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चीनी और इस्लामी कट्टरपंथियों ने फैलाई US के साथ ट्रेड बंद करने की खबर, ताकि लोगों में फैल जाए पैनिक: MEA ने खारिज की अफवाहें

                                                                                                     साभार: MEA Fact check
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ के ऐलान के बाद सोशल मीडिया पर ऐसे पोस्ट की बाढ़ आ गई, जिसमें भारत-अमेरिका के बीच सबकुछ ‘सही’ नहीं होने की बात कही जा रही थी। यही नहीं, दावे ये भी किए जा रहे थे कि अब भारत अमेरिका के साथ कोई संबंध नहीं रखेगा और वो अमेरिका पर पलटवार की तैयारी कर रहा है। भारत अब अमेरिका की ‘शत्रुतापूर्ण आर्थिक नीतियों’ के जवाब में ‘दोगुना’ तक टैरिफ लगा देगा।

भारत-अमेरिका के बीच वैमनस्य को बढ़ावा देने वाले फर्जी सोशल मीडिया पोस्ट चीन समर्थित या इस्लामी देशों से जुड़े दिखने वाले हैंडल्स से लगातार किए जा रहे थे। ऐसे ही एक हैंडल ‘मिडिल ईस्टर्स अफेयर्स’ की पोस्ट में दावा किया गया कि अगर अमेरिका अपनी ‘होस्टाइल’ नीतियों को नहीं बदलता है, तो भारत सरकार अमेरिका से साथ सभी व्यापारिक समझौतों को रद्द कर सकती है।

इसी तरह से ‘चाइना इन इंग्लिश’ नाम के हैंडल से बाकायदा एक लिस्ट ही जारी कर दी गई, जिसके इम्पोर्ट-एक्सपोर्ट को लेकर भारत सरकार फैसले लेने वाली है। दावा किया गया कि भारत अमेरिका को देने वाली व्यापार छूटों को खत्म कर देगा।

हालाँकि विदेश मंत्रालय ने उन अफवाहों को सिरे से खारिज कर दिया है। मंत्रालय की फैक्ट चेक यूनिट ने साफ कहा कि ऐसी कोई योजना नहीं है। ये भी साफ कर दिया गया है कि भारत सरकार फिलहाल किसी भी जल्दबाजी में नहीं है। वो अमेरिका को दी गई व्यापारिक छूटों को वापस लेने या समीक्षा करने की दिशा में कोई कदम नहीं उठा रही।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 25% टैरिफ लगाने की घोषणा की थी, जो 1 अगस्त से लागू हो चुका है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर भारत की आलोचना करते हुए कहा था कि भारत के टैरिफ दुनिया में सबसे ज्यादा हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भारत और रूस को अपनी अर्थव्यवस्थाओं के साथ ‘डूब जाना चाहिए।’ ट्रंप का यह बयान भारत द्वारा रूस से तेल और सैन्य उपकरण खरीदने के कारण भी आया, क्योंकि यूक्रेन युद्ध के बीच अमेरिका इससे नाराज है।

इन तनावों के बावजूद भारत और अमेरिका व्यापारिक रिश्तों को बेहतर करने की दिशा में काम कर रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों देश आपसी सहमति से लाभकारी व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहे हैं। सूत्रों ने बताया कि वर्चुअल मोड में चर्चा चल रही है और 24 अगस्त को अमेरिकी व्यापार वार्ता टीम नई दिल्ली आएगी। इस दौरे में छठे दौर की वार्ता होगी, जिसमें व्यापारिक मुद्दों को सुलझाने पर जोर रहेगा।

इस बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से ‘स्वदेशी’ अपनाने का आह्वान किया है, ताकि भारतीय उत्पादों को बढ़ावा मिले। वहीं, विदेश मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही गलत खबरें, जैसे कि भारत का ‘कोई सम्मान नहीं तो कोई छूट नहीं’ जैसा बयान, पूरी तरह बेबुनियाद हैं। सरकार का ध्यान व्यापारिक रिश्तों को मजबूत करने पर है, न कि उन्हें तोड़ने पर।

नहाती हुई महिला, कपड़े बदलती हुई महिला… महाकुंभ की फोटो-वीडियो बता बेच रहे थे डार्क बेव पर: UP पुलिस हुई सख्त तो कई अकाउंट हुए बंद, ‘पत्रकार’ कामरान पहुँचा हवालात

महाकुंभ को बदनाम करने के क्रम में सोशल मीडिया पर हिंदू लड़कियों की इज्जत उछालने का मामला प्रकाश में आया है। पता चला है कि सोशल मीडिया पर कुछ अकॉउंटों से लड़कियों की नदियों में नहाते हुए फोटो-वीडियो साझा की जा रही है। इसके अलावा ये भी जानकारी सामने आई कि लड़कियों के नहाने की वीडियो को डार्क वेब पर बेचा जा रहा है। उन्हें टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर कुछ हजार रुपयों में वायरल करने का काम हो रहा है।

पुलिस ने अब इन शिकायतों की जाँच करनी शुरू कर दी है। वीडियोज डार्क वेब पर बेची गईं या नहीं, इसकी जाँच के लिए पुलिस ने इंस्टाग्राम के हेडऑफिस कैलिफोर्निया को एक ईमेल भेजकर अकाउंट की डिटेल्स माँगी है। साथ ही जिन अकॉउंट ने लड़कियों के नहाने की फोटो साझा करते हुए महाकुंभ को बदनाम करने की कोशिश की है उनके ऊपर भी पुलिस ने एक्शन लेना शुरू कर दिया है।

उत्तर प्रदेश पुलिस ने कामरान अलवी नाम के कथित पत्रकार को गिरफ्तार किया है। उसने महिलाओं की नदी में नहाने की एक वीडियो को शेयर किया हुआ था और लिखा था- संगम घाट का भव्य नजारा। पुलिस ने इस वीडियो को देखने के बाद कामरान अलवी को अरेस्ट कर लिया है।

वहीं अन्य लोगों की भी छानबीन कर रही है जिन्होंने महिलाओं की ऐसी वीडियो प्रसारित करने का काम किया। जानकारी के मुताबिक इस मामले में कुंभ मेला प्रयागराज के साइबर थाने में सब इंस्पेक्टर पूजा रायकवार ने एक इंस्टाग्राम अकाउंट के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा–79, 353, IT एक्ट की धारा–67 में 17 फरवरी को FIR कराई है। एफआईआर में बताया गया है कि आईडी में महिलाओं के नहाने के वीडियो डाले गए हैं। अब पुलिस इस केस की जाँच कर रही है।

ये भी कहा जा रहा है कि इन वीडियोज को बनाने के बाद टेलीग्राम ग्रुप पर 1900 से 4000 रुपए तक में बेचा जा रहा है। इसकी सच्चाई क्या है पुलिस लगातार इसे जानने का प्रयास कर रही है। वहीं जो कोई भी महाकुंभ पर झूठ फैलाने का या महिलाओं की इज्जत से छेड़छाड़ करने का काम कर रहा है उनपर कार्रवाई हो रही है। जानकारी के मुताबिक कुंभ में अब तक सोशल मीडिया से जुड़ी 12 एफआईआर दर्ज हो चुकी है। एक टेलीग्राम चैनल ‘सीसीटीवी चैनल 11’ पर भी कार्रवाई हुई है।

रोजे में पखाने के बाद कैसे धोएँ, कैसे न धोएँ… पिछवाड़े से पानी पेट में चले जाने से टूट जाएगा रोजा? अलग-अलग मौलाना के वीडियो हो रहे वायरल

मुफ्ती बदर की वीडियो से लिया गया स्क्रीनशॉट
रमजान का महीना शुरू होते ही सोशल मीडिया पर इस्लाम संबंधी कई सवालों के जवाब में मुफ्ती/ मौलाना की वीडियो आना शुरू हो गई है। इसी क्रम में वो वीडियो भी वायरल हो रही है जिसमें एक मुफ्ती को पखाने के बाद गुदाद्वार साफ करने का तरीका बताते देखा जा सकता है जिससे कि पानी पेट तक न जाए।

सोशल मीडिया पर लोग इस वीडियो को ये कहकर शेयर कर रहे हैं कि मुफ्ती खुद इस संबंध में ज्ञान दे रहे हैं कि कैसे गुदाद्वार साफ किया जाए, लेकिन हकीकत यह है कि मुफ्ती बदर अपनी वीडियो में किसी और मौलाना द्वारा फैलाई कई भ्रांति पर सफाई दे रहे हैं। असल में तो वो समझा रहे हैं कि पखाने का रास्ता बहुत सख्त होता है वहाँ से कैसे भी पानी घुसकर पेट तक नहीं जा सकता।

वायरल होती वीडियो में मुफ्ती मामुर बदर कासमी की वीडियो को क्रॉप करके शेयर किया जा रहा है। क्रॉप वीडियो में ऐसा लग रहा है कि वो खुद कहते हैं कि इस्तिन्जा करते समय साँस रोक लें। इसके बाद वो हाथ हिला कर (पिछवाड़ा धोने की प्रक्रिया) बता रहे हैं कि पानी का इस्तेमाल करें। साँस रोकने को लेकर मुफ्ती तर्क देते हैं कि इससे पखाने का सुराख (गुदाद्वार) खुलेगा नहीं, टाइट रहेगा। इस कारण से इस्तिन्जा के वक्त पानी गुदाद्वार से होते हुए पेट के अंदर नहीं जाएगा।

रोजे के टूटने की बात कहते हुए मुफ्ती बताते हैं कि कोई चीज अगर मुँह के रास्ते से या पखाने के रास्ते से पेट में चली जाए तो उस कारण से रोजा का टूटना माना जाएगा। अपनी बात में वजन लाने के लिए इस्लामी मजहबी किताबों के कुछ उदाहरण भी देते हैं मुफ्ती।

ये वीडियो 7 मई 2020 को रमजान के समय मुफ्ती मामुर बदर कासमी के ऑफिशियल अकॉउंट से अपलोड की गई थी। ये वीडियो 7 मिनट 18 सेकेंड की है। इसमें मुफ्ती बदल असल में ‘रोजे में पखाने के बाद पिछवाड़ा कैसे धोएँ’ को लेकर चल रही भ्रांतियों पर बात रखी थी।

उन्होंने अपने यूजर को वीडियो में बताया था कि जैसा कि वीडियो वायरल हो रही है कि इस्तिन्जा के समय पानी पेट में जा सकता है। तो ये बात बिलकुल असंभव है। हाँ, एक संभावना यह बताई कि जिस इंसान के पखाने का रास्ता (गुदाद्वार) बहुत ढीला हो, उसके पेट में इस्तिन्जा करते समय पानी जा सकता है।

पिछले साल भी उनकी यह वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल होना शुरू हुई थी। उस समय उन्होंने शॉर्ट वीडियो बनाते हुए सफाई दी थी। उन्होंने कहा था कि ये दावा उनका नहीं है बल्कि एक बरेलवी मौलाना का है जो बता रहे थे कि रोजे में किस तरह से इस्तिन्जा करना चाहिए।

उनके अनुसार बरेलवी मौलाना ने वो भ्रांतियाँ फैलाई थीं जिसकी बात करते वो वीडियो में दिखे। ऊपर दी गई वीडियो उसी बरेलवी मौलाना की है जो यह बताता दिख रहा है कि रोजे में गुदाद्वार को चिपका कर इस्तिन्जा करना चाहिए।


उत्तराखंड : जहाँ से चले पत्थर उन्हीं इलाके में दूध-दवाई बाँट रहे पुलिस वाले; सोशल मीडिया पर उपद्रवी परोस रहे झूठ

                                       हल्द्वानी के दंगाग्रस्त क्षेत्र में दूध और सहायता पहुंचाती पुलिस 
उत्तराखंड के हल्द्वानी में अवैध कब्ज़ा कर के बनाए गए मदरसे और मस्जिद को हटाने के लिए प्रशासन पहुँचा तो बवाल हो गया। इस्लामी कट्टरपंथी भीड़ ने थाना और पेट्रोल पंप फूँक दिया। पुलिस वालों को ज़िंदा जलाने की कोशिश की गई। कई वाहन क्षतिग्रस्त कर दिए गए। चश्मदीदों का कहना है कि छतों पर पानी की टंकी में पत्थर जमा कर के रखे गए थे। वहीं अब एक गिरोह विशेष द्वारा सोशल मीडिया पर फैलाया जा रहा है कि पुलिस ने महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार किया है।

नेहा दीक्षित नाम की तथाकथित पत्रकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक नोट जारी कर के दावा किया कि हल्द्वानी में पुलिस हिंसक हो गई है। उन्होंने दावा किया कि उत्तराखंड पुलिस लोगों के घरों में घुस कर उन्हें पीट रही है। महिलाओं को निशाना बनाए जाने के आरोप भी लगाए गए। नेहा दीक्षित ने तो यहाँ तक दावा कर दिया कि पुलिस के डर से बनभूलपुरा के मुस्लिमों ने पलायन कर के जंगल में शरण लेना शुरू कर दिया है। दावा किया गया कि कई घरों में बच्चों के पीने के लिए दूध तक नहीं है।

ऐसी भ्रमित और भड़काऊ झूठी खबर फ़ैलाने से पहले नेहा को बताना होगा, कि पहल किसकी तरफ से हुई, घरों से पत्थरबाज़ी और पेट्रोल बम फेंकने वालों पर कार्यवाही होने से तुम्हे क्यों दर्द हो रहा है? तुम्हारा कर्तव्य यह होना चाहिए था कि सरकार और पुलिस को उन सभी स्थानों, जहाँ से पत्थरबाज़ी और पेट्रोल बम आए, पर सख्त से सख्त कार्यवाही, ताकि भविष्य में कोई उपद्रवी ऐसा करने से पहले हज़ार बार सोंचे। मुस्लिम कट्टरपंथी तो है ही बदनाम, लेकिन तुम्हारे जैसे भड़काऊ लोगों की भी कमी नहीं। तुम क्षेत्र में शांति क्यों नहीं बनाना चाहती? तुम्हारे ऐसे भ्रमित ट्वीट से आग भड़केगी, शांत नहीं होगी। इतना कुछ उपद्रव हुआ, तुम्हे शर्म नहीं आयी? 

   

लेकिन, ग्राउंड पर स्थिति इसके एकदम उलट है। वीडियो में देखा जा सकता है कि खुद पुलिस के अधिकारी कर्फ्यू वाले इलाकों में दूध और खाने-पीने की वस्तुएँ वितरित कर रहे हैं। ये वही इलाके जहाँ, इसी पुलिस को निशाना बनाया गया था। छतों से पत्थर चले थे। कर्फ्यू वाले इलाकों में एम्बुलेंस भेजी गई हैं, दवाएँ भेजी गई हैं। इसके अलावा डॉक्टरों को भी तैनात किया गया है। वीडियो में देखा जा सकता है कैसे पुलिस मुस्लिमों को मदद सामग्रियाँ बाँट रही है।

वहीं नैनीताल पुलिस ने भी बयान जारी कर के चेताया है कि अफवाह फैला कर माहौल ख़राब न किया जाए। महिलाओं के साथ पुलिस द्वारा दुर्व्यवहार किए जाने की खबरों को लेकर नैनीताल पुलिस ने कहा कि ये भ्रामक हैं और इनके माध्यम से अनावश्यक रूप से समाज में संवेदनशीलता पैदा की जा रही है। इस पोस्ट में स्पष्ट किया गया है कि पुलिस ने महिलाओं के साथ कोई दुर्व्यवहार नहीं किया है। नियमानुसार अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।

पुलिस ने अनुरोध किया है कि किसी भी प्रकार की भ्रामक खबरें न पोस्ट करें, न कमेंट करें। बता दें कि उत्तराखंड के हल्द्वानी में हुए दंगों का मुख्य साजिशकर्ता अब्दुल मलिक गिरफ्तार कर लिया गया है। क्षेत्र में स्थिति नियंत्रण में है और पुलिस व सुरक्षा एजेंसियाँ अब दंगाइयों की धर-पकड़ में लग गई है। बनभूलपुरा में 5 दंगाइयों को गिरफ्तार किया गया है। इसमें एक समाजवादी पार्टी के एक नेता का भाई है, 2 निवर्तमान पार्षद हैं और एक खनन कारोबारी भी शामिल है। इस हिंसा के मुख्य साजिशकर्ताओं में एक अब्दुल मलिक का नाम सामने आया, जिसे दिल्ली से गिरफ्तार किया गया है

मालदीव को झटके पर झटका, ‘EaseMyTrip’ ने बंद की फ्लाइट बुकिंग: 8 हजार+ लोग करा चुके हैं होटल बुकिंग रद्द, 2500 टिकट भी कैंसिल

(चित्र साभार: EaseMyTrip & NewsMagzine)
देश की बड़ी ऑनलाइन ट्रैवल कम्पनी EaseMyTrip ने मालदीव को बड़ा झटका दिया है। इसके फाउंडर और सीईओ ने कहा है कि वह अपने पोर्टल से मालदीव की फ्लाइट टिकट बुकिंग बंद कर रहे हैं। EaseMyTrip ने यह निर्णय मालदीव के मंत्रियों के भारत और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर की गई अपमानजनक टिप्पणियों के बाद लिया है।

EaseMyTrip के सीईओ और फाउंडर निशांत पिट्टी ने एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखा, “अपने देश के साथ मजबूती से खड़े होते हुए EaseMyTrip ने मालदीव की सभी फ्लाइट बुकिंग को निलंबित कर दिया है।” EaseMyTrip भारत में ऑनलाइन ट्रैवल बाजार का बड़ा खिलाड़ी है।

EaseMyTrip की देश के ऑनलाइन ट्रैवल बाजार में लगभग 10% की हिस्सेदारी है। यह बाजार 1.5 लाख रूपए करोड़ का है। EaseMyTrip के इस कदम के बाद अन्य ट्रैवल कम्पनियों पर भी दबाव पड़ रहा है कि वह ऐसे ही कदम उठाएँ।

हाल ही में मालदीव की मुइज़्ज़ू सरकार में मंत्री मरियम शिनुआ, मालशा शरीफ और अब्दुल्ला मह्जूम समेत पार्टी के अन्य सदस्यों ने भारत और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ काफी अपमानजनक टिप्पणियाँ की थीं। इनकी यह अभद्रता प्रधानमंत्री मोदी के लक्षद्वीप दौरे की तस्वीरें डालने के बाद सामने आई थी।

इनकी अपमानजनक टिप्पणियों के कारण भारत में मालदीव के प्रति उबाल आ गया और लोगों ने मालदीव के इस रवैये की आलोचना की। एक्स (पहले ट्विटर) पर भी इसको लेकर लगातार अभियान चलाया गया। भारत ने प्रधानमंत्री मोदी के प्रति की गई टिप्पणियों को राजनयिक स्तर पर भी मालदीव के साथ उठाया।

भारत के नाराज होने के बाद मालदीव की सरकार ने इन मंत्रियों को निलंबित कर दिया था और साथ ही एक बयान जारी करके कहा था कि मालदीव की सरकार ऐसे बयानों का समर्थन नहीं करती है और यह इन व्यक्तियों के निजी मत हैं। मालदीव के दो पूर्व राष्ट्रपति और मालदीव की राजनीतिक पार्टियों ने भी मुइज्जू सरकार के मंत्रियों की आलोचना की थी।

प्रधानमंत्री मोदी के ऊपर अपमानजनक टिप्पणियाँ करने के कारण कई बॉलीवुड सितारों और बड़ी हस्तियों ने ने मालदीव के रवैये की आलोचना की थी। कई बॉलीवुड सितारों ने लक्षद्वीप को बढ़ावा देने वाले ट्वीट किए थे और साथ ही खुद भी जाने की बात कही थी।

उधर भारतीयों के गुस्से का असर मालदीव पर लगातार पड़ रहा है। एक रिपोर्ट के अनुसार, अब तक लगभग 2500 फ्लाइट और 8 हजार से ज्यादा होटल बुकिंग भारतीय रद्द कर चुके हैं। यह आँकड़ा अभी और बढ़ सकता है।

‘जानवर, लाश और बच्ची से सेक्स जायज, नहाना भी ज़रूरी नहीं’: दारुल उलूम में बच्चों को दी जा रही स्तरहीन शिक्षा

NCPCR के संज्ञान के बाद दारुल उलूम देवबंद की वेबसाइट से हटाए गए 'बहिश्ती जेवर' के फतवे (साभार- ABP न्यूज़ और हिंदुस्तान)
प्रमुख इस्लामी शिक्षण संस्थान दारुल उलूम देवबंद एक बार फिर से चर्चा में है। दरअसल, राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने शरई मसलों पर लिखी गई एक किताब ‘बहिश्ती जेवर’ के फतवों पर प्रतिबन्ध लगाने के लिए देवबंद के डीएम और एसपी को नोटिस भेजा था। इसमें दारुल उलूम देवबंद में बच्चों को दी जा रही तालीम पर सवाल उठाए गए थे। जिस पर कार्रवाई करते हुए शासन ने देवबंद की वेबसाइट से उन विवादित अंशो को हटवा दिया है। जिसकी जानकरी अधिकारियों ने आयोग को 19 अक्टूबर, 2023 को दी।

शासन द्वारा की गई कार्रवाई की जानकारी देते हुए NCPCR के चेयरपर्सन प्रियंक कानूनगो ने रविवार (22 अक्टूबर, 2023) को पोस्ट किया, “नाबालिग बच्चियों के यौन शोषण के तौर तरीक़े बताने वाली मौलाना अशरफ़ अली थानवी की किताब बाहिश्ती ज़ेवर,मदरसा दारुल उलूम देवबंद सहारनपुर द्वारा फ़तवे जारी करने व बच्चों को सिखाने के काम में ली जा रही थी। जिस पर NCPCR ने संज्ञान ले कर ज़िला प्रशासन को नोटिस जारी किया था। ज़िला प्रशासन सहारनपुर ने तत्परता पूर्वक कार्यवाही करते हुए अवगत करवाया है कि उक्त किताब का उपयोग बंद करवा दिया गया है व संबंधित फ़तवे भी दारुल उलूम देवबंद की वेबसाइट से हटवा दिए गए हैं। शेष जाँच जारी है।”

दरअसल, दारुल उलूम के मदरसों में ऐसा पाठ्यक्रम पढ़ाया जा रहा था, जिसमें कई विवादित संदर्भ व फतवे शामिल थे। जैसे जानवरों से रेप, मृत महिलाओं और नाबालिग बच्चियों से यौन सम्बन्ध के तौर तरीके बताए गए थे एवं उन्हें जायज ठहराया गया था। यहाँ तक कि नहाना भी जरुरी नहीं था। जिस पर दिल्ली की सामाजिक संस्था मानुषी सदन ने राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग में शिकायत की थी। इसके बाद ही NCPCR की नोटिस के बाद अब इसे वेबसाइट व पाठ्यक्रम से हटा दिया गया है।

मानुषी सदन संस्था ने गत 7 जुलाई, 2023 को शिकायत की थी कि इस्लामिक विद्वान दिवंगत मौलाना अशरफ अली थानवी की 100 साल पुरानी किताब “बहिश्ती जेवर” के जरिए दारुल उलूम छात्रों को नाबालिगों पर आपराधिक हमले, अवैध संबंध, दुष्कर्म और नाबालिगों की शादी की पढ़ाई करा रहा है।

जिसके बाद राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने सहारनपुर के डीएम व एसएसपी को जाँच करने व दारुल उलूम की वेबसाइट पर उपलब्ध ऐसी विवादित सामग्री को हटाने के लिए कहा था। साथ ही अधिकारियों को आयोग में तलब भी किया था।

आयोग की तरफ से जारी नोटिस में कहा गया था कि बच्चों को दारुल उलूम की तरफ से जारी फतवों को पढ़ाया जा रहा है। बच्चों को वो फतवे पढ़ाए जा रहे हैं जो वेबसाइट पर मौजूद हैं। और यह बाल अधिकार के खिलाफ है। 

आयोग ने कहा कि उन्हें दारुल उलूम देवबंद की तरफ से जारी फतवों के खिलाफ एक शिकायत भी मिली है। फतवे में ‘बहिश्ती जेवर’ नामक पुस्तक का जिक्र है, जो बच्चों के लिए आपत्तिजनक, अनुचित और अवैध है। 

इसी मामले में 19 जुलाई, 2023 को बाल संरक्षण आयोग के निर्देश पर एसडीएम संजीव कुमार के नेतृत्व में सीओ रामकरण सिंह, डीआईओएस योगराज सिंह, डीएसओ डॉ. विनिता, बीईओ डॉ. संजय डबराल की टीम दारुल उलूम पहुँची थी। टीम ने संस्था के नायब मौलाना अब्दुल खालिक मद्रासी और सद्र-मुदर्रिस मौलाना अरशद मदनी से मुलाकात की थी और पूरे मामले की जाँच की थी।

इस मामले में दारुल उलूम के जिम्मेदारों ने टीम को बताया था कि पुस्तक से संस्था का कोई वास्ता नहीं है। जिसके बाद उन्हें वेबसाइट से हटवा दिया गया। वहीं अब 19 अक्टूबर, 2023 को आयोग में प्रस्तुत होकर अधिकारियों ने बताया कि चार सदस्यीय टीम की जाँच के बाद विवादित सभी फतवों और पुस्तक को दारुल उलूम समेत अन्य सभी वेबसाइट से हटवा दिया गया है।

‘मौत मुबारक, नरक में जाओ: युवा राष्ट्रवादी इन्फ्लुएंसर की मृत्यु पर AltNews वाले ज़ुबैर और RLD वाले कनौजिया ने मनाया जश्न, कहा – ‘आत्मा गाजा में भटके’

मोहम्मद ज़ुबैर और प्रशांत कनौजिया (साभार- HT and India Tooday)
सोशल मीडिया एक्स पर ‘IAS Smoking Skills’ हैंडल के नाम से पोस्ट करने वाले राष्ट्रवादी इन्फ्लुएंसर की अचानक से मौत हो गई है। इस हैंडल के पीछे जो राष्ट्रवादी चेहरा था उसे लोग यश के नाम से जानते थे। रविवार (29 अक्टूबर, 2023) को जैसे ही ह्रदय गति रुक जाने से उनके मौत की सूचना मिली नेटिजन्स स्तब्ध रह गए क्योंकि यश की उम्र 30 वर्ष से भी कम थी।

सामाजिक-राजनितिक सहित विभिन्न ज्वलंत मुद्दों पर पोस्ट करने वाले यश को जहाँ नेटिजन्स श्रद्धांजलि दे रहे हैं, वहीं अक्सर लोगों की पहचान उजागर कर उन्हें बहशियों के हाथो सौंप देने वाला मोहम्मद ज़ुबैर, यहाँ भी अपनी हरकत से बाज नहीं आया। लगातार एक के बाद एक पोस्ट कर यश की मौत का मजाक उडाता रहा। वहीं अब भारी विरोध और सोशल मीडिया पर जलील किए जाने के बाद ज़ुबैर ने अपना ट्वीट डिलीट कर दिया है।

इतना ही नहीं RLD के प्रशांत कनोजिया ने भी यश के मारे जाने का मजाक उड़ाते हुए लिखा, “यह लड़का गाजा में मारे जा रहे फ़िलिस्तीनी बच्चों पर नाच कूद रहा था @Smokingskills07। परंतु आज पता चला धर्म की रक्षा करने का ढोंग करने वाले इस व्यक्ति की मौत हो गई। बच्चों के लाशों पर मज़ा ले रहा था आज कुदरत ने इसके मज़े ले लिए। परिवार को मेरी संवेदना है और उम्मीद है उनका बेटा नर्क में जाए और उसकी आत्मा गाजा में भटकती रहे। गुमनामी की मौत मुबारक!”

देखिए किस तरह से नेटिजन्स स्मोकिंग्स किल्स हैंडल चलाने वाले यश को श्रद्धांजलि दे रहे हैं। यश की मौत हार्ट अटैक से बताई जा रही है। यश को याद करते हुए टीवी पत्रकार प्रदीप भंडारी ने लिखा, “मैं तो बहुत सदमे में हूँ। यश @Smokingskills07 हमने अभी इस सप्ताह बात की है। आप बहुत छोटे, मिलनसार, स्नेही थे। आप हमेशा कहते थे – ”भैया आप आगे बढ़ो, मैं आपके साथ हूँ। मुझे अब भी यकीन नहीं हो रहा कि आप हमारे साथ नहीं हैं. ओम शांति।”

वहीं चचा मॉन्क नामक हैंडल ने लिखा, “यह जानकर आश्चर्य और दुःख हुआ कि भाई! @Smokingskills07 अब नहीं है। ॐ शांति  जीवन बेहद अप्रत्याशित है। हम जीवन के प्रत्येक मिनट के लिए भगवान के प्रति आभारी रहें।”

जहाँ लोग दुःखी हैं यश की मौत से वहीं ऑल्टन्यूज़ का फाउंडर सदस्य मोहम्मद ज़ुबैर लगातार पोस्ट कर यश की मौत का मजाक उड़ाता रहा और लोगों के विरोध को देखते हुए एक पोस्ट कर अपने पुराने सभी पोस्ट जो उसने यश की मौत का मजाक उड़ाने के लिए किए थे डिलीट कर दिया। और अपने बचाव में लिखा, “मैंने उसके पुराने ट्वीट्स को उजागर करने वाले अपने ट्वीट्स हटा दिए हैं। लेकिन जिस तरह से उसने लगातार छोटे फ़िलिस्तीनी बच्चों की मौत का मज़ाक उड़ाया और जश्न मनाया….”

वहीं दूसरे नेटिजन्स ने ज़ुबैर के डिलीट किए गए सभी ट्वीट का स्क्रीनशॉट पोस्ट कर दिया। बाला नामक एक्स हैंडल ने पोस्ट करते हुए लिखा, “खून में ही इसके जहर है, अपने ट्वीट डिलीट मत कर ज़ुबैर, हम जानते हैं कि तू क्या है?”

यश की मौत पर श्रद्धांजलि देते हुए और ज़ुबैर की खैर खबर लेते हुए इस्कॉन के प्रवक्ता राधा रमण दास ने लिखा, “@Smokingskills07 की दिल का दौरा पड़ने से असामयिक मृत्यु की खबर ह्रदय विदारक है। उनकी उम्र 30 साल भी नहीं थी। ओम  शांति। हरे कृष्ण। और ये बेशर्म आतंकवादी 🐖 उनके जाने का जश्न मना रहा है। मूर्ख को यह नहीं पता कि उनका दोबारा जन्म होगा।”

                                                   पोस्ट पोस्टका स्क्रीनशॉट

मोहम्मद ज़ुबैर की ये हरकत नया नहीं है इसके पहले भी वह जहाँ जिहादियों, आतंकियों का बचाव करता आया है वहीं फैक्ट चेक के नाम पर सही लोगों के पहचान को संकट में डालने, यहाँ तक कि मौत के मुँह में भेज देने भी बाज नहीं आया। सोशल मीडिया पर लोग ज़ुबैर के इन्हीं कारनामों की चर्चा करते हुए उसे लानत भेज रहे हैं। 

‘मर्दों से औरतें कमतर’: पाकिस्तान के प्रोफेसर से मौलानाओं ने कहलवाया

जीव विज्ञान के पाकिस्तानी प्रोफेसर शेर अली ने डार्विन सिद्धांत को पढ़ाने पर माँगी माफी (साभार: businesstoday.in)
पाकिस्तान के बन्नू शहर से एक चौकाने वाला मामला सामने आया है। यहाँ सरकारी स्नातकोत्तर डिग्री कॉलेज के जीव विज्ञान के एक सहायक प्रोफेसर को स्टाम्प पेपर पर माफ़ीनामा देने के लिए मजबूर किया गया। सहायक प्रोफेसर शेर अली को ये माफीनामा जीव विज्ञान की एक बुनियादी अवधारणा चार्ल्स डार्विन के विकासवाद के सिद्धांत को पढ़ाने की वजह से देना पड़ा।

यही नहीं उन्हें मिश्रित-लिंग वाली यानी मर्द और औरतों के साथ होने वाली मीटिंग की निंदा करने और यह ऐलान करने के लिए भी मजबूर किया गया कि महिलाएँ पुरुषों से निम्नतर (नीचे) हैं। सहायक प्रोफेसर शेर अली को लेकर ये सब विवाद महज इसलिए खड़ा हुआ, क्योंकि उन्होंने इस महीने की शुरुआत में डोमेल क्षेत्र में संविधान और कानून के मद्देनजर औरतों के हकों पर आयोजित एक सेमिनार को संबोधित किया था।

सेमिनार के दौरान उनकी टिप्पणियाँ स्थानीय मौलवियों को अच्छी नहीं लगीं। इन लोगों ने प्रोफेसर शेर अली पर अय्याशी फैलाने और इस्लाम और स्थानीय संस्कृति के खिलाफ बोलने का आरोप लगाया और अधिकारियों से उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग कर डाली।

हालाँकि, इसके इसके तुरंत बाद, प्रोफेसर अली ने पाठ्यक्रम के हिस्से के तौर पर डार्विन के विकासवाद के सिद्धांत को पढ़ाने के मुद्दे पर अपनी स्थिति साफ की। पाकिस्तान के अखबार डॉन ने उनके हवाले से कहा, “जीव विज्ञान की पाठ्यपुस्तक का अध्याय 24 डार्विन के जैविक विकास के सिद्धांत पर चर्चा करता है और अगर किसी को इस विषय से परेशानी है, तो उन्हें पाठ्यक्रम से इस अध्याय को हटाने के लिए सरकार से संपर्क करना चाहिए।”

प्रोफेसर ने यह भी कहा कि अगर वह इस विषय को नहीं पढ़ाएँगे तो उनके छात्र उनकी पढ़ाने की काबिलियत पर सवाल उठाएँगे। उन्होंने ये भी कहा कि उन्होंने हमेशा अपने छात्रों की सहमति लेने के बाद डार्विन के जैविक विकास के सिद्धांत को पढ़ाया है।

जिला प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने डॉन को बताया कि शेर अली ने मौलवियों से कहा कि पर्दा या औरतों के हकों पर सोशल मीडिया पोस्ट उनके नहीं थे, उन्हें एडिट किया गया था।

सहायक प्रोफेसर शेर अली ने बन्नू डिप्टी कमिश्नर के कार्यालय को तीन पन्नों का हलफनामा दिया कि डार्विन के विकासवाद के सिद्धांत सहित सभी वैज्ञानिक और तर्कसंगत विचार, जो इस्लामी शरिया का विरोध करते हैं वो झूठ हैं।

कट्टरपंथी मौलानाओं के दबाव में प्रोफेसर शेर अली को ये भी ऐलान करना पड़ा कि औरतें मर्दों से कमतर हैं और ऐलान किया कि महिलाओं को पुरुषों के साथ गैरजरूरी तौर पर घुलने-मिलने की मंजूरी नहीं है।

ये तब है जब सहायक प्रोफेसर शेर अली के पास पेशावर विश्वविद्यालय से एमएससी की डिग्री है। वो इस्लामाबाद में कायद-ए-आज़म विश्वविद्यालय से ह्यूमन जेनेटिक्स में एमफिल हैं।

‘द कर्स ऑफ गॉड-व्हाई आई लेफ्ट इस्लाम’ किताब के लेखक हैरिस सुल्तान ने इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया एक्स पर डाला था। इसके बाद ये सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इस वीडियो के साथ सुल्तान ने कैप्शन लिखा, “यही वजह है कि पाकिस्तान तीसरी दुनिया का नरककुंड बना रहेगा। अच्छी दाढ़ी रखने वाले ये कट्टरपंथी मुस्लिम विश्वविद्यालय के प्रोफेसर शेर अली को विकासवाद के सिद्धांत की निंदा करने और रिकॉर्ड पर यह कहने के लिए मजबूर करते हैं कि कुरान और हदीस के मुताबिक, महिलाएँ पुरुषों के मुकाबले ‘बौद्धिक रूप से कमतर’ हैं।”

लेखक हैरिस सुल्तान ने आगे लिखा, “हालाँकि मौलवी ग़लत नहीं हैं। कुरान और पैगंबर मुहम्मद ने कहा था “औरतें मूर्ख हैं”।

जीव विज्ञान के एक प्रोफेसर शेर अली का डार्विन के विकासवाद के सिद्धांत को पढ़ाने के लिए सार्वजनिक माफी माँगने का मामला पाकिस्तान में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और वैज्ञानिक विचारों में इस्लामिक कट्टरपंथियों की दखलअंदाजी का उदाहरण हैं।


फिलिस्तीन के लिए चंदा माँग रहे यूपी पुलिस का कॉन्स्टेबल सोहेल अंसारी को योगी सरकार ने किया सस्पेंड

फिलिस्तीन के लिए फेसबुक पर चंदा माँग रहा था कांस्टेबल सोहेल अंसारी (साभार- X हैंडल चन्दन शर्मा)
हमास के समर्थन में भारत के भी कई मुस्लिम खुलेआम लिखने और बोलने से बाज नहीं आ रहे हैं। इसी कड़ी में अब एक मामला आया उत्तर प्रदेश पुलिस का, जहाँ एक कांस्टेबल को फ़िलिस्तीन के प्रति समर्थन व्यक्त करने और फ़िलिस्तीन के लिए चंदा माँगने के मामले में अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ा है। आरोपित कांस्टेबल का नाम सोहेल अंसारी है। सोहेल अंसारी ने फेसबुक पर पोस्ट करके फिलिस्तीन के समर्थन के लिए चंदे की अपील की थी। 

जो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था। चन्दन शर्मा नाम के एक व्यक्ति ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा, “यह है मोहम्मद सोहेल अंसारी, उत्तर प्रदेश पुलिस में कांस्टेबल हैं। 

फिलिस्तीनी आतंकवादियों के लिए यह फेसबुक पर पोस्ट करके चंदा माँग रहे थे लेकिन योगी बाबा के रडार पर आ गए, उम्मीद करते हैं आतंकवादी समर्थक का जल्दी ही वर्दी जाएगा और जेल की हवा खाएगा, फिलहाल इस आतंकवादी समर्थक के अब्बू माफी माँगते हुए बोल रहे है कि बच्चा है गलती हो गया। 

दरअसल, कांस्टेबल सोहेल अंसारी ड्रोन कैमरा उड़ाने वाली टीम में तैनात हैं मगर फिलहाल वह अपनी सोशल मीडिया पोस्ट की वजह से जाने जा रहे हैं, फिलिस्तीन के लिए मदद की गुहार लगा रहे हैं और लोगों से चंदा माँग रहे हैं!

इस पूरे मामले पर लखीमपुर खीरी जिले के एडिशनल एसपी नेपाल सिंह ने बताया, “इस संदर्भ में जाँच की जा रही है, जाँच में जो भी तथ्य आएँगे, जो भी सही होगा, उसके अनुसार कार्रवाई की जाएगी।”

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले में पुलिस अधिकारियों ने कांस्टेबल सोहेल अंसारी के खिलाफ कार्रवाई की है। मामला सामने आने के बाद एडिशनल एसपी को जाँच का जिम्मा सौंपा गया था। जाँच में आरोपों में दम पाया गया, जिसके परिणामस्वरूप कांस्टेबल के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई। फ़िलहाल, सिपाही सोहेल अंसारी को निलंबित कर दिया गया है। 

 फिलिस्तीन के लिए समर्थन में सोहेल का पोस्ट

कांस्टेबल सोहेल अंसारी ने अपने फेसबुक पर फिलिस्तीन के लिए समर्थन व्यक्त करते हुए और इस उद्देश्य के लिए चंदा देने का अनुरोध करते हुए पोस्ट किया था। सोहेल अंसारी ने अपने फेसबुक पर लिखा था, “HELP SAVE PALESTINE.  I REPOST =$1 ALL DONATION ARE DIRECTLY SENT TO…. ADD TO STORY TO HELP SAVE PALESTINE.

इसके बाद कॉन्स्टेबल सोहेल अंसारी की पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। एक बार जब पुलिस अधिकारियों को मामले की जानकारी हुई, तो उन्होंने कांस्टेबल के खिलाफ जाँच शुरू की। 
वहीं जब इस मामले में पुलिस अधिकारियों ने पूछताछ की तो कांस्टेबल ने दावा किया कि यह उसके बेटे की गलती थी। हालाँकि, उन्होंने अपना पूरा फेसबुक अकाउंट डिलीट कर दिया है। फ़िलहाल, लखीमपुर के एसपी ने पहले ही मामले की जाँच के आदेश जारी कर दिए थे।

इजरायल का झंडा जला रहा हमास का समर्थक आग में खुद ही जल गया: वीडियो वायरल

   
          विशालकाय इजरायली झंडा जला रहा था खुद ही आग की लपटों में घिरा (स्क्रीनशॉट वायरल वीडियो)
हमास के क्रूर हमलों का इजरायल गाजा पट्टी में सख्ती से जवाब दे रहा है। इसी बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है। जिसमें एक व्यक्ति इजरायल का एक बड़ा सा झंडा पकड़े हुए है और दूसरा व्यक्ति उसमें आ लगाकर जैसे ही हटता है। उसके कुछ ही सेकंड में आग भड़कती है और झंडा पकड़े उस व्यक्ति को अपने चपेट में ले लेती है। 

जिसे कई लोगों द्वारा शेयर किया जा रहा ज़्यादातर लोगों ने कैप्शन में लिखा है- “हमास के मौजूदा हालात, देखें- हमास समर्थक ने गलती से खुद को आग लगा ली! कर्म अद्भुत तरीके से कार्य करता है।”

हालाँकि, जब हमने थोड़ी पड़ताल की तो वीडियो पुराना निकला। 2021 में भी इसे कई हैंडलों द्वारा शेयर किया गया है। जिसमें ज़्यादातर मुस्लिम नामों वाले सोशल मीडिया हैंडल हैं। जो इजरायल के विरोध में इस वीडियो को शेयर कर रहे थे।

कहाँ का है वीडियो?

इस वीडियो के बारे में जानकारी देते हुए टाइम्स ऑफ़ इजरायल ने इसे ईरानी वीडियो बताया है। टाइम्स ऑफ़ इजरायल ने लिखा है, “सोशल मीडिया पर शेयर किए जा रहे एक वीडियो में दिख रहा है कि ईरान में एक व्यक्ति एक बड़ा सा इजरायली झंडा हाथ में लिए हुए है, जिसमें उसने आग लगा दी है, इससे पहले कि वह कुछ समझ पाता वह खुद ही आग की लपटों में घिरा भागता हुआ नजर आता है।
मजेदार बात यह है कि जब इजरायली झंडा जलाया जा रहा है तब वहाँ फिलिस्तीनी झंडा लिए एक भीड़ मौजूद है। इसके बाद भी जैसे ही आग इजरायली झंडा जलाने वाले व्यक्ति को अपने चपेट में लेती है। उसके भागने के साथ लगाकर भागते ही फिलिस्तीनी झंडाथामे हुए लोगों का एक समूह भी उससे दूर हटता नजर आता है।
सोशल मीडिया के अनुसार, यह वीडियो अल-कुद्स दिवस के विरोध प्रदर्शन के दौरान का बताया जा रहा है।
ईरान ने इस्लामिक क्रांति के वर्ष, 1979 में अल-कुद्स दिवस या जेरूसलम दिवस की शुरुआत की। ईरान में शासन द्वारा इस दिन इजरायल विरोधी भाषणों, घटनाओं और यरूशलेम को इजरायली नियंत्रण से “मुक्त” करने की धमकियों के साथ मनाया जाता है। इसमें ईरानी जनता भी शामिल होकर इजरायल को समाप्त करने जैसी दलीलें देती है और विरोध प्रदर्शन करती है।
कुल मिलाकर वीडियो भले ही अब इजरायल और हमास के बीच चल रही तनातनी के समय वायरल हो रहा है लेकिन वीडियो पुराना है और ईरान का है न कि किसी हमास आतंकी या सपोर्टर का। हाँ, यहाँ भी इजरायल के विरोध और फिलिस्तीन के समर्थन में ही इजरायली झंडा जलाया जा रहा था।

मासूम बच्चे ने पुलिस से लगाई गुहार : ‘मम्मी मुझे और पापा को मारती हैं, बर्तन धुलवाती हैं’

सोशल मीडिया पर एक बच्चे का वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें एक बच्चा खुद को पुलिस से बचाने की गुहार लगाता दिखाई दे रहा है। बच्चे का कहना है कि उसकी माँ उसे और उसके पिता के साथ मारपीट करती है। साथ ही जान से मारने की धमकी देती है। यह वीडियो अलीगढ़ के बन्ना देवी थाने का बताया जा रहा है।

लगभग 29 सेकेंड के इस वीडियो में बच्चा कह रहा है, “मम्मी मुझे रोज-रोज मारती हैं। पापा को भी मारती हैं। मुझे मारने की धमकी देती हैं। पापा को भी जेल भेजवाने की धमकी देती हैं। मुझसे बर्तन धुलवाती हैं, काम करवाती हैं। पुलिस अंकल, कृपया करके मेरी हेल्प करवा दो। मेरी फैमिली को बचा लो, मेरी मम्मी से।”

प्रभात खबर की रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले में एसएसपी कलानिधि नैथानी ने कहा कि यह मामला पति-पत्नी के बीच पारिवारिक विवाद से जुड़ा हुआ है। इसमें क्षेत्राधिकारी द्वितीय को जाँच करने के लिए कहा गया है। वहीं इस वीडियो को लेकर अलीगढ़ पुलिस ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा है, “पति-पत्नी के मध्य पारिवारिक विवाद के मामले में क्षेत्राधिकारी को जाँचकर आवश्यक कार्यवाही हेतु निर्देशित किया गया।”

इससे पहले मध्य प्रदेश के ग्वालियर से पत्नी द्वारा पति को प्रताड़ित करने का मामला सामने आया था। इसमें महिला ने अपने पति पर खौलता तेल डाल दिया था। इससे उसका प्राइवेट पार्ट जल गया था। पति का कहना था कि उसकी पत्नी पड़ोस में रहने वाले एक युवक से बात करती थी। कई बार मना करने के बाद भी वह नहीं मान रही थी।

एक दिन वह ऑफिस से घर लौटा तो उसकी पत्नी फोन पर बात कर रही थी। इससे उसने उसका फोन छीन लिया था। इससे नाराज होकर पत्नी ने रात करीब 2 बजे तेल गर्म कर पति के प्राइवेट पार्ट में डाल दिया और मौके से फरार हो गई थी। खौलते हुए तेल से जलने के कारण पति की चीखें निकल गईं थी। शोर शराबा सुन आस-पड़ोस के लोगों ने पीड़ित पति को हॉस्पिटल पहुँचाया था।

ट्रैफिक रूल तोड़ने पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न, पैसे लेकर आतंकवादियों की मदद: हिलाकर रख देगा DSP आदिल मुश्ताक का सेक्स और टेरर ट्रैप

                 आतंकियों का सहयोगी और जम्मू-कश्मीर पुलिस का DSP आदिल मुश्ताक (साभार: अमर उजाला)
हाल ही में गिरफ्तार किए गए जम्मू-कश्मीर पुलिस के डीएसपी शेख आदिल मुश्ताक को निलंबित कर दिया गया है। उन्हें अगले आदेश तक प्रदेश सरकार ने जोनल पुलिस मुख्यालय कश्मीर के साथ अटैच कर दिया है। मुश्ताक पर टेरर फंडिंग से जुड़े एक आरोपित को बचाने के लिए सबूतों से छेड़छाड़ करने और घूस लेने का आरोप है।

श्रीनगर पुलिस मुश्ताक को 21 सितंबर 2023 को गिरफ्तार किया था। इसके बाद पुलिस उसे 6 दिन की रिमांड पर लिया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए पाँच सदस्यीय एक SIT का गठन किया गया है और उसे इस मामले की जाँच सौंपी गई है।

प्रशासन की जाँच में सामने आया है कि आदिल मुश्ताक ने लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी उमल आदिल डार और जहूर मुज्जमिल पर सर्विलांस लगाया था। इसके बाद इसी साल फरवरी में उनके कब्जे से 32 लाख रुपए बरामद किए गए हुए। इस दौरान आदिल मुश्ताक की करतूत का पता चला।

इस दौरान पता चला कि इस पूरे मामले की जाँच करने वाला डीएसपी आदिल मुश्ताक ही था और उसने टेरर फंडिंग के आतंकियों को बचाने के लिए 2.7 लाख रुपए की घूस ली थी।मार्च 2023 में उसे नौगाम और जाँच से हटा दिया गया। तब मुश्ताक ने अपने जूनियर के जरिए फर्जी बयान दिलाकर मुज्जमिल को बचाने की कोशिश की थी।

मुश्ताक के खिलाफ लगने वाले आरोपों से जम्मू-कश्मीर पुलिस की हर तरफ आलोचना हो रही थी। इससे केंद्रशासित प्रदेश की पुलिस की छवि को भारी नुकसान हो रहा था। इसके बाद पुलिस ने आदिल मुश्ताक के खिलाफ सबूत जुटाने की कोशिश शुरू कर दी और आखिर कार पुलिस को ये सबूत हाथ लग ही गए। इसके बाद सरकार ने एक्शन लिया।

 जाँच के दौरान यह बात भी सामने आई कि आदिल मुश्ताक अपनी गुड लुकिंग परनालिटी के साथ-साथ DSP जैसे महत्वपूर्ण पद का भरपूर मिसयूज करता था। जब वह ट्रैफिक पुलिस में था तो वह अपने पद का दुरुपयगो करते हुए लड़कियों का यौन शोषण करता था। इसके लिए उसने एक होटल में कमरा तक ले रखा था।

ट्रैफिक डिपार्टमेंट में बतौर डीएसपी मुश्ताक पैसे वाली परिवार से ताल्लुक रखने वाली लड़कियों को ट्रैफिक नियम तोड़ने पर अपने सामने पेश करवाता था। इनमें फर्जी मामले भी होते थे, जो उसके कहने पर बनाए जाते थे। मुश्ताक ने श्रीनगर के एक टूरिस्ट रिसेप्शन सेंटर में कमरा ले रखा था। वहीं पर धमकाकर इन लड़कियों का वह यौन शोषण करता था।

उस पर पिछले 6 महीनों तक लगाए सर्विलांस में सामने आए तथ्यों के आधार पर बनाए डोजियर में कहा गया है कि मुश्ताक होटल के कमरे में ले जाकर युवा महिला का शोषण का वीडियो भी बनाता था। इसके आधार पर उन्हें वह ब्लैकमेल भी करता था। उन्हें वह धमकाता था कि उसका सर्विस अभी लंबा है और आगे जाकर वे परेशानी में पड़ जाएँगी।

टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, जाँच में यह बात भी सामने आई है कि आदिल मुश्ताक ने सीज किए गए 200 से अधिक जानवरों को उसने बेच दिया। इसके साथ ही जम्मू-कश्मीर पर्यटन विभाग के दरफ्तर से वह 4 टेंट और 16 स्लीपिंग एवं कैरी बैग से भी लेकर अपने घर चला गया।

आदिल अपने ऐशो-आराम की जिंदगी जीने के लिए सरकारी संपत्तियों का भी खूब दुरुपयोग करता था। उसे सोशल मीडिया का भी खूब शौक था। वह इन पर खूब सक्रिय रहता था। उसके लगभग 47000 फॉलोअर हैं। वह सोशल मीडिया पर अपनी ऐशो आराम की जिंदगी का खूब प्रदर्शन करता था।

साल 2020 में ऐसे ही एक और डिप्टी एसपी देविंदर सिंह को गिरफ्तार किया गया था। टेरर फंडिंग में सहयोग करने के कारण देविंदर को आखिरकार सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था। कहा जा रहा है कि आदिल को भी बर्खास्त किया जा सकता है।

डीएसपी शेख आदिल के दिल्ली के कई मीडिया संस्थानों से अच्छे संबंध थे। इसके अतिरिक्त, वह जम्मू और कश्मीर पुलिस विभाग के बड़े अधिकारियों के साथ भी लंबे समय से संपर्क बनाए हुए था। बताया जा रहा है कि गिरफ्तारी से बचने के लिए उसने अपने घर से कूदकर भागने की कोशिश की। लेकिन पुलिस ने उसे पकड़ लिया।

उत्तर प्रदेश : इस्लामी टोपी लगाए लड़के से मारपीट कर हिन्दू विरोधी प्रोपेगंडा फैलाने वाला निकला मोहम्मद फैसल

                                           वीडियो का स्क्रीनग्रैब और अली सोहराब का पोस्ट
उत्तर प्रदेश के कानपुर के जाजमऊ थाना क्षेत्र का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। वीडियो में एक आदमी टोपी लगाए लड़के के साथ मारपीट करता नजर आ रहा है। इस मामले में पुलिस ने मोहम्मद फैसल नामक आरोपित को हिरासत में लिया है। लेकिन इस्लामवादी इसे सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश कर रहे हैं।

वीडियो वायरल होने के बाद आरोपित की गिरफ्तारी को लेकर ‘पुलिस कमिश्नरेट कानपुर नगर’ ने 30 सितंबर को ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट शेयर की थी। इसमें लिखा था, “जाजमऊ थानाक्षेत्र का एक वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें एक व्यक्ति एक बच्चे को पीटते हुए दिख रहा है। प्रकरण का तत्काल संज्ञान लेकर थाना जाजमऊ पुलिस टीम द्वारा आरोपी मोहम्मद फैसल पुत्र अशरफ को हिरासत में ले लिया गया है, प्रकरण में FIR दर्ज कर विधिक कार्रवाई की जा रही है।”

इस पोस्ट के साथ ही पुलिस ने मोहम्मद फैसल की एक तस्वीर भी शेयर की थी। इसमें वह सलाखों के पीछे घुटने टेक कर हाथ जोड़े नजर आ रहा है।

दरअसल, 30 सितंबर को सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था। वीडियो में फैसल अपनी बाइक से आता नजर आता है। इसके बाद बाइक से उतरते ही वह टोपी लगाए लड़के की ओर बढ़ता है। फिर वह लड़के पर लात-घूँसों की बौछार कर देता है। फैसल पीड़ित को काफी देर तक मारता रहता है। इस दौरान कुछ लोग पीड़ित को बचाने की कोशिश करते भी नजर आ रहे हैं।

                                                                 पोस्ट का स्क्रीनग्रैब

वीडियो सामने आने के बाद इस्लामवादी इस मामले को सांप्रदायिक रंग देकर विवाद पैदा करने की कोशिश में जुट गए। ‘द मुस्लिम 786’ नामक यूजर ने लिखा कि एक दबंग ने पुलिस की जीप के सामने ही मुस्लिम युवक को थप्पड़ मार और लातों से कुचला। बेशक यहाँ पर इस्लामवादी ने हिंदू नहीं लिखा था लेकिन मुस्लिम को थप्पड़ मारे लिखकर अपना एजेंडा सेट करने की कोशिश की।

वहीं एक अन्य इस्लामवादी ने लिखा कि ये लोग पागल हो गए हैं और दंगा करवाना चाहते हैं। मुस्लिम की खामोशी का फायदा उठा रहे हैं। यही नहीं उस यूजर ने पुलिस को अपशब्द कहे।

                                                              पोस्ट का स्क्रीनग्रैब

सलीम खान राणा नामक यूजर ने लिखा, “पुलिस में भी तो काफ़िर ही हैं।” सलीम ने ‘भी’ शब्द का उपयोग कर पहले तो आरोपितों को गैर-मुस्लिम बताया फिर पुलिस को काफ़िर बता दिया।

तथाकथित ‘पत्रकार’ और झूठ फैलाते हुए कई बार पकड़ा जा चुका अली सोहराब ने भी पीड़ित को ‘मुस्लिम युवक’ लिखकर यह बताने की कोशिश की है कि आरोपित किसी अन्य धर्म से है। वरना मुस्लिमों के क्राइम में तो यह चूँ भी नहीं बोलता।

                                                                       पोस्ट का स्क्रीनग्रैब

सलीम खान राना ने एक अन्य पोस्ट में सभी गैर-मुस्लिमों के नरसंहार की धमकी दी। उसने लिखा, “जिस दिन मुस्लिम मैदान में आ जाएगा, काफ़िर दहशत में मर जाएगा।”

अमेरिका : पति के साथ सेक्स करते बायडेन की पार्टी की उम्मीदवार सुज़ाना गिब्सन को लोगों ने देखा लाइव: चुनाव प्रचार पर निकलीं तो मिला जबर्दस्त समर्थन

         वर्जीनिया की डेमोक्रेटिक महिला उम्मीदवार का पति के साथ सेक्स वीडियो लीक (साभार-वाशिंगटन पोस्ट)
अमेरिका के वर्जीनिया में चुनाव प्रचार एक अलग ही लेवल पर पहुँच गया है। यहाँ 11 सितम्बर, 2023 को वर्जीनिया के विधायिका (लेजिस्लेटिव) के चुनाव में एक जो बायडेन की पार्टी डेमोक्रेट की महिला उम्मीदवार का उसके पति के साथ सेक्स सम्बन्ध बनाते हुए वीडियो का लाइव प्रसारण हो गया। वाशिंगटन पोस्ट सहित कुछ मीडिया रिपोर्ट में यौन सम्बन्ध की लाइव स्ट्रीमिंग को चुनावी फायदे के लिए उपयोग करने की बात कही जा रही है क्योंकि वीडियो को लाइव करने के बाद देखने वालों से चुनाव के लिए धन की माँग भी की गई थी। वहीं कई रिपोर्ट में दावा है कि वीडियो लीक हुआ है, जिसे विरोधी रिपब्लिकन पार्टी द्वारा बदनाम करने के लिए किया गया है।

हालाँकि, अब इस मामले में 12 सितम्बर को जो खबर आई है उसके अनुसार वर्जीनिया की डेमोक्रेटिक उम्मीदवार को महिलाओं और राज्य सीनेटर एल लुईस लुकास आदि डेमोक्रेटस का ज़बरदस्त समर्थन मिल रहा है। 

वर्जीनिया की डेमोक्रेटिक उम्मीदवार का नाम सुज़ाना गिब्सन, जो पेशे से एक नर्स हैं, साथ ही दो बच्चों की माँ भी हैं। सुजाना ने जून में डेमोक्रेटिक प्राइमरी जीती और राज्य के सबसे प्रतिस्पर्धी जिलों में से एक वर्जीनिया में रिपब्लिकन व्यवसायी डेविड ओवेन के खिलाफ चुनाव लड़ रही हैं। इस चुनाव में लाइव सेक्स वीडियो के अलावा सुजाना को एक एबॉर्शन राइट एक्टिविस्ट (गर्भपात के अधिकार के लिए लड़ने वाली महिला) के रूप में भी लोगों का समर्थन मिल रहा है।

 रिपोर्ट के अनुसार, लोगों ने सुजाना को लाइव स्ट्रीम के बाद भारी मात्रा में चुनाव लड़ने के लिए धन देकर मदद की। दरअसल, अमेरिका के दक्षिणी राज्यों में गर्भपात के लिए शख्त कानून है। यहाँ रेयर मामलों में ही गर्भपात की इजाजत है। 

हालाँकि, इस मामले में सुजाना के समर्थन में आए दूसरे डेमोक्रेट सीनेटर लुकास ने कहा कि उनका मानना ​​है कि सेक्स वीडियो सुजाना गिब्सन को शर्मिंदा करने और उनके चुनाव अभियान को नुकसान पहुँचाने  के लिए एक रिपब्लिकन द्वारा लीक किया गया था।

लुकास ने कहा, “वे (रिपब्लिकन) किसी भी उम्मीदवार के बारे में ऐसी किसी भी चीज़ की तलाश कर रहे हैं जो उन्हें लगता है कि मतदाताओं को प्रभावित कर सकती है। यह सब इस बात से संबंधित है कि सीनेट का नियंत्रण किसे मिलने वाला है और सदन का नियंत्रण किसे मिलने वाला है। सारा मामला महज नियंत्रण का है।”

वर्जीनिया में डेमोक्रेट और रिपब्लिकन के बीच काँटे की इस चुनावी लड़ाई में इस सेक्स वीडियो लीक कांड के बाद सुजाना के समर्थन में डेमोक्रेटिक महिला उम्मीदवारों के लिए वकालत करने वाले समूह एमिली लिस्ट ने भी गिब्सन का बचाव किया।

सेक्स वीडियो लीक होने के बाद वर्जीनिया में चुनाव का पूरा नैरेटिव ही बदलता नजर आ रहा है। जहाँ कुछ राजनितिक विश्लेषक इसे बड़ा गेम मान रहे हैं वहीं कुछ का कहना है कि यह कदम राजनीति को और नीचे ले जाने वाला है। चुनाव में नीतियों पर बात न होकर सेक्स वीडियो चर्चा का विषय बना हुआ है। 

क्या कहा डेमोक्रेटिक उम्मीदवार ने

वहीं अब इस मामले में सुजाना का बयान भी आ गया है जिसमें उन्होंने उनके पति के साथ सेक्स वीडियो लीक को गटर छाप राजनीति कहा है। 
सुजाना ने अपने बयान में कहा, “इससे मैं डरने वाली नहीं और न मुझे यह चुप करा पाएगा। मेरे राजनीतिक विरोधियों और उनके रिपब्लिकन सहयोगियों ने यह साबित कर दिया है कि वे मुझ पर और मेरे परिवार पर हमला करने के लिए इस हद तक गिरने को तैयार हैं क्योंकि जब महिलाएँ बोलती हैं तो उन्हें चुप कराने के लिए ऐसी कोई सीमा नहीं है जिसे वे पार नहीं करेंगे।”
इस मामले में गिब्सन ने कहा, “सेक्स वीडियो को लीक करना मेरी गोपनीयता के अधिकार पर अवैध आक्रमण है जो मुझे और मेरे परिवार को अपमानित करने के लिए किया गया है।” गिब्सन के वकील, डैनियल पी. वॉटकिंस ने कहा कि वीडियो का प्रसार वर्जीनिया के रिवेंज पोर्न कानून का उल्लंघन है, जो जबरदस्ती, परेशान करने के इरादे से किसी अन्य व्यक्ति की नग्न या सेक्स वीडियो को दुर्भावनापूर्ण रूप से प्रसारित करना या बेचना अपराध है।
वॉटकिंस ने 2021 वर्जीनिया कोर्ट ऑफ अपील्स के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि सहमति से यौन संबंध के दौरान भी अपनी प्रेमिका को गुप्त रूप से रिकॉर्ड करना गैरकानूनी था, भले ही उसने अन्य लोगों को वीडियो न दिखाया हो। 

पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने महिला पत्रकार’ का हाथ पकड़, पूछा- निकाह कब करोगी, शौहर खुद चुनोगी: वीडियो वायरल

जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला का एक वीडियो सोशल मीडिया में वायरल है। इसमें वे एक युवा महिला पत्रकार के साथ अजीबोगरीब व्यवहार और सवाल करते दिख रहे हैं। इसको लेकर सोशल मीडिया में उनकी आलोचना हो रही है।

हालाँकि वीडियो में दिखने वाली युवा महिला पत्रकार उरफाना मुनीर का कहना है कि फारूक अब्दुल्ला के साथ उनकी बातचीत ‘शानदार’ रही और पूर्व मुख्यमंत्री उन्हें ‘बेटी’ की तरह मानते हैं।

85 वर्षीय फारूक अब्दुल्ला का यह वीडियो ऐसे वक्त में वायरल हो रहा जब INDI गठबंधन ने ऐसे 14 पत्रकारों के बायकॉट का ऐलान किया है जो कठिन सवाल पूछते रहे हैं। नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता अब्दुल्ला विपक्ष के इस गठबंधन के हिस्सा हैं।

वीडियो में अब्दुल्ला को युवा महिला पत्रकार का हाथ पकड़ते और कंधा छूते दिख रहे हैं। उससे पूछते हैं कि क्या उसने अपना शौहर चुन लिया है। अब्दुल्ला की इस हरकत पर आसपास खड़े कुछ लोग हँसते हुए भी दिख रहे हैं।

फारूक अब्दुल्ला ने महिला पत्रकार से पूछा- निकाह कब करोगी

इस वीडियो में महिला पत्रकार उरफाना मुनीर कहती हैं कि सर एक लास्ट सवाल यह जानना चाहूँगी कि इनका कहना… लेकिन उनका सवाल पूरा होने से पहले ही पूर्व मुख्यमंत्री अब्दुल्ला उनसे स्थानीय भाषा में उससे पूछते हैं- तुमने निकाह कर ली, तुम निकाह कब करोगी? क्या तुमने अपना शौहर चुना? क्या तुम्हारे अब्बू-अम्मी तुम्हारा शौहर चुनेंगे या तुम चुनोगी।
इस पर युवा महिला पत्रकार जवाब देती है, “मैं अभी बहुत छोटी हूँ सर अभी।” इसके बाद बुजुर्ग अब्दुल्ला उससे निकाह में सावधान रहने को कहते हैं। कहते हैं- क्या पता वो औरतों के साथ घूम रहा हो और तुम्हें पता भी न चले। इसके बाद वे जोर से हँसने लगते हैं।
इसके बाद फारूक अब्दुल्ला महिला पत्रकार से पूछते हैं- यह (मेहंदी) आपके हाथों पर क्यों है? इसके बाद वे हिंदी में कहते हैं- तेरी किसी की शादी थी? जवाब में महिला पत्रकार कहती हैं- मेरे बड़े भाई की शादी थी। इसके बाद अब्दुल्ला उससे हँसते हुए कहते हैं- शादी ठीक थी, बीवी रहेगी कुछ दिन या भाग जाएगी। जवाब में महिला पत्रकार कहती है- रहेगी सर।
बीजेपी आईटी सेल के हेड अमित मालवीय ने एक्स/ट्विटर पर पोस्ट करते कहा है कि फारूक अब्दुल्ला अपने सबसे घृणित रूप में दिख रहे हैं। उन्होंने लिखा है, “रिपोर्टर शायद उनकी पोती की उम्र या उससे भी छोटी है। लेकिन यह तथ्य उन्हें असहज सवाल पूछने से नहीं रोकता है।”
वहीं पत्रकार आदित्य राज कौल ने लिखा है, “महिला विरोधी फारूक अब्दुल्ला से मिलिए।” साथ ही पूछा है कि क्या फारूक अब्दुल्ला सार्वजानिक तौर पर कैमरे के सामने अपने बेटे या बेटी की शादी के बारे में उनसे ऐसे ही सवाल पूछते?
वहीं बीजेपी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा है कि यह सिर्फ गैर पेशवर ही नहीं है। यह महिला विरोधी और बेहद घिनौना भी है। लेकिन उस गठबंधन के लिए यह हैरानी की बात नहीं है जो सवाल पूछने वाले पत्रकारों का बहिष्कार करता है।
वीडियो वायरल होने के बाद युवा महिला पत्रकार उरफाना मुनीर की भी प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने कहा है, “फारूक अब्दुल्ला साहब के साथ बातचीत शानदार थी। उन्होंने हमेशा मुझे एक बेटी की तरह माना है। नेटिजन्स से अनुरोध है कि वे इसका मजाक न बनाएँ।”