बिहार के नवनिर्वाचित शिक्षा मंत्री मेवा लाल ने दिया इस्तीफा

बिहार की नवनिर्वाचित बिहार विधानसभा में शिक्षा मंत्री बनाए गए मेवा लाल ने इस्तीफा दे दिया है।दरअसल मेवा लाल के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप हैं। यानि भ्रष्टाचार के विरुद्ध स्वच्छ प्रशासन के लिए हुए मतदान में भ्रष्टाचारी को ही जितवाने का मतलब है कि जनता ही भ्रष्टाचार को दूर नहीं करना चाहती। दूसरे, यह कि जब राजनितिक पार्टियां भ्रष्टाचार दूर करने की बात करती हैं, फिर क्यों एक भ्रष्टाचारी को टिकट दिया? यानि खुद भी खाओ, पार्टी को भी खिलाओ और जनता को पागल बनाओ। 
बिहार कृषि विश्वविद्यालय में साल 2012-13 के दौरान असिस्टेंट प्रोफेसरों की नियुक्ति के मामले में जांच के दौरान तत्कालीन वीसी और मेवा लाल पर लगाए गए आरोप सही पाए गए थे। हाईकोर्ट के पूर्व जज ने इस मामले की जांच की थी जिसमें मेवा लाल दोषी करार दिेए गए थे। मेवा लाल पर अब भी मामला चल रहा है।  

नीतीश कुमार के नेतृत्व में बनी एनडीए सरकार में मेवा लाल को शिक्षा मंत्री बनाया गया था जिसके बाद से ही उन पर लगे अनियमित्ताओं के आरोपों को नए सिरे से हवा मिल रही थी। जिस नेता को करप्शन के मामले में खुद नीतीश ने पार्टी से हटाया था, उसे सीधा मंत्री कैसे बना दिया था जबकि उस मामले की जांच जारी थी।शायद यही वजह है कि मेवा लाल पर इस्तीफे का दवाब बना और उन्होंने मंत्रीपद से इस्तीफा दे दिया है।बताया जा रहा है कि मेवा लाल मुख्यमंत्री आवास पर पहुंचे थे और फिर वहां से एक चिट्ठी राजभवन पहुंच गई है जिसमें मेवा लाल का इस्तीफा पत्र है। 

बिहार के कृषि विश्वविद्यालय में लगभग 160 सहायक प्राध्यापक और कनीय वैज्ञानिकों की नियुक्ति में अनियमित्ताओं की शिकायत के बाद जांच की गई तो पता चला कि वहां के तत्कालीन कुलपति और मेवालाल चौधरी की मिलीभगत से धांधली हुई और पास अभ्यर्थिर्यो को फेल कर वेबसाइट पर रिजल्ट जारी कर दिया था। जानकारी के मुताबिक विश्वविद्यालय से बहाली से जुड़े कागजात भी गायब कर दिए गए थे। मामले सामने आने के बाद हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज ने मामले की जांच की। राजभवन के निर्देश पर फरवरी, 2017 में पूर्व कुलपति के खिलाफ सबौर थाना में केस दर्ज किया गया था। इस मामले में पूर्व कुलपति से एसआईटी ने भी पूछताछ की जिसके बाद वो अंडरग्राउंड हो गए। बाद में पता चला कि उन्होंने हाइकोर्ट से बेल भी ले लिया। 

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