरात में करेंगे ऑटो रिक्शा नौटंकी। बीजेपी नेता प्रवेश साहिब सिंह ने तंज कसते हुए कमेंट किया कि नीली शर्ट पहनकर प्राइवेट जेट से उतर रहा यह वही आम आदमी अरविंद केजरीवाल हैं। जिसके पास फोन रिचार्ज तक के पैसे नहीं होते लेकिन चार्टर प्लेन में चलने के लिए खूब पैसे हैं। फिर भी कुछ लोगों को लगता है कि यह युगपुरुष हैं। बीजेपी नेता कुलजीत सिंह चहल ने सवाल किया कि केजरीवाल जी जवाब दो। आपके पास कितने हेलीकॉप्टर हैं? कितने प्राइवेट हवाई जहाज है? ये किसके हैं? कितना खर्च हो रहा है? शराब दलाली का पैसा यही लगा रहे हो क्या?

खुद को आम आदमी कहने वाले केजरीवाल और उनके करीबियों की अय्याशी देखिए कि चाय-समोसे से लेकर अन्य सुविधाओं के लिए सरकारी खजाने का किस तरह दुरुपयोग किया जा रहा है-

पंजाब CM के गुजरात दौरे से सरकारी खजाने पर 44.85 लाख का बोझ

पंजाब सीएम भगवंत मान का गुजरात दौरा सरकारी खजाने पर भारी पड़ा है। मान ने गुजरात के लिए प्राइवेट एयरक्राफ्ट हायर किया था। जिसके बदले सिविल एविएशन विभाग ने 44.85 लाख का बिल खजाने को भेजा है। बठिंडा के RTI एक्टिविस्ट हरमिलाप ग्रेवाल ने यह जानकारी मांगी थी। इसको लेकर मान अब विरोधियों के निशाने पर आ गए हैं। कांग्रेस ने मान सरकार से पूछा कि क्या यही वह बदलाव और इंकलाब है?, जिसका वादा उन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान किया था। सीएम भगवंत मान 1 से 3 अप्रैल को गुजरात दौरे पर गए थे। जहां दिल्ली सीएम अरविंद केजरीवाल भी उनके साथ थे। दोनों ने दिसंबर में होने वाले गुजरात चुनाव के लिए पार्टी कैंपेन की शुरूआत की थी। पंजाब विधानसभा में विपक्षी दल नेता प्रताप सिंह बाजवा ने कहा कि चुनाव से पहले भगवंत मान ने बदलाव और इंकलाब का वादा किया था। अब अरविंद केजरीवाल की राजनीतिक महत्वाकांक्षा को पूरा करने के लिए प्राइवेट जेट्स हायर किए जा रहे हैं। आम आदमी पार्टी के चुनाव कैंपेन में पंजाब के टैक्स पेयर के 45 लाख रुपए बर्बाद कर दिए गए। क्या इसके लिए किसी को जिम्मेदार ठहराया जाएगा?

न बंगला लूंगा न गाड़ी…केजरीवाल के लिए कार खरीदने पर 1.43 करोड़ हुए खर्च

आम आदमी पार्टी के मुखिया और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल 2014 में दिल्ली के मुख्यमंत्री बनने के बाद से अब तक अपनी गाड़ियों की खरीद पर कुल एक करोड़ 43 लाख 35 हजार 145 रुपये खर्च कर चुके हैं। इस पूरी जानकारी का खुलासा विवेक पूनिया द्वारा 30 मई को आरटीआई के माध्यम से पूछे गए सवाल के बाद दिल्ली सरकार के अधिकारी भास्कर प्रियदर्शिनी के द्वारा दिया गया है। मुख्यमंत्री के द्वारा अब तक कुल 4 बार अपनी गाड़ियों को बदला जा चुका है।

चेहरा सादगी का मिजाज रजवाड़ों सा

केजरीवाल ने सरकार की वर्षगांठ मनाने के लिए 11-12 फरवरी, 2016 को अपने आवास पर दावत दी। एक थाली का खर्च 12, 000 रुपये था। नियमों के मुताबिक दावतों में खाने का खर्च 2, 500 रुपये प्रति थाली से अधिक नहीं हो सकता है। लेकिन नियमों की अनदेखी कर ताज होटल से मंगवाए गए भोजन में 11.4 लाख रुपये का खर्च आया था।

चाय-समोसों पर चट कर गए करोड़ों

ईमानदार केजरीवाल सरकार की सच्चाई देखिये कि फरवरी 2015 से अगस्त 2016 के बीच केजरीवाल के कार्यालय में 1.20 करोड़ रुपये के समोसे और चाय का खर्च दिखाया गया। आरटीआई के जरिए इस बात की सूचना सार्वजनिक हुई तो पता चला कि उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के सचिवालय स्थित कार्यालय में 8.6 लाख और कैंप आफिस में 6.5 लाख रुपये का चाय और स्नैक्स में खर्च किए गए।

जनता के पैसे से मुफ्त इलाज

दिल्ली में बड़े-बड़े अस्पतालों को छोड़ केजरीवाल बेंगलुरू के जिंदल नेचुरोपैथी केंद्र इलाज करवाने जाते हैं। जब से वे दिल्ली के सीएम बने हैं तब से दो बार दिल्ली में वे इलाज करवाने जा चुके हैं। 2016 में तो उनका परिवार भी उनके साथ गया था। इस दौरान वे 17,000 रुपये प्रतिदिन वाले कमरे में रहे। इसका खर्च भी दिल्ली सरकार ने ही वहन किया।

ठेंगे पर पब्लिक, सिसोदिया को तो मस्ती पसंद है !

11 अगस्त से 16 अगस्त, 2015 के बीच मनीष सिसोदिया ब्राजील की यात्रा पर गए। प्रोटोकॉल तोड़ अर्जेंटिना में इग्वाजू फॉल देखने चले गए। इसमें सरकार को 29 लाख रुपयों का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ा। बिजनेस क्लास में सफर करने वाला ये आम आदमी सितंबर, 2015 में न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया भी गए। जून 2016 में बर्लिन की भी यात्रा की। 2016 में जब दिल्ली में डेंगू का कहर था तो राज्य के डिप्टी सीएम फिनलैंड में मौज-मस्ती कर रहे थे। उपराज्यपाल की डांट पड़ी तो वापस आए।

बिजली बिल में लाखों गुल

साल 2017 में एक आरटीआई के जरिये यह भी पता चला कि 19 मार्च 2015 से 4 सितंबर 2016 के बीच मुख्यमंत्री के आधिकारिक निवास स्थान का बिल 2.23 लाख रुपये था। लेकिन बिजली बिल बचाने की नसीहत देने वाले मंत्री सत्येंद्र जैन के घर 3.95 लाख रुपये का बिजली बिल आया।

प्राइवेट जेट के उपयोग पर कभी सवाल उठाने वाले केजरीवाल जब खुद प्राइवेट जेट से यात्रा करने लगे हैं तो लोगों का सवाल उठाना लाजिमी है। आप भी देखिए लोग क्या कह रहे हैं

दिल्ली में ‘छलावा’ कर अरविंद केजरीवाल ने गुजरात से किया वादा : ‘नौकरी नहीं, तो 3000 रूपए बेरोजगारी भत्ता देंगे’

फ्री कल्चर के खिलाफ बार-बार चेतावनी मिलने के बावजूद अरविंद केजरीवाल अपनी राजनीति के तरीके में सुधार नहीं कर रहे। उन्होंने दिल्ली, पंजाब के बाद अब गुजरात में फ्री बिजली-पानी-नौकरी देने का वादा कर लिया है। सबसे हैरानी की बात ये है कि उन्होंने गुजरात में भी ‘बेरोजगारी भत्ता योजना’ की घोषणा की है।

वास्तव में यह फ्री कल्चर शुरू हुई निर्वाचित सफेदपोशी नेताओं को मिलने वाली हर महीने करोड़ों की सुविधाएं और मिलने वाली पेंशन। केजरीवाल ने तो बहुत देर से शुरू की। जनता को फ्री में कुछ सुविधाएं मिलने से आर्थिक संकट का रोना-रोया जा रहा है, लेकिन नेताओं को मिलने वाली सुविधाओं पर ख़ामोशी क्यों? जनता नहीं जानती कि जिस दिन नेताओं को मिलने वाली पेंशन और सुविधाओं पर अंकुश लग जाएगा, देश की अर्थव्यवस्था जरुरत से ज्यादा मजबूत हो जाएगी। 

 ‘बेरोजगारी भत्ता’ दिल्ली सरकार की वही ‘छलावा’ योजना है जिसके बारे में कुछ दिन पहले एक आरटीआई से पता चला था कि दिल्ली में ऐसी कोई योजना चल ही नहीं रहीं, जबकि मीडिया में देखें तो उसका प्रचार-प्रसार खूब हुआ था।

गुजरात में आम आदमी पार्टी के वादे

मुख्यमंत्री व आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने वडोदरा में कहा, “पंजाब में पिछले हफ्ते 25 लाख परिवारों के बिजली बिल ज़ीरो आए हैं। 1 सितंबर तक 26 लाख और परिवारों के बिल ज़ीरो आएँगे। दिल्ली में कई साल से बिल ज़ीरो आ रहे हैं। गुजरात में भी अगर हमें मौका मिलेगा तो यहाँ भी बिजली के बिल ज़ीरो आएँगे।”
उन्होंने आगे कहा, “जैसे दिल्ली में रोज़गार दिए वैसे ही गुजरात के हर बेरोज़गार युवा को रोज़गार देंगे, जब तक रोज़गार नहीं मिल जाता तब तक हर महीने 3,000 रुपए बेरोज़गारी भत्ता देंगे। 10 लाख सरकारी नौकरियाँ तैयार करेंगे। पेपर लीक के खिलाफ सख़्त क़ानून बनाएँगे।”

फ्री कल्चर से खतरा और बेरोजगारी भत्ता का झूठ

एक तरह जहाँ आम आदमी पार्टी हर राज्य में अपना विस्तार करने के साथ वहाँ के लोगों को हर चीज फ्री का लालच दे रही है, वहीं बीते दिनों श्रीलंका के हालात देखने के बाद कई बार फ्री कल्चर के खिलाफ लोगों को आगाह किया जा चुका है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस ‘रेवड़ी कल्चर’ के विरुद्ध अपने सवाल किए थे और विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी कहा था, “भारत स्वाभाविक रूप से श्रीलंका में ‘बहुत गंभीर संकट’ से चिंतित है और इसे बड़े सबक के तौर पर ले रहा है। हमें राजकोषीय विवेक, जिम्मेदार शासन और ‘मुफ्त के कल्चर’ के दुष्परिणामों से सबक लेना होगा।”

इसके अलावा बेरोजगारी भत्ता का जो ऐलान आम आदमी पार्टी ने किया है, उसकी दिल्ली में क्या हकीकत है, इसका खुलासा विवेक पांडे की आरटीआई से हुआ था। विवेक पांडे ने बेरोजगारी भत्ता को लेकर चंद सवाल एक आरटीआई में किए थे और इसे मुख्यमंत्री कार्यालय में देकर अपने प्रश्नों का जवाब माँगा था।

नूपुर शर्मा की जुबान काटने पर 1 करोड़ रूपए का ऐलान: सूरत में सड़क पर बिछाए पोस्टर, फोटो पर क्रॉस और जूते के निशान

पैगंबर मोहम्मद पर भाजपा की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा द्वारा की गई विवादित टिप्पणी के मामले में रोज नया बवाल सामने आ रहा है। जहाँ अब इस विवाद में कूदते हुए भीम सेना ने नूपुर शर्मा की जुबान काटने पर ईनाम का ऐलान किया है। वहीं सूरत की सड़कों पर भी नूपुर शर्मा के ऐसे पैम्फलेट फेंके हुए मिले जिन पर उनके चेहरे पर जूतों और क्रॉस के निशान बनाए गए हैं। 

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, भीम सेना चीफ नवाब सतपाल तंवर ने बुधवार (8 जून, 2022) को नूपुर शर्मा की जीभ काटकर लाने वाले को एक करोड़ रुपए का इनाम देने की घोषणा की है। यही नहीं भीम सेना ने कानपुर में हुई हिंसा में मुस्लिम दंगाइयों का बचाव करते हुए नूपुर शर्मा को ही घटना का मास्टरमाइंड होने का आरोप लगाया है।

रिपोर्ट के अनुसार, भीम सेना के संस्थापक और राष्ट्रीय अध्यक्ष सतपाल तंवर ने आरोप लगाते हुए कहा, “नूपुर शर्मा ने नबी का अपमान किया है, जिससे करोड़ों मुस्लिम समुदाय के लोग आहत हुए हैं।” यही नहीं इस मामले में सीधा मोदी पर आरोप लगते हुए भीम सेना के संस्थापक ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार जानबूझ कर नूपुर शर्मा को गिरफ्तार नहीं कर रही है।

सतपाल तंवर यहीं नहीं रुके। उन्होंने आगे कहा, “नूपुर शर्मा जैसी नेता को समाज में रहने का कोई अधिकार नहीं है। इसे तुरंत जेल भेजना चाहिए या देश निकाला दे देना चाहिए। नूपुर शर्मा द्वारा की गई इस आपत्तिजनक टिप्पणी से भारत पूरे दुनिया में बदनाम हो रहा है।”

वहीं तंवर ने कानपुर हिंसा के बाद ताबतोड़ होती पुलिस कार्रवाई से इतर योगी सरकार पर भी कानपुर दंगे की असली मास्टरमाइंड नूपुर शर्मा को बताते हुए आरोप लगाया कि योगी सरकार ने उसको आरोपित क्यों नहीं बनाया।

नूपुर शर्मा के जो पैम्फलेट सूरत की जिलानी ब्रिज की सड़क पर लगाए और फेंके गए हैं। उन पर नूपुर के चेहरे पर जूतों के निशान भी बने हैं। इनमें नूपुर की गिरफ्तारी की माँग की गई है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ब्रिज पर इस तरह के पैम्फलेट क्यों और किसने लगाए हैं, फिलहाल इसका खुलासा अभी नहीं हुआ है। इस मामले में भी पुलिस आरोपितों का पता लगा रही है।

गौरतलब है कि पिछले दिनों नूपुर शर्मा ने टाइम्स नाउ की एक टीवी डिबेट के दौरान पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। तब से ही शर्मा को कई कट्टरपंथी धमकी भी दे रहे हैं। वहीं नूपुर शर्मा पर बढ़े खतरे के मद्देनजर दिल्ली पुलिस ने उन्हें सुरक्षा प्रदान की है।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने रविवार (5 जून, 2022) को राष्ट्रीय प्रवक्ता नूपुर शर्मा को पार्टी से निलंबित कर दिया था, वहीं दिल्ली इकाई के मीडिया प्रमुख नवीन कुमार जिंदल को पार्टी से निष्कासित कर दिया था। यहाँ यह भी उल्लेखनीय है कि बीजेपी ने अपने दोनों प्रवक्ताओं के खिलाफ यह कार्रवाई ऐसे समय में की है, जब उनके बयानों को लेकर सोशल मीडिया से लेकर विदेशों में भी विवाद खड़ा हो गया था और इस्लामिक देशों ने भारत को इसी मुद्दे पर घेरने की कोशिश की थी।

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वहीं इस मुद्दे पर सोशल मीडिया से लेकर मीडिया में मचे बवाल के बाद बीजेपी ने अपने दोनों प्रवक्ताओं पर जहाँ एक्शन लिया था वहीं सोशल मीडिया पर तभी से नुपुर शर्मा को उनके सच बोलने की वजह से अपार जनसमर्थन भी मिल रहा है।