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इन्दिरा गाँधी : न्यायालय के आदेश को ठेंगा दिखा आपातकाल घोषित कर बेकसूरों को जेलों में भरा था

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                                                                              चित्र साभार  : जनसत्ता 
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
आज कांग्रेस और कांग्रेस समर्थक पार्टियाँ वर्तमान भारतीय जनता पार्टी के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर लोकतंत्र का गला घोटने, तानाशाही आदि का आरोप लगा कर जनता को भ्रमित किया जा रहा है, लेकिन ये सभी पार्टियाँ भूल रही हैं कि इंदिरा गाँधी ने प्रधानमंत्री रहते किस तरह से तानाशाही रवैया अपनाते, न्यायालय, मीडिया और हिन्दुओं पर कितने अत्याचार किये थे। जब चुनाव में धांधली के आरोप में सोशलिस्ट नेता राजनारायण(जनता पार्टी राज में स्वास्थ्य केन्द्रीय मंत्री रहे) ने कोर्ट में पराजित किया और कोर्ट ने आदेश में इंदिरा गाँधी को पदमुक्त किया था, परन्तु इंदिरा गाँधी ने देश में आपातकाल घोषित कर विरोधियों को आधी रात से जेलों में भरना शुरू कर दिया था। आज कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी एवं अन्य नेता और इनके समर्थक किस मुँह से मोदी पर तानाशाह का आरोप लगा रहे हैं। बल्कि इस मुद्दे पर मीडिया को भी निर्भीकता से इन मुद्दों को उठाना चाहिए। विशेषकर, रामनाथ गोयनका पुरस्कार लेने पत्रकारों को। रामनाथ गोयनका ने आपातकाल में तानाशाह प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी का मुकाबला किया था। 7 नवम्बर 1966 को गौ-हत्या का विरोध कर रहे निहत्थे साधु-सन्तों पर गोली चलवाकर दिल्ली में पार्लियामेंट स्ट्रीट बेगुनाहों के खून से लाल करवाने वाली तत्कालीन तानाशाह इंदिरा गाँधी ही थी।       
इंदिरा प्रियदर्शनी गांधी का जन्म 19 नवंबर 1917 को इलाहाबाद में हुआ। इंदिरा साल 1966 से 77 और 1980 से 1984 तक भारत की प्रधानमंत्री रहीं। वह जवाहरलाल नेहरू की एक मात्र संतान थीं। इंदिरा ने शांतिनिकेतन (पश्चिम बंगाल)(स्मरण हो, इनके चाल-चलन के कारण रविन्द्र नाथ टैगोर ने शांतिनिकेतन से निकाल दिया था।) और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से अपनी पढ़ाई की और 1938 में कांग्रेस पार्टी में शामिल हुईं। उन्होंने 1960 में कांग्रेस पार्टी के नेता फिरोज गांधी से निकाह किया। इंदिरा गांधी के दो बच्चे हुए राजीव गांधी और संजय गांधी। इंदिरा गांधी की राजनीति में दिलचस्पी शुरुआत से ही रही। वह बचपन से अपने पिता के साथ राजनीतिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेती थीं और यात्राएं करती थीं।
1947 में कांग्रेस पार्टी के सत्ता में आते ही इंदिरा की सक्रिय राजनीति में शुरुआत हो गई। वह 1955 में कांग्रेस की वर्किंग कमेटी की सदस्य बन गईं। वह पहली बार 1964 में राज्यसभा की सदस्य बनीं। जवाहरलाल नेहरू के निधन के बाद लाल बहादुर शास्त्री देश के प्रधानमंत्री बने। शास्त्री की सरकार में उन्हें सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय का विभाग दिया गया।
कांग्रेस का विभाजन 
1966 में लाल बहादुर शास्त्री के निधन के बाद इंदिरा को कांग्रेस पार्टी का अध्यक्ष और प्रधानमंत्री बनाया गया। प्रधानमंत्री बनने के बाद इंदिरा की राजनीतिक चुनौतियों का दौर शुरू हो गया। इंदिरा के नेतृत्व को मोरारजी देसाई और पार्टी के पुराने नेताओं से चुनौती मिलती रही। राजनीति में देसाई के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए इंदिरा को उन्हें उप प्रधानमंत्री तक बनाना पड़ा। एक समय ऐसा भी आया जब उन्हें पार्टी से निकाल दिया गया। इंदिरा राजनीतिक चुनौतियों से घबराई नहीं और उन्होंने न्यू कांग्रेस पार्टी के नाम से नए राजनीतिक दल का गठन किया। साल 1971 के आम चुनाव में इंदिरा ने स्पष्ट बहुमत प्राप्त किया। साल 1971 इंदिरा गांधी के लिए बेहम कामयाब रहा। उन्होंने में पाकिस्तान के दो टुकड़े कर बांग्लादेश बनवा था। इस फैसले ने उनकी छवि आयरन लेडी के रूप में गढ़ी। उन्होंने सबसे पहले बांग्लादेश (पूर्वी पाकिस्तान ) को एक सरकार के रूप में मान्यता दी।
न्यायालय के आदेश को ठेंगा दिखा आपातकाल घोषित 
1975 में चुनाव में धांधली  करने का दोषी पाए जाने पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने इंदिरा गांधी के खिलाफ अपना फैसला सुनाया। कोर्ट के फैसले के बाद विपक्ष ने इंदिरा गांधी पर इस्तीफा देने का दबाव बनाया। हालांकि उन्होंने इस्तीफा देने से इंकार कर दिया था। इंदिरा गांधी ने हाईकोर्ट का फैसला मानने से इंकार कर दिया था और 26 जून को आपातकाल लागू करने की घोषणा कर दी थी। संजय गांधी भी नहीं चाहते थे कि उनकी मां के हाथ से सत्ता चली जाए। वहीं जय प्रकाश नारायण की अगुवाई में पूरा विपक्ष एकजुट होकर इंदिरा के सामने खड़ा हो गया था। पूरे देश में इंदिरा के खिलाफ आंदोलन शुरू हो गया। सरकार विपक्ष के आंदोलन को खत्म करने के लिए सरकार ने कड़े रुख अपनाया।  अटल बिहारी वाजपेयी, लाल कृष्ण आडवाणी, मुलायम सिंह यादव समेत विपक्ष के तमाम नेता जेल में बंद कर दिया था। संजय ने भी खूब मनमानी की। इस मामले में उन्हें सुप्रीम कोर्ट से भी राहत नहीं मिली। राजनीतिक सत्ता अपने हाथ से फिसलते देख उन्होंने देश में आपातकाल की घोषणा कर दी। इस दौरान विरोधी नेताओं और कार्यकर्ताओं को जेल में डाला गया और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर रोक लगाई गई। आपातकाल के दौरान सरकार ने जनसँख्या को नियन्त्रित करने के उद्देश्य से नसबंदी का दुरूपयोग किया गया। यहाँ तक की भिखारियों, रिक्शा चालक एवं झल्ली ढोने वालों तक की पकड़-पकड़ कर जबरदस्ती नसबंदी कर दी गयी थी। अध्यापक और सरकारी कर्मचारियों को अपनी वार्षिक वेतन वृद्धि और पदोन्नति लेने की लिए कम से कम दो नसबन्दी के केस लाने के लिए मजबूर किया गया था, और ऐसा न करने पर उनका सुदूर इलाकों में ट्रांसफर कर दिया जाता था। 
फिल्मों एवं गीतों पर पाबन्दी 
चर्चित गायक किशोर कुमार द्वारा किसी कार्यक्रम में फ्री में गीत गाने के कारण, फिल्मों और रेडियो पर उनके गानों पर पाबन्दी लगा दी गयी थी। फिल्म "रोटी,कपडा और मकान" के चर्चित गीत "हाय महँगाई तू कहाँ से आयी...", फिल्में "किस्सा कुर्सी का", "आंधी" आदि फिल्मों पर पाबन्दी लगा दी गयी थी।  
समाचार-पत्र एवं पत्रिकाओं पर Censorship 
Related imageआपातकाल के वक्त देश का चौथा स्तंभ माने जाने वाला मीडिया का भी खूब उत्पीड़न किया गया था। अखबारों पर सेंसेस बैठा दिया गया था। सेंसरशिप के अलावा अखबारों और सामाचार एजेंसियों को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने नया कानून बनाया । जिसके बाद देशभर में आपत्तिजनक सामाग्री पर रोक लगा दी गई। कानून के बारे में बोलते हुए कहा था कि इसके जरिए संपादकों की स्वतंत्रता की समस्या का हल हो जाएगा। सरकार ने उस वक्त चारों सामाचार एजेंसियों  पीटीआई, यूएनआई, हिंदुस्तान समाचार और समाचार भारती को खत्म करके उन्हें ‘समाचार’ नामक एजेंसी में तबदील कर दिया था।
आपातकाल में बिना सरकार की इजाजत के बिना कोई प्रकाशित नहीं कर सकता था। प्रमाण के लिए उस समय के Indian Express को देखा जा सकता है। सरकार के विरुद्ध समाचार को सेंसर कर दिया जाता था, संघ समर्थित कई पत्र/पत्रिकाओं जैसे Motherland(अंग्रेजी दैनिक), Organiser और पाञ्चजन्य आदि पर ऐसा अंकुश लगाया गया कि तत्कालीन अत्याचारों के चलते प्रकाशन असम्भव था। 
भाईयों और बहनों राष्ट्रपति जी ने आपातकाल की घोषणा की है। इससे आतंकित होने का कोई कारण नहीं है। ये शब्द थे उस दौर की सबसे ताकतवर महिला और त्तकालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के।  25 जून 1975 में आधी रात को देशभर में  आपातकाल की घोषणा की गई थी। ये आपातकाल 21 मार्च 1977 तक रहा। ये देश के इतिहास का वो काला अध्याय है जिससे याद कर आज भी लोगों की आंखे नम हो जाती है। कहा जाता है कि आपातकाल लागू होने के बाद लोगों से उनके अधिकार छीन लिए गए थे। 
लोगों के पास नहीं रहे थे अधिकार 
इमरजेंसी के दौरान भारत एक जेल में तबदील हो गया था। नागरिकों के सारे मौलिक अधिकार भी छीन लिए गए थे। नागरिकों के अधिकारों को स्थगित कर दिया गया था। 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने भी माना था कि आपातकाल के दौरान नागरिकों को अधिकारों के हनन हुआ था। 
वकीलों और जजो को भी नहीं बख्शा गया 
इस दौरान नागरिकों के साथ भी खूब दुर्व्यवहार किया। नागरिकों के अधिकारों की रक्षा  करने वालें वकीलों को भी बख्शा नहीं गया और खासकर बार काउंसिल के अध्यक्ष राम जेठमलानी को। उन्हें सबक सिखाने के लिए संसद के कानून द्वारा अटॉर्नी जनरल को इसका अध्यक्ष बना दिया गया बाकी जिन भी 42 जजों ने नजरबंदियों के मुकदमों में न्यायसंगत दिए या देने की कोशिश की उन सभी का तबादला कर दिया गया।  
1977 में जनता ने कांग्रेस को सत्ता से हटाया 
कांग्रेस पार्टी को आपातकाल का नतीजा 1977 के आम चुनावों में भुगतना पड़ा। इस चुनाव में कांग्रेस पार्टी को बड़ी हार का सामना करना पड़ा और देश में पहली बार मोरारजी देसाई के नेतृत्व में जनता पार्टी की सरकार बनी। यह देश की पहली गैर-कांग्रेसी सरकार थी।
1978 की शुरुआत में इंदिरा ने कांग्रेस (आई) पार्टी बनाई। अक्टूबर 1977 से दिसंबर 1978 के बीच कुछ समय के लिए वह जेल में भी रहीं। इन झटकों के बावजूद वह 1978 में लोकसभा सीट जीत गईं और उनकी पार्टी एक बार फिर से जनता में अपनी पकड़ बनाने लगी। 1980 में जब लोकसभा चुनाव हुए तो उनकी पार्टी कांग्रेस (आई) बहुमत से जीतकर सत्ता में आई। इंदिरा के पीएम बनने के बाद उनके बेटे संजय गांधी उनके राजनीतिक सलाहकार बने। इसके बाद इंदिरा और संजय के खिलाफ सभी मुकदमों को वापस ले लिया गया। 1980 में संजय गांधी की एक विमान हादसे में मौत हो गई। संजय की मौत के बाद इंदिरा ने अपने राजनीतिक उत्तराधिकारी के रूप में राजीव गांधी को तैयार करना शुरू किया।
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इस खण्‍ड में लिखा गया है कि इंदिरा ‘बिस्‍तर में बेहद अच्‍छी थीं’ औरं सेक्‍स में ‘वह फ्रेंच महिलाओं और केरल नायर महिलाओं का मिश्रण थीं।’ किताब में यह भी दावा किया गया है कि वह लेखक (मथाई) से गर्भवती हो गई थीं और गर्भपात कराना पड़ा। कई अपुष्‍ट ऑनलाइन वर्जन में इंदिरा के हवाले से कहा गया कि इंदिरा गाँधी ने एक बार कहा था कि वो किसी हिन्दू के साथ अफेयर तो कर सकती है, लेकिन किसी हिन्दू के साथ शादी नहीं कर सकती।’
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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार जब हम पूर्व प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी की बात करते हैं, तो कई कांग्रेसी कहते हैं कि वह ....


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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार क्या कांग्रेसी हिन्दू गो मांस की इस तरह दावत के लिए 
नब्बे दशक की शुरुआत में इंदिरा गांधी को पंजाब में बढ़ते अलगाववाद का सामना करना पड़ा। जरनैल सिंह भिंडरवाला पंजाब से अलग खालिस्तान की मांग कर रहा था। उसने अपनी इस मांग के लिए हिंसा का रास्ता चुना था। 1982 में भिंडरावाले अपने गुट के सदस्यों के साथ हरमंदिर साहिब (स्वर्ण मंदिर) पर कब्जा कर लिया। 1984 में इंदिरा गांधी ने स्वर्ण मंदिर को मुक्त कराने के लिए सेना को आदेश दिया। सेना स्वर्ण मंदिर में दाखिल हुई और भिंडरावाला को उसके साथियों के साथ मार गिराया। सेना की इस कार्रवाई से सिख समुदाय में असंतोष एवं नाराजगी फैली और इसके पांच महीने बाद इंदिरा गांधी की सुरक्षा में तैनात दो सिख सुरक्षाकर्मियों ने गोली मारकर उनकी हत्या कर दी। इंदिरा गांधी की हत्या के बाद उनके बेटे राहुल गांधी देश के प्रधानमंत्री बने। राजीव 1989 तक देश के पीएम रहे।

IAF Air Strike: बॉलीवुड की पीएम नरेंद्र मोदी से अपील, पाक कलाकारों को न मिले वीजा

IAF Air Strike All India Cine Worker Association Appeals No Issue Of Visa To Pakistani Artist  बॉलीवुड की पीएम नरेंद्र मोदी से अपील, पाक कलाकारों को न मिले वीजा
आर.बी.एल.निगम, फिल्म समीक्षक 
जम्मू कश्मीर के पुलवामा हमले का बदला लेते हुए भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के बालाकोट में जाकर आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के ठिकानों को ध्वस्त किया है। बॉलीवुड ने भी इस जवाबी कार्रवाही का स्वागत किया है। अब ऑल इंडिया सिने वर्कर एसोसिएशन (AICWA) ने पीएम मोदी से पाकिस्तानी एक्टर्स को वीजा जारी न करने की अपील की है। 
सिने वर्कर एसोसिएशन ने लेटर लिखकर कहा- पीएम नरेंद्र मोदी से अपील की है कि वह किसी भी पाकिस्तान आर्टिस्ट को विजा न दें। इसके अलावा किसी भी भारतीय मूवी और कंटेंट को पाकिस्तान में रिलीज न किया जाए।


All India Cine Workers Assn in a letter to PM Modi in regards with Pakistan's ban on release of Indian Movie or content in Pak:AICWA on behalf of entire film&media fraternity would demand complete shut down on issuing any Visa to Pakistani actors,Film Association&Media Fraternity
अपने लेटर में एसोसिएशन ने कहा है कि- हम उम्मीद करते हैं कि भारत सरकार कड़े कदम उठाया जाए। इसके अलावा आतंकी संगठन को फंडिंग करने वाले पाक जैसे देश के खिलाफ प्रतिबंध लगाए जाए। भारत की 1.3 अरब आबादी इस काम में आपके साथ खड़ी है। 
वायु सेना पर है गर्व 
ऑल इंडिया सिने वर्कर एसोसिएशन ने लिखा है कि- पूरा बॉलीवुड को वायुसेना और भारतीय सेना पर गर्व है, जिन्होंने पाक अधिकृत कश्मीर में ऐसा साहसी और जिम्मेदारी से भरा जवाब दिया है। हम उम्मीद करते हैं कि आगे भी सरकार ऐसी ही कड़ी कार्रवाही करे। लेटर के आखिर में एसोसिएशन ने विदेश मंत्रालय और सूचना और प्रसारण मंत्रालय से अपील की है कि वह इस रिक्वेस्ट का संज्ञान लें।

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Choudhary Fawad Hussain, Pakistan I&B Minister: Cinema Exhibitors Association has boycotted Indian content, no Indian movie will be released in Pakistan. Also have instructed PEMRA to act against made in India advertisements. (file pic)

Now speechless!!!
उन्होंने साथ ही पीईएमआरए को भारत के विज्ञापनों के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। आपको बता दें कि फिल्म टोटल धमाल के मेकर्स ने फिल्म को पाकिस्तान में रिलीज न करने का निर्णय लिया था। इसके अलावा सलमान खान की फिल्म भारत को भी पाक ने बैन कर दिया था।
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आर.बी.एल.निगम, फिल्म समीक्षक अक्टूबर 2018 में पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को स्थानीय टीवी चैनलों पर प्रसारि.....

पाक ने भारतीय फिल्मों की रिलीज पर लगाई रोक 
जम्मू कश्मीर के पुलवामा में 14 फरवरी को हुए आतंकी हमले में हमारे 40 सैनिक शहीद हो गए। इस कायरतापूर्ण हरकत की पूरी दुनिया में निंदा हुई। इस घटना के बाद से ही भारत और पाकिस्तान के रिश्तों में और भी कड़वाहट भर गई। जिसका असर दोनों देशों के सिनेमा पर भी दिखा। पुलवामा अटैक के बाद जहां भारत ने पाकिस्तानी एक्टर्स और आर्टिस्ट्स को बैन कर दिया और अपनी कई फिल्मों को वहां रिलीज करने पर रोक लगा दी, वहीं अब पाकिस्तान भी बौखलाया हुआ नजर आ रहा है।

भारतीय वायुसेना द्वारा एयर स्ट्राइक के बाद पाकिस्तान ने भारतीय फिल्मों की रिलीज पर पूरी तरह से रोक लगा दिया है। एएनआई के मुताबिक पाकिस्तान के सूचना एवं प्रसारण मंत्री फवाद हुसैन ने कहा कि सिनेमा प्रदर्शकों एसोसिएशन ने भारतीय कंटेंट का बॉयकॉट करने का फैसला लिया है। कोई भी भारतीय कोई भारतीय फिल्म पाकिस्तान में रिलीज नहीं होगी। 
26 फरवरी को बालाकोट में भारतीय वायुसेना की आतंकी संगठनों पर स्ट्राइक के बाद पाकिस्तान ने भारतीय फिल्मों को वहां रिलीज न करने की बात कही है। एएनआई के मुताबिक पाकिस्तान के सूचना एवं प्रसारण मंत्री फवाद हुसैन ने कहा कि सिनेमा प्रदर्शकों एसोसिएशन ने भारतीय कंटेंट का बॉयकॉट करने का फैसला लिया है। कोई भी भारतीय फिल्म पाकिस्तान में रिलीज नहीं होगी। साथ ही उन्होंने पीईएमआरए को भारत के विज्ञापनों के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।
ख़ुशी से झूमें टीवी कलाकार 
बीते दिनों हुए पुलवामा आतंकी हमले के बाद भारतीय वायु सेना ने पाकिस्तान के अंदर घुस कर बालाकोट में स्थित आतंकियों के ठिकाने को तबाह कर दिया है। वहीं जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी ठिकानों को नेस्तोनाबूत करने के बाद भारतीय वायु सेना सही सलामत वापस लौट आई और इससे भारत के लोग खूब खुश है। जी हाँ, वायु सेना ने मिराज 2000 के इस्मेमाल से 1000 किलो के बम बरसाए जिससे जैश के कई ठिकाने तहस-नहस हो गए और इससे अब सभी भारत के जय-जयकार के नारे लगा रहें हैं 
जैसे ही यह खबर सामने आई वैसे ही हर आम हो या खास ब्यक्ति सभी वायु सेना की इस दिलेरी की दाद देते और सलाम करते नजर आए। वहीं इस लिस्ट में टीवी की भी कई नामी हस्तियों ने वायु सेना के इस जज्जे को सलाम किया है जो आप सभी देख सकते हैं। आप सभी को बता दें कि टीवी के सितारों ने ट्विटर के माध्यम से वायु सेना के रणबाकुरों को सलामी दी है जिनमे कई स्टार्स शामिल हैं। आप सभी को पता ही होगा कि वायुसेना ने आतंकवादियों के कैंप पर कुल 21 मिनट तक सर्जिकल स्ट्राइक की। इस कार्रवाई में जैश-ए-मोहम्मद के कैंप तबाह हुए हैं। मिली खबरों के अनुसार कुल 250 से 300 आतंकी मारे गए हैं 
मिराज फाइटर जेट्स‌ की ग्वालियर‌ स्थित दो स्कॉवड्रन को जिम्मेदारी सौंपी गईं। ये दोनों स्कॉवड्रन थीं–टाइगर (नबंर 1 स्कॉवड्रन) और (नंबर‌‌ 7) बैटेल एक्सेस। इन दोनों स्कॉवड्रन के 6-6 फाइटर जेट्स ने इस मिशन में हिस्सा लिया। कुल मिलाकर 12 मिराज 2000 आई (यानि अपग्रेड) ने हिस्सा लिया। मिराज‌ 2000 विमानों को भारत ने फ्रांस से 80 के दशक में खरीदे थे। वायुसेना में ‘वज्र’ के नाम से जाने वाले मिराज को फ्रांस की उसी दसॉल्ट कंपनी ने बनाया था जिसने राफेल जेट बनाया है। फिलहाल टीवी सेलेब्स जैसे करणवीर बोहरा, सुमोना चक्रवर्ती, कपिल शर्मा, हर्षद अरोरा, अंकिता करण पटेल सभी ने ट्वीट कर वायुसेना को सलाम किया है 

पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय फिल्मों व टीवी कार्यक्रमों पर लगाई रोक

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आर.बी.एल.निगम, फिल्म समीक्षक 
भारतीय वायुसेना की एयरस्ट्राइक के बाद पाकिस्तान पूरी तरह बौखला गया है। इसके बाद पाकिस्तान कैबिनेट ने तत्काल मीटिंग बुलाई और भारत के प्रति एक्शन लेते हुए भारतीय सिनेमा को पाकिस्तान में रिलीज पर बैन लगा दिया है। पाकिस्तान के सूचना एवं प्रसारण मंत्री चौधरी फवाद हुसैन ने इसका एलान किया। पाकिस्तान के सूचना एवं प्रसारण मंत्री देश में भारतीय फिल्मों के साथ-साथ 'मेड इन इंडिया' विज्ञापनों के बहिष्कार की घोषणा की। बता दें कि पुलवामा अटैक के बाद भारत ने पाकिस्तानी एक्टर्स और आर्टिस्ट्स को बैन कर दिया और अपनी कई फिल्मों को वहां रिलीज करने पर रोक लगा दी, वहीं अब पाकिस्तान भी बौखलाया हुआ नजर आ रहा है। इसके अलावा पीईएमआरए को 'मेड इन इंडिया' विज्ञापनों के खिलाफ कार्रवाई करने का निदेर्श दिया गया है।

सिनेमा एक्जिबिटर एसोसिएशन ने भारतीय कंटेंट का बहिष्कार किया है।


पाकिस्तान के सूचना एवं प्रसारण मंत्री ने कहा कि पाकिस्तान के सिनेमा एग्जिबीटर्स एसोसिएशन ने भारतीय फिल्मों का बहिष्कार करने का फैसला किया है। चौधरी ने ट्वीट किया, सिनेमा एक्जिबिटर एसोसिएशन ने भारतीय कंटेंट का बहिष्कार किया है। इसके साथ पाकिस्तान में अब कोई भारतीय फिल्म रिलीज नहीं होगी।
पाकिस्तान को होगा नुकसान 
पाकिस्तान में बाॅलीवुड फिल्मों पर बैन होने से राजस्व में कमी आएगी ही, पाकिस्तान की फिल्म इंडस्ट्री पर भी बुरा असर पड़ेगा। पाकिस्तान में बॉलीवुड की फिल्में नहीं दिखाए जाने से पाकिस्तान की फिल्म इंडस्ट्री का बिजनेस 70 फीसदी कम हो जाएगा, क्योंकि पाकिस्तानी फिल्म इं‍डस्ट्री में 70 फीसदी बिजनेस बॉलीवुड और हॉलीवुड से आता है।
पहले भी अक्टूबर 2018 में पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को स्थानीय टीवी चैनलों पर प्रसारित होने वाली भारतीय फिल्मों और टीवी कार्यक्रमों पर रोक लगा दी। स्थानीय अखबार डॉन के मुताबिक शीर्ष अदालत, पाकिस्तानी टीवी चैनलों पर प्रसारित होने वाली विदेशी सामग्री के संबंध में यूनाइटेड प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन की याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
सुनवाई के दौरान, मुख्य न्यायाधीश मियां साकीब निसार ने भारतीय विषय सामग्री को बंद करने का आदेश दिया और यह स्पष्ट किया कि प्राधिकारी सिर्फ उचित सामग्री का प्रसारण करें। उन्होंने कहा,वे हमारे बांधों (के निर्माण को बाधित) करने की कोशिश कर रहे हैं और हम क्या उनके चैनलों को प्रतिबंधित भी नहीं कर सकते हैं?

साल 2006 से ही भारतीय धारावाहिक पर आंशिक प्रतिबंध लगा हुआ था लेकिन साल 2016 में कई बड़े भारतीय सीरियल्स पर बैन लगा दिया गया।

ऐसा नहीं है कि पाकिस्तान में इस तरह का प्रतिबन्ध पहली बार लगा है। वरिष्ठ फिल्म समीक्षकों को ज्ञात हो, जब 80 के दशक में अभिनेता-निर्माता शेख मुख्तियार ने फिल्म नूरजहाँ का निर्माण किया था, जो भारत में बुरी तरह से असफल हो गयी थी, और कर्जे में डूबे मुख्तियार को उनके किसी हितैषी ने फिल्म को पाकिस्तान में रिलीज़ करने का परामर्श दिया। उस दौरान भारत में असफल फिल्में किसी भी भारतीय फिल्म निर्माता को हुए नुकसान की भरपाई कर देती थी। पाकिस्तान फिल्म निर्माता संघ ने भारतीय फिल्मों के कारण पाकिस्तान फिल्मों के बॉक्स-ऑफिस पर औंधे मुंह गिरते देख किसी भी रूप में भारतीय फिल्मों के प्रदर्शन पर रोक लगा रखी थी। जिस कारण कर्ज में में डूबे शेख को पाकिस्तान जाकर भी कोई राहत नहीं मिली। उन दिनों पाकिस्तान के राष्ट्रपति थे जिया-उल-हक़। जिया चर्चितअभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा को अपने पुत्र के समान मानते थे। इस बात की जानकारी मिलते ही, शेख ने सिन्हा से सम्पर्क किया और शत्रुघ्न सिन्हा के अथक प्रयास के कारण पाकिस्तान में नूरजहाँ का प्रदर्शन क्या हुआ, उनकी तो डूबती नैया ही पार क्या लगाई, फिल्म को मिली अभूतपूर्व सफलता ने उन्हें शत्रुघ्न का मुरीद बना दिया।   
भारत-पाकिस्तान के आपसी कटु संबंधों के कारण कई ऐसे सीरियल हैं जो पाक में बैन किए गए। पाक की ओर से ये कहा जा चुका है कि उनके यहां भारतीय टीवी कार्यक्रमों के 6 प्रतिशत कन्टेंट्स ही दिखाए जाएंगे। इन 6 प्रतिशत कार्यक्रमों की भी पाक में रोक लगाने की मांग की गई। 2016  में अथॉरिटी ने ये फैसला लिया कि पाकिस्तान के अंदर भारतीय कंटेंट्स को पूरी तरह से बैन कर दिया जाए।
पाकिस्तान ने देश में अवैध भारतीय डीटीएच सेवाओं और ज्यादा विदेशी सामग्री के प्रसारण पर टीवी चैनलों और केबल संचालकों पर कार्रवाई की घोषणा की है। यह कदम भारत सरकार के ऑल इंडिया रेडियो (एआईआर) के बलूची भाषा में कार्यक्रम के प्रसारण की पहल करने के बाद आया है।
गौरलतब है कि पाकिस्तानी इलेक्ट्रॉनिक मीडिया नियामक आयोग ने 2016 में स्थानीय टीवी चैनलों और एफएम रेडियो पर भारतीय सामग्री के प्रसारण पर रोक लगा दी थी। लेकिन लाहौर हाईकोर्ट ने 2017 में रोक को खारिज कर दिया था और इसे अवैध घोषित किया था क्योंकि इस संबंध में पाकिस्तानी सरकार को कोई आपत्ति नहीं थी।
पीईएमआरए के अध्यक्ष अबसार आलम ने कहा, “करीब तीन लाख भारतीय डीटीएच डिकोडर्स देश में बेचे जा रहे हैं। हम सिर्फ इस बिक्री को ही नहीं रोकना चाहते, बल्कि हमने एजेंसियों से पाकिस्तानियों को बेचे जा रहे डिकोडर्स के भारतीय डीलरों को होने वाले भुगतान के तरीके का पता लगाने को भी कहा है।”
उन्होंने कहा कि इसके लिए पर्याप्त समय केबल संचालकों और सैटेलाइट चैनलों को अपने कानून के जरूरत के अनुसार समायोजित करने के लिए दिया गया है। अन्यथा 15 अक्टूबर से दो महत्वपूर्ण क्षेत्रों में दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
भारतीय डीटीएच डीलरों के खिलाफ भी तत्काल प्रभाव से कार्रवाई की जाएगी। यह फैसला हाल की एक पीईएमआरए (पेमरा) परिषद की बैठक में किया गया।
आलम ने कहा कि पेमरा फेडरल राजस्व बोर्ड, स्टेट बैंक और एजेंसियों और फेडरल जांच एजेंसी को देश में भारतीय डीटीएच की बिक्री में कमी लाने लिए पत्र लिखेगा।
पेमरा नियम के तहत 24 घंटे के प्रसारण में सिर्फ 10 प्रतिशत (दो घंटे और 40 मिनट) विदेशी सामग्री का प्रसारण किया जाना है।
भारत-पाकिस्तान के आपसी कटु संबंधों के कारण कई ऐसे सीरियल हैं जो पाक में बैन किए गए। पाक की ओर से ये कहा जा चुका है कि उनके यहां भारतीय टीवी कार्यक्रमों के 6 प्रतिशत कन्टेंट्स ही दिखाए जाएंगे। इन 6 प्रतिशत कार्यक्रमों की भी पाक में रोक लगाने की मांग की गई। 2016  में अथॉरिटी ने ये फैसला लिया कि पाकिस्तान के अंदर भारतीय कंटेंट्स को पूरी तरह से बैन कर दिया जाए।
जिसके बाद नागिन से लेकर बिग बॉस तक के शो पर रोक लगी थी। हांलाकि अब पाकिस्तान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया रेग्युलेटरी अथॉरिटी (पेमरा) को पाकिस्तान में भारतीय नाटकों पर लगे प्रतिबंध को समाप्त करने का आदेश दिया है। बैन हटने से पहले पाक के टीवी ऑपरेटर्स को चेतावनी दी गई कि जो इस प्रतिबंध का उल्लंघन करने के दोषी होंगे उनके लाइसेंस निलंबित कर दिये जाएंगे। प्रतिबंध पाकिस्तान में केबल पर प्रसारित हो रहे सभी भारतीय कार्यक्रमों पर लागू रहा। इस लिहाज से पाकिस्तानी दर्शक वो सीरियल नहीं देख पाए जो भारत के साथ-साथ पाकिस्तान में भी खासा मशहूर रहे।

बिग बॉस

बिग बॉस के चाहने वाले जितने भारत में हैं उतने ही पाक में भी हैं। पाकिस्तान में इस सीरियल को खासा पसंद किया गया। लेकिन बैन का दर्द इस सीरियल तो भी उठाना पड़ा। पाक में इस पर प्रतिबंध को लेकर कहा गया कि शो में गलत कंटेंट को पेश किया जाता है।

नागिन

भारत में नागिन सीरियल को दर्शकों से खासा प्यार मिला और इसके दो सीजन छोटे पर्दे पर पेश किए गए। लेकिन इस शो को भी पाक में बैन किया। इस शो पर प्रतिबंध लगाने का कारण अफवाह बताया।

"भाबी जी घर पर हैं"

छोटे पर्दे के बेहद लोकप्रिय शो "भाबी जी घर पर हैं" के टेलीकॉस्ट पर भी रोक लगी थी। इस शो के रोके जाने के बाद इसको पाक में प्रसारण के रोक के बाद यूट्यूब पर सबसे ज्यादा देखा गया।

ये हैं मुहाब्बतें

एकता कपूर के शो ये हैं मुहाब्बते को भारत के साथ ही पाक में भी जमकर पसंद किया गया, लेकिन इस शो को जब इस शो को बैन किया गया तो पाक की ओर से ही इसको दिखाए जाने की मांग उठी थी।

ये सीरियल हुए बैन



‘थपकी प्यार की’,‘कबूल है’, 'उड़ान', '24' , जैसे और भी कई सीरियल्स को पाक में रोका गया।  अब जब सीरियल के प्रसार रोक हट गई है तो इनको फिर से पहले की ही तरह से दिखाया जाने लगा है। (agencies इनपुट्स सहित)