चलो देर आए, दुरुस्त आए। वास्तव में कांग्रेस का पतन उसी दिन से शुरू हो गया था, जिस दिन तत्कालीन अध्यक्ष सीताराम केसरी को पार्टी ऑफिस से बाहर फेंक, सोनिया गाँधी को अध्यक्ष बना दिया गया था। उसे भी बर्दाश्त किया गया, लेकिन अयोध्या में राममंदिर मुद्दे पर जनता को भ्रमित करने के साथ-साथ कोर्ट को भी भ्रमित कर हिन्दू-मुस्लिम विवाद करवाया जाता रहा, राम को काल्पनिक बता दिया, रामसेतु को तुड़वाने का कितनी बार प्रयास किया, किसी से नहीं छुपा। हिन्दू-विरोधी गतिविधियों को अंजाम दिया जाता रहा। दूसरे, सोने पे सुहागा, राहुल को अध्यक्ष बना दिया गया, राहुल से हो रहे नुकसान को नज़रअंदाज़ गुलामों की भांति प्रियंका को भी पार्टी में उच्च स्थान देकर धरातल में धंसने को और सुगम कर दिया। राहुल को अध्यक्ष बनाए जाने पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हवा में नहीं बोला था, कि "जितनी जल्दी हो, राहुल बाबा को अध्यक्ष बनाइए।", परिणाम दुनिया के सम्मुख है।
बिहार और देश के अन्य हिस्सों में हुए उपचुनावों में कांग्रेस की हार के बाद अब एक बार फिर से पार्टी नेतृत्व पर सवाल उठने लगे हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा कि न सिर्फ बिहार, बल्कि देश के जिन भी हिस्सों में चुनाव हुए – उनके परिणामों से स्पष्ट है कि जनता ने कॉन्ग्रेस को एक प्रभावशाली विकल्प के रूप में देखना ही बंद कर दिया है। उन्होंने याद दिलाया कि कैसे 2019 लोकसभा चुनाव और 2020 विधानसभा चुनाव में भाजपा ने क्लीन स्वीप किया।
उन्होंने उत्तर प्रदेश की बात करते हुए कहा कि वहाँ हुए चुनावों में कांग्रेस 2% वोट पाने में भी नाकाम रही। ‘इंडियन एक्सप्रेस’ के मनोज सीजी के साथ इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि गुजरात में कांग्रेस के 3 उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई। उनका कहना है कि ये सब अप्रत्याशित नहीं था, बल्कि पहले से दिख रहा था। उन्होंने बताया कि CWC के एक सदस्य ने कहा भी कि वो आशा करते हैं कि पार्टी आत्ममंथन करेगी।
After the Congress' performance in Bihar elections, party veteran Kapil Sibal said the people of the country did not consider Congress to be an "effective alternative" anymore.https://t.co/DZccWHw8ma
— News18.com (@news18dotcom) November 16, 2020
When the party's own senior leaders starts speaking openly showing their disappointment then the party is in trouble and has to take major calls to revive itself.. How can a party revive India when it can't revive effectively itself
— Bhuban Patnaik (@Bhuban64039498) November 16, 2020
कपिल सिब्बल ने पूछा कि जब पिछले 6 वर्षों से कांग्रेस पार्टी ने आत्ममंथन नहीं किया तो अब कौन आशा करे कि वो ऐसा करेगी? उन्होंने कहा कि संगठनात्मक रूप से पार्टी में क्या गड़बड़ी है, ये सभी को पता है। उन्होंने कहा कि जवाब भी सबके पास है, कांग्रेस भी जानती है – लेकिन वो ऐसा स्वीकार नहीं करना चाहती। उन्होंने कहा कि अगर इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो कांग्रेस पार्टी का ग्राफ यूँ ही गिरता चला जाएगा।
उन्होंने कहा कि समस्याओं के समाधान में CWC हिचक रही है, क्योंकि ये एक नॉमिनेटेड बॉडी है। उन्होंने कांग्रेस के संविधान का हवाला देते हुए कहा कि CWC के चयन के लिए लोकतांत्रिक प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि CWC के नॉमिनेटेड सदस्यों से समस्याओं पर आवाज़ उठाने की अपेक्षा नहीं की जा सकती। 22 नेताओं द्वारा नेतृत्व को पत्र लिख कर बदलाव की माँग पर उन्होंने कहा कि पार्टी में अपने विचार रखने के लिए कोई फोरम ही नहीं है।
उन्होंने उत्तर प्रदेश-बिहार जैसे बड़े प्रदेशों में कांग्रेस के विकल्प न बन पाने पर अफ़सोस जताते हुए कहा कि मध्य प्रदेश में भी 28 में से कांग्रेस के 8 उम्मीदवार ही जीत पाए। उन्होंने चेताया कि कांग्रेस पार्टी को बहादुर बन कर समस्या को पहचानना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब हमने सुझाव दिए तो नेतृत्व ने पीठ दिखा दिया, इसीलिए आज ये हालत हो रही है। उन्होंने कहा कि अगर नेताओं को सुनना बंद कर दिया जाता है तो संचार ठप्प हो जाता है।
उन्होंने ये भी आरोप लगाया कि मेनस्ट्रीम मीडिया को सत्ताधारी पार्टी ने नियंत्रण में रखा हुआ है। उन्होंने लोगों तक पहुँचने के लिए नए माध्यम की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि फ़िलहाल हम सोशल मीडिया पर अच्छा कर रहे हैं, लेकिन जमीन पर उसके परिणाम नजर नहीं आ रहे। उन्होंने ऐसे नेताओं को आगे करने पर जोर दिया, जिन्हें लोग सुनना चाहते हों और जो सक्रिय रूप से सोच-विचार कर नेतृत्व करें।
उन्होंने कहा कि पार्टी नेतृत्व फ़िलहाल क्या सोच रहा है, ये उन्हें नहीं पता है, क्योंकि उन्हें नेतृत्व के आसपास के लोगों से ही ये बातें सुनने को मिलती हैं। कपिल सिब्बल ने कहा कि ताज़ा चुनावों में हार के बाद अब तक कांग्रेस पार्टी के नेतृत्व ने नेताओं से कुछ नहीं कहा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इसे ‘जैसा चल रहा है, चलने दो’ की तरह ले रही है। उन्होंने कहा कि नेतृत्व को लगता है कि सब ठीक है।
हाल ही में बिहार में कांग्रेस विधायक दल का नेता बनने के लिए दो विधायकों के समर्थक बैठक में भिड़ गए थे। पार्टी के 23 वरिष्ठ नेताओं द्वारा अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी को पत्र लिखने की बात भी सामने आई थी। इसमें कहा गया कि कांग्रेस कार्यसमिति की तुरंत बैठक बुलाकर बिहार में चुनावी असफलता पर चर्चा की जाए। पत्र में पार्टी में संगठनात्मक चुनाव की भी माँग की गई। सीडब्ल्यूसी के पाँच सदस्यों ने इस पत्र के लिखे जाने की पुष्टि की है।
दलाल भगाओ, कांग्रेस बचाओ
बिहार में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को मात्र 19 सीटें मिलीं, जिसके बाद पार्टी में आंतरिक कलह भी शुरू हो गया है। आम कार्यकर्ता नाराज़ हैं और वो पार्टी के ही कुछ नेताओं के खिलाफ आवाज़ उठाते हुए उन्हें हार के लिए जिम्मेदार बता रहे हैं। पार्टी के बड़े नेताओं के खिलाफ बयानबाजी जारी है। अब पटना में कांग्रेस कार्यकर्ताओं का विरोध प्रदर्शन भी शुरू हो गया है। कहा जा रहा है कि बिहार में पार्टी के बड़े नेताओ ने टिकट-वितरण में धाँधली की।
अखिल भारतीय किसान कांग्रेस के राष्ट्रीय संयोजक और बिहार प्रभारी राजकुमार शर्मा के नेतृत्व में पार्टी के पटना स्थित बिहार मुख्यालय ‘सदाकत आश्रम’ में ‘कांग्रेस बचाओ दलाल भगाओ’ महाधरना का आयोजन किया गया। जिन नेताओं पर धाँधली के आरोप लगाए गए, वो हैं – प्रभारी शक्ति सिंह गोहिल, चुनाव प्रचार समिति के अध्यक्ष अखिलेश प्रसाद सिंह, प्रदेश अध्यक्ष मदन मोहन झा, सदानंद सिंह और स्क्रीनिंग कमेटी के अध्यक्ष अविनाश पांडे।
पटना में पार्टी के कार्यकर्ताओं के साथ-साथ कुछ पूर्व विधायकों ने भी इस विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लेते हुए आरोप लगाए। उनका कहना था कि जयंती झा और मुर्तज़ा अली जैसे नेता पिछले 3-4 दशकों से सक्रिय हैं, लेकिन उन्हें टिकट नहीं दिया गया और उनकी जान चली गई। मोटी रकम लेकर उसके एवज में दल-बदलू उम्मीदवारों को टिकट देने के आरोप लगे हैं। कई जिलों में कांग्रेस एक अदद सीट को तरस गई, जिससे कार्यकर्ता नाराज़ हैं।
कार्यकर्ताओं ने पूछा कि प्रदेश में कांग्रेस का खात्मा करने वाले नेताओं ने बूथ, पंचायत, ब्लॉक, जिला और प्रदेश स्तर तक कमेटी क्यों नहीं बनाई? उनका आरोप है कि कई क्षेत्रों में तो दूसरे दलों के प्रत्याशियों को जिताने के लिए कमजोर कैंडिडेट खड़े किए गए। राजकुमार शर्मा का कहना है कि भाजपा के दबाव में ऐसा किया गया। उन्होंने बिहार कांग्रेस के बड़े नेताओं पर कार्रवाई की माँग करते हुए कहा कि उन्होंने अपने स्वार्थ के लिए आलाकमान को गुमराह किया है। पटना के इस प्रदर्शन में कांग्रेस के कई कार्यकर्ताओं का जमावड़ा लगा।
#WATCH: RJD leader Shivanand Tiwari speaks on #BiharResults, says "...elections were in full swing & Rahul Gandhi was on picnic at Priyanka ji's place in Shimla. Is party run like that? Allegations can be levelled that manner in which Congress is being run, it's benefitting BJP." pic.twitter.com/ZZXmndMJFh
— ANI (@ANI) November 15, 2020
No to blame Pappu as he just utilizing or spending the wealth his family earned in all these years. And as far as elections they debuted there servants to campaigning on behalf of them..
— Laxmikant Karwa 🇮🇳🇮🇳 (@LKK0209) November 15, 2020
Congress party under Rahul and Priyanka pic.twitter.com/gjdp6EyiMw
— Girish (Headhunter) (@girishs2) November 15, 2020
यह पहले भी साबित हो चुका है
— Babjipv (@pvbabji) November 15, 2020
😜😜😜ENJOY THE VDO 😜😜😜 pic.twitter.com/SFR9gt8fOM
पप्पू गांधी के बारे में लालू प्रसाद यादव पहले से ही जानते हैं और खुलकर कहते भी हैं लेकिन तुम ही गलत उम्मीद लगाते हो तो किसका दोष?? pic.twitter.com/fuwr1rZGKe
— दलीप पंचोली🇮🇳 (@DalipPancholi) November 15, 2020
उधर राजद ने भी कांग्रेस को ही अपनी हार का जिम्मेदार ठहराया है। राजद के प्रवक्ता शिवानंद तिवारी ने याद दिलाया कि कैसे कपिल सिब्बल, मुकुल वासनिक, शशि थरूर और मनीष तिवारी जैसे नेताओं ने नेतृत्व को चिट्ठी लिखी थी, पार्टी की हालत को लेकर चिंता जताई थी। उन्होंने इन नेताओं को कांग्रेस का वफादार और आजीवन कांग्रेसी करार दिया और नेतृत्व से कहा कि आप इस तरह से पार्टी नहीं चला सकते हैं।
शिवानंद तिवारी ने कहा कि बिहार में चुनाव हो रहा है और राहुल गाँधी अपनी बहन प्रियंका गाँधी के शिमला वाले घर पर जाकर पिकनिक मना रहे हैं, क्या ऐसे पार्टी चलाई जाती है? उन्होंने कहा कि इन चीजों से उन आरोपों को बल मिलता है कि कांग्रेस पार्टी जिस तरह से अपना ‘कारोबार’ चला रही है, उससे भाजपा को ही मदद मिल रही है। कांग्रेस अब अपने गठबंधन साथियों और अपने ही पार्टी नेताओं के आरोपों से जूझ रही है।


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