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‘इस्लाम में एक्स्ट्रा मैरिटल सेक्स और पैरामेट्रियल सेक्स पर पुरुष को 100 कोड़े’: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने ‘इस्लाम’ का दिया हवाला


निकाह से पहले किसी तरह का यौन संबंध, यहाँ तक कि चूमना और छूना भी हराम है। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने लिव इन रिलेशनशिप में रह रहे एक जोड़े (हिंदू लड़की+मुस्लिम लड़का) की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह बात कही। अदालत ने इस्लाम का हवाला देते हुए जोड़े को राहत देने से इनकार कर दिया।

लाइव लाॅ की रिपोर्ट के अनुसार हाई कोर्ट ने कहा, “इस्लाम में निकाह से पहले या निकाह से इतर यौन संबंधों की इजाजत नहीं है। वास्तव में निकाह से पहले किसी भी प्रकार का यौन, वासनापूर्ण, स्नेहपूर्ण कार्य मसलन चूमना, छूना, घूरना वगैरह इस्लाम में हराम है। इन्हें जिना का हिस्सा माना जाता है।” जस्टिस संगीता चंद्रा और जस्टिस नरेंद्र कुमार जौहरी की बेंच ने कहा, “कुरान में व्यभिचार के लिए अविवाहित पुरुष और महिला के लिए सौ कोड़े की सजा है। साथ ही विवाहित पुरुष और महिला के लिए ‘सुन्नत’ के अनुसार पत्थर मारकर हत्या करने की सजा है।”

दरअसल लड़की की माँ अपनी बेटी के संबंधों के विरोध में थी। उनकी शिकायत पर पुलिस ने लड़का और लड़की के खिलाफ FIR दर्ज की थी। इसको चुनौती देते हुए लड़की ने अदालत में याचिका दायर की थी। हाई कोर्ट ने इस्लाम का हवाला देते हुए इस संबंध को मान्यता देने से इनकार कर दिया। याचिका में लड़की ने पुलिस पर प्रताड़ित करने का आरोप लगाया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस केस में याचिकाकर्ता लखनऊ के हसनगंज थानाक्षेत्र की रहने वाली 29 वर्षीया एक लड़की है। उसने मोहम्मद रिज़वान नाम के एक 30 वर्षीय युवक के साथ खुद को लिव इन रिलेशनशिप में बताया था। लड़की का आरोप था कि उनकी माँ दोनों के रिश्ते से खुश नहीं हैं। लड़की की माँ ने पुलिस में FIR दर्ज करवा के आरोप लगाया था कि पुलिस उन्हें और रिज़वान को प्रताड़ित कर रही है। याचिका में लड़की ने खुद को बालिग और अपने निर्णय को पूरी तरह से सोच-समझ कर लिया गया बताया था।

इस मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति संगीता चंद्रा और न्यायमूर्ति नरेंद्र कुमार जौहरी ने इसे एक सामाजिक परेशानी बताया। उन्होंने कहा कि इसके लिए याचिका दाखिल करने की जरूरत नहीं थी। कुरान का हवाला देते हुए न्यायाधीशों ने कहा कि इस्लाम में निकाह से पहले सेक्स, छूना और यहाँ तक कि किसिंग भी हराम मानी जाती है। अदालत द्वारा बताया गया कि इस्लाम में एक्स्ट्रा मैरिटल सेक्स और पैरामेट्रियल सेक्स पर पुरुष को 100 कोड़े और महिला को मौत की सजा का प्रावधान है।

कोर्ट ने इस्लाम में शादी से पहले बनाए गए संबंध को ‘जिना’ बताया है। जिना का जिक्र कुरान में है। अपनी टिप्पणी में हाई कोर्ट ने यह भी बताया कि याचिकाकर्ता ने कहीं भी इस बात का जिक्र नहीं किया है कि दोनों निकट भविष्य में शादी करने वाले हैं। याचिकाकर्ता पक्ष कोर्ट में स्पष्ट रूप से यह भी साबित नहीं कर पाया कि पुलिस द्वारा उनका उत्पीड़न किया जा रहा है। अदालत ने याचिकाकर्ता को यह भी सलाह दी कि अगर उन्हें परिजनों से किसी प्रकार का खतरा है तो वो पुलिस में आवेदन दे सकते हैं।