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आखिर किस गोली या गोले के डर से ममता बनर्जी ने UTurn लेकर वक़्फ़ कानून लागू किया?

                                                                         साभार: सोशल मीडिया       
पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी सरकार ने आखिर केंद्र का नया वक्फ कानून राज्य में लागू कर दिया है। केंद्र के नए वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 का ममता बनर्जी ने महीनों तक विरोध किया। उन्होंने यहां तक कहा था कि गोली मार दो लेकिन मैं पश्चिम बंगाल में वक्फ कानून लागू नहीं होने दूंगी। फिर अब अचानक उन्होंने गुपचुप तरीके से इस कानून को लागू कर दिया। 82,000 वक्फ संपत्तियों की जानकारी 5 दिसंबर की समय सीमा तक केंद्रीय पोर्टल पर अपलोड करने के निर्देश जारी किए हैं।

SIR करने वाले BLOs पर कम समय में काम पूरा करने का दबाव का शोर मचाने वाली बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इतने कम में यानि 5 दिसम्बर तक 82,000 वक्फ संपत्तियों को केंद्रीय पोर्टल पर अपलोड करने के निर्देश जारी करने से क्या अधिकारियों और कर्मचारियों पर अधिक काम का बोझ नहीं पड़ेगा? आखिर वह कौनसी गोली या गोले के डर ने ममता को U Turn लेने के लिए मजबूर किया?     

पश्चिम बंगाल में 8 महीने विरोध के बाद ममता सरकार ने नए वक्फ संशोधन कानून को लागू किया और 8063 वक्फ संपत्तियों की जानकारी 6 दिसंबर तक UMID पोर्टल पर अपलोड करने के निर्देश दिए
सुप्रीम कोर्ट ने कानून की संवैधानिकता पर रोक नहीं लगाई, केवल तीन बदलावों पर स्टे लगाया था
केंद्र सरकार ने वक्फ बोर्डों और मुतवल्लियों की जवाबदेही बढ़ाई, इसलिए ममता सरकार कानूनी विवाद से बचने के लिए कानून लागू करने को राजी हुई

वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 इस साल अप्रैल में संसद के दोनों सदनों ने पारित किया था। गुरुवार शाम को सभी जिलाधिकारियों को लिखे एक पत्र में पश्चिम बंगाल अल्पसंख्यक विकास विभाग के सचिव पीबी सलीम ने राज्य की वक्फ संपत्तियों की जिलेवार जानकारी निर्धारित समय सीमा तक केंद्रीय पोर्टल, umeedminority.gov.in पर अपलोड करने के निर्देश जारी किए। ममता बनर्जी ने किया था खुलकर विरोध किया था।

राजनीतिक रूप से क्यों अहम?

इस फैसले को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस कानून का खुलेआम विरोध किया था। उन्होंने सार्वजनिक रूप से घोषणा की थी कि वह राज्य में नए अधिनियम को लागू नहीं होने देंगी। इसके अलावा, नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार द्वारा विधेयक पेश किए जाने के बाद राज्य में व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए थे।

ममता बनर्जी ने दी थी खुलेआम चुनौती

कानून पारित होने के कुछ दिनों बाद 9 अप्रैल को जैन समुदाय के एक कार्यक्रम में बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा था कि मैं बंगाल में वक्फ संशोधन अधिनियम को लागू नहीं होने दूंगी। मैं उन्हें फूट डालो और राज करो की इजाज़त नहीं दूंगी। यहां 33 प्रतिशत मुसलमान हैं। वे सदियों से यहां रह रहे हैं। उनकी रक्षा करना मेरा कर्तव्य है। उन्होंने कहा था कि मुझे गोली मार दो, फिर भी बंगाल में वक्फ कानून लागू नहीं होने दूंगी।

नया वक्फ कानून क्या?

संशोधित कानून के अनुसार वक्फ बोर्ड और न्यायाधिकरणों में गैर-मुस्लिम सदस्य होंगे। अगर किसी संपत्ति पर वक्फ होने का दावा किया जाता है, तो इस संबंध में अंतिम निर्णय सरकार लेगी। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस सरकार इस कानून के खिलाफ अदालत भी गई, लेकिन उसे अनुकूल फैसला नहीं मिला। संशोधित अधिनियम की धारा 3बी में कहा गया है कि देश भर में सभी पंजीकृत वक्फ संपत्तियों की जानकारी छह महीने (5 दिसंबर, 2025) के भीतर केंद्रीय पोर्टल पर अपलोड की जानी चाहिए। 

मध्य प्रदेश : 36.04 लाख रूपए कैश, 2.6 किलो सोना, 5.5 किलो चाँदी… PWD के रिटायर्ड अधिकारी के ठिकानों से मिला 17 टन शहद

लोकायुक्त पुलिस ने PWD के मुख्य अभियंता जीपी मेहरा के ठिकानों पर आय से अधिक संपत्ति के मामले में की छापेमारी (साभार: एनडीटीवी, आज तक)
मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। लोकायुक्त पुलिस ने लोक निर्माण विभाग (PWD) के रिटायर्ड चीफ इंजीनियर जीपी मेहरा के ठिकानों पर छापा मारा। यह छापा आय से अधिक संपत्ति के मामले में मारा गया।

भोपाल और नर्मदापुरम जिले के चार ठिकानों पर एक साथ यह कार्रवाई हुई। छापे में करोड़ों रुपए की नकदी, सोना, लग्जरी गाड़ियाँ मिली हैं। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि उनके फार्महाउस से 17 टन शहद का विशाल भंडार मिला।

क्या-क्या मिला?

छापेमारी के दौरान मेहरा के ठिकानों से करोड़ों का खजाना जब्त किया गया। इसमें कुल 36.04 लाख रूपए कैश, लगभग 3.05 करोड़ रूपए का 2.6 किलो सोना, और 5.5 किलो चाँदी शामिल है। मेहरा के परिवार के नाम पर फोर्ड एंडेवर, स्कोडा स्लाविया समेत चार लग्जरी कारें भी मिली हैं। इसके अलावा, ₹56 लाख की एफडी, शेयर और इंश्योरेंस पॉलिसी के महत्वपूर्ण दस्तावेज भी जब्त किए गए।

मेहरा की सबसे बड़ी संपत्ति नर्मदापुरम में स्थित उनका विशाल फार्महाउस है, जहाँ 17 टन शहद का भंडार, 6 ट्रैक्टर, और 39 कॉटेज (7 तैयार और 32 निर्माणाधीन) मिले हैं। गोविंदपुरा स्थित एक फैक्ट्री को उनका बिजनेस फ्रंट माना जा रहा है। 

जब्त की गई संपत्ति का क्या होता है?

भ्रष्टाचार से जुड़ी करोड़ों की संपत्ति जब्त होने के बाद यह सवाल उठता है कि कानून के तहत इन संपत्तियों का आखिर क्या होता है। देश में ऐसी कार्रवाई मुख्य रूप से भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 और धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत की जाती है।

जाँच के दौरान, संदेह होने पर संपत्ति को CRPC की धारा 102 या PMLA की धारा 5 के तहत जब्त किया जाता है। जब्त किया गया कैश, सोना और जेवर को बैंकों या सरकारी एजेंसियों के गोदाम में सुरक्षित रखा जाता है। जब तक यह मामला कोर्ट में चल रहा होता है, तब तक इन संपत्तियों को बेचा या निपटाया नहीं जाता है।

कोर्ट का फैसला आने के बाद

अगर कोर्ट में आरोपित पर भ्रष्टाचार के आरोप साबित हो जाते हैं, तो जब्त की गई संपत्ति पूरी तरह सरकार की हो जाती है। इसके बाद सरकार कानूनी प्रक्रिया के तहत इन संपत्तियों को नीलामी के जरिए बेच सकती है। नीलामी से जो पैसा मिलता है, वह सीधे सरकारी खजाने में जमा होता है। इस राशि का उपयोग सरकारी योजनाओं और जनकल्याण के कामों में किया जाता है। कई बार जब्त किए गए वाहन या अन्य सामानों को सरकारी उपयोग में भी लिया जा सकता है।

लेकिन अगर अदालत में आरोप साबित नहीं होते, तो जब्त की गई संपत्ति आरोपित को वापस कर दी जाती है। हालाँकि, इसके लिए आरोपित को यह साफ करना होता है कि उसने वह संपत्ति कैसे और किस स्रोत से कमाई थी।

कुल मिलाकर, जब्त की गई संपत्ति कोर्ट की निगरानी में रहती है। फैसला आने तक न तो उसे बेचा जा सकता है और न ही उसका इस्तेमाल किया जा सकता है। सरकार की यह भी जिम्मेदारी होती है कि वह जब्त किए गए हर सामान का पूरा लेखा-जोखा अदालत के सामने पेश करे। आरोप सिद्ध होने पर ही वह संपत्ति हमेशा के लिए सरकारी हो पाती है।