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हापुड़ : हनुमान चालीसा पाठ पर भड़के SC दबंग, प्रजापति माँ-बेटे को जूतों की माला पहनाकर निकाला जुलूस-अंबेडकर प्रतिमा के सामने रगड़वाई नाक

                      माँ-बेटे के साथ अपराध करने वाले 4 आरोपित गिरफ्तार (साभार X_@hapurpolice)
उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले से सामाजिक सद्भाव को बिगाड़ने वाली एक रूह कंपा देने वाली वारदात सामने आई है। यहाँ शाहपुर चौधरी गाँव में एक माँ और उसके बेटे को जूतों की माला पहनाकर पूरे गाँव में घुमाया गया और उन्हें अमानवीय तरीके से अपमानित किया गया। इस पूरी घटना से जुड़ी FIR की कॉपी ऑपइंडिया के पास मौजूद है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल कार्रवाई की है और अब तक चार आरोपितों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज दिया है, जबकि अन्य की तलाश जारी है।

मंदिर में विवाद और जूतों की माला का ‘फरमान’

 जानकारी के अनुसार, घटना की जड़ें अयोध्या में श्रीराम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के समय से जुड़ी हैं। पीड़ित युवक दीपक चौधरी (प्रजापति समुदाय) के अनुसार, उस दौरान गाँव के मंदिर में हनुमान चालीसा का पाठ हो रहा था, तभी दलित समुदाय के एक युवक ने हिंदू देवी-देवताओं पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी, जिसका दीपक ने विरोध किया था।

आरोप है कि इसी रंजिश के चलते 26 जनवरी 2026 को कुछ दलित युवकों ने दीपक को रास्ते में रोक लिया और गाली-गलौज की। इसके बाद उसकी माँ को भी मौके पर बुला लिया गया। गाँव की पंचायत ने कथित तौर पर एक ‘तालिबानी’ फरमान सुनाया कि दोनों को जूतों की माला पहनाकर घुमाया जाए ताकि धर्म पर टिप्पणी का बदला लिया जा सके।

प्रतिमा के सामने नाक रगड़वाई और निकाला जुलूस

पीड़ित ने FIR में आरोप लगाया कि उसे और माँ को जबरन बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा के सामने ले जाया गया और वहाँ उनकी नाक रगड़वाई गई। इसके बाद भीड़ ने दोनों के गले में जूतों और चप्पलों की माला डाल दी और पूरे गाँव में उनका जुलूस निकाला।
इस दौरान माँ-बेटे के साथ मारपीट भी की गई और उन्हें हाथ जोड़कर माफी माँगने पर मजबूर किया गया। यह पूरी शर्मनाक घटना गाँव में लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद हो गई, जिसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

पुलिस की कार्रवाई और गाँव में तनाव

वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। गढ़ कोतवाली पुलिस ने पीड़ित की तहरीर पर तत्काल 10 नामजद युवकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए चार आरोपितों (अनिल, अमित, सागर और विनीत) को गिरफ्तार कर लिया है।

गढ़ कोतवाली प्रभारी इंस्पेक्टर देवेंद्र विष्ट ने बताया कि आरोपितों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जा रही है। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि एक आरोपित पुलिस विभाग से जुड़ा है, जिसकी जाँच की जा रही है। फिलहाल गाँव में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है और एहतियातन पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।

आदिवासियों का काम करने के लिए भेजो खराब ऑफिसर: AAP सांसद राघव चड्ढा

अरविन्द केजरीवाल ने सियासत(राजनीति नहीं) में आने पर कहा था कि "हम राजनीति बदलने आये हैं", जो फ्री के लॉलीपॉप देकर सत्ता हथियाने में सफल जरूर हो गए, लेकिन ओछी मानसिकता की बुनियाद पर बनी आम आदमी पार्टी की समय-समय पर सामने आती रही है, जिसे खुले दिमाग से जनता को समझना होगा। जिसका कोई न कोई नेता राशन कार्ड(यौन शोषण), हवाला, हिन्दू विरोधी दंगों आदि आरोपों में लिप्त नज़र आ रहा है, परन्तु केजरीवाल उन पर कोई कार्यवाही करने का साहस नहीं कर पा रहे, हाँ अगर वही काम भाजपा शासित राज्य में होने पर सड़क पर उतर उस राज्य में पिकनिक मनाने पहुँच जाते हैं। 
अब इसी पार्टी आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा का जनजातीय समाज के प्रति घटिया सोच सामने आई है। दरअसल राघव चड्ढा का एक बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इसमें वह आदिवासी जनजाति के लिए अपमान भरे लहजे का इस्तेमाल करते हुए दिखाई दे रहे हैं। इसमें वह कह रहे हैं कि घटिया अफसरों को आदिवासी मंत्रालय भेजा जाए।

भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा ने इसका वीडियो शेयर करते हुए लिखा है, “यह देखिए आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा की जनजातीय समाज के खिलाफ ओछी मानसिकता।”

इस वीडियो में राघव चड्ढा कहते हुए सुनाई दे रहे हैं, “आप किसी बाबू (अधिकारी) को नौकरी से तो निकाल नहीं सकते। ट्रांसफर-पोस्टिंग ही कर सकते हो। अगर कोई बहुत अच्छा काम कर रहा है तो उसे अच्छा विभाग दो… जैसे कि उसे स्वास्थ्य सचिव बनाओ, गृह सचिव बनाओ और जो खराब काम कर रहा है उसे भेजो जनजातीय विभाग में। ये पनिशमेंट पोस्टिंग है उसका। उसे या तो बागवानी या फिर पशुपालन विभाग में भेजो।”

इस पर लोगों ने तरह-तरह की प्रतिक्रियाएँ दी हैं। राघव चड्ढा के इस बयान पर लोग आपत्ति जता रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, “आप आदिवासी को हीन भावना से क्यों देखते हो अरविंद केजरीवाल जी..!! आप उनसे नफरत क्यों करते हो..?? क्या बिगाड़ा है इन निर्दोष जनजातियों ने आपका।”

एक अन्य यूजर ने लिखा, “उनका बयान आदिवासी विभाग का अपमान है, जो कि बेहद महत्वपूर्ण विभाग है। उन्हें अपनी टिप्पणी के लिए माफी माँगनी चाहिए।”

एक यूजर ने इस पर हैरानी जताई कि आखिर राघव चड्ढा इस तरह से कैसे बोल सकते हैं।

AAP की प्रेस कॉन्फ्रेंस और ‘राघव चड्ढा चोर है’

पिछले दिनों पंजाब चुनाव से पहले AAP नेता टिकट बँटवारे को लेकर आपस में भिड़ गए थे। इस दौरान खूब लात-घूँसे चले थे। आम आदमी पार्टी में इस अंदरूनी बवाल से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर खूब शेयर किए गए थे। वायरल हो रहे वीडियो में पार्टी के नेताओं को जालंधर प्रेस क्लब में एक-दूसरे को धक्का देते और मारपीट करते देखा गया था।
दरअसल प्रेस क्लब में राघव चड्ढा की प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कॉन्ग्रेस के पूर्व पार्षद दिनेश ढल को पार्टी में शामिल करवाया जाना था, लेकिन टिकट बँटवारे को लेकर विवाद हो गया। इस दौरान पंजाब के सह-प्रभारी के खिलाफ ‘राघव चड्ढा चोर है’ के नारे लगाए गए। बात यहीं तक रहती तो गनीमत होती, लेकिन मामला इतना बढ़ गया कि लोगों के बीच जमकर मारपीट भी हो गई। टिकट बँटवारे को लेकर करीब 45-50 मिनट हुए बवाल के बाद राघव चड्ढा को पिछले दरवाजे से बाहर भागना पड़ा था।

केरल : ‘इस्लामी कट्टरपंथियों ने हाथ काटा, चर्च के डर से अपनों ने छोड़ा’: परेशान हो पत्नी ने भी कर ली आत्महत्या

                                                           प्रोफेसर टीजे जोसेफ
केरल के एक कॉलेज में मलयालम पढ़ाने वाले प्रोफेसर पर साल 2010 में ईशनिंदा का आरोप मढ़ कर कट्टरपंथियों ने हमला किया था। इस हमले में उनके हाथ काटे गए थे। अब उन्हीं टीजे जोसेफ नामक प्रोफेसर का संस्मरण बाजार में अंग्रेजी भाषा में अनुवाद होकर आया है। इसमें उन्होंने बताया है कि कैसे कट्टरपंथियों ने उनके साथ जो किया सो किया लेकिन चर्च, कॉलेज, दोस्त, पड़ोसियों ने भी उन्हें नीचा दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।

रविवार(सितम्बर 19) को संडे टाइम्स को साक्षात्कार देते हुए जोसेफ ने कहा कि आरोपितों को दंड देने से न्याय नहीं मिलेगा। असल समस्या कट्टरपंथ की है। याद दिला दें इससे पहले टीजे जोसेफ पिछले वर्ष चर्चा में आए थे जब मलयालम में उनका संस्मरण रिलीज हुआ था। अब वही संस्मरण- नंदकुमार द्वारा अंग्रेजी में अनुवाद किए जाने के बाद शीर्षक ‘अ थाऊजेंड कट्स: एन इनोसेंट क्वाश्चन एंड डेडली आंसर’ के साथ बाजार में आया है।

इसमें उन्होंने बताया, “थोड़ूपुझा न्यूमैन कॉलेज के प्रिंसिपल और मैनेजमेंट ने शुरुआती समय में मेरा साथ दिया लेकिन समय के साथ उनके मत बदल गए। ये जानने के बावजूद कि मैं निर्दोष हूँ, कॉलेज ने मुझ पर ईशनिंद का आरोप मढ़ा, मुझे सस्पेंड किया गया और बाद में नौकरी से निकाल दिया गया। चर्च ने मेरे परिवार को बहिष्कृत किया और कोठामंगलम सूबा के 120 चर्चों में मेरे खिलाफ पत्र पढ़े गए कि आखिर मेरे विरुद्ध ऐसा एक्शन क्यों लिया गया है। कई ईसाई दोस्तों और परिवारों ने हमारे घर आना छोड़ दिया। उन्हें डर था कि चर्च उनसे नाराज हो जाएगा। मेरे ऊपर हमला करने वालों की आँख पर कट्टरपंथ की पट्टी बंधी थी जिसने मुझे शारीरिक रूप से दुख दिया। लेकिन जो मेरे लोगों ने मेरे साथ किया वो भी और भी ज्यादा भयावह है क्योंकि उससे मेरे परिवार पर प्रभाव पड़ा।”

टीजे जोसेफ केरल के इदुकी जिले के एक कॉलेज में मलयालम पढ़ाते थे। 2010 में उन पर कट्टरपंथी मुस्लिम संगठन के सदस्य नजीब समेत कुछ युवकों ने चाकुओं से हमला करके उनका दाहिना हाथ काट दिया था। जोसेफ पर आरोप था कि उन्होंने बीकॉम का पेपर तैयार करते हुए पैगंबर मोहम्मद का नाम लिया, जबकि जोसेफ कहते हैं कि वो पीटी कुंजू मोहम्मद नामक एक लेखक के बारे में लिख रहे थे पर कुछ लोगों ने जानबूझकर मोहम्मद नाम को गलत लिया। इसके बाद उनपर हमला हुआ, उन्हें नौकरी से निकाला गया और उनकी पत्नी ने भी हालातों से तंग आकर सुसाइड कर ली।

जोसेफ के अनुसार, उनकी पत्नी गहरे सदमें में थी। 19 मार्च 2014 को वह मनोवैज्ञानिक के पास से लौटीं और सुसाइड कर ली। ये क्षण जोसेफ के लिए और मुश्किल भरा था। उन्हें दुख इस बात का था कि उनकी पत्नी उन्हें दोबारा जॉब करते नहीं देख पाईं जो कि उनकी सबसे बड़ी इच्छा थी। जोसेफ अपनी किताब में आपबीती लिखते हुए समझाते हैं कि कैसे कट्टरपंथ के कारण हर कोई खतरे में हैं।